Public Administration: Salient Features of the Draft Bill

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भारत में श्रमिकों की बेहतरी और संरक्षण के लिए तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Labourers in India)

मसौदा विधेयक के प्रमुख प्रावधान (Salient Features of the Draft Bill Are as Follows)

  • नि: शक्तता की परिभाषा, नि: शक्तता के कई वर्गो को शामिल करती है।
  • नि: शक्तता के प्रमाणीकरण का तंत्र सुव्यवस्थित करना जिसके अंतर्गत विभिन्न प्राधिकृत एजेंसियों किसी विशेष नि: शक्तता का मूल्यांकन कर सकती हैं और उसके लिए विभिन्न दिशा निर्देश जारी कर सकता है।
  • नि: शक्त लोगों के लिए सरकारी रोजगार क्षेत्र और उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण का कोटा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत होगा।
  • निजी क्षेत्र में जहाँ न्यूनतम 20 कर्मचारी हो वहाँ नि: शक्त लोगों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होगा।
  • नि: शक्तता पर केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड का गठन करना जो केन्द्रीय सहयोग समिति का स्थान ले तथा सलाह एवं निगरानी के लिए राज्य सलाहकार बोर्ड व जिला स्तरीय समिति का निर्माण।
  • वैधानिक शिकायत निवारण तंत्र के रूप में राष्ट्रीय एवं राज्य आयोगों का निर्माण।
  • विनियमन एवं निगरानी हेतु राष्ट्रीय नि: शक्तता अधिकार संस्था और राज्य नि: शक्तता अधिकार संस्था का गठन।
  • राज्य सरकारों के लिए प्रावधान है कि वे मामलों के त्वरित निपटारे हेतु नि: शक्तता अधिकार न्यायालयों का नाम निर्दिष्ट करें।
  • नि: शक्त जनों के लिए सांविधिक राष्ट्रीय फंड का गठन।
  • नि: शक्त लोगों के विरुद्ध अपराधों (विशेषकर महिलाओं व बच्चो के लिए) के लिए IPC में मौजूद दंड से अधिक दंड का प्रावधान।

भारत में नि: शक्त लोगों के कल्याण हेतु एजेंसियाँ और संस्थान (Agencies and Organizations for Disabled People Welfare in India)

भारतीय पुनर्वास परिषद (Rehabilitation Council of India)

पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न वर्गों के पेशेवरों की प्रशिक्षण नीतियों और कार्यक्रमों के विनियमन हेतु यह परिषद उत्तरदायी है। इसके कार्यों में शामिल हैं-

  • पूरे देश में विभिन्न स्तरों पर सभी प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशक्षण कार्यक्रमों का मानकीकरण व विनियमन।
  • नि: शक्त लोगों के पुनर्वास हेतु देश एवं विदेश में संस्थानों/विश्वविद्यालयों की पहचान करना।
  • पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा में अनुसंधान को बढ़ावा।
  • पुनर्वास के क्षेत्र में मान्यता प्राप्त योग्यता रखने वाले पेशेवरों का एक केन्द्रीय पुनर्वास रजिस्टर तैयार करना।
  • नि: शक्तता के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के साथ मिलकर मौजूदा पुनर्वास शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना।

नि: शक्त लोगों के लिए मुख्य आयुक्त का कार्यालय (Office of the Chief Commissioner for Persons with Disabilities)

मुख्य आयुक्त एक महत्वपूर्ण वैधानिक कार्यकर्ता है, जिसकी नियुक्ति नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनिम, 1995 की धारा 57 के अधीन की जाती है। मुख्य आयुक्त के कार्यों में शामिल हैं- नि: शक्त लोगों हेतु राज्य आयुक्तों के कार्य में सहयोग, फंड के प्रयोग की निगरानी (केन्द्र प्रदत्त) नि: शक्त जनों को प्राप्त अधिकारों व सुविधाओं की सुरक्षा हेतु कदम उठाना, साथ ही नि: शक्त जनों के अधिकारों के हनन संबंधी शिकायतों की जाँच करना। नि: शक्त व्यक्तियों से संबद्ध किसी नियम, कानून आदि के संबंध में मुख्य आयुक्त मामले को स्वत: संज्ञान में ले सकता है और उसके पास गवाह को समन (Summon) भेजने तथा दस्तावेज आदि प्राप्त करने के संबंध में एक दीवानी न्यायालय जितनी शक्ति है।

