Public Administration 1: Ministry of Information and Broadcasting

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting)

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत प्रमुखत: 3 विभाग सूचना, प्रसारण व चलचित्र कार्यरत हैं। इन विभागों के अंतर्गत आने वाले मुख्य विषयों का विवरण अग्रांकित है-

प्रसारण (Broadcasting)

  • एफ. एम. रेडियो चरण-2
  • प्रसारण इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्‌स इंडिया लिमिटेड
  • इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनीटरिंग सेंटर
  • प्रसार भारती
  • एफ. एम. रेडियो चरण-3
  • सामुदायिक रेडियो स्टेशन।
  • इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन।
  • टीवी चैनलों की अपलिंकिंग/डाउनलिंकिग
  • विषय वस्तु नियमन
  • हेडेड इन दि स्काई (हिट्‌स)
  • डायरेक्ट टु होम (डी. टी. एच.)
  • स्व-विनियमन दिशानिर्देश

सूचना (Information)

  • गवेषणा संदर्भ और प्रशिक्षण प्रभाग
  • फोटो प्रभाग
  • क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय
  • भारतीय जन संचार संस्थान
  • विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय
  • प्रकाशन विभाग
  • भारत के समाचारपत्र के पंजीयक
  • भारत प्रेस-परिषद
  • गीत नाटक प्रभाग
  • भारती सूचना सेवा

चलचित्र (Film)

  • फिल्म प्रमाणन अपीलीय अधिकरण
  • सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान
  • राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम
  • फिल्म समारोह निदेशालय
  • भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह
  • भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान
  • राष्ट्रीय बाल एवं युवा चलचित्र केन्द्र
  • फिल्म प्रभाग
  • राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय
  • केन्दीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड

कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture)

भारत में कृषि संबंधी कानून व नियमों के निर्माण, प्रशासन व अधिनियमित करने के लिए कृषि मंत्रालय भारत सरकार की प्रमुख शाखा है। भारत जहाँ 58 प्रतिशत से अधिक आबादी जीविका उपार्जन हेतु कृषि कार्यों में संलग्न है वहीं यह मंत्रालय महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है।

कृषि मंत्रालय के प्रमुख विभाग अग्रांकित हैं-

  • कृषि एवं सहकारिता विभाग (Department of Agriculture and Co-operation)
  • कृषि अनुसंधान व शिक्षा विभाग (Department of Agriculture Research and Education)
  • पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यन विभाग (Department of Animal Husbandry, Dairy and Fisheries)

कृषि मंत्रालय के प्रमुख संलग्न व अधीनस्थ कार्यालय हैं-

  • केन्द्रीय मुर्गीपालन विकास संगठन, पूर्वी क्षेत्र (Central Poultry Development Organization, Eastern Region)
  • आर्थिक व सांख्यिकी निदेशालय (Directorate of Economics and statistics)
  • एकीकृत कीट प्रबंधन राष्ट्रीय (National Centre for Integrated Pest Management)

कृषि एवं समन्वय विभाग निम्नांकित कार्यों एवं योजनाओं को देखता है-

  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (2007 - 08)
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
  • किसान क्रेडिट कार्ड (अगस्त, 1998)
  • कृषि बीमा
  • राष्ट्रीय बागवानी मिशन
  • सूखा प्रबंधन

पशुपालन डेयरी एवं मत्स्ययन विभाग निम्नांकित कार्यो व योजनाओं से देखता है-

  • पशुपालन
  • कुक्कुट व सूअर विकास
  • पशु स्वास्थ्य
  • राष्ट्रीय डेयरी योजना
  • दुग्ध, मांस, अंडा, ऊन उत्पादन

कृषि अनुसंधान व शिक्षा विभाग निम्नांकित कार्यों व योजनाओं को देखता है-

  • कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार।
  • बागवानी, फसल विकास
  • भूमि व जल उत्पादकता प्रबंधन
  • कृषि इंजीनियरिंग और कटाई बाद प्रौद्योगिकी
  • मछली पालन व प्रबंधन।
  • राष्ट्रीय कृषि नवीकरण परियोजना।
  • फसल विज्ञान
  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन।
  • जलवायु परिवर्तन।
  • पशुधन विकास, पशु विज्ञान एवं पशुधन प्रबंधन
  • कृषि शिक्षा व कृषि विस्तार

