Public Administration: Important Welfare Schemes for the Development of Scheduled Caste in India

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केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and Sate)

भारत में अनुसूचित जातियों के विकास हेतु महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाएँ (Important Welfare Schemes for the Development of Scheduled Caste in India)

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक पश्चात्‌ छात्रवृत्ति (Post Metric Scholarship for Scheduled Castes Student)

  • इस योजना का उद्देश्य मैट्रिक के बाद या माध्यमिक शिक्षा के बाद के स्तर पर अध्ययन कर रहे अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें अपनी शिक्षा पूर्ण करने में सक्षम बनाना है। आर्थिक सहायता में निर्वाहन भत्ता शिक्षण संस्थान दव्ारा लिए गए अप्रतिदेय अनिवार्य शुल्कों का पुनर्भुगतान, पुस्तक बैंक सुविधा एवं अन्य भत्ते सम्मिलित है। छात्रवृत्ति केवल भारत में अध्ययन के लिए देय है तथा यह मूल रूप से प्रार्थी से संबंद्ध राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश के सरकार दव्ारा प्रदान की जाती है।
  • यह छात्रवृत्ति उन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती है जिनके माता-पिता/अभिभावक की आय प्रतिवर्ष 200000 (दो लाख रुपये) से अधिक न हो। इस योजना का निष्पादन राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासनों दव्ारा किया जाता है, जो इस योजना के अंतर्गत होने वाले व्यय का शत प्रतिशत (100 %) केन्द्रीय सहायता के रूप में भारत सरकार से प्राप्त करती है तथा यह उसके अपने संकल्पित उत्तरदायित्वों (देयता) के अतिरिक्त है। लेकिन नौवी पंचवर्षीय योजना काल (1997 - 2002) से उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए इस योजना के अंतर्गत आने वाले समस्त व्यय का वहन भारत सरकार कर रही है।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रृत्ति (Pre-Metric Scholarship for Scheduled Castes Students)

योजना के उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • कक्षा IX एवं X में अध्ययनरत अनुसूचित जाति के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के शिक्षण के लिए सहायता प्रदान करना ताकि प्राथमिक से माध्यमिक स्तर के संक्रमण काल में विद्यार्थियों दव्ारा विद्यालय छोड़ने की घटनाओं में कमी लाई जा सके एवं मैट्रिक पूर्व कक्षा IX एवं X में अनुसूचित जाति के बच्चों की भागीदारी में वृद्धि की जा सके जिससे उनके बेहतर प्रदर्शन एवं मैट्रिक के बाद के स्तर के शिक्षा की ओर अग्रसर होने की एक बेहतर संभावना उत्पन्न हो।
  • छात्रवृत्ति उन विद्यार्थियों को दी जाएगी जिनके माता-पिता/अभिभावक की वार्षिक आय 200000 (दो लाख रुपये) से अधिक न हो।

संपूर्ण पाठयक्रम की अवधि के दौरान छात्रृत्ति में निम्नलिखित सम्मिलित होते हैं-

  • छात्रवृत्ति एवं अन्य अनुदान
  • नि: शक्त विद्यार्थियों जो कि गैर-आर्थिक सहायता प्राप्त किन्तु मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं, को अतिरिक्त भत्ते दिए जाते हैं।

इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन के माध्यम से किया जाएगा। सभी राज्य सरकारें व केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन यथा समय समुचित रूप से योजना को प्रचारित करेगी एवं राज्य के प्रमुख समाचार पत्रों अपनी वेबसाइटों एवं अन्य प्रचार माध्यमों में स्थानीय भाषा में विज्ञापन जारी कर आवेदनों को आमंत्रित करेंगी।

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि लाभार्थियों को समय पर एवं सटीक छात्रवृत्ति का भुगतान हो, राज्य सरकारें/केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन एक कम्प्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली के दव्ारा छात्रवृत्तियों का निष्पादन करेंगी जिसमें ‘ई-पेमेंट’ (इलेक्ट्रॉनिक-भुगतान) प्रणाली भी सम्मिलित है।
  • यह योजना केन्द्रीय प्रायोजित योजना है एवं राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन दव्ारा इसका क्रियान्वयन होता है, जो अपने संकल्पित उत्तरदायित्वों (देयता) के अतिरिक्त, इस योजना के अंतर्गत होने वाले व्यय का शत प्रतिशत (100 %) केन्द्रीय सहायता के रूप में भारत सरकार से प्राप्त करेंगी।

