Public Administration: The Employees՚state Insurance (Amendment) Bill, 2009

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भारत में श्रमिकों की बेहतरी और संरक्षण के लिए तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Labourers in India)

कर्मचारी राज्य बीमा संशोधन विधेयक, 2009 [The Employees՚ State Insurance (Amendment) Bill, 2009) ]

  • श्रम और रोजगारी मंत्री दव्ारा कर्मचारी राज्य बीमा संशोधन विधेयक, 2009, लोकसभा में 7 अगस्त, 2009 को प्रस्तावित किया गया था।
  • विधेयक, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 में संशोधन करता है ताकि केन्द्र सरकार “अन्य लाभार्थियों” और उनके परिवारों के लिए योजनायें बना सके जिससे उन्हें पूर्व में किसी “प्रयोग में न रहे” अस्पताल (जिसे ESIC ने स्थापित किया हो) में चिकित्सा सुविधायें “प्रयोक्ता मूल्यों” पर प्रदान की जा सके।
  • विभिन्न वर्गो के लिए “आश्रित” की आयु सीमा में बदलाव किया गया है। साथ ही माता-पिता को आश्रित तब तक नहीं माना जाएगा जब तक उसकी आय केन्द्र सरकार दव्ारा निर्धारित आय से कम न हो।
  • विधेयक में “कारखाने” की परिभाषा में संशोधन करते हए, इसमें ऐसे किसी स्थान को शामिल करने की बात कही गई है, जिसमें एक विनिर्माण प्रक्रिया हो तथा जिसमें 10 या अधिक लोग कार्यरत हों (भले वे कितनी भी ऊर्जा खपत करें) ं

श्रमिकों के कल्याण की निगरानी करने वाली एजेंसियाँ एवं संस्थायें (Agencies and Institutions to Monitor the Welfare of Labours)

क. प्रथम राष्ट्रीय श्रमिक आयोग (First National Labour Commission)

  • श्रमिकों पर पहले राष्ट्रीय आयोग का गठन 24 दिसंबर, 1966 को न्यायमूर्ति पी. बी. गजेंन्द्रगडकर की अध्यक्षता में किया गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट संगठित व असंगठित दोनों क्षेत्रकों के श्रमिकों की समस्याओं के सभी पहलुओं के विस्तृत परीक्षण के बाद अगस्त, 1969 में प्रस्तुत की। सुझावों में अनेक मुद्दे शामिल थे जैसे-भर्ती एजेंसियाँ एवं कार्य प्रणाली, रोजगार सेवा प्रशासन, प्रशिक्षण और कामगार शिक्षा, कार्यदशायें, श्रमिक कल्याण, आवास, सामाजिक सुरक्षा, वेतन व आय, वेतन नीति, बोनस, कामगार/कर्मचारी संगठन, औद्योगिक संबंध तंत्र आदि।
  • श्रम आयोग के महत्वपूर्ण सुझावों को संशोधन के दव्ारा कुछ श्रम कानूनों जैसे कामगार मुआवजा अधिनियम 1923, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948, कारखाना अधिनियम 1948, अनुबंध श्रमिक (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम 1970, बाल श्रम (निषेध व विनियमन) अधिनियम, 1986 पर लागू किया गया है। आयोग की संस्तुतियों के आधार पर राष्ट्रीय श्रम संस्थान (National Labour Institute) की स्थापना 1972 में की गई थी।

ख. दव्तीय राष्ट्रीय श्रम आयोग (Second National Labour Commission)

श्रम कानूनों में आर्थिक उदारीकरण के परिप्रेक्ष्य में भारत सरकार ने वर्ष 2002 में श्री रविन्दर वर्मा की अध्यक्षता में दव्तीय राष्ट्रीय आयोग का गठन किया, जिसका कार्य इन मुद्दों पर सुझाव देना था-

  • श्रम कानूनों की उपयुक्त व्याख्या संबंधी मानदंड।
  • संगठित क्षेत्र में कामगारों की सुरक्षा का न्यूनतम स्तर सुनिश्चित करने के लिए एक प्रमुख विधान की व्यवस्था।

