Public Administration 1: Ministry of Personnel, Public Grievances and Pension

Doorsteptutor material for IAS is prepared by world's top subject experts: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances and Pension)

कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय कार्मिक मामलों, विशेषकर भर्ती, प्रशिक्षण, कॅरियर विकास, कर्मचारी कल्याण तथा सेवानिवृत्ति के पश्चात्‌ के कामकाज के लिए केन्द्र सरकार की समन्वयकर्ता एजेंसी है। मंत्रालय का संबंध उत्तरदायी जनोन्मुख आधुनिक प्रशासन की प्रक्रिया से भी है। कार्य आबंटन नियमावली में मंत्रालय को आबंटित कार्य को परिभाषित किया गया है।

विजन (Vision)

कुशल, प्रभावी, दायित्वपूर्ण, संवेदनशील तथा पारदर्शी सुशासन हेतु सरकार के मानव संसाधन के विकास तथा प्रबंधन हेतु सक्षम परिवेश का विकास।

मिशन (Mission)

  • कार्मिक नीतियाप तथा सरकारी कामकाज को प्रभावी बनाने के लिए एक सक्षम ढांचे का प्रावधान करना।
  • सरकार में सक्षमता तथा नवीनता का विकास।
  • लोक सेवाओं को भलीभांति संपन्न करने के लिए सरकार के सभी स्तरों पर मानव संसाधनों क क्षमता निर्माण।
  • सार्वजनिक मामलें में पारदर्शिता, दायित्व की भावना लाने तथा भ्रष्टाचार को पूर्णत: समाप्त करने के लिए परिवेश का निर्माण करना तथा उसे समर्थन देना।
  • पणधारियों के साथ सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रणाली को संस्थागत बनाना।

परिचय (Introduction)

  • कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय भारत के प्रधानमंत्री के सीधे प्रभार के अंतर्गत आता है। राज्य मंत्री (कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन) के पास संसदीय कार्य तथा प्रधानमंत्री कार्यालय का पद भी है। कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय कार्मिक मामलों के लिए जिम्मेदार नोड्‌ल मंत्रालय है, विशेषकर भर्ती प्रशिक्षण, कॅरियर विकास कर्मचारी कल्याण प्रशासनिक सुधार तथा सेवानिवृत्ति पश्चात्‌ के कामकाज के स्तर पर।
  • इस मंत्रालय में तीन विभाग हैं- कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ; प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग; और पेंशन एवं पेंशन भोगी कल्याण विभाग (DARAPG) ।

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (Department of Personnel and Training)

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में सचिव (कार्मिक) के प्रभाव में छ: विंग अर्थात्‌ स्थापना अधिकारी, सेवाएप तथा सतर्कता, स्थापना, प्रशासनिक अधिकरण तथा प्रशासन, प्रशिक्षण तथा सेवाएप हैं। इनमें से प्रत्येक विंग में संयुक्त सचिव अथवा अपर सचिव रैंक के अधिकारी अध्यक्ष होते हैं। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग भर्ती से संबंधित नीतियों को बनाने, सेवा-शर्तों के विनियम तथा कार्मिकों की प्रतिनियुक्ति के कामकाज के अलावा कार्मिक प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के बारे में केन्द्र सरकार के सभी संगठन को सलाह-मशविरा देने का कार्य करता है।

कार्मिक नीतियाप (Personnel Policies)

कार्मिक लाेेक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

यह विभाग भर्ती नियमों, पदोन्नति तथा वरिष्ठता लचीली अनुपूरक योजना, छुट्‌टी यात्रा रियायत, प्रतिनियुक्ति और बच्चों की देखभाल हेतु छुट्‌िटयों सहित सेवा-शर्तों को अभिशासित करने वाले नियम बनाने सेवा को अभिशासित करने तथा विनियम के लिए जिम्मेदार हैं। उच्च सिविल पदों पर कार्मिकों की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग दव्ारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से की जाती है। समूह ‘ख’ तथा ‘ग’ श्रेणी के अराजपत्रित कर्मचारियों की भर्ती कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से की जाती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों तथा विकलांग व्यक्तियों के उत्थान तथा कल्याण के उद्देश्य की पूर्ति हेतु यह विभाग केन्द्र सरकार की विभिन्न सेवाओं में इन समूहों के लिए आरक्षण के प्रावधान संबंधी नीतियाप बनाने तथा उनके कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है।

संवर्ग प्रबंधन (Cadre Management)

