Public Administration 1: Ministries and Departments of the Government

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सरकार के मंत्रालय एवं विभाग (Ministries and Departments of the Government)

  • प्रशासन के कार्यो में कल्याणकारी अवधारणा जुड़े जाने के साथ ही प्रशासन का स्वरूप व्यापक हो गया है। कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन के लिये कार्यो को विभिन्न विभागों व मंत्रालयों के अंतर्गत विभाजित किया गया है। शाब्दिक दृष्टि से विभाग से तात्पर्य किसी संगठन या इकाई के भाग या अंग से है। विभाग श्रम-विभाजन संकल्पना की देन है। सरकार कायम रहने के लिये स्थापित किये गये मूलभूत उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभागों की स्थापना की जाती है।
  • विभागों को संगठित करने का अधिकार संविधान, संसद या कार्यपालिका में निहित हो सकता है। अमेरिका में शासन व संगठन से संबंधित विस्तृत मुद्दों को कांग्रेस नियमित करती है। 1947 में पारित अधिनियम ने ब्रिटिश कार्यपालिका को यह अधिकार दिया है कि जिस प्रकार वह आवश्यक समझे विभागों का संगठन तथा पुनर्गठन कर सकती है। भारत में मंत्रालयों तथा विभागों का निर्माण तथा विघटन कार्यपालिका का कार्य है। प्रोफेसर व्हांइट के अनुसार “प्रशासन की सुदृढ़ नीति विभागों पर ही निर्भर होती है।”
  • मंत्रालयों को विभागों में बाँटा गया है। मंत्रालय एवं विभागी की उल्लेख गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल्स, 1961 (Government of India Allocation Business Rules, 1961) में है। मंत्रालय व विभाग के नीचे विंग, डिवीजन, ब्रांच इत्यादि का प्रयोग होता है।
Ministries and Departments of the Government
  • मंत्रालय के राजनीतिक प्रमुख मंत्री होते हैं और प्रशासनिक प्रमुख सचिव होते है। स्पष्ट है कि राजनीतिक प्रमुख राजनीतिक पदाधिकारी होते हैं और प्रशासनिक प्रमुख प्रशासनिक पदाधिकारियों से अनुभव, वरीयता इत्यादि के आधार पर चयनित किए जाते हैंं।
  • विभिन्न मंत्रालयों के मध्य समन्वय करने के लिये मंत्रिमंडल समितियों का गठन किया जाता है। इन समितियों के सदस्य मंत्रीगण होते हैं। अत: ये समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों के मध्य एक तरह से राजनीतिक रूप से समन्वय का कार्य करती हैं। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय प्राप्ति में मंत्रिमंडल सचिव और सचिव स्तरीय समितियों की भूमिका होती है। इस कार्य के लिये संलग्न कार्यालय, अधिनस्थ संगठन, स्वायत्त संस्थाएं, मंडल, आयोग, सलाहकारी समितियों इत्यादि का प्रयोग किया जाता है।
Ministries and Departments of the Government
  • वित्त के संबंध में वित्त मंत्रालय, कार्मिक विषयों में कार्मिक प्रशासन मंत्रालय, लोक उपक्रमों के विषयों में भारी उद्योग व लोक उपक्रम मंत्रालय इत्यादि नोड्‌ल मंत्रालय और नियोजन संबंधी विषयों में बाहर से योजना आयोग की सहायता ली जाती है। लोकनीतियों के निर्माण में सचिवालय व्यवस्था और लोकनीति कार्यान्वयन में क्षेत्रीय अभिकरण की भूमिका होती है। इनके सचिव विभिन्न राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ संपर्क रखते हैं। विकास और कल्याण के संदर्भ में वर्तमान में स्थानीय सरकारों का भी सहयोग लिया जाता है।
  • विभागीय संगठन की संरचना-विभागीय संरचना पिरामिड की भांति है। इसमें पदसोपान पद्धति का प्रयोग किया जाता है। नियंत्रण, निरीक्षण, पर्यवेक्षण, समन्वय इत्यादि कार्यों के सरलतापूर्वक संपादन हेतु पदसोपान व्यवस्था एक व्यावहारिक पद्धति है।
Ministries and Departments of the Government
  • विभागीय संरचना के पदसोपानिक पिरामिड में सत्ता शीर्ष से प्रारंभ होकर क्रमश: नीचे की ओर चलती हैं शीर्ष स्तर पर उत्तरदायित्व अधिक होता है और निम्न स्तर पर कार्य संपादन की मात्रा बढ़ती जाती है और उत्तरदायित्व की मात्रा कम होती जाती हैं आदेश व निर्देश का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होता है और प्रतिवेदन व सूचनाओं का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होता है।

