Public Administration 1: Department of Economic Affairs: Organizational Units

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आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs)

आर्थिक कार्य विभाग देश की आर्थिक नीतियों और कार्यक्रमों जिनका आर्थिक प्रबंधन के आंतरिक और विदेशिक पहलूओं से संबंध होता है, को तैयार करने और उन्हें मॉनीटर करने के लिए केन्द्र सरकार की नोड्‌ल एजेंसी है। इस विभाग का एक प्रमुख उत्तरदायित्व प्रति वर्ष केन्द्रीय बजट (रेलवे बजट को छोड़कर) तैयार करना है।

संगठनात्मक इकाइयाँ (Organizational Units)

इस समय आर्थिक कार्य विभाग का कार्य निम्नलिखित प्रभागो/इकाइयों दव्ारा सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है-

  • सहायता लेखा और लेखापरीक्षा प्रभाग-यह बहुपक्षीय/दव्पक्षीय दाता एजेंसियों से ऋणों और अनुदानों के संवितरण बहुपक्षीय /दव्पक्षीय दाताओं को ऋणों का शोधन, विदेशिक सहायता का लेखांकन निर्यात सवर्द्धन की लेखापरीक्षा और ऋण प्रभागों को प्रबंधन सूचना की आपूर्ति हेतु/उत्तरदायी है।
  • प्रशासन और समन्वय प्रभाग-यह प्रभाग प्रोटोकाल और राजभाषा नीति के कार्यान्वयन सहित सभी प्रशासनिक और स्थापना संबंधी मामले देखता है।
  • दव्पक्षीय सहयोग प्रभाग- दव्पक्षीय सहयोग प्रभाग सभी जी 8 देशों से दव्पक्षीय विकास सहायता का कार्य देखता है। इस प्रभाग का प्रमुख कार्य अन्य विकासशील देशों को रियायती ऋण श्रृखला प्रदान करना है। यह सभी अल्पकालिक विदेशी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को देखता है।
  • बजट प्रभाग- केन्द्रीय बजट को तैयार करने और अन्य संबंधित मामलों जैसे बाजार उधार, लेखांकन और लेखा-परीक्षा विधियाँ तथा राज्य सरकारों के साथ वित्तीय संबंध के अलावा यह प्रभाव राष्ट्रीय बचत संगठन (एनएसओ) के माध्यम से लघु बचतों के संग्रहण का कार्य भी देखता है।
  • पूंजी बाजार प्रभाग- यह प्रभाग मुख्य रूप से प्रतिभूति बाजारों (अर्थात शेयर, ऋण व्युत्पन्न) के विकास, विदेशिक वाणिज्यिक उधार और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) , 1999 से संबंधित नीतिगत मामलों के लिए उत्तरदायी है। यह प्रभाग स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) , प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी) और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के प्रशासनिक मामलों का कार्य भी देखता है।
  • आर्थिक प्रभाग-यह प्रभाग अर्थव्यवस्था के वृहद प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर सरकार को आर्थिक सलाह देता है।
  • एकीकृत वित्त प्रभाग-एकीकृत वित्त प्रभाग, आर्थिक कार्य विभाग और वित्तीय सेवा विभाग के सरकारी व्यय संबंधी सभी मामलों में वित्तीय सलाह प्रदान करने हेतु उत्तरदायी है। यह प्रभाग इन विभागों के बजट तैयार करने और अनुदानों की विस्तृत मांगों को प्रशासित करने के लिए भी उत्तरदायी है। वित्त मंत्रालय के अनुदानों की विस्तृत मांगों और परिणाम बजट के समन्वय, संकलन और मुद्रण के कार्य भी इस प्रभाग दव्ारा निपटाए जाते हैं।
  • बहुपक्षीय संबंध प्रभाग-बहुपक्षीय संगठनों और व्यापार से जुड़े विषयों पर अधिक ध्यान केन्द्रित करने और परिणामोन्मुखी रूप से कार्य करने के उद्देश्य से, विदेशी व्यापार प्रभाग और फंड बैंक प्रभाग से विशेषकर संबंधित मामलों का कार्य देखने वाले अनुभागों का विलय कर हाल ही में बहुपक्षीय संबंध प्रभाग सृजित किया गया है। संयुक्त सचिव (एमआर) , एमआर प्रभाग के प्रमुख होते हैं। इस प्रभाग में पाँच अनुभाग सम्मिलित हैं। वर्तमान योजनागत फ्रेमवर्क के अंतर्गत एमआर-1 अनुभाग को सलाह देने और जी-20, जी-24, जी-8, एएसईएम, ओईसीडी और ईसी से संबंधित सभी मामलों का कार्य सौंपा गया है। एमआर-2 अनुभाग संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सभी मामलों का कार्य देखता है और यूएनडीपी से संबंधित सभी नीतिगत मामले इसके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। एमआर-3 अनुभाग डब्ल्यूटीओ और सार्क से संबंधित सभी मामलों के लिए उत्तरदायी है। एमआर-4 अनुभाग कोलंबो प्लान और उसके अंतर्गत निर्मित तकनीकी सहयोग से संबंधित सभी मामलों के लिए उत्तरदायी है। एमआर-5 अनुभाग विदेश व्यापार नीति के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप उत्पन्न मामलों पर वाणिज्य मंत्रालय को सलाह प्रदान करता है।
  • बहुपक्षीय संस्था प्रभाग-अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) , अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) , अंतरराष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) , अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) , वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और बहुपक्षीय निवेश गारंटी अभिकरण (एमआईजीएम) इस प्रभाग से जुड़े प्रमुख मामले हैं।
  • भारतीय आर्थिक सेवा प्रभाग-भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) के संवर्ग प्रशासन से जुड़े सभी मामले आईईएस प्रभाग में निपटाए जाते हैं।
  • अवसरंचना और निवेश प्रभाग-रेलवे, दूरसंचार, सड़क, पत्तन, नौवाहन, नगर विमान, विद्युत, कोयला, गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधन और अंतर्देशीय जल यातायात (आईडब्ल्यूटी) सहित, अवसरंचना के क्षेत्र में विशिष्ट उत्तरदायित्वों का संचालन इस प्रभाग में होता है।
  • मिडिल ऑफिस (ऋण प्रबंधन) -इस कार्यालय की स्थापना 2007 - 08 के बजट भाषण में घोषित सरकार के निर्णय के परिणामस्वरूप की गई है। इसका उद्देश्य सरकार की ऋण प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाना और सरकार के ऋण पोर्टफोलियों में जोखिम का प्रबंधन है।

