Public Administration: Flagship Programmes of Government of India

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सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय (Government Policies and Interventions for Development in Various Sectors and Issues Arising Out of Their Design and Implementation)

भारत सरकार के 13 महत्वपूर्ण फलैगशिप कार्यक्रम (13 Important Flagship Programmes of Government of India)

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme)

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम भारत सरकार का फलैगशिप कल्याणकारी कार्यक्रम है जिसे 8वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 15 अगस्त, 1995 को प्रारंभ किया गया था। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम में वर्तमान में 5 प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं, जो निम्नवत्‌ हैं-

  • अन्नपूर्णा योजना (Annapurna Yojana) - अन्नपूर्णा का प्रारंभ 2 अक्टूबर, 2000 को गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश) के सिखोड़ा ग्राम से हुआ। इस योजना का उद्देश्य देश के लिए रोटी की व्यवस्था करनी है। इसके अंतर्गत वे सभी वृद्ध नागरिक जो वृद्धावस्था पेंशन के हकदार हैं, लेकिन किसी कारणवश इसे प्राप्त नहीं कर पा रहें हैं, प्रतिमाह 10 किग्रा. , अनाज बिना मूल्य के पाने के हकदार हैं। 2001 - 02 में बजट में किये गए संशोधन के अनुसार अब जो वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे हैं वे भी इससे लाभान्वित होंगे।
  • राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना (National Family Benefit Scheme) - राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना भी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही 1995 में शुरू की गई, जिसे 2002 - 03 में राज्य सरकारों को सौप दिया गया था। अब यह राज्य प्रायोजित योजना है। इस योजना के अंतर्गत निर्धनता रेखा से नीचे रहने वाले परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर सरकार दव्ारा 10,000 रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया है। राशि में वृद्धि के साथ आयु सीमा में भी परिवर्तन किया गया है। आयु सीमा जो इस योजना के तहत पूर्व में 18 - 64 वर्ष थी, उसे परिवर्तित कर 18 - 59 वर्ष की दिया गया है।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (Indira Gandhi National Old Age Pension Scheme) : 15 अगस्त, 1995 में शुरू की गयी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन स्कीम को संशोधित करके वर्ष 2007 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के नाम से निर्धनता रेखा से नीेचे के परिवारों के लिए शुरू की गई। केन्द्रीय बजट 2011 - 12 में इसकी अर्हता को 65 वर्ष से घटकर 60 वर्ष कर दिया तथा 80 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए इसकी राशि 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गयी है।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (Indira Gandhi National Widow Pension Scheme) : यह योजना फरवरी 2009 से प्रारंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 40 वर्ष से 59 वर्ष तक की गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाएँ पात्र थीं और इस योजना के तहत केन्द्र सरकार ने 200 रुपये प्रतिमाह की राशि निर्धारित की थी, जबकि इतनी ही राशि राज्य सरकार के दव्ारा दिया जाना निर्धारित किया गया था।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (Indira Gandhi National Disability Pension Scheme) : यह योजना भी फरवरी 2009 में प्रारंभ की गई थी। इस योजना के तहत गंभीर रूप से विकलांग एवं विभिन्न अंगों से विकलांग व्यक्ति को 200 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। इसके तहत 18 - 59 वर्ष के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रह विकलांग पात्र हैं।

उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 के अंतर्गत (नीति निदेशक तत्वों के तहत) राज्य को यह निर्देश दिया गया है कि वह अपने नागरिकों को बेरोजगार, बुढ़ापा, बीमारी, अक्षमता एवं अन्य कठिनाइयों की स्थिति में सहायता उपलब्ध कराए। इसी अनुच्छेद के अनुपालन के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया था।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों की राशि में वृद्धि (Increase in the Amount of National Social Assistance Programmes)