दव्तीय श्रम आयोग के कुछ सुझाव-

  • आयोग ने “वर्कमैन” की अपेक्षाकृत “वर्कर” का शब्द का प्रयोग किया।
  • अधिक वेतन वाली नौकरियों या जो कामगार श्रेणी से अलग हैं उनके लिए आयोग पृथक कानून का प्रावधान करता है।
  • सभी श्रम कानूनों को एक सुपरिभाषित सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।
  • श्रम आधिक्य को कम करने के लिए नियोजन की समाप्ति।
  • एक अनुबंध श्रमिक उत्पादन/सेवा कार्यो में नियुक्त नहीं किया जा सकता। अनुबंध श्रमिक को नियमित दर पर नियमित ग्रेड का वेतन मिलना चाहिए।
  • प्रत्येक कर्मचारी को एक माह का वेतन बोनस के रूप में मिलना चाहिए।
  • प्रत्येक कर्मचारी को न्यूनतम वेतन पाने का अधिकार है।
  • बाल श्रम अपराध है।

ग. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation)

  • NSDC निजी तथा सरकारी क्षेत्र दव्ारा शुरू किया गया एक साझा प्रयास है। जिसका मूल उद्देश्य भारतीय श्रमिक वर्ग को कुशल बनाना था। पहले से कुशल श्रमिकों की कुशलता को उन्नत करना है। NSDC के प्रयासों का एक बड़ा भाग इस बात के लिए समर्पित है कि असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक भी प्रगति पथ पर अग्रसर हो सके। इसके लिए NSDC प्रशिक्षण के लिए वित्तीय मदद देने में प्रमुख भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण के अलावा उससे जुड़ी अन्य सेवाएँ भी NSDC के कार्यक्षेत्र में शामिल हैं। माँग तथा पूर्ती के बीच किस क्षेत्र में कितना बड़ा अंतराल है इसकी पड़ताल तथा प्रशिक्षण के लिए मानकों का निर्धारिण भी NSDC के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आता है।
  • NSDC बिना मुनाफे के कार्य करने वाली एक ऐसी कंपनी है जो वित्त मंत्रालय के अधीन आती है तथा जो कंपनी अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थापित की गयी है। इसकी मूल पंजी 10 करोड़ रूपये है तथा निजी एवं सरकारी क्षेत्र की भागीदारी क्रमश: 51 प्रतिशत तथा 49 प्रतिशत है।
    • कार्य निष्पादन की सरलता के लिए इसे कई स्तरों में विभाजित किया गया है जिनमें प्रमुख हैं। 12 सदस्यीय निदेशक मंडल तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निधि, जिसका 100 प्रतिशत नियंत्रण भारत सरकार के पास है।
  • NSDC निजी तथा सरकारी क्षेत्र की साझेधारी में स्थापित एक ऐसी इकाई है जिसका प्रबंधन अनुभवी तथा पेशेवर लोगों की टीम के दव्ारा किया जाता है। पेशेवर लोगों के होने की वजह से इसके निर्णय लेने की प्रक्रिया भी जटिल नहीं है।

NSDC किन-किन क्षेत्रों में अपनी सेवायें प्रदान करती है?

  • वाहन तथा उससे जुड़े पूर्जों का उद्योग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • चमड़ा तथा चमड़े से बनी सामग्री का उद्योग
  • बिल्डिंग तथा ढांचागत निर्माण उद्योग
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
  • गृहनिर्माण तथा गृहसज्जा की वस्तुओं का उद्योग
  • सूचना तकनीक तथा सॉफ्टवेयर उद्योग
  • सुनियोजित खुदरा व्यापार
  • स्वास्थ्य सेवा
  • असंगठित क्षेत्र

घ. वी. वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (V. V. Giri National Labour Institute)

वी. वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान एक प्रमुख संस्थान है जो अनुसंधान, प्रशिक्षण, शिक्षा, प्रकाशन और श्रम संबंधी परामर्श एवं संबंद्ध मुद्दों से जुड़ा है। 1974 में स्थापित यह संस्थान, भारत सरकार के श्रम व रोजगार मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी संस्थान है। 1995 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रख्यात श्रमिक संघ नेता वी. वी. गिरि के सम्मान में संस्थान का पुन: नामकरण किया गया। यह संस्थान श्रम और श्रम प्रशासकों के प्रशिक्षण, श्रमिक संघों, सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधकों और श्रम से जुड़े अन्य सरकारी संस्थानों से जुड़कर अनुसंधान क्षेत्र में कार्यरत है।

ङ केन्द्रीय कामगार शिक्षा बोर्ड (Central Board for Workers Education)

