Public Administration 1: Ministry of Human Resource Development

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource Development)

परिचय (Introduction)

शिक्षा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय का सारभूत तत्व है जो देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण और सुधारात्मक भूमिका का निर्वाह करती है। चूंकि भारत के नागरिक ही इसके सर्वाधिक मूल्यवान संसाधन हैं, इसलिए बेहतर जीवन स्तर प्राप्त करने के लिए अरबों की जनशक्ति वाले अपने राष्ट्र को बुनियादी शिक्षा के रूप में संपोषण और देखभाल की आवश्यकता है। यह अपने नागरिकों के सर्वांगीण विकास की मांग करता है जो केवल शिक्षा की बुनियाद को मजबूत बनाने में ही हो सकता है। इस मिशन के अनुपालन में भारत सरकार (कार्य का आबंटन) नियमावली 1961 में 174वें संशोधन के जरिये 26 सितंबर, 1985 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का सृजन किया गया।

विभाग (Departments)

वर्तमान में मानव संसाधन विकास मंत्रालय दो विभागों के माध्यम से कार्य कर रहा है;

Human Resource Development: Departments
  • देश में स्कूली शिक्षा और साक्षरता के विकास का उत्तरदायित्व स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग का है, जबकि उच्चतर शिक्षा विभाग उच्चतर शिक्षा प्रणाली की जिम्मेदारी संभालता है जो केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद विश्व की सबसे बड़ी उच्चतर शिक्षा प्रणाली है।
  • स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने “शिक्षा के सर्वसुलभीकरण” और हमारी युवा शक्ति में से बेहतर नागरिक बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए विभिन्न नई योजनाएँ और कार्यकलाप नियमित रूप से शुरू किए जाते हैं और अब इन योजनाओं और कार्यक्रमों ने स्कूलों में नामांकन में वृद्धि के रूप में लाभ प्रदान करना भी शुरू कर दिया है।
  • दूसरी ओर, उच्चतर शिक्षा विभाग देश को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करने के कार्य में जुटा है ताकि भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वयं को पिछड़ा हुआ न पाएं। इसके लिए सरकार ने संयुक्त उपक्रम शुरू किए हैं और समझौता ज्ञापन संपन्न किए हैं ताकि भारतीय छात्र वैंश्विक विचारधारा से लाभान्वित हो सकें।

उद्देश्य: मंत्रालय के उद्देश्य निम्नलिखित होंगे:

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाना और उसका अक्षरश: कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • संपूर्ण देश, जिसमें ऐसे क्षेत्र भी शामिल हैं जहांँ शिक्षा तक लोगों की पहुँच आसान नहीं हैं, में शैक्षिक संस्थाओं की पहुँच में विस्तार और गुणवत्ता में सुधार करने सहित सुनियोजित विकास करना।
  • निर्धनों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों जैसे वंचित समूहों की ओर विशेष ध्यान देना।
  • समाज के वंचित वर्गों के पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति, ऋण सब्सिडी आदि के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना जिसमें यूनेस्कों तथा विदेशी सरकारों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर कार्य करना शामिल है ताकि देश में शैक्षिक अवसरों में वृद्धि हो सके।

स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के अंतर्गत आने वाले मुख्य पहलू हैं-

  • प्रारंभिक शिक्षा
    • प्रारंभिक शिक्षा
    • सर्व शिक्षा अभियान
    • मध्याहृ भोजन
  • माध्यमिक शिक्षा
  • प्रौढ़ शिक्षा
  • शिक्षक शिक्षा
  • व्यावसायिक शिक्षा
  • मुख्य नियंत्रक लेखा
  • सूचना का अधिकार
  • परिपत्र/आदेश/अधिसूचना

स्कूली शिक्षा और साक्षरता (School Education and Literacy)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई) 1986/92 में घोषित शिक्षा का सार और भूमिका इसके बनाए जाने के 25 वर्ष बाद भी प्रासंगिक हुए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह कहा गया है कि:

  • हमारी राष्ट्रीय अवधारणा में शिक्षा सबके लिए अनिवार्य है। हमारे चहुमुखी विकास का यह मूलभूत आधार है।
  • शिक्षा की भूमिका संस्कृत संक्रमण करने की है। यह संवेदनशीलताओं और अवधारणाओं को परिष्कृत करती है जिससे राष्ट्रीय सामंजस्यता, वैज्ञानिक मन: स्थित और बुद्धि एवं भावना की स्वतंत्रता को बल मिलता है। इस प्रकार हमारे संविधान में प्रतिष्ठापित समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और प्रजातंत्र के लक्ष्यों को प्रोत्साहन मिलता है।
  • शिक्षा अर्थव्यवस्था के विभिन्न स्तरों के लिए जनशक्ति का विकास करती है। यह एक आधार भी है जिनसे अनुसंधान और विकास समृद्ध होते हैं जो अंतत: राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करते हैं।
  • संक्षेप में, शिक्षा वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए एक अदव्तीय निवेश है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कुंजी है। वर्ष 2010 में देश ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की, जब 1 अप्रैल, 2010 को अनुच्छेद 21 क और नि: शुल्क बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 लागू किए गए। अनुच्छेद 21 क और आरटीई अधिनियम के लागू होने से प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौकिरण के संघर्ष में हमारे देश ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। आरटीई अधिनियम ने इस विश्वास को मजबूत किया है कि समानता सामाजिक न्याय और प्रजातंत्र के मूल्यों और न्यायपूर्ण एवं मानवोचित समाज का सृजन केवल सभी के लिए समावेशी प्रारंभिक शिक्षा का प्रावधान करके ही किया जा सकता है।

देश की मानव क्षमता का पूर्ण उपयोग करने के लिए उचित गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करने के ध्येय के अनुरूप विभाग ने निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए हैं-

  • राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ साझेदारी में शिक्षा के राष्ट्रीय एवं समेकित स्वरूप को सुदृढ़ करना।
  • संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध समाज का निर्माण करने की दिशा में स्कूली शिक्षा और साक्षरता की गुणवत्ता एवं मानकों में सुधार करना।
  • आरटीई अधिनियम के तहत प्रदत्त अधिकारों के अनुरूप प्रारंभिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण करना।
  • गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक शिक्षा के लिए अवसरों का सार्वभौमिकरण करना।
  • पूर्णत: साक्षर समाज की स्थापना करना।