व्यय विभाग (Department of Expenditure)

  • सरकार की सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और राज्य की वित्तीय स्थिति से संबंधित मामलों की जाँच करने हेतु यह एक नोड्‌ल विभाग है। इस विभाग के मुख्य कार्यकलापों में प्रमुख स्कीमों परियोजनाओं (योजना और गैर योजना व्यय दोनों) की स्वीकृति पूर्व मूल्यांकन; राज्यों को अंतरित केन्द्रीय बजटीय संसाधनों के एक बड़े अंश का रख-रखाव, वित्त और केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का कार्यान्वयन, वित्तीय सलाहकारी के साथ समन्वय करते हुए और वित्तीय नियमावली/विनियमों/आदेशों को लागू करके तथा लेखापरीक्षा टिप्पणियों/प्रेक्षणों के प्रबोधन के जरिए केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों में व्यय प्रबंधन की जांच करना, केन्द्रीय सरकारी लेखों को तैयार करना, केन्द्र सरकार के कार्मिक प्रबंधन के वित्तीय पहलुओं की व्यवस्था करना, सार्वजनिक सेवाओं की लागत और मूल्यों के नियंत्रण में केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों की सहायता करना, स्टालफिंग पैटर्न और ओ. एंड एम. अध्ययनों की समीक्षा के जरिए संगठनात्मक पुनर्गठन में सहायता करना और उत्पादन और सार्वजनिक व्यय के परिणामों को अनुकूलतम बनाने के लिए प्रणालियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करना शामिल हैं। यह विभाग मंत्रालय के संसद से संबंधित कार्यो सहित वित्त मंत्रालय से संबंधित मामलों के समन्वय की व्यवस्था भी कर रहा है। राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एन. आई. एफ. एम.) फरीदाबाद इस विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
  • व्यय विभाग को आबंटित कार्य इसके स्थापना प्रभाग, योजना वित्त के 1 और 2 प्रभाग, वित्त आयोग प्रभाग, कर्मचारी निरीक्षण एकक, लागत लेखा शाखा, महालेखा नियंत्रक और केन्द्रीय पेंशन लेखा कार्यालय के माध्यम से किए जाते हैं।

संगठनात्मक इकाइयाँ (Organizational Units)

सम्प्रति व्यय विभाग का कार्य निम्नलिखित भिन्न-भिन्न पूरक प्रभागो/एककों दव्ारा व्यवस्थित किया जाता है:

  • संस्थापना प्रभाग
  • राज्य वित्त प्रभाग (योजना वित्त-1)
  • योजना वित्त-2 प्रभाग
  • कर्मचारी निरीक्षण एकक
  • मुख्य सलाहकार लागत का कार्यालय
  • महालेखा नियंत्रक का कार्यालय
  • राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एन. आई. एफ. एम.)
  • केन्द्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (सी. पी. ए. ओ.)
  • मुख्य लेखा नियंत्रक का कार्यालय

संस्थापना संभाग वेतन पाने वाले केन्द्र सरकार के लोक सेवकों की सेवा -शर्तों से संबंधित कार्य नियंत्रित करता है जिसके अंतर्गत वेतनमान संशोधन एवं नियमन, भत्ते निर्धारण तथा अन्य लाभ सम्मिलित हैंं यह संभाग वेतनमान संशोधन, वेतनवृद्धि, प्रतिनियुक्ति, भत्ता एवं कैडर रिव्यू इत्यादि मामलों में परीक्षण कर परामर्श देता है। वेतन आयोगों की अनुशंसाएँ भी यही संभाग संचालित करता है।