  • केन्द्रीय मंत्रिमंडल दव्ारा 18 अक्टूबर, 2012 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के प्रमुख घटक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली राशि में भी वृद्धि की गई। उपर्युक्त निर्णय के अनुसार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत विधवाओं को केन्द्र की ओर दिये जाने वाले 200 /रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 300 रुपये प्रतिमाह प्रदान किये जायेगें। इस योजना के तहत अब विधवाओं की आयु सीमा को 40 - 59 वर्ष से बढ़ाकर 40 - 79 कर दिया गया है। इससे 76 लाख ऐसी विधवाएँ जो गरीबी रेखा से नीचे की स्थिति में जीवनयापन कर रही हैं, लाभान्वित होंगी।
  • राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के एक अन्य महत्वपूर्ण घटक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना के तहत गंभीर रूप से विकलांग एवं विभिन्न अंगों से विकलांगता व्यक्ति का मासिक पेंशन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। इस निर्णय से देश में रह रहें। 11 लाख विकलांग लाभान्वित होंगे। इस योजना के तहत पात्र विकलांगों के लिए आयु सीमा को बढ़कर 18 - 79 वर्ष कर दिया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को जारी रखने के लिए 3 प्रतिशत प्रशासनिक व्यय के साथ उपर्युक्त सभी योजनाओं में व्यय हेतु लगभग 4 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (Integrated Child Development Service Scheme)

2 अक्टूबर, 1975 को प्रारंभ इस योजना का उद्देश्य 0 - 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण एवं शैक्षणिक सेवाओं का एकीकृत पैकेज प्रदान करना तथा आँगनबाड़ी भवनों, सीडीपीओ (Child Development Project Officer) कार्यालयों एवं गोदामों के निर्माण के लिए ऋण प्रदान करना है। वस्तुत: एकीकृत बाल विकास सेवा योजना विश्व के सबसे बड़े समुदाय आधारित आरंभिक शैशवावस्था विकास कार्यक्रमों में से एक है। इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नवत्‌ हैं-

  • 0 - 6 वर्ष आयु वर्ग में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य स्तर में सुधार करना।
  • बच्चों के उचित मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की आधारशिला रखना।
  • बच्चों में मृत्यु, रुग्णता, कुपोषण और स्कूल छोड़ने की घटनाओं में कमी लाना।
  • बाल विकास के प्रोत्साहन हेतु विभिन्न विभागों के मध्य नीति और क्रियान्वनयन का प्रभावी समन्वय करना।
  • समुचित पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों की सामान्य स्वास्थ्य और पोषण आवश्यकताओं की देखभाल की क्षमता का उन्नयन करना।

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना में शामिल सेवाओं का पैकेज (Package of Services Included in Integrated Child Development Service Scheme)

इस योजना में एक महत्वपूर्ण धारणा निहित है कि सेवाओं का एक पैकेज समन्वित ढंग से विकास की आवश्यक दशा के रूप में उपलब्ध कराया जाय। इस योजना में शामिल सेवाओं का पैकेज निम्नवत है-

