Public Administration: Issues Relating to Development and Management

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स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय (Issues Relating to Development and Management of Social Sector/Services Relating to Health, Education, Human Resources)

परिचय (Introduction)

  • विगत कुछ समय में विकास की अवधारणा में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं और सामाजिक विकास ने विकास की विचारधारा में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। इस नई विचारधारा का संबंध मुख्यत: 1959 में कोपेनहेगन में संपन्न हुए सामाजिक विकास पर शिखर सम्मेलन तथा इसमें स्वीकार किये गए उद्घोषणा एवं कार्यक्रमों से हैं।
  • वर्तमान समय में सामाजिक विकास को आर्थिक सवृद्धि के साधन तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार हेतु संपूर्ण समाज के रूपांतरण के माध्यम के रूप में माना जाता है। वास्तव में, सामाजिक विकास की संकल्पना मानव विकास की संकल्पना के अपेक्षा अधिक व्यापक है। जहाँ मानव विकास पृथकता की स्थिति में व्यक्ति विशेष की भलाई पर बल देता है, वहीं सामाजिक विकास व्यक्ति विशेष का अध्ययन सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में करता है। इसका संबंध न केवल आधारभूत मानवीय क्षमताओं के विकास से है, बल्कि सामाजिक अवसंरचना के स्तर सामाजिक संस्थाओं की प्रकृति तथा सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया से भी है।

सामाजिक क्षेत्रक से तात्पर्य (What Do We Mean by Social Sector)

  • किसी क्षेत्र के सामाजिक विकास का स्तर बहुत हद तक कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है जिन्हें संयुक्त रूप में सामाजिक क्षेत्रक के अंतर्गत शामिल किया जाता है। जो लोगों के जीवन में सुधार की दृष्टि से आवश्यक है। इसके अंतर्गत शिक्षा स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों के साथ साथ र्नािनता उन्मूल तथा अन्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रम से संबंधित क्षेत्र शामिल है।
  • व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो लैंगिक भेदभाव पर्यावरण निम्नीकरण आदि से जुड़े विषय भी सामाजिक क्षेत्रक विकास के दायरे में आते हैं। इस क्षेत्र का विकास होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सतत्‌ विकास के अपेक्षित स्तर को प्राप्त करने की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। वर्ष 2002 में दक्षिण अफ्रिका के जोहांसबर्ग में संपन्न सतत्‌ विकास पर विश्व शिखर सम्मेलन में सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा इसमें सामाजिक क्षेत्रक के महत्व पर भी बल दिया गया।

भारत में सामाजिक क्षेत्रक (Social Sector in India)

सामाजिक क्षेत्रक विकास प्रक्रिया में शिक्षा और स्वास्थ्य रणनीतिक महत्व की दृष्टि से दो महत्वपूर्ण विषय है। आमर्त्य सैन तथा जीन ट्रॉ ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य की पहचान दो महवपूर्ण कारकों के रूप में की है। उन्होने यह तर्क भी दिया कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य दोनो सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकते है।

Social Sector in India

लेकिन, दसवी पंचवर्षीय योजना से सरकारी प्रयास केवल शिक्षा एवं स्वास्थ्य तक ही सीमित नही रह गए हैं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र के विकास के लिए किए गए अनेकानेक प्रयासों ने हमारे समाज को और भी अधिक समावेशी बना दिया है। इस तरह, भारत में सामाजिक क्षेत्रक का दायरा दिनोदिन विस्तृत होता जा रहा है।

भारत में सामाजिक क्षेत्रक विकास की पृष्ठीभूमि एवं उद्देश्य (Background and Objective of Social Sector Development in India)