  • योजना वित्त संभाग को पुन: दो संभागो (1 एवं 2) में विभक्त किया गया है। प्रथम संभाग राज्यों की वार्षिक योजनाओं तथा दव्तीय संभाग केन्द्रीय योजनाओं के कार्य देखते हैं। राज्यों की वार्षिक योजनाओं के लिए चाहे वे केन्द्र दव्ारा प्रायोजित हों या विदेशी सहायता प्राप्त हों, पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम, सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम, गैर योजना राजस्व, घाटा अनुदान-राज्यों में आपदा राहत कोष के लिए केन्द्र का हिस्सा तथा राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में केन्द्रीय सहायता के निर्धारण से संबंधित व्यवस्था यह संभाग करता है।
  • सन्‌ 1964 में गठित कर्मचारी निरीक्षण एकक प्रशासनिक कुशलता तथा मितव्ययता की स्थापना करने का प्रयास करता है। कार्य निष्पादन मानक तथा पद्धतियाँ तैयार करना कार्यविधियों में नवाचार करना तथा कार्यप्रणाली इत्यादि का अध्ययन करना एवं प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग को आवश्यक कार्यवाही की अनुशंसा करना इसके मुख्य कृत्य हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इस एकक की अनुशसाएँ परामर्श नहीं बल्कि आदेशात्मक होती है जिन्हें एक निश्चित अवधि में पूर्णरूपेण अमल में लाना आवश्यक होता है।
  • मुख्य सलाहकार लागत का कार्यालय लागत था लेखाशास्त्र में विशेषज्ञता प्राप्त अभिकरण है, जो भारत सरकार के समस्त मंत्रालयों, विभागों एवं अन्य अभिकरणों को औद्योगिक लागत तथा मूल्य इत्यादि विषयों पर व्यावसायिक सहायता प्रदान करता है। मुख्यत: मित्तव्ययिता लाला तथा कुशलता प्रदर्शित करना इस संभाग का प्रयास रहता है। वस्तुत: दव्तीय विश्वयुद्ध के दौरान लागत लेखा की स्थापना की गई थी। सन्‌ 1961 तथा 1978 में केन्द्रीय लागत लेखा (CCA) पूल की स्थापना हुई। अब इस पूल को भारतीय लागत लेखा सेवा में परिवर्तित कर दिया गया है।
  • आधुनिक ‘नव लोक प्रबंध’ के दौर में सरकारी कार्यो, उत्पादों एवं सेवाओं की लागत का विश्लेषण करने वाला मुख्य सलाहकार लागत कार्यालय ऐसी पेशेवर एजेंसी है, जिसके प्रमुख कार्मिक लागत या सनदी लेखाकार (Cost or Chartered Accountants) होते है। भारतीय लागत लेखा सेवा (ICAS) का यह अधिकारी तथा इसका स्टाफ संपूर्ण सरकारी तंत्र, लोक उपक्रमों, कर प्रणाली, आय स्त्रोतों, पद्धतियों, सब्सिडी मूल्य निर्धारण विवादों तथा लागत विश्लेषण संबंधी परामर्श देने वाला प्रमुख स्त्रोत होता है।
  • राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान, फरीदाबाद की स्थापना सन्‌ 1993 में की गई थी। स्वायत्त संस्था के रूप में यह संस्थान वित्तीय क्षेत्र में प्रशिक्षण एवं अनुसंधान कार्य करता है।

केन्द्रीय पेंशन लेखा कार्यालय की स्थापना 01 जनवरी, 1990 को की गई थी। यह कार्यालय केन्द्रीय सिविल पेंशनधारकों के मुख्यत: तीन कार्य देखता है-

  • देय पेंशन हेतु आवश्यक बजट तैयार करना।
  • पेंशन वितरित करने वाले बैंकों को अनुमति एवं पेंशन भेजना।
  • संबंधित बैंकों का आतंरिक अंकेक्षण करना।

लेखा महानियंत्रक कार्यालय का मुख्य कार्य लेखांकन (Accounting) से संबंधित प्रपत्र निर्माण, वित्तीय एवं लेखा नियमों का संचालन, लेखा साधारण, भारतीय लोक सेवा संवर्ग प्रबंधन तथा केन्द्रीय मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों के वित्तीय मामलों में बैंको एवं सरकार से समन्वय करना है। लेखा महानियंत्रक भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय से भी समन्वय करता है तथा उसे आवश्यक सहायता एवं सामग्री उपलब्ध कराता है। एक संवैधानिक संस्था के रूप में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक संघ तथा राज्यों के लेखाओं के स्वरूप निर्धारित करने और लेखा परीक्षण करने की राष्ट्रपति की शक्तियों का (अनुच्छेद-150) प्रयोग करता है। वस्तुत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कार्यालय ही ‘भारतीय लेखा एवं अंकेक्षण विभाग’ होता है। सन्‌ 1976 में स्थापित हुई लेखा महानियंत्रक (CGA) संस्था के माध्यम से लेखांकन संबंधी सभी कार्य संपन्न हो रहे हैं। यही भारत का ‘लोक लेखा संगठन’ है।

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