Public Administration: Expert Committee for Roadmap for Innovation Universities in India

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स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय (Issues Relating to Development and Management of Social Sector/Services Relating to Health, Education, Human Resources)

भारत में नवाचार विश्वविद्यालयों हेतु रोडमैप के लिए विशेषज्ञ समिति (Expert Committee for Roadmap for Innovation Universities in India)

केन्द्र सरकार दव्ारा हाल में यूनिवर्सिटीज फॉर रिसर्च एंड इनोवेशन विधेयक, 2012 के प्रावधानों में संशोधन और भारत में नवाचार विश्वविद्यालयों हेतु एक रोडमैप बनाने हेतु रामकृष्ण रामास्वामी समिति का गठन करने का निर्णय किया है। यह समिति अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय और नवाचार विधेयक, 2012 पर मानव संसाधन विकास पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का परीक्षण करेगी। यह समिति अनुसंधान व नवाचार के लिए विश्वविद्यालय के गठन संबंधी प्रावधानों का परीक्षण करेगी। उल्लेखनीय है कि मानव संसाधन विकास पर संसदीय स्थायी समिति ने विधेयक के संदर्भ में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए इसके कुछ प्रावधानों पर प्रश्नचिन्ह उठाया है। 21 मई, 2012 को इस विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था। इस विधेयक के मुख्य प्रावधान निम्नवत्‌ हैं-

  • यह विधेयक अधिसूचना के जरिये अनुसंधान व नवाचारों हेतु विश्वविद्यालयों का गठन करने की स्वीकृति केन्द्र सरकार को देता है। इन विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के रूप में देखा जाएगा।
  • विधेयक के प्रावधानों के अनुसार केन्द्र सरकार किसी वर्तमान लोक वित्तीयन वाले विश्वविद्यालय (Existing Public Funded Universities) की एक विशेषज्ञ समिति दव्ारा आकलन के बाद अनुसंधान एवं नवाचार के लिए विश्वविद्यालय के रूप में घोषित कर सकती है। ध्यातव्य है कि विशेषज्ञ समिति का गठन केन्द्र सरकार दव्ारा किया जाएगा।
  • विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि नये विश्वविद्यालय का गठन एक प्रमोटर के दव्ारा कुछ निश्चित शर्तों को पूरा करने के आधार पर किया जा सकता है। ये शर्ते निम्नवत्‌ हैं-
    • यदि प्रमोटर एक संगठन हो।
    • इसे एक गैर लाभकारी कंपनी होना चाहिए।
    • इसे नवाचार के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त सोसाइटी अथवा ट्रस्ट होना चाहिए।
    • यदि यह एक भारतीय विश्वविद्यालय है तो इसे कम से कम 25 वर्षों के लिए गठित किया जाना चाहिए।
    • यदि यह एक विदेशी विश्वविद्यालय है तो इसे कम से कम 50 वर्षों के लिए गठित होना चाहिए।
  • विधेयक में प्रावधान किया गया है कि विश्वविद्यालय के गठन संबंधी प्रस्ताव को केन्द्र सरकार दव्ारा व्यावहारिक पक्षों को ध्यान में रखते हुए 6 माह के भीतर मंजूरी देनी होगी।
  • प्रत्येक विश्वविद्यालय एक समिति का गठन करेगा जो विश्वविद्यालय के कार्य निष्पादन की समीक्षा करेगा और ऐसा विश्वविद्यालय के गठन के 15 वर्षों के भीतर किया जाएगा।

इस विधेयक में कई ऐसे मुद्दे हैं जो कई सवाल खड़े करते हैं। यह विधेयक विश्वविद्यालयों की एक नयी श्रेणी बनाता है। इस विधेयक में केन्द्र सरकार को अत्यधिक स्वायत्ता प्रदान की गयी है। इस विधेयक में जो एक महत्वपूर्ण बात छूट गयी है, जिसे शामिल किया जाना चाहिए, वह है लोक वित्त वाले विश्वविद्यालयों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक दव्ारा ऑडिटिंग करना। केन्द्र सरकार दव्ारा गठित विशेषज्ञ समिति के आकलन उपरांत विश्वविद्यालयों के गठन संबंधी प्रावधान पर भी प्रश्न चिन्ह उठाया गया है।