  • 1990 के दशक के शुरुआती दौर में हुए आर्थिक सुधारों के चलते उदारीकरण के बाद से नियमित उच्च आर्थिक संवृद्धि दर जारी है। मजबूत आर्थिक संस्थाएँ, समृद्ध निजी क्षेत्र, तेजी से विकसित होती आधारभूत तथा निवेश आर्थिक उदारीकरण के स्वाभाविक परिणाम हैं। इन सकारात्मक परिवर्तनों के बावजूद भारत कुछेक उन देशों की श्रेणी में शामिल है, जिनका मानव विकास सूचकांक में निम्न स्थान है, क्योंकि भारत में कुपोषण, निरक्षरता तथा गरीबी का स्तर अस्वीकार्य रूप से अत्यधिक है। निरंतर बढ़ती आय की असमानताएँ तथा क्षेत्रीय विषमताएँ भी चिंता का कारण बनी हुई हैं। रोजगार में वृद्धि हुई है लेकिन नौकरियाँ उच्च गुणवत्ता वाली रही हैं। यद्यपि स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा जैसी सामाजिक सेवाओं में वृद्धि हुई है, लेकिन अधिकांश ग्रामीण उच्च क्षेत्रों में इन सेवाओं की गुणवत्ता निम्नतम बनी हुई है तथा अधिकांश जनसंख्या मूलभूत सामाजिक सरंक्षण से वंचित हैं।
  • 11वीं योजना (2007 - 12) में इन बातों पर स्पष्ट रूप से बल दिया गया और संतुलित तथा समावेशी विकास की आवश्यकता को चिन्हित किया गया। समाज के सभी तबको के विकास के एजेंडे के साथ हमारे समाज को और भी अधिक समावेशी बनाने पर बल दिया गया। मानव विकास एवं सामाजिक विकास के मुद्दे पर 10वीं योजना अधिक सुस्पष्ट थी, क्योंकि इसमें स्पष्ट किया गया था कि मानव विकास का मुद्दा राष्ट्रीय आय में वृद्धि अथवा गिरावट से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि मानव विकास का संबंध जीवन की गुणवत्ता, व्यक्ति की खुशहाली के स्तर तथा मूलभूत सामाजिक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने से हैं।

भारत में सामाजिक क्षेत्रक के मुख्य उद्देश्य (Prime Objectives of the Social in India)

  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य, सामाजिक क्षेत्रक के दो ऐसे भाग हैं- जिनमें निवेश की आवश्यकता है।
  • भारत में सामाजिक क्षेत्रक केन्द्रित लोक नीति का सर्वप्रमुख उद्देश्य लोगों विशेषकर समाज के गरीब एवं असुरक्षित तबकों के जीवन स्तर में नियमित सुधार के माध्यम से लोगों का कल्याण करना है।

भारत में सामाजिक क्षेत्रक सूचकांक और उससे संबंधित मुद्दे (Social Sector Indicators in India and Issues Related to It)

  • इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बेहतर आधारभूत अवसरंचना से उत्पादकता में वृद्धि होती है, लेकिन इस बात की भी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती कि भारत में मानव पूंजी की अनुपस्थिति की स्थिति में सतत्‌ विकास हो पाएगा। यहाँ हमें इस बात को समझना होगा कि सामाजिक क्षेत्रक के अंतर्गत वे क्षेत्र शामिल हैं, जहाँ सरकारी निवेश का प्रत्यक्ष प्रभाव मानव विकास के घटकों पर पड़ता है, जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जल आपूर्ति, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा, कल्याण तथा पोषण इत्यादि।
  • विगत कुछ वर्षों से खासकर संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों कि सूत्रपात से विभिन्न नीति निर्माताओं तथा विकास नीति विश्लेषकों ने यह सुझाव दिया है कि केन्द्र सरकार को सामाजिक क्षेत्रक बजटीय मदद में और अधिक वृद्धि होनी चाहिए।

भारत में सामाजिक क्षेत्रक सूचकांक (Social Sector Indicators in India)

  • गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रही जनसंख्या।
    • 1 - 5 साल तक के बच्चों में कुपोषण का प्रभाव।
    • 1 - 5 साल तक के बच्चों में नियंत्रित कुपोषण का प्रभाव।
  • 5 वर्ष से कम आयु के प्रति 1000 बच्चों में मृत्यु दर की स्थिति।
  • प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर।
  • 6 - 14 वर्ष के ऐसे बालक जो स्कूल नहीं जा रहे हैं (10 लाख में) ।
    • पुरुष साक्षरता दर।
    • महिला साक्षरता दर।
  • अनुसूचित जातियों में साक्षरता दर की स्थिति।
    • अनुसूचित जनजातियों में साक्षरता दर की स्थिति।
  • स्वच्छजल तक पहुँच रखने वाली जनसंख्या का प्रतिशत।
  • स्वच्छता सुविधाओं तक पहुँच रखने वाली जनसंख्या का प्रतिशत।

इस श्रेणी की अधिकांश सामाजिक सेवाओं का संबंध राज्य से है और इस दिशा में केन्द्र सरकार राज्य सरकार के प्रयासों में सहयोगी की भूमिका निभा रही है।

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