ऑटिज्म, प्रमस्तिष्क अंगघात, मानसिक मंदता और विविध नि: शक्तताओं से युक्त लोगों के कल्याण हेतु राष्ट्रीय न्याय, नई दिल्ली (National Trust for the Welfare of Persons with Autism, Cerebral Palsy, Mental Retardation and Multiple Disabilities New Delhi)

न्यास के प्रमुख उद्देश्य हैं-

  • नि: शक्त लोगों को, आत्मनिर्भर एवं पूर्ण रूप से अपने समुदाय में रहने के लिए सक्षम व शक्तिशाली बनाना।
  • नि: शक्त लोगों को उनके परिवारों के साथ रहने के लिए सहयोग एवं सुविधायें देना।
  • नि: शक्त लोगों के परिवार में किसी समस्या के दौरान उनकी आवश्यकता के अनुरूप पंजीकृत संस्थानों को मदद देना।
  • जिन नि: शक्त लोगों के पास पारिवारिक मदद नहीं है उनकी समस्यायें सुलझाना।

नि: शक्त लोगों हेतु राष्ट्रीय नीति 2005 के अधीन भारत में विशिष्ट आधारिक संरचना का निर्माण हुआ है और इसमें निम्न संस्थाओं की स्थापना का प्रावधान है-

  • पं. दीनदयाल उपाध्याय शारीरिक विकलांग संस्थान नई दिल्ली।
  • राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान देहरादून।
  • राष्ट्रीय अस्थि, विकलांग संस्थान कोलकाता।
  • राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान, सिकन्दराबाद।
  • स्वामी विवेकानंद पुनर्वास, प्रशिक्षण एवं अनुसंधान राष्ट्रीय संस्थान कटक
  • विविध नि: शक्तताओं से पीड़ित लोगों के सशक्तीकरण के लिए राष्ट्रीय संस्थान चेन्नई।
  • राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान मुंबई।

भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम एलिम्को (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India-ALIMCO)

भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण कॉपारेशन (ALIMCO) कानपुर एक निजी क्षेत्र का निकाय है जो नि: शक्त लोगों के लिए उपकरणों का निर्माण करता है। कॉपोर्रेशन दव्ारा निर्मित उत्पादों को भारतीय मानक ब्यूरों दव्ारा ISI मानक प्राप्त होते हैं। उत्पादों का विपणन कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, भुवनेश्वर और दिल्ली के क्षेत्रीय विपणन केन्द्रों दव्ारा किया जाता है साथ ही राष्ट्रीय संस्थान और स्वैच्छिक संगठन भी विपणन करते हैं।

स्याुंक्त क्षेत्रीय केन्द्र और क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र (Composite Regional Centres and Regional Rehabilitation Centres)

नि: शक्त लोगों हेतु 5 संयुक्त क्षेत्रीय केन्द्रों की स्थापना श्रीनगर, लखनऊ, भोपाल, सुन्दरनगर और गुवाहाटी में हुई है। ये केन्द्र पुनर्वास के क्षेत्र में पेशेवरों को तैयार करने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाते हैं और नि: शक्त लोगों को पुनर्वास सुविधायें देते हैं। रीढ़ की हड्‌डी में चोट और अन्य अस्थि जन्य अक्षमताओं हेतु 4 क्षेत्रीय पुनर्वास केन्द्र मोहाली, कटक, जबलपुर और बरेली में स्थापित किये गये हैं ताकि रीढ़ की हड्‌डी में चोटिल लोगों को आधारभूत प्रबंधन व सुविधा दी जा सके ताकि प्रभावित लोग आत्मनिर्भर हो सकें।

जनसंख्या के असुरक्षित समूहों के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार की कल्याण योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

भारत में नि: शक्त जन (Disabled People in India)

नि: शक्त व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति, 2006 (National Policy for Persons with Disabilities, 2006)

राष्ट्रीय नीति स्पष्ट करती है कि नि: शक्त व्यक्ति देश के मूल्यवान मानव संसाधन हैं। साथ ही नीति यह प्रयास भी करती है कि इन व्यक्तियों को समान अवसरों की प्राप्ति हो इनके अधिकारों का संरक्षण हो तथा समाज में इनकी पूर्ण भागीदारी भी सुनिश्चित हो। और यह सब सभी व्यक्तियों की समानता, स्वतंत्रता, न्याय एवं गरिमा के मौलिक सिद्धांतों से संगत हो, जिसकी स्थापना भारतीय संविधान में की गई है और जो कि एक समावेशी समाज की स्थापना के लिए अपरिहार्य है जिसमें नि: शक्त व्यक्तियों के साथ-साथ सभी लोग शामिल हों। राष्ट्रीय नीति इस तथ्य को भी स्पष्ट करती है कि यदि नि: शक्त व्यक्तियों के पुनर्वास उपायों की समान उपलब्धता एवं इन तक प्रभावी पहुँच सुनिश्चित की जाए तो ऐसे व्यक्ति बेहतर जीवन -यापन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय नीति की मुख्य विशेषताएँ (Salient Features of the National Policy Are)