  • विवादों व मुद्दों से परे यह तो स्पष्ट ही है कि भारत में नवाचार के विकास हेतु संस्थागत प्रयासों पर जोर देना आवश्यक है ताकि भारत एक वैश्विक ज्ञान केन्द्र (Global Knowledge Hub) बन सके। इसलिए एक समावेशी रणनीति का विकास भारत सरकार से अपेक्षित है।
  • भारत में नवाचारी विश्वविद्यालयों के गठन संबंधी धारणा भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दव्ारा दी गयी थी, जिसके तहत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मानकों को प्राप्त करने के लिए, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अधिक स्वायत्ता देने के उद्देश्य से 14 नवाचारी विश्वविद्यालों के गठन का प्रस्ताव वर्ष 2008 - 09 में किया गया था।
  • 11वीं पंचवर्षीय योजना में स्पष्ट रूप से इन विश्वविद्यालयों का गठन संबंधी प्रस्ताव किया गया और इसके लिए एक केन्द्रीय विधायन पर भी जोर दिया गया था।
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना के दृष्टिकोण प्रपत्र में कहा गया है कि इस योजना के अंत तक अनुसंधान व नवाचार के लिए 20 विश्वविद्यालयों का गठन किया जाएगा। ये विश्वविद्यालय सरकारी अथवा निजी विश्वविद्यालय हो सकते हैं और लोक निजी सहभागिता पद्धति (PPP Mode) में गठित किये जा सकते हैं। ये विश्वविद्यालय अनुसंधान विकास कार्यों पर बल देंगे।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में यूजीसी ने नवाचारी विश्वविद्यालयों पर एक स्कीम आरंभ किया है, जिसके अंतर्गत यह प्रावधान है कि कुछ निश्चित श्रेणीगत योग्यताओं को पूरा करने पर विश्वविद्यालय एक निश्चित वित्त राशि प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय के गठन स्तर (खासकर नवाचारी विश्वविद्यालय) पर कुछ उद्देश्य निर्धारित किये गये हैं। सर्वाधिक प्रमुख उद्देश्य यह है कि ये ज्ञान के क्षेत्र में श्रेष्ठता की स्थिति को प्राप्त करें। इन्हें सामाजिक समस्याओं की तरफ उन्मुख अनुसंधानों पर बल देना चाहिए। इन आधारों पर ही भारत में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के समग्र विकास को मूर्तमान बनाया जा सकता है।

शिक्षा (Education)

उच्चतर शिक्षा से संबंधित प्रथम अखिल भारतीय सर्वेक्षण (2010 - 11) की अंतिम रिपोर्ट (Final Report of First All India Survey (2010 - 11) Related to Higher Education)

21वीं सदी में ज्ञान आधारित समाज के रूप में विकसित करने की दृष्टि से उच्चतर शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए 11वीं पंचवर्षीय योजना में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था और वर्ष 2020 तक इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत के स्तर पर पहुँचाने का लक्ष्य था। इस दिशा में हुई प्रगति का आकलन व मूल्यांकन करने के लिए मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय दव्ारा सितंबर, 2012 में उच्चतर शिक्षा से संबंधित प्रथम अखिल भारतीय सर्वेक्षण (2010 - 11) की अनंतिम रिपोर्ट जारी की गयी। यह रिपोर्ट 31 जुलाई, 2012 तक एकत्रित किये गये आँकड़ों पर आधारित है।

भारतीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मूल बिन्दु अथवा निष्कर्ष निम्नवत हैं-

  • 2010 - 11 में उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 18.8 प्रतिशत है, जो वर्ष 2009 - 10 के 15 प्रतिशत के सापेक्ष 3.8 प्रतिशत बिन्दु की वृद्धि दर्शाता है।
  • 2010 - 11 में उच्चतर शिक्षा में पुरुष एवं महिला सकल नामाकंन अनुपात क्रमश: 20.9 प्रतिशत एवं 16.50 प्रतिशत है तथा इन दोनों में भी विगत वर्ष की तुलना में 3.8 प्रतिशत बिन्दु की वृद्धि दर्ज की गयी है।
  • प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार लगभग 36 प्रतिशत विश्वविद्यालय, 48 प्रतिशत महाविद्यालय एवं 56 प्रतिशत स्वत: संचालित संस्थान ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इस सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 57 प्रतिशत के लगभग महाविद्यालय व्यक्तिगत प्रबंधन के अंतर्गत तथा 22 प्रतिशत सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत हैं, वहीं स्वत: संचालित संस्थानों का लगभग 64 प्रतिशत व्यक्तिगत प्रबंधन के अंतर्गत है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लगभग 45 प्रतिशत विश्वविद्यालय और 36 प्रतिशत महाविद्यालय एक विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हैं, जबकि 1 प्रतिशत विश्वविद्यालय एवं 9 प्रतिशत महाविद्यालय बालिकाओं की शिक्षा से संबंधित हैं।
  • सकल नामांकन में संस्थागत मोड (Institutional Mode) के छात्रों की संख्या 82.7 प्रतिशत तथा दूरस्थ मोड (Distance Mode) के छात्रों की संख्या 17.3 प्रतिशत है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार 2010 - 11 में अनुसूचित जातियों का उच्चतर शिक्षा में सकल नामाकंन अनुपात 10.2 प्रतिशत के स्तर पर है जिसमें 10.3 प्रतिशत पुरुषों एवं 10.1 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
  • अनुसूचित जनजातियों का उच्चतर शिक्षा में सकल नामाकंन अनुपात 4.4 प्रतिशत के स्तर पर है जिसमें 4.3 प्रतिशत पुरुषों एवं 4.6 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
  • अन्य पिछड़ा वर्गों का उच्चतर शिक्षा में सकल नामाकंन अनुपात 27.1 प्रतिशत है जिसमें 27.3 प्रतिशत पुरुष एवं 26.8 प्रतिशत महिलाएँ शामिल हैं।