कामगार शिक्षा हेतु केन्द्रीय बोर्ड की स्थापना भारत सरकार के श्रम व रोजगार मंत्रालय दव्ारा 1958 में असंगठित, संगठित और ग्रामीण क्षेत्रक के कामगारों के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और इकाई/ग्रामीण स्तर पर कामगार शिक्षा योजनायें लागू करने के लिए की गई थी। बोर्ड के प्रशिक्षण श्रमक्रमों का उद्देश्य श्रमबल में जागरूकता पैदा करना तथा उनको शिक्षित करना है ताकि वे देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में प्रभावी भागीदारी कर सकें। बोर्ड का मुख्यालय नागपुर में स्थित है तथा इसके नेटवर्क में 50 क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय निदेशालय पूरे भारत में विभिन्न स्थानों पर स्थापित हैं।

च. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Safety Council)

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की स्थापना 1966 में दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु सुरक्षा मानक अपनाने, खतरों को कम करने, मानवीय प्रताड़ना को कम करने, सुरक्षा पर कार्यक्रम, व्याख्यान, कार्यशाला आयोजित करने और कामगारों में जागरूकता बढ़ाने हेतु शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने तथा शैक्षणिक और जानकारी आँकड़े एकत्र करने के उद्देश्य से कामगारों के मध्य सुरक्षा जानकारी बढ़ाने के लिए की गई थी। प्रति वर्ष 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के स्थापना दिवस की स्मृति में राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।

छ. असंगठित क्षेत्र में उद्यम हेतु राष्ट्रीय आयोग (National Commission for Enterprises in the Unorganized Sector)

असंगठित क्षेत्र में उद्यम हेतु राष्ट्रीय आयोग की स्थापना 20 सितंबर 2004 को एक स्पष्ट आदेश के साथ हुई थी। आयोग को सौंपी गई प्रमुख संस्तुतियाँ थी-

  • भारत के असंगठित क्षेत्र की समीक्षा करना, जिसमें उद्यमों की प्रकृति, उनके आकार, विस्तार एवं विषय क्षेत्र, रोजगार का परिमाण आदि शामिल है।
  • छोटे उद्यमों दव्ारा उठायी जाने वाली वे समस्यायें जो उद्यम को चलाने, कच्चे माल तक पहुँच, वित्त कौशल, उपक्रम विकास अवरसंचना, तकनीक और बाजार आदि से संबंधित हैं, उनकी पहचान करना और इन्हें संस्थागत मदद उपलब्ध कराना और खामियों को दूर करना।
  • असंगठित क्षेत्रक की वृद्धि, रोजगार, निर्यात और प्रोन्नयन हेतु कानूनी और नीतिगत वातावरण का सुझाव देना।
  • रोजगार सृजन करने वाले तथा उनकी पुनर्संरचना के सुधार हेतु मौजूदा कार्यक्रमों का निरीक्षण करना।
  • असंगठित क्षेत्र की वृद्धि हेतु कानूनी और वित्तीय उपकरणों की पहचान करना।
  • रोजगार एवं बेरोजगारी निर्धारण के मौजूदा तरीकों का परीक्षण करना और 1990 के दशक में रोजगार में गिरावट के कारण ढूँढना।
  • असंगठित क्षेत्र को ध्यान में रखकर रोजगार रणनीति हेतु सुझाव देना।
  • श्रम अधिकारों के साथ-साथ श्रमिक कानूनों की समीक्षा करना, विशेषकर असंगठित क्षेत्रक में उद्योग व सेवाओं की वृद्धि की जरूरतों को पूरा करना तथा उत्पादकता बढ़ाने व प्रतिस्पर्धा में सुधार करना। इसके अतिरिक्त-

असंगठित श्रमिक (कामगार) सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के अंतर्गत केन्द्र स्तर पर एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया गया था जिसका कार्य ऐसी योजनाओं हेतु सुझाव देना था जो जीवन एवं अक्षमता सुरक्षा, स्वास्थ्य व मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा तथा असंगठित क्षेत्र के कामगारों के अन्य लाभों से जुड़ी हों। यह बोर्ड सामाजिक क्षेत्र की अन्य योजनाओं जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना, आम आदमी बीमा योजना, इंदिरा गांधी वृद्धावस्था पेंशन योजना की भी समीक्षा करता है।

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