  • भौतिक पुनर्वास इसके अंतर्गत नि: शक्तता की जितनी हो सके पहचान करना, रक्षोपाय अपनाना, परामर्श एवं चिकित्सकीय पहल करना तथा सहायता एवं सामग्री संबंधी मदद के प्रावधान शामिल हैं इसके अलावा इसमें पुनर्वास कर्मियों का विकास कार्य भी शामिल है।
  • शैक्षिक पुनर्वास जिसके अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल है तथा
  • समाज में गरिमामय जीवन-यापन के लिए अधिक पुनर्वास।
  • इस राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन से संबद्ध सभी विषयों में सांमजस्य स्थापित करने की दृष्टि से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय प्रमुख मंत्रालय है।
  • केन्द्रिय समन्वय समिति, सहभागी प्रतिनिधित्व के साथ राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन से संबद्ध विषयों में सामंजस्य स्थापित करती है। इसी प्रकार की समिति राज्य स्तर पर भी होती है। पंचायती राज संंस्थाएँ तथा नगरीय स्थानीय निकाय जिला नि: शक्तता पुनर्वास केन्द्रों की कार्यप्रणाली से संबद्ध हैं।
  • नि: शक्त व्यक्तियों के लिए केन्द्र स्तर पर मुख्य आयुक्त तथा राज्य स्तर पर राज्य आयुक्त अपनी सांविधिक जिम्मेदारियों के अलावा नि: शक्त व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंं

विकलांग व्यक्तियों को यंत्रों/उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए सहायता योजना (एडिप) (Assistance to Disabled Persons for Purchase/Fitting of Aids and Appliances (ADIP) Scheme)

परिचय (Introduction)

सरकार की हमेशा से यही कोशिश रही है कि नि: शक्त व्यक्तियों को कम से कम लागत पर सहायता सामग्री उपलब्ध कराई जाए। नि: शक्त व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक और व्यावसायिक पुनर्वास के लिए सहायता सामग्री उपलब्ध कराने की आवश्यकता विशेष रूप से नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 जो 1996 से लागू हुआ, के बाद चर्चा में आई। समय-समय पर कराए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के माध्यम से एक बात सामने आई कि भारत में नि: शक्त व्यक्तियों की संख्या बहुत अधिक है और उनमें से अधिकांश तो निम्न आय समूहों से संबंध रखते हैं। नि: शक्तता उन्हें उत्पादक जीवन जीने के अवसरों से वंचित करती है। आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रचलन के साथ ही नि: शक्त व्यक्तियों के लिए विभिन्न प्रकार के सहायता उपायों की शुरूआत हुई है, जिनसे नि: शक्तता के प्रतिकूल प्रभावों में कमी आई और नि: शक्त व्यक्तियों की आर्थिक क्षमताओं में खासी वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए व्हील चेअर, कृत्रिम अंग, बैसाखी आदि ने नि: शक्त व्यक्तियों के चलने-फिरने को काफी आसान बनाया है। फिर भी अधिकांश नि: शक्त लोग इन यंत्रो/उपकरणों के लिए फंड प्राप्त करने में अपनी असमर्थता के कारण इनसे प्राप्त हो सकने वाले लाभ से वंचित रह जाते हैं।

योजना और उसके उद्देश्य (The Scheme and Its Objectives)

इस योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद नि: शक्त व्यक्तियों को स्थाई, परिष्कृत और वैज्ञानिक ढंग से विनिर्मित एवं आधुनिक स्तरीय सहायता एवं सामग्री उपलब्ध कराना है ताकि नि: शक्तता के प्रतिकूल प्रभावों में कमी करके और आर्थिक क्षमताओं में वृद्ध दव्ारा नि: शक्त व्यक्तियों का भौतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

क्षेत्र (Scope)

इस योजना का क्रियान्यवन आगे बताए गए अभिकरणों दव्ारा किया जाएगा। योजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इन अभिकरणों को इन सहायता सामग्रियों की खरीद, निर्माण एवं वितरण के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी। ये क्रियान्वयन अभिकरण ही ‘एडिप’ योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता सामग्री की फिटिंग एवं फिटिंग के पश्चात्‌ (Post Fitting) की देखरेख करेंगें।

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