Public Administration: Global Innovation Index, 2012 and Important Plans

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स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय (Issues Relating to Development and Management of Social Sector/Services Relating to Health, Education, Human Resources)

वैश्विक नवाचार सूचकांक, 2012 (Global Innovation Index, 2012)

  • भूमंडलीकरण के दौर में नवाचार विकास के महत्वपूर्ण पैमाने के रूप में उभरा है। वैश्विक स्तर पर कई राष्ट्रों की आर्थिक समृद्धि, तकनीकी कुशलता, सामाजिक गतिशीलता, आधुनिकीकरण का कारण नवाचार की प्रवृत्ति ही है। नवाचारों के संदर्भ में वैश्विक स्थिति को स्पष्ट करने हेतु हाल ही में यूरोप के शीर्ष व्यावसायिक स्कूल इनसीड तथा संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) ने विश्व के 141 देशों की नवाचार क्षमता के आधार पर वैश्विक नवाचार सूचकांक, 2012 जारी किया है। इसमें भारत को 3507 अंको के साथ 64वां स्थान प्रदान किया गया है।
  • वर्ष 2012 के सूचकांक में समग्र प्रदर्शन के आधार पर स्विटजरलैंड, स्वीडन, सिंगापुर ने क्रमश: प्रथम दव्तीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया है। सूचकांक में नये देशों के दव्ारा नवाचारियों के रूप में उभरने को स्पष्ट किया गया है, जिसे विभिन्न देशों में देखा जा सकता है। वैश्विक नवाचार सूचकांक एक समयपरक चेतावनी दर्शाता है कि नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीतियाँ महत्वपूर्ण हैं जिससे तेजी से सतत्‌ आर्थिक विकास को प्राप्त किया जा सके। नवाचार में निवेश को घटाने के प्रयास का विरोध अवश्य ही किया जाना चाहिए अन्यथा यह देशों के टिकाऊ उत्पादक क्षमता को नुकसान पहुँचाएगा।
  • वैश्विक नवाचार सूचकांक, 2012 की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका लगातार नवाचार का नेतृत्वकर्ता बना हुआ है लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिक्षा, मानव संसाधन तथा नवाचार उत्पादों में कमी के कारण तुलनात्मक रूप से इसकी नवाचार रैंकिंग को कम कर दिया गया है। वहीं ब्रिक देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) को नवाचार क्षमता के विकास के लिए निवेश बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। ब्रिक देशों में ब्राजील की रैंकिग में सबसे ज्यादा गिरावट हुई है, फिर भी यह भारत से ऊपर है। भारत ब्रिक देशों की सूची में आखिरी पायदान पर है।

भारत में दक्षता अथवा कौशल विकास व नवाचार विकास पर महत्वपूर्ण योजनाएँ, कार्यक्रम एवं रिपोर्ट (Important Plans, Programs and Reports on Skill Development or Innovation Development in India)

भारत में दक्षता अथवा कौशल विकास व नवाचार विकास मानव संसाधन विकास की रणनीति का हिस्सा है। इस संदर्भ में महत्वपूर्ण योजनाएँ, कार्यक्रम व रिपोर्टों का उल्लेख निम्नवत है-

