Public Administration 1: Ministry of Panchayati Raj and Parliamentary Affairs

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पंचायती राज मंत्रालय (Ministry of Panchayati Raj)

  • विकेन्द्रीकरण और स्थानीय स्वशासन संकल्पना की प्रक्रिया में भारत सरकार की शाखा के रूप में पंचायती राज मंत्रालय की स्थापना की गई है।
  • संघीय सरकार की अवधारणा में शक्तियों व कार्यों को केन्द्र व राज्य सरकार के मध्य वितरित किया गया है। 73वें व 74वें संविधान संशोधन 1993 के माध्यम से शक्तियों व कार्यों का बँटवारा जिला एवं ग्राम स्तरों तक किया गया है। (पंचायत ग्राम स्तर पर और नगरीय संस्थाएँ नगरीय स्तरों पर) ं अब भारत सरकार दो नहीं बल्कि त्रिस्तरीय संघीय सरकार है।
  • पंचायती राज मंत्रालय को पंचायती राज व पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित सभी मुद्दों को देखने के लिए 27 मई 2004 को निर्मित किया गया। कैबिनेट स्तर का मंत्री मंत्रालय का प्रमुख होता है।

कार्य (Function)

  • 73वें संविधान संशोधन अधिनियम में उल्लिखित पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र में विस्तार) अधिनियम 1996 के क्रियान्वयन, निगरानी के कार्यो के लिए पंचायती राज मंत्रालय उत्तरदायी है।
  • एलोकेशन ऑफ बिजनेस रूल्स में संशोधन के पश्चात्‌ “पंचायती राज एवं पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित सभी मुद्दे” नये गठित पंचायती राज मंत्रालय दव्ारा देखे जायेंगे।
  • राज्य सरकार/संघ शासित क्षेत्रों में भी 73वें व 74वें संविधान संशोधन विभिन्न रूपों में क्रियान्वित हैं। पंचायती राज मंत्रालय यह देखता है कि समय से इनके चुनाव हो रहे हैं या नहीं और राज्य वित्त आयोग गठित किये गये हैं या नहीं।
  • जिला नियोजन समिति को गठन एवं उनकी सिफारिशों के सशक्त रूप से राज्य व केन्द्र स्तरीय नियोजन के साथ जोड़कर स्थानीय नियोजन को प्रभावकारी बनाने का प्रयत्न करना।
  • पंचायती राज मंत्रालय का एक प्रमुख कार्य यह देखना है कि राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं में संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप वित्त, कार्य व कार्यकारी संस्थाएँ हैं या नहीं।
  • पंचायती राज मंत्रालय इस तरह की कार्य योजनाओं के निर्माण व क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी होगा ताकि पंचायती राज संस्थाएँ “स्थानीय स्वशासन संस्थाओं” के रूप में उद्गमित हो सके। जिससे इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय लाया जा सके।
  • ग्राम सभा की नियमित बैठकों व सामाजिक अंकेक्षण दव्ारा ग्राम सभा को सशक्त बनाना। ताकि ये राज्य व केन्द्र शासित क्षेत्रों में पंचायती राज के आधार के रूप में उभर सकेें।
  • स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य व केन्द्र शासित क्षेत्रों में इन संस्थाओं में वार्ड सभा एवं महिला सभाओं का गठन करना।
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में शामिल कार्यों में पंचायती राज संस्थाओं को कार्यालयी कार्यों में सक्षम बनाने एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों के योग्यता निर्माण संबंधी कार्यों से पंचायती राज मंत्रालय महत्वपूर्ण रूप से संबंधित है।
  • अनुमानत: 3 मिलियन निर्वाचित सदस्यों एवं चुनाव कार्यो से संबंधित स्टॉफ को प्रशिक्षण दव्ारा अपने कार्यो को प्रभावी ढंग से कर सकने योग्य बनाना।
  • प्चाांयत विकास संबंधी शोध अध्ययनों, वर्कशॉप/कार्यशालाओं एवं सेमिनार के लिए वित्त की व्यवस्था करना।
  • “बेहतर पंचायतों के लिए राष्ट्रीय अवार्ड” संबंधी स्कीम क्रियान्वित करना।
  • स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास व सामाजिक न्याय की अवधारणा चरितार्थ करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करना एवं उन्हें योग्य बनाने संबंधी कार्यों का क्रियान्वयन करना।

संसदीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Parliamentary Affairs)

  • संसदीय प्रणाली की सरकार में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के समय और संसाधनों का एक बहुत बड़ा भाग संसदीय प्रणाली के दिन-प्रतिदिन के कार्यचालन पर व्यय होता है। किसी एक समय के दौरान संसदीय कार्यक्रम में सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से संबंधित बहुत से जटिल मामले-वित्तीय, विधायी और गैर-विधायी शामिल होते हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय, यद्यपि एक छोटा-सा मंत्रालय है परन्तु केन्द्रीय सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है। संसद में सरकार की ओर से इस विविध और विपुल संसदीय कार्य को कुशलतापूर्वक करने का कार्य संसदीय कार्य मंत्रालय को सौंपा गया है। इस प्रकार संसदीय कार्य मंत्रालय, संसद में सरकारी कार्य के संंबंध में सरकार एवं संसद के दोनों सदनों के बीच एक एक महत्वपूर्ण समन्वय कड़ी के रूप में कार्य करता है। मई, 1949 में मुख्यत: उपरोक्त कार्य के लिए एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना की गई थी, परन्तु अब यह एक संपूर्ण मंत्रालय है।
  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 77 (3) के अधीन बनाए गए भारत सरकार कार्य आबंटन नियम, 1961 के अधीन मंत्रालय को सौंपे गए कार्य परिशिष्ट-1 में दिए गए हैंं।
  • यह मंत्रालय संसदीय कार्य मंत्रिमंडल की समिति को सचिवालयक सहायता प्रदान करता है जो अन्य बातों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सत्रावसान तथा गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों और संकल्पों पर सरकार के रूख की सिफारिश करती है।
  • म्त्राांलय सरकार के मंत्रालयों/विभागों से संसद में लंबित विधेयकों को पुन: स्थापित किए जाने वाले नए विधेयकों और अध्यादेशों के प्रतिस्थापक विधेयकों के संबंध में निकट संपर्क बनाए रखता है। मंत्रालय विधेयकों की प्रगति पर निरन्तर निगरानी रखता है। यह निगरानी विधेयकों के मंत्रिमंडल दव्ारा अनुमोदन की अवस्था से लेकर विधेयक के संसद के दोनों सदनों दव्ारा पारित होने तक रखी जाती है। संसद में विधेयकों के पारित होने संबंधी कार्रवाई के सुचारू रूप से पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिए इस मंत्रालय के अधिकारी विधेयक प्रायोजित करने वाले मंत्रालयों/विभागों तथा विधि और न्याय मंत्रालय, जो कि विधेयकों का प्रारूपण करता है, के अधिकारियों से सतत्‌ संपर्क बनाए रखते हैं।
  • म्त्राांलय संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समितियाँ गठित करता है तथा सत्रावधि और अंत सत्रावधि दोनों ही के दौरान इनकी बैठके आयोजित करने के लिए व्यवस्था करता है। इस समय विभिन्न मंत्रालयों से संबद्ध ऐसी 29 समितियाँ है जिनके लिए एक वर्ष में लगभग 180 बैठके आयोजित करना अपेक्षित थी। इन समितियों के गठन और कार्यचालन संबंधी दिशा-निर्देश इस मंत्रालय दव्ारा तैयार किए जाते हैं। परामर्शदात्री समितियों दव्ारा गठित किसी उप समिति अध्ययन ग्रुप के संबंध में अधिसूचनाएँ भी इस मंत्रालय दव्ारा जारी की जाती हैं
  • यह मंत्रालय संसद में मंत्रियों दव्ारा दिए गए आश्वासनों के शीघ्र और उपर्युक्त कार्यान्वयन के लिए अन्य मंत्रालयों के साथ कार्रवाई करता है।
  • इस मंत्रालय को आबंटित कार्य की कई अन्य मदें भी हैं जिनमें संसद सदस्यों, संसद के दो सचिवालयों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ संपर्क शामिल हैं। सदस्यों के कल्याण और सुख-सुविधाओं की देख-रेख करना भी इस मंत्रालय को आबंटित एक महत्वपूर्ण कार्य है। संसदीय कार्य मंत्री सरकार दव्ारा गठित विभिन्न समितियों, परिषदों बोर्डों और आयोगों में सदस्यों का नामांकन करते हैं। मंत्रालय संसद सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेंशन अधिनियम, 1954 संसद अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953 संसद में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 और संसद में मान्यता प्राप्त दलों तथा समूहों के नेता और मुख्य सचेतक (प्रसुविधाएँ) अधिनियम, 1998 का प्रशासन भी करता है।
  • प्रजातंत्र की जड़ों को मजबूत करने तथा विद्यार्थी समुदाय में अनुशासन और सहनशीलता जैसी स्वस्थ आदतों को डालने और संसद के कार्यचालन की पूर्ण जानकारी देने के लिए यह मंत्रालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के विद्यालयों; पूरे देश के केन्द्रीय विद्यालयों; जवाहर नवोदय विद्यालयों और विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।

कार्य (Functions)

भारत के संविधान के अनुच्छेद 77 (3) के अधीन राष्ट्रपति दव्ारा बनाए गए भारत सरकार के (कार्य का आबंटन) नियम, 1961 के अधीन मंत्रालय को सौंपे गए कार्य:

  • संसद की दोनों सभाओं को बुलाने और उनका सत्रावसान करने की तिथियाँ, लोक सभा का विघटन, संसद के समक्ष राष्ट्रपति का अभिभाषण;
  • दोनों सभाओं में विधायी और अन्य सरकारी कार्य आयोजन तथा समन्वय।
  • सदस्यों दव्ारा सूचित किए गए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए संसद में सरकारी समय का नियतन।
  • संसद में प्रतिनिधत्व करने वाले विभिन्न दलों और ग्रुपों के नेताओं और सचेतकों के साथ संपर्क।
  • विधेयकों संबंधी प्रवर और संयुक्त समितियों के सदस्यों की सूचियाँ।
  • सरकार दव्ारा गठित समितियों और अन्य निकायों पर संसद सदस्यों की नियुक्ति।
  • विभिन्न मंत्रालयों के लिए संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समितियों का कार्यचालन।
  • संसद में मंत्रियों दव्ारा दिए गए आश्वासनों का कार्यान्वयन।
  • गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों और संकल्पों पर सरकार का रूख।
  • ससंदीय कार्य संबंधी मंत्रिमंडल की समिति को सचिवालयिक सहायता।
  • प्रक्रिया और अन्य संसदीय मामलों में मंत्रालयों को सलाह।
  • संसदीय समितियों दव्ारा की गई सामान्य रूप में लागू होने वाली सिफारिशों पर मंत्रालयों दव्ारा की जाने वाली कार्रवाई का समन्वय।
  • रोचक स्थानों के सरकार दव्ारा प्रयोजित संसद सदस्यों के दौरे।
  • संसद सदस्यों के स्वत्वों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों संबंधी मामले।
  • संसदीय सचिव कार्य।
  • संपूर्ण देश में विद्यालयों/कॉलेजों में युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन का आयोजन।
  • संसद सदस्यों के सरकार दव्ारा प्रायोजित शिष्टमंडलों का दूसरे देशों के साथ आदान-प्रदान।
  • लोक सभा में प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियम के नियम 377 के अधीन तथा सभा में विशेष उल्लेखों के माध्यम से उठाए जाने वाले मामलों के संबंध में नीति का अवधारण और अनुवर्ती कार्रवाई।

संसदीय कार्य मंत्रालय का संगठनात्मक चार्ट (दिनांक 24.4. 2012 की स्थिति के अनुसार) (Organizational Chart of Ministry of Parliamentary Affairs (As on 24.4. 2012) )

Organizational Chart of Ministry of Parliamentary Affairs

आख्यान (Narrative)

Organizational Chart of Ministry of Parliamentary Affairs
उ. स. -उप सचिवप्र-प्रशासनसा. -सामान्यअ. स. -अवर सचिववि. विधायी
स. समितिअ. अ. -अनुभाग अधिकारीयु. सं. -युवा संसदसां. प. सांसद परिलब्धियांस. नि. -सहायक निदेशक
कार्या. -कार्यान्वयनले. क्र. - लेखा और क्रयअनु. अ. अनुसंधान अधिकारीहिं-हिन्दीप्रो. क. -प्रोटोकॉल और कल्याण

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