भारत में मौटे तौर पर त्रि-स्तरीय विभागीय संरचना है-

  • राजनीतिक स्तर पर मंत्रालय
  • प्रशासनिक स्तर पर सचिवालय
  • क्रियान्वयन स्तर पर निदेशालय विभाग या कार्यकारी संगठन।

राजनीतिक स्तर पर मंत्रालय (Ministry at Political Level)

  • राजनीतिक स्तर पर राजनीतिक प्रमुख मंत्री होते हैं इनकी सहायतार्थ राज्यमंत्री व उपमंत्री होते हैं। ये सभी संसद सदस्य होते हैं एवं अपने कार्यो के लिये संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं। विभिन्न चुनावों के पश्चात्‌ जनता दव्ारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के आधार पर पदाधिकारियों का भी परिवर्तन होता रहा है। स्पष्ट है उनकी नियुक्ति का आधार विशिष्ट ज्ञान एवं योग्यता न होकर, दल के भीतर उनकी शक्ति, स्थिति व राजनीतिक छवि होती है। मंत्रियों का प्रमुख कार्य विभागों दव्ारा कार्य करने हेतु आवश्यक नीतियों का निर्माण करना, नीति संबंधी महत्वपूर्ण प्रश्नों का निराकरण करना, नीति क्रियान्वयन का समान्य निरीक्षण करना, विभाग की नीति संबंधी प्रश्नों पर संसद के समक्ष स्पष्टीकरण देना है। मंत्री अपने विभाग से संबंधित पूछे गये प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आवश्यक विधेयक प्रस्तु करते हैं एवं जनता के समक्ष अपने विभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • मंत्रालयों के राजनीतिक मुख्य कार्यकारी वैसे तो मंत्री होते है, परन्तु प्रत्यक्ष राजनीतिक मुख्य कार्यकारिणी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रीपरिषद होती है। मंत्रिमंडलीय समितियों के सदस्य होने के नाते समन्वय करने और लोकनीति व कार्यक्रम के संदर्भ में राजनीतिक समर्थन प्राप्ति करने की भूमिका का निर्वहन मंत्रियों दव्ारा किया जाता है। विभाग में नीतियों व कार्यक्रमों की सफलता व असफलता के संबंध में संबंधित मंत्रालय का दायित्व उभरता है। पहले प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी सिफारिश की थी कि मंत्री स्वयं को लोक नीतियों में ज्यादा केंद्रित करें और नीति क्रियान्वयन के मुद्दों की पहल के लिये सचिवों का प्रयोग करें।
  • कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री व उपमंत्री स्तर पर विभाजित होते हैं। वर्तमान में उपमंत्रियों के प्रयोग की प्रवृत्ति नहीं है। मंत्री विभाग की नीति का व्यापक रूप से निर्धारण करता है और विभाग में उत्पन्न विशेष नीति विषयक मामलों को निश्चित करता है। राज्यमंत्री प्राय: अपने विभाग के मंत्री के सामान्य निरीक्षण तथा मार्गदर्शन में कार्य करता है तथा उसे कुछ विशेष प्रकार के कार्य सौंपे जाते हैंं कुछ स्थितियों में राज्य मंत्री अकेला ही पूरे मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण कर सकता है। विभाग के कार्यसंचालन के संबंध में उपमंत्री का प्राय: कोई विशिष्ट प्रशासकीय उत्तरदायित्व नहीं होता। उपमंत्री का कर्तव्य संबंधित मंत्रियों की ओर से संसद में उत्तर देना, विधि निर्माण में उसकी सहायता करना, सामान्य जनता तथा निर्वाचन क्षेत्रों में नीतियों एवं कार्यक्रमों को स्पष्ट करना, संसद सदस्यों, राजनीतिक दलों तथा प्रेस से संपर्क बनाये रखना तथा संबंधित मंत्रियों दव्ारा सौंपी गयी विशेष समस्याओं का विशेष अध्ययन या जाँच करना होता है। संसदीय सचिव संसदीय कार्यों को संपन्न करने में मंत्री की सहायता करता है।

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