  • पूरक पोषण (Supplementary Nutrition) : इस सेवा के अंतर्गत पूरक आहार व वृद्धि पर निगरानी रखी जाएगी। विटामिन ए की कमी तथा रक्ताल्पता (एनीमिया) पर नियंत्रण रखने हेतु सेवा प्रदान करना इसका महत्वपूर्ण घटक है। इसमें समुदाय के सभी परिवारों के 0 - 6 वर्ष के बच्चों और गर्भवती माताओं की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जाता है और इन्हें एक वर्ष में 300 दिन पूरक आहार (Supplementary Feeding) की सुविधा प्रदान की जाती है। आँगनवाड़ी केन्द्र दव्ारा इस पूरक आहार की उपलब्धता को सुनिश्चित करके इस योजना के अंतर्गत निम्न आय वर्गो व वंचित समुदायों के बच्चों व महिलाओं में कैलोरी संबंधी विषमता (Caloric Gap) को भरने का प्रयास किया जाता है।
  • प्रतिरक्षण (Immunization) : शिशुओं व गर्भवती महिलाओं का प्रतिरक्षण उन्हें 6 टीकाकरण से बचाव वाली बीमारियों जैसे- पोलियों, डीप्थीरिया, पर्ट्रसिस, टिटनेस, टुवर क्यूलोसिस और खसरा से सुरक्षा प्रदान करता है।
    • इस प्रकार आईसीडीएस के तहत प्रदान किये जाने वाले प्रतिरक्षण से शिशु मृत्यु विकलांगता और कुपोषण जैसी समस्याओं पर नियंत्रण रखता है। गर्भवती महिलाओं का प्रतिरक्षण (टिटनेस से बचाव हेतु) मातृ मृत्यु दर व प्रसव पूर्व मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • स्वास्थ्य जाँच (Health Check-up) : आईसीडीएस की इस सेवा के अंतर्गत 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा माँ बनने वाली महिलाओं को प्रसवपूर्व और देखभाल करने वाली माताओं को प्रसव-पश्चात्‌ (Postnatal Care) इस सेवा के अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाती है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के कर्मचारियों दव्ारा बच्चों को विविध प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। इसमें नियमित स्वास्थ्य जाँच, वजन का मापन, प्रतिरक्षण (Immunization) , कुपोषण का प्रबंधन, डायरिया का इलाज और साधारण दवाइयों का वितरण आदि शामिल हैं।
  • संदर्भित सेवाएँ (Referral Services) : इसके अंतर्गत जरूरतमंद बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्राेें व इसके उप-केंद्रों में भेजा जाता है। स्वास्थ्य जाँच के दौरान और बालकों की वृद्धि की निगरानी के दौरान कई बीमार व कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है जिन पर त्वरित चिकित्सकीय ध्यान दिया जाना जरूरी होता है। इस सेवा को प्रदान करने के क्रम में आँगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को खोजने की दिशा में सक्रिया रहते हैं।
    • आँगनवाड़ी कार्यकर्ता ऐसे सभी मामलों को एक विशेष रजिस्टर में लेखबद्ध करती है और इसके उपरांत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों व इसके उप-केन्द्रों में चिकित्सकीय अधिकारियों के हवाले कर देती है।
  • स्कूल-पूर्व गैर-औपचारिक शिक्षा (Pre-School Non-formal Education) : बच्चों को स्कूल-पूर्व गैर-औपचारिक शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करना एकीकृत बाल विकास सेवा योजना का सर्वाधिक अहम भाग माना जाता है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता दव्ारा ही इस प्रकार की सेवाओं को प्रत्येक गांव में उपलब्ध कराया जाता है।
  • पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा (Nutrition and Health Education) : इसके अंतर्गत आँगनवाड़ी कार्यकर्ता को पोषण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। इससे व्यवहार परिवर्तन संचार रणनीति का निर्माण होता है। इसके दव्ारा महिलाओं, विशेषकर 15 - 45 आयु वर्ग की महिलाओं में दीर्घकालिक क्षमता निर्माण के विकास का लक्ष्य रखा जाता है ताकि वे स्वयं अपनी स्वास्थ्य पोषण और विकास आवश्यकताओं और अपने परिवार व बच्चों का ध्यान रख सकें।

आईसीडीएस का क्रियान्वयन (Implementation of ICDS)

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत 6 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन पोषणीय उद्देश्यों के लिए 300 कैलोरी (8 - 10 ग्राम प्रोटीन) उपलब्ध कराया जाता है। वहीं किशोरियों (Adolescent Girls) के लिए प्रतिदिन 500 कैलोरी जिसमें 25 ग्राम प्रोटीन भी शामिल है, उपलब्ध कराया जाता हैं। आँगनवाड़ी केन्द्रों के कार्यकर्ता इस सेवा की आपूर्ति के कुशल अभिकरण होते हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य अवसंरचना के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को लक्षित वर्गो तक पहुँचाया जाता है। 1975 में यूनिसेफ आईसीडीएस योजना के लिए आवश्यक आपूर्ति को सुनिश्चित करके इस योजना के क्रियान्वयन का भाग बना था। विश्व बैंक दव्ारा भी इस योजना को वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान की गई है।

आईसीडीएस की वर्तमान स्थिति (Current Scenario of ICDS)

वर्तमान में एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS) से 9.65 करोड़ लाभार्थी लाभ उठा रहे हैं। इनमें 7.82 करोड़ 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 1.83 करोड़ गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ शामिल हैं। इस योजना ने 2005 - 06 के बाद व्यापक रूप लिया और अंतत: 2008 - 09 में 7.076 अनुमोदित परियोजनाओं और 14 लाख आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पूरे देश में इसका विस्तार हुआ। नेशनल इंस्टीट्‌यूट ऑफ पब्लिक कोऑपरेशन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट के अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि आईसीडीएस के चलते जन्म के समय शिशु वजन व शिशु मृत्यु दर सुधार हुआ है।

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