  • वैश्विक उद्यमशीलता प्रदर्शन सूचकांक (Global Entrepreneurship and Development Index) : वैश्विक उद्यमी व विकास सूचकांक, 2012 में 78 देशों की सूची में भारत को 73वाँ स्थान प्रदान किया गया है जो कि उद्यमशीलता के मामले में भारत की निराशाजनक स्थिति को दर्शाता है। विगत वर्ष में (2011) भारत की रैंकिंग 68वीं थी। भारत के अलावा ब्रिक देशों में चीन व ब्राजील की साझा रैंकिंग 54वीं है जबकि दक्षिण अफ्रीका 41वें स्थान पर है। सूचकांक के अनुसार, यद्यपि भारत में स्वरोजगार गतिविधियाँ काफी हैं लेकिन गुणवत्ता निम्न है। भारत में कोई व्यक्ति उत्कृष्ट रोजगार नहीं पाने के कारण ही स्वरोजगार की ओर उन्मुख होता है जबकि सूचकांक में देशों की रैंकिंग स्वरोजगारों की संख्या पर नहीं बल्कि व्यवसाय की गुणवत्ता, उनका प्रभाव व विकास क्षमता के आधार पर की जाती है।
    • भारत के संदर्भ में अत्यधिक विनियमन व सीमित शैक्षिक अवसर संबंधी एक और महत्वपूर्ण बाधा का उल्लेख किया गया है। कोई क्षमतावान व्यक्ति भारत में कुछ प्रभावी कदम उठाना भी चाहता है तो उसे लालफीताशाही का सामना करना पड़ता है। सूचकांक तैयार करने में उद्यमी गतिविधियाँ, आकांक्षा व नजरिया मापन हेतु वर्ष 2010 के मध्य से 14 विभिन्न आँकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें किसी वयस्क दव्ारा नया व्यवसाय आरंभ करने को अच्छा कैरियर विकल्प मानने से लेकर व्यवसाय आरंभ व संचालन तक को शामिल किया गया है।
  • राष्ट्रीय नवाचार परिषद की दव्तीय वार्षिक रिपोर्ट: राष्ट्रीय नवाचार परिषद के अध्यक्ष दव्ारा नवंबर, 2012 में दव्तीय वार्षिक रिपोर्ट भारतीय राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत की गयी। यह रिपोर्ट देश में नवीन पारिस्थितिकी (New Ecosystem) का मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय नवाचार परिषद् दव्ारा की गयी पहल और गतिविधियों पर प्रकाश डालती है। भारतीय राष्ट्रपति दव्ारा इस संदर्भ में कहा गया है कि नवाचार वृद्धि और विकास का मुख्य चालक है। यह नवीन दृष्टिकोण स्वास्थ्य, शिक्षा जल, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में काफी महत्व रखता है। रिपोर्ट को जारी करते हुए भारतीय राष्ट्रपति दव्ारा स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय नवाचार परिषद् ने देश को नवीनता के रास्ते पर ले जाने के लिए अनेक पहल की है जिसमें समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।
    • उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय नवाचार परिषद् नवोत्पादों के लिए आर्थिक प्रबंध करने के उद्देश्य से एक व्यवस्था बनाने की दिशा में कार्य कर रही है, जिसने समग्र भारतीय नवोत्पाद कोष शुरू करने की तैयारी कर ली है। यह कोष 500 करोड़ रुपये की आरंभिक राशि के साथ शुरू करने का प्रस्ताव है। सरकार ने इस कोष के लिए आरंभ में 100 करोड़ रुपये की धनराशि देने का प्रावधान किया है। भारत में करीब 5000 लघु और मध्यम दर्जे के क्षेत्रीय उद्योग हैं जो अपने पूरे सामर्थ्य का इस्तेमाल नहीं कर पाते और मध्यम क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने की जरूरत है।
    • राष्ट्रीय नवाचार परिषद लघु और मध्यम उद्यमों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इस उद्योग समूह में सृजनशीलता की दिशा में कार्य कर रहा है ताकि रोजगार का सृजन हो सके और उत्पादकता बढ़ायी जा सके। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद इस कार्य में राष्ट्रीय नवाचार परिषद् को सहयोग दे रहे हैं। परिषद् मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ भी काम रही है ताकि इन प्रयासों को आकार प्रदान किया जा सके। मंत्रालय दव्ारा शैक्षणिक वर्ष 2013 से 1000 छात्रवृत्तियाँ शुरू करने की भी योजना है।
    • राष्ट्रीय नवाचार परिषद् और मानव संसाधन विकास मंत्रालय मिलकर मेटा विश्वविद्यालय के गठन की दिशा में मिलकर कार्य कर रहे हैं। मेटा विश्वविद्यालय राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क से जुड़ेगा और बहुउद्देश्याीय शिक्षा को बढ़ावा देगा। मंत्रालय दिल्ली में मेटा विश्वविद्यालय की स्थापना का कार्य शुरू कर चुका है। इस विश्वविद्यालय की विशेषता यह होगी कि इसमें पढ़ने वाले एक ही समय में दो अलग-अलग संस्थानों से दो अलग-अलग कोर्सों में दाखिला ले सकेंगे।
  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दव्ारा कौशल विकास पर रिपोर्ट: भारत में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय दव्ारा दक्षता अथवा कौशल विकास पर सितंबर, 2012 के दौरान अब तक उठाये गये कदमों के तहत रोजगार कौशल के लिए 72 क्षेत्रों में 14.13 मॉड्‌यूलों का संचालन आरंभ किया गया। इसके अतिरिक्त मूल्यांकन के लिए 46 आकंलन निकायों को पैनल में शामिल किया गया। जिनमें से 11 को प्राविधिक रूप से सम्मिलित किया गया। उल्लेखनीय है कि इस योजना की पहल के बाद से अब तक कुल 14 लाख 21 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त 2511 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाताओं को वेब पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है। अब तक इस योजनागत पहल के अंतर्गत 7125 व्यावसायिक शिक्षा प्रदाता पंजीकृत किये गये हैं।
    • व्यावसायिक प्रशिक्षण में उत्कृष्टता के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उद्योग जगत राज्य सरकार और विशेषज्ञों से विचार विमर्श कर स्कूल की पढ़ाई बीच में ही जल्दी छोड़ देने वाला और मौजूदा कामगारों के लिए एक नई नीति की रूपरेखा तैयार की जिसे मई, 2007 से क्रियानिवत किया गया था। इस योजना के तहत इसमें बहु प्रवेश और योजना से बाहर आने के बहु विकल्प लचीले कार्यक्रम और आजीवन सीखने की सुविधा है। केन्द्र सरकार प्रशिक्षण के लिए सुविधा उपलब्ध करा रही है जबकि उद्योग जगत, निजी क्षेत्र, राज्य सरकारें व्यावसायिक शिक्षा प्रदाताओं के माध्यम से सीखने वालों के साथ जुड़ी हुई हैं। यह योजना कौशल विकास पहल योजना के जरिये अमल में लाई जा रही है।
  • नक्सलवाद प्रभावित राज्यों में कौशल विकास कार्यक्रम: 9 नक्सलवाद प्रभावित राज्यों के 34 जिलों में मानव संसाधन विकास की महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में कौशल विकास कार्यक्रम की योजना तैयार की गई है। इस योजना को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के विकास के लिए इस योजना के तहत लगभग 233 करोड़ रुपये के सामाजिक व मानव निवेश की मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य प्रत्येक जिले में आईटीआई और दो कौशल विकास केन्द्र (SDC) स्थापित कर वामपंथ प्रभावित क्षेत्रों में कौशल विकास संबंधी आधारभूत ढांचे का विकास करना है।
    • इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य वाम चरमपंथ से ग्रस्त क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न लघु अवधि और दीर्घ अवधि के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना है ताकि युवाओं को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध करायी जा सके।