भारत में महिलाओं की उन्नति एवं संरक्षण के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थाएँ एवं निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Bodies Constituted for the Protection and Betterment of Women in India)

प्रमुख तथ्य (Key Facts)

2011 के अस्थायी जनसंख्या आँकड़ों के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 1210.2 मिलियन है जिसमें से 586.5 मिलियन महिलाएँ हैं। इसलिए एक स्वतंत्र समूह के रूप में महिलाएँ कुल जनसख्या की 48 प्रतिशत से ज्यादा हैं। 2001 - 2011 के दशक में महिलाओं की वृद्धि दर 18.12 प्रतिशत तथा लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 940 महिलाएँ जबकि शिशु लिंगानुपात (0 - 6 वर्ष) 927 से गिरकर 914 रह गया हैं। राष्ट्रीय साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत तथा पुरुष साक्षरता दर 82: 14 प्रतिशत है और इनके मुकाबले महिला साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत हैं।

परिचय (Introduction)

  • राष्ट्रीय प्राथमिकता में महिलाओं का सशक्तीकरण मुख्यतया तीन कारकों से निर्धारित होता है। उनकी आर्थिक सामाजिक एवं राजनीतिक पहचान उनकी महत्ता। ये कारक एक-दूसरे के साथ मजबूती से जुड़े हुए हैं। इसलिए इनमें से कोई एक कारक सशक्तीकरण सुनिश्चित नहीं कर सकता हैं। यह केवल तभी संभव है, जब तीनों कारक एक साथ सुसंगत होकर इस दिशा में कार्य करें, केवल तभी सही अर्थों में महिला सशक्तीकरण किया जा सकता है। इसलिए महिलाओं को समग्र रूप से सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए उनके जीवन को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक कारकों को प्रभावी समेकन अत्यावश्यक है।
  • एक महत्वपूर्ण मानव संसाधन के रूप में महिलाओं की महत्ता को संविधान दव्ारा भी मान्यता दी गई है। साथ ही संविधान दव्ारा न केवल महिलाओं को समानता प्रदान की गई है, बल्कि विशेष रूप से महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करते हुए उनके राजनीतिक अधिकारों एवं निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

भारतीय समाज में असुरक्षित समूह के रूप में महिलायें (Women as Vulnerable Groups in Indian Society)

असुरक्षित समुदायों के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग जैसे पिछड़े सामाजिक समुदायों की महिलाएँ दोहरे भेदभाव का सामना करती हैं, एक तो महिला होने के कारण तथा दूसरा पिछड़े समुदाय से संबंधित होने के कारण। इसी तरह एक नि: शक्त पुरुष के मुकाबले एक नि: शक्त महिला की कई विशिष्ट समस्याएँ होती है। हिंसा एवं यौन दुर्व्यवहार जैसे दुर्व्यापार एवं बलात्कार की पीडित महिलाओं को बिल्कुल भिन्न लेकिन विशिष्ट पुनर्वास पैकेज की आवश्यकता होती है। किशोर लड़कियाँ बहुत ही ज्यादा असुरक्षित समूह के अंतर्गत आती हैं क्योंकि वे दुर्व्यापार, बलात्कार, बाल विवाह जैसे अत्याचारों का सामना करती हैं।

नीचे कठिन परिस्थितियों में जीने वाली विभिन्न वर्ग की महिलाओं की सूची दी गई है-

हिंसा से प्रभावित महिलायें (Women Impacted by Violence)

  • घरेलू हिंसा से प्रभावित
  • बलात्कार पीड़ित
  • डायन करार दी गई महिलाएँ
  • तेजाब हमले की पीड़ित
  • अवैध व्यापार की पीड़ित

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