यह विभाग अखिल भारतीय सेवा संवर्गों तथा तीनों सचिवालयों सेवाओं अर्थात केन्द्रीय सचिवालय सेवा (केेन्द्रीय सचिवालय सेवा) केन्द्रीय सचिवालय आशुलिपिक सेवा (केन्द्रीय सचिवालय सेवा रस) और केन्द्रीय सचिवालय लिपिक सेवा (सीएससीएस) के संबंध में प्रबंधन हेतु जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त यह विभाग गृह मंत्रालय तथा पर्यावरण एवं विदेश मंत्रालय के परामर्श से अखिल भारतीय सेवाओं अर्थात आईपीएस तथा आईएसएस की शर्तों के संबंध में नियमों तथा विनियमों को बनाता है तथा उनमें संशोधन भी करता है। यह विभाग आवधिक आधार पर 58 केन्द्रीय समूह ‘क’ सेवाओं की संवर्ग समीक्षा हेतु भी जिम्मेदार हैं

Hkkjr Ljdkj Ds V/Khu Ofj ′ B Inksa Ij Fu; qfDr; Ki (Appointments on Superior Posts under Go)

विभाग वरिष्ठ स्तर पर नियुक्तियों तथा भारत सरकार की कार्मिक नीतियों के संबंधमें कार्य करता है। भारत सरकार के अधीन वरिष्ठ पदों पर नियुक्तियों के उन सभी प्रस्तावों पर इस विभाग दव्ारा कार्रवाई की जाती है, जिनके संबंध में मंत्रिमंडल की नियुक्ति-समिति का अनुमोदन लिया जाना अपेक्षित होता है। इनमें केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बोर्ड स्तर की नियुक्तियाप तथा मंत्रालयों/विभागों में संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के पदों पर केन्द्रीय स्टाफिंग पैटर्न की नियुक्तियाप शामिल होती हैं। इसके अतिरिक्त, पदोन्नति दव्ारा की जाने वाली ऐसी सभी नियुक्तियों के मामले, जिनके संबंध में मंत्रिमंडल की नियुक्ति-समिति का अनुमोदन लिया जाना अपेक्षित होता है, पर भी इस विभाग दव्ारा कार्रवाई की जाती है।

प्रशिक्षण नीति तथा कार्यक्रम (Training Policy and Programme)

यह विभाग सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने हेतु नोड्‌ल विभाग है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) का प्रशिक्षण विंग प्रशिक्षण के क्षेत्रों की पहचान कर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार कर, प्रशिक्षकों तथा प्रशिक्षण क्षमताओं तथा प्रशिक्षण में प्रशासनिक नीतियों का विकास कर प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित नीतियाप बनाता तथा उन नीतियों को कार्यान्वित करता है। वर्ष के दौरान कार्यान्वित की गई मुख्य प्रशिक्षण गतिविधियाप इस प्रकार हैं-

  • भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का सेवाकालीन प्रशिक्षण।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा का मध्य करियर प्रशिक्षण।
  • विदेशी प्रशिक्षण का घरेलू वित्त पोषण।
  • लोक नीति में स्नातकोत्तर कार्यक्रम।
  • प्रशिक्षण सहायता।
  • गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता में बढ़ोत्तरी।
  • गरीबी उन्मूलन के लिए क्षमता निर्माण।
  • दूरस्थ तथा ई-लर्निंग पहल।
  • ई-शासन पहल।

प्रशिक्षण संस्थान (Training Institutes)

इस विभाग के सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में दो प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी उत्तराखंड एवं सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान (आईएसटीएम) नई दिल्ली है। ये संस्थान केन्द्र सरकार के सभी अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर मानव संसाधन विकास की अपेक्षाओं को पूरा करते हैं ताकि उनके कॅरियर में प्रगति हो सके। यह विभाग भारतीय लोक प्रशासन संस्थान को प्रशासकों तथा अनुसंधानकर्ताओं को लोक प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी सहायता प्रदान करता है जो कि स्वायत्त संगठन है।

प्रशासनिक सतर्कता (Administrative Vigilance)

यह विभाग सरकार की सतर्कता तथा नीति बनाने तथा कार्यान्वित करने के लिए एक नोड्‌ल अभिकरण के रूप में कार्य करता है। विभाग का प्रशासनिक सतर्कता विंग अनुशासन बनाए रखने तथा लोक सेवाओं से भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की नीति को तैयार करता है केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) सभी तरह के सतर्कता मामलों में केन्द्र सरकार को सलाह देता है। इस आयोग के अधिकार क्षेत्र में वे सभी संगठन आते हैं, जिन पर भारत सरकार की कार्यकारी शक्तियाप लागू होती हैं।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation)