उल्लेखनीय है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कौशल विकास कार्यक्रम के तहत निम्नांकित कार्य किया जाना निर्धारित हुआ है-

  • प्रत्येक जिले में 30 युवाओं को दीर्घ अवधि प्रशिक्षण के तहत कुल 100 युवाओं को प्रशिक्षित करना।
  • प्रत्येक जिले में 120 युवाओं को लघु अवधि प्रशिक्षण के तहत कुल 4000 युवाओं को प्रशिक्षित करना।
  • प्रत्येक जिलें में 10 युवाओं को निर्देशक प्रशिक्षण (Instructor Training) के तहत कुल 340 युवाओं को प्रशिक्षित करना।

इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए केन्द्र सरकार दव्ारा शत-प्रतिशत सहायता दी जाएगी। योजना के तहत 75 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता के साथ प्रत्येक जिले में एक आईटीआई और दो कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना का प्रस्ताव है।

  • जम्मू कश्मीर के युवाओं के कौशल विकास हेतु ‘उड़ान’ नामक वेबसाइट की शुरूआत: जम्मू कश्मीर में औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने कौशल विकास हेतु ‘उड़ान’ नामक नये वेबसाइट की शुरूआत की। मार्च, 2012 में भारतीय गृह मंत्री दव्ारा नई दिल्ली में इसका उद्घाटन किया गया था। इसके तहत राज्य के युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। ध्यातव्य है कि 8 निगमित कंपनियों ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ समझौता किया है।
    • समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर के लगभग 8000 युवाओं को 5 वर्ष के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। ये क्षेत्र व्यापार प्रबंधन, सॉफ्टवेयर, बीपीओ आदि हैं। इस वेबसाइट का डिजाइन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम तैयार किया है। इस साइट पर उम्मीदवार पूरी सूचना हासिल करने के साथ-साथ ऑनलाइन पंजीकरण भी करा सकते हैं। स्नातक, स्नातकोत्तर और पेशेवर डिग्रीधारक युवा प्रशिक्षण ले सकेंगे। इसके उपरांत चिन्हित कंपनियाँ राज्य से छात्रों की छंटनी करेंगी। प्रशिक्षण के बाद राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के साथ मिलकर प्रशिक्षुओं के रोजगार के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
  • नशीले पदार्थों के नियमन व नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय नीति: हाल ही केन्द्र सरकार दव्ारा अनुमोदित की गयी नशीले पदार्थ से संबंधित राष्ट्रीय नीति मानव संसाधन विकास एवं प्रबंधन के लक्ष्य से ही प्रेरित है। इस नीति में कहा गया है कि अफीम के व्यसनी लोगों की लत धीरे-धीरे छुड़ाई जाएगी और एक निश्चित अवधि में इसे पूरी तरह रोक दिया जाएगा। इस अवधि का निर्णय राज्य सरकार करेगी। इस नीति में नशीले पदार्थों के खतरें को समाप्त करने के अलावा नशे के सेवन के आदी व्यक्तियों के उपचार, पुनर्वास तथा सामाजिक पुन: एकीकरण के प्रयासों का भी प्रावधान किया गया है। अफीम के अवैध खेती के संक्रमण वाले क्षेत्रों में इस खेती से जुड़े व्यक्तियों को जीवन-यापन के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराये जायेंगे। नीति में कहा गया है कि ऐसे उपाय किये जाएगे जिससे नशीले पदार्थो की तस्करी करने वाले को मारफीन उपलब्ध न हो पाए। इस नीति में नशीले पदार्थो के उत्पादन व्यापार एवं उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून बनाया जाएगा। इस संदर्भ में एक निश्चित अवधि की योजना तैयार की जाएगी, जिसके तहत विभिन्न मंत्रालय, विभाग तथा एजेंसियाँ अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नियंत्रण बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप कदम उठाएगी।

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