राज्य सरकारें एवं केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन इस योजना का निष्पादन इस प्रकार से करेंगी-

  • लाभार्थियों के आँकड़ें (डेटाबेस) तैयार करेंगी जो विशिष्ट पहचान पत्र (UID) से इस प्रकार समेकित हो सकती है- (a) आधार संख्या (UID) को इसमें समाहित कर (b) UID सक्रिय बैंक खातों में छात्रवृत्तियों का भुगतान (c) लाभार्थियों की पहचान के लिए UID प्रमाणीकरण का उपयोग।
  • विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए राज्य एवं जिला स्तरों पर शिकायत निवारण अधिकारियों (Grievance Redressed Offices-GRO) की नियुक्ति।

मलिन पेशों में कार्यरत बच्चों के लिए मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्तियाँ (Pre-Metric Scholarships for Children of Those Engaged in Unclean Occupation)

इस योजना को वर्ष 1977 - 78 में प्रारंभ किया गया था। प्रारंभ में इस योजना में केवल छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी ही आते थे। कालांतर में वर्ष 1991 में गैर-आवासीय विद्यार्थियों को भी इस योजना के दायरे में लाया गया। योजना के अंतर्गत निम्नलिखित लक्षित समूहों के बच्चों को मैट्रिक पूर्व शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है-

  • शुष्क शौचालय के सफाई कर्मी (मेहतर)
  • झाडू लगाने वाले जो परंपरागत रूप से सफाई कार्यों से जुड़े हैं।
  • चर्मकार
  • खाल उतारने वाले कर्मी एवं
  • मेनहोल (बंद नालियों) एवं खुली नालियों के सफाई कर्मी।

योजनान्तर्गत सहायता के दो अवयव हैं-

  • मासिक छात्रवृत्ति (10 माह के लिए) ।
  • वार्षिक अस्थायी अनुदान (समय-समय पर होने वाले व्यय जैसे लेखन-सामग्री एवं पोशाक इत्यादि)

पात्रता के लिए कोई आय की उच्चतम सीमा या जाति बंधन नहीं है। सबसे बड़े समूह के रूप में विकलांग विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान हैं। योजना राज्य सरकार दव्ारा क्रियान्वित की जाती है। दिसंबर, 2008 में योजना को संशोधित किया गया था।

अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने हेतु राजीव गांधी राष्ट्रीय फैलोशिप (Rajeev Gandhi National Fellowship for Providing Scholarships to Scheduled Caste Students)

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2005 - 6 अनुसूचित जातियों के लिए एम. फिल. एवं पी. एच. डी. जैसी डिग्री वाले उच्च शिक्षा में अवसरों को बढ़ाने के लिए राजीव गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप के नाम से एक केन्द्र प्रायोजित योजना को आरंभ किया। कालांतर में इस योजना में संशोधन किया गया, जो 1 अप्रैल, 2010 से प्रभावी है। यह योजना अनुसूचित जाति के उन विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को पूरी करती है, जो विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं वैज्ञानिक संस्थानों में अनुसंधान डिग्रियों में अध्ययनरत हैं। योजना के कार्यान्वयन के लिए यूजीसी नोडल एजेंसी है। यूजीसी इस योजना की सूचना समाचार पत्रों में समुचित विज्ञापन जारी करके देती है। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली फैलोशिप की कुल संख्या 2000 है। दी जाने वाली फैलोशिप की तुलना में यदि अभ्यार्थियों की संख्या अधिक हो तो यूजीसी अभ्यार्थियों दव्ारा स्नातकोत्तर परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के प्रतिशत के आधार पर अभ्यार्थियों का चुनाव करेगी।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (Pradhan Mantri Adarsh Gram Yojana-PMAGY)

  • भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2009 - 10 से एक नई प्रायोजित (प्रायोगिक) योजना जिसे प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना कहा जाता है, के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी। यह योजना देश के 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जातियों की जनसंख्या वाले 1000 ग्रामों के समेकित विकास के लिए है।
  • PMAGY वर्तमान में प्रायोगिक अवस्था में पाँच राज्यों अर्थात उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, तमिलनाडु (प्रत्येक राज्य के 225 ग्रामों) एवं असम (100 ग्रामों) में चलायी जा रही है। राज्य सरकार प्राथमिकता के आधार पर निश्चित संख्या में ग्रामों का चुनाव एक जिले से करेगी अन्यथा अधिकतम 2 - 3 पड़ोसी जिलों से करेगी।

PMAGY का लक्ष्य चुने गए ग्रामों का सर्वांगीण एवं समेकित विकास करना है-

  • मुख्यत: केन्द्र एवं राज्य की सभी प्रासंगिक योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन दव्ारा एवं
  • उपरोक्त (i) के दव्ारा जो आवश्यकताएँ पूर्ण नहीं होती, उसके लिए “रिक्तता-पूर्ति” कोष के प्रावधान दव्ारा किसके लिए 10 लाख रुपये प्रति ग्राम की दर से केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार से भी आशा की जाती है कि वह एक समुचित एवं सुमेलित योगदान दे।

बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना (01.01. 2008 से प्रभावी) [Babu Jagjivan Ram Chhatrawas Yojana (Effective from 01.01. 2008) ]

  • अनुसूचित जातियों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम एवं प्रोत्साहित करने हेतु अनुसूचित जाति छात्राओं के लिए छात्रावास के निर्माण का कार्य तृतीय पंचवर्षीय योजना से प्रारंभ किया गया है जबकि छात्रों के लिए यह कार्य वर्ष 1989 - 90 से प्रारंभ है। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं हेतु छात्रावास निर्माण के पूर्व के केन्द्र प्रायोजित योजना में संशोधन किया गया है एवं इसका नाम परिवर्तित कर “बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना” कर दिया गया है जो 01.01. 2008 से प्रभावी है। संशोधित योजना में मुख्य संशोधन हैं-
    • छात्राओं के हॉस्टल निर्माण के लिए राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों एवं केन्द्रीय विश्वविद्यालयों को शत प्रतिशत (100 %) तथा डीम्ड विश्वविद्यालयों व निजी निकायों को 90 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता।
    • हॉस्टलों की निर्माण अवधि 5 वर्षों से कम कर 2 वर्ष कर दी गई है।
  • इस योजना का उद्देश्य माध्यमिक विद्यालयों, उच्च माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे अनुसूचित जाति के छात्र एवं छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। राज्य सरकारें, केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासन एवं केन्द्रीय तथा राजकीय विश्वविद्यालय/संस्थान, नवीन छात्रावास के निर्माण एवं मरम्मति दोनों कार्यों के लिए केन्द्रीय सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।
  • छात्राओं हेतु हॉस्टल के वित्तपोषण का प्रारूप-
    • छात्राओं हेतु नये हॉस्टल के निर्माण एवं पहले से मौजूद हॉस्टलों के विस्तार हेतु 100 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता राज्य/केन्द्रशासित क्षेत्र/ विश्वविद्यालयों को देय है।
    • निजी क्षेत्रों में गैर सरकारी संगठन (NGO) एवं डीम्ड विश्वविद्यालयों को छात्राओं के हॉस्टल में विस्तार हेतु 90 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता।
  • छात्रों हेतु छात्रावास के लिए केन्द्रीय सहायता निम्नलिखित है-
    • राज्यों को 50: 50 आधार पर
    • केन्द्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत
    • केन्दीय विश्वविद्यालयों को 90: 10 के आधार पर
    • राजकीय विश्वविद्यालयों/संस्थानों को 45: 10 के आधार पर (राज्य 45)
    • निजी क्षेत्र में गैर सरकारी संगठनों एवं डीम्ड विश्वविद्यलयों को केवल विस्तार हेतु (45: 45: 10) के आधार पर (राज्य 45)
  • प्रत्येक विद्यार्थी हेतु एक चारपाई, एक मेज एवं एक कुर्सी के लिए 2500 प्रति विद्यार्थी एक-कालिक अनुदान इस योजना के अंतर्गत देय है, जो अन्य केन्द्रीय सहायता के अतिरिक्त है।

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