बजट 2012 - 2013 व उच्चतर शिक्षा (Budget 2012 - 2013 and Higher Education)

भारत के बजट 2012 - 2013 में उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के विकास और संवर्द्धन के लिए 15000 करोड़ रुपये की राशि आबंटित की गयी है। उच्च एवं विश्वविद्यालय शिक्षा को जितनी राशि मिली है उसमें आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर आदि संस्थाएं भी साझेदार होंगे। वहीं कुछ ऐसे भी विश्वविद्यालय है, जिनके विकास को प्राथमिकता दी गई है। इनमें से कुछ प्रमुख निम्नवत्‌ है-

  • केरल कृषि विश्वविद्यालय के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि का निर्धारण।
  • चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालयों के लिए 50 करोड़ रुपये।
  • नेशलन काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनोमिक्स रिसर्च के लिए 15करोड़ रुपये।

यदि विश्वविद्यालयों पर नजर डाले तो स्पष्ट हो जाएगा कि खास तकनीकी शिक्षा व विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने पर विशेष बल रहा है।

उच्च शिक्षा में संसाधन आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दे (Issues Related to Resource Requirements in Higher Education)

  • उच्च शिक्षा (तकनीकी शिक्षा सहित) में सार्वजनिक व निजी निवेश बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है और उसके बाद उसके सदुपयोग में भी कार्यकुशलता बढ़ाने की आवश्यकता है। आज संपूर्ण सरकारी शिक्षा में लगभग 18 प्रतिशत उच्च शिक्षा पर या जीडीपी का लगभग 1.12 प्रतिशत व्यय किया जा रहा है। इसे इसमें क्रमश: 25 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत तक बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसा 12वीं पंचवर्षीय योजना के दृष्टिकोण प्रपत्र में माना गया है।
  • राज्य विश्वविद्यालय और उनसे संबद्ध कॉलेज जो 90 प्रतिशत से भी अधिक पंजीकरण करते है वहाँ निधि संबंधी (Fund Related) गंभीर समस्याएँ झेलनी पड़ती हैं और कमजोर अभिशासन के अनुसार गुणवत्ता बहुत अल्प रह जाती है। राज्य उच्च शिक्षा योजनाओं पर आधारित रणनीतिक केन्द्रीय निधियन की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि शैक्षणिक और अभिशासन संबंधी सुधारों से राज्य निधियन को जोड़ा जा सके, जिसमें मानदंड आधारित निधियन राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए करना शामिल है।
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना का दृष्टिकोण है कि उच्च शिक्षा (तकनीकी शिक्षा सहित) में निजी क्षेत्रक विकास को स्थान दिया जाए और नव प्रवर्तनकारी सार्वजनिक निजी सहभागिता (PPP) की संभावनाओं का पता लगातार उन्हें 12वीं योजना में विकसित किया जाना चाहिए। व्यावसायिक उच्च शिक्षा में निजी उच्च शिक्षा का योगदान 4/5 है। सहयोगी अनुसंधान, विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों जो अधिक शोध अध्येतावृत्तियों को प्रदान करते हैं, में उद्योग विकास कारकों को गठित करना, नये एवं उभरते हुए क्षेत्रों में अंतरविषयी शोध के जरिये नवप्रवर्तन (Innovation) को प्रोत्साहित करना, अंतरविश्वविद्यालयी केन्द्रों को सुदृढ़ करने आदि पर 12वीं योजना में जोर दिये जाने की जरूरत है।

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