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की स्थापना भारत सरकार के दिनांक 01 अप्रैल, 1963 के संकल्प दव्ारा न केवल रिश्वत तथा भ्रष्टाचार के मामलों की बल्कि केन्द्रीय वित्तीय कानूनों के उल्लंघन, भारत सरकार के विभागों से जुड़े मुख्य घोटालों, लोक संयुक्त स्टॉक कंपनियों, पासपोर्ट घोटालों तथा संगठित गैंगों, व्यवसायिक अपराधियों दव्ारा किए गए गंभीर अपराधों की भी जापच करने हेतु किया गया था। भारत सरकार के आर्थिक अपराध विंग को शामिल कर 02 फरवरी 1964 के संकल्प दव्ारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को और सुदृढ़ किया गया।

संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (Joint Advisory Mechanism)

केन्द्र सरकार और इसके कर्मचारियों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने, आम हितों के मामले में केन्द्र सरकार तथा कर्मचारियों के बीच अधिकाधिक सहयोग प्राप्त करने के लिए तीन स्तरों पर संयुक्त परामर्श के प्रयोजन से केन्द्र सरकार ने एक तंत्र का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ लोक सेवाओं की दक्षता को बढ़ाना है। इस त्रिस्तरीय तंत्र में निम्नलिखित शामिल हैं-

  • राष्ट्रीय परिषद्-कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के अधीन शीर्ष स्तर पर कार्यरत्‌।
  • विभागीय परिषदें-मंत्रालयों/विभागों के अधीन कार्यालयों/संगठनों में कार्यरत्‌।
  • कार्यालय परिषदें-विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के अधीन कार्यालयों/संगठनों में कार्यरत्‌।

केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (Central Administrative Tribunal)

सरकार के निर्णयों से व्यथित कर्मचारियों को शीघ्र और सस्ता न्याय मुहैया करवाने के प्रयोजन से सरकार ने 1985 में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) स्थापित किया था जो अब सेवा से संबंधित सभी मामलों पर विचार करता है। केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की 17 खंडपीठें हैं जिनमें से 15 उच्च न्यायालयों की प्रधान सीटों से संचालित होती हैं और शेष दो जयपुर तथा लखनऊ में हैं।

कर्मचारी कल्याण (Employee Welfare)

यह विभाग देश के सबसे बड़े एकमात्र नियोक्तता होने के नाते केन्द्र सरकार कर्मचारियों के कल्याण के अपने दायित्व का विभिन्न कल्याणकारी उपायों के दव्ारा पूरा करता है। यह विभाग विभिन्न कर्मचारी कल्याण उपायों को भी सहायता प्रदान करता है कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण हेतु स्थापित चार पंजीकृत समितियों के संबंध में नोड्‌ल अभिकरण (एजेंसी) हैं इसके अतिरिक्त यह विभाग विभागीय कैंटीन के लिए नीतियाप भी निर्धारित करता है तथा आवासीय कल्याण संघों को सहायता प्रदान करता है।

सूचना का अधिकार (Right of Information)

इस विभाग ने भारत के नागरिकों को शासन के सभी मामलों में केन्द्र सरकार से लेकर स्थानीय स्वशासन तक सूचना का अधिकार सुनिश्चित करने की दृष्टि से एक व्यापक कानून तैयार किया है। इस कानून (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) में एक तंत्र का प्रावधान है जिसमें केन्द्रीय सूचना आयुक्त केन्द्र में शीर्षस्थ निकाय होने के नाते अपने नागरिको को समयबद्ध आसान और वहनीय दर पर सूचनाएप सुलभ कराता है।

हिन्दी का प्रगामी प्रयोग (Progressive Use of Hindi)

यह विभाग राजभाषा के रूप में सरकारी कामकाज मे हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देने तथा राजभाषा अधिनियम, 1963 के उपबंधों तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुपालन को प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग यह भी सुनिश्चित करता है कि संघ की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन का समुचित रूप से पालन किए जाने हेतु राजभाषा विभाग दव्ारा जारी विभिन्न आदेशों तथा मार्ग-निर्देशों की भावनाओं का अनुपालन लागू किया जाए। विभाग में एक राजभाषा प्रभाग है, जो विभाग में इस नीति की मॉनीटरिंग तथा कार्यान्वयन करता है।

Developed by: