Public Administration 1: Ministry of Rural Development: Introduction

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ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development)

परिचय (Introduction)

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश विकास एवं कल्याण संबंधी कार्यकलापों का नोड्‌ल मंत्रालय होने के नाते ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के समग्र विकास की रणनीति में प्रमुख भूमिका निभाता है। मंत्रालय का विजन तथा मिशन टिकाऊ है। ग्रामीण क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने और ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आजीविका अवसरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ बहुआयामी रणनीति के दव्ारा गरीबी उन्मूलन कर, सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराकर, विकासात्मक विसंगतियों को सुलझाकर तथा समाज के अति दुर्बल वर्गों तक ग्रामीण क्षेत्र विकास को प्राथमिकता देकर ग्रामीण भारत का विकास सुनिश्चित किया गया।

विभाग (Department)

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत दो विभाग हैं-

  • ग्रामीण विकास विभाग
  • भूमि संसाधन विभाग।

मुख्यतौर पर मंत्रालय के उद्देश्य इस प्रकार है:

  • महिलाओं तथा अन्य अति दुर्बल वर्गों के साथ-साथ जरूरतमंदो को आजीविका के लिए रोजगार अवसर तथा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों (बीपीएल) को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करना।
  • प्रत्येक परिवार को प्रत्येक वित्त वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटीयुक्त रोजगार प्रदान कर ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को संवर्धित आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • सड़क मार्गों से नहीं जुड़ी ग्रामीण बसावटों के लिए बारहमासी ग्रामीण सड़क संपर्क का प्रावधान और मौजूदा सड़कों का उन्नयन करके बाजार तक पहुँच उपलब्ध कराना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल परिवारों को मूल आवास और वासभूमि की उपलब्धता कराना।
  • वृद्धजनों, विधवाओं तथा विकलांग व्यक्तियों को सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना।
  • जीवन स्तर के सुधार हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
  • ग्रामीण विकास कार्यकताओं का क्षमता निर्माण करना तथा उन्हें प्रशिक्षण देना।
  • ग्रामीण विकास के लिए स्वैच्छिक एजेंसियों तथा वैयक्तिक भागीदारी का प्रोन्नयन करना है।
  • भूमि की खोई अथवा जर्जर उत्पादकता की पुनप्राप्ति करता। इसे वाटरशेड विकास कार्यकमों तथा भूमिहीन ग्रामीण निर्धनों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी भूमि संंधंधी उपायों की पहल के माध्यम से किया जाता है।

ग्रामीण विकास का अभिप्राय एक ओर जहाँ लोगों का बेहतर आर्थिक विकास करना है वहीं दूसरी ओर वृहद सामाजिक कायाकल्प करना भी है। ग्रामीण लोगों को आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाएँ मुहैया कराने के उद्देश्य से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लोगों की उतरोत्तर भागीदारी सुनिश्चित करने, योजना का विकेन्द्रीकरण करने, भूमि सुधार को बेहतर ढंग से लागू करने और ऋण प्राप्ति का दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।

  • प्रारंभ में कृषि उद्योग, संचार, शिक्षा स्वास्थ्य तथा इससे संबंधित क्षेत्रों के विकास पर मुख्य बल दिया गया था लेकिन बाद में यह महसूस किया गया कि त्वरित विकास केवल तभी संभव हो सकता है जब सरकारी प्रयासों में बुनियादी स्तर पर लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भागीदारी है।
  • तद्नुसार 31 मार्च, 1952 को समुदाय परियोजना प्रशासन के स्तर पर एक संगठन की योजना आयोग के अधीन स्थापना की गई जिसका कार्य सामुदायिक विकास से संबंधित कार्यक्रमों का संचालन करना था। सामुदायिक विकास कार्यक्रम का उद्घाटन 2 अक्टूबर, 1952 को किया गया था और यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान था। इस कार्यक्रम में समय के साथ-साथ कई बदलाव हुए और यह विभिन्न मंत्रालयों के अधीन रहा।
  • अक्टूबर, 1974 में खाद्य एवं कृषि मंत्रालय के एक भाग के रूप में ग्रामीण विकास विभाग अस्तित्व में आया। 18 अगस्त, 1979 को ग्रामीण विकास विभाग को ग्रामीण पुनर्निर्माण मंत्रालय नामक नए मंत्रालय का दर्जा दिया गया। 23 जनवरी, 1982 को उस मंत्रालय का नाम ग्रामीण विकास मंत्रालय कर दिया गया था। जनवरी, 1985 में ग्रामीण विकास मंत्रालय को पुन: कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय जिसे बाद में सितंबर, 1985 में कृषि मंत्रालय नाम दिया गया था, के अंतर्गत विभाग में परिवर्तित कर दिया गया। 5 जुलाई, 1991 को विभाग का उन्नयन कर उसे ग्रामीण विकास मंत्रालय बना दिया गया। 2 जुलाई, 1992 को इस मंत्रालय के अंतर्गत एक अन्य विभाग अर्थात बंजर भूमि विकास विभाग का सृजन किया गया। मार्च 1995 में तीन विभागों अर्थात ग्रामीण रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग, ग्रामीण विकास तथा बंजर भूमि विकास विभाग के साथ मंत्रालय का नाम ग्रामीण क्षेत्र व रोज़गार मंत्रालय रखा गया।
  • पुन: वर्ष 1999 में ग्रामीण क्षेत्र एवं रोज़गार मंत्रालय का नाम बदलकर ग्रामीण विकास मंत्रालय कर दिया गया। 13 जुलाई, 2011 से पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय बनाया गया है।

योजनाएँ (Schemes)

ग्रामीण विकास मंत्रालय दव्ारा ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न प्रमुख कार्यक्रमों को चलाया जा रहा है।

  • रोज़गार देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए)
  • स्वरोज़गार एवं कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)
  • बीपीएल परिवारों को आवास उपलब्ध कराने हेतु इंदिरा आवासा योजना (आईएवाई)
  • गुणवत्ता वाली सड़कों के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)
  • समाजिक पेंशन के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी)
  • भूमि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए समेकित वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी)

इसके अलावा ग्रामीण कार्यकर्ताओं की क्षमता का विकास, सूचना, शिक्षा, संचार की निगरानी और मूल्यांकन करना मंत्रालय के कार्यक्रम हैं।

ग्रामीण विकास (Department of Rural Development)

ग्रामीण विकास विभाग गरीबी उपशमन, रोजगार सृजन, ग्रामीण अवसरंचना, निवासियों के विकास, न्यूनतम बुनियादी सेवाओं के प्रावधान आदि के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक कार्यक्रमों का कार्यान्वयन कर रहा है। विभाग दव्ारा वर्तमान में कार्यान्वित किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यक्रम है-

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई)
  • स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई)
  • ग्रामीण विकास (इंदिरा आवास योजना)
  • डीआरडीए प्रशासन
  • प्रशिक्षण रोजगार
  • कपार्ट के जरिए ग्रामीण प्रौद्योगिकी के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए स्वैच्छिक योजनाओं तथा सामाजिक कार्य कार्यक्रम लाभार्थियों के संगठन का संवर्धन करना।
  • निगरानी प्रणाली।

इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ग्रामीण सड़क गांव में गरीबी उपशमन के लिए आर्थिक विकास और उपायों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसवाई नामक एक 100 प्रतिशत केन्द्रीय प्रायोजित योजना शुरू की है। कार्यक्रम का उद्देश्य दसवीं योजना अवधि की समाप्ति तक अच्छी बारहमासी सड़कों के जरिए 500 से अधिक की आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-थलग पड़ी सभी बसावटों को संपर्क सुविधा उपलब्ध कराना है। पहाड़ी क्षेत्रों (पूर्वोत्तर, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तराखंड) तथा मरुभूमि क्षेत्रें के संबंध में 250 से अधिक व्यक्तियों वाली बसावटों को संपर्क प्रदान करना है।

  • स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (एसजीएसवाई) ग्रामीण गरीबों के लिए एकमात्र स्वरोजगार कार्यक्रम है। 1.4. 1999 से अस्तित्व में आई इस योजना में ग्रामीण गरीबों को स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना तथा बैंक ऋण और विपणन सहायता आदि के जरिए उनका क्षमता निर्माण करना, प्रशिक्षण, कार्यकलाप समूहों की योजना, आधारभूत ढांचो का विकास, वित्तीय सहायता जैसे स्वरोजगार के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए सामूहिक कार्यक्रम के रूप में परिकल्पना की गई है।
  • आवास मनुष्य की एक बुनियादी आवश्यकता है। इसलिए आवासों के निर्माण को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम, जो 1980 में प्रारंभ हुआ था, के अंतर्गत मुख्य कार्यकलापों में से एक के रूप में शुरू किया गया था। इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) आरएलईजीपी की एक उपयोजना के रूप में 1985 - 1986 के दौरान शुरू की गयी थी और तत्पश्चात्‌ यह जवाहर रोजगार योजना की एक उपयोजना बनी। 1 जनवरी, 1986 से आईएवाई को जेआरवाई से पृथक करके एक स्वतंत्र योजना बना दिया गया था। भारत सरकार ने 1988 में एक राष्ट्रीय आवास और पुनर्वास नीति की घोषणा की थी जिसका उद्देश्य “सभी के लिए आवास” उपलब्ध कराना था तथा 20 लाख अतिरिक्त आवास इकाइयों (ग्रामीण क्षेत्रों में 13 लाख तथा शहरी क्षेत्रों में 7 लाख) का निर्माण करना था जिसमें गरीबों और उपेक्षितों को स्थायी लाभ दिलाना था। इसका उद्देश्य आवास की कमी को दूर करना तथा 11वीं योजना अवधि के अंत तक सभी कच्चे मकानों को पक्के घरों में बदलना था। इस कार्य योजना को इंदिरा आवास एवं पर्यावास मिशन जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए कार्यान्वित किया जाता है।
  • प्रशिक्षण ने विभिन्न गरीबी उपशमन कार्यक्रमों से संबंधित ग्रामीण विकास कार्यकलापों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया है। चूंकि प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास एक दूसरे के साथ गहराई से जुड़े हैं, अत: नीति निर्माताओं और कार्यक्रम कार्यान्वयन करने वालों, दोनों के लिए यह शिक्षा प्रद बन गया है। यह सुविधा दिलाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी) प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएँ, संगोष्ठियाँ और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इसके अलावा ग्रामीण विकास से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए अनेक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थानों को व्यापक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
  • डीआरडीए को सुदृढ़ बाने और उन्हें अधिक व्यावसायिक और प्रभावी बनाने के लिए शंकर समिति नामक एक अंतर मंत्रालय समिति की सिफारिशों के आधार पर 1 अप्रैल 1999 से डीआरडीए प्रशासन को लागू किया गया है। यह योजना प्रशासनिक लागत को कार्यक्रम निधियों का प्रतिशत आबंटन करने की पूर्व पद्धति के स्थान पर लागू की गई है। इसके अंतर्गत डीआरडीए, जिनसे योजनाओं को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और कार्यान्वित करने की अपेक्षा की जाती है, के प्रशासनिक व्यय को पूरा करने के लिए एक पृथक प्रावधान किया गया है।
  • सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) जागरूकता सृजन करने, लोगों को एकजुट करने तथा परामर्श तथा लोगों को ज्ञान, कौशल और तकनीक प्रदान करके विकास में भागीदारी करने में मंत्रालय अहम भूमिका निभाता है। मंत्रालय के विभिन्न कार्यक्रमों की सामूहिक संचार आवश्यकता को पूरा करने के लिए संचार के उपलब्ध मॉडलों का अधिकतम उपयोग करने की परिकल्पना से एक एकीकृत आईईसी कार्यनीति लागू की गई है ताकि मंत्रालय के कार्यक्रमों की संचार आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।
  • विकास कार्यकलापों की निगरानी और मूल्यांकन (एमएंडई) विभिन्न पणधारकों को इन कार्यकलापों के लिए पिछले अनुभव से सीखने, सेवा सुपुर्दगी योजना और आबंटन संसाधनों में सुधार करने तथा मुख्य पणधारकों की जवाबदेही के भाग के रूप में परिणामों को प्रदर्शित करने के लिए मंत्रालय बेहतर उपाय के रूप में कार्य करता है। पिछले वर्षों के दौरान मंत्रालय के कार्यक्रमों में निगरानी और मूल्यांकन नीति तथा पर्यावरण को लागू करने की एक व्यापक बहुस्तरीय, बहु-साधन प्रणाली विकसित की गई है। मंत्रालय के कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के व्यापक कार्यक्षेत्र को देखते हुए कार्यक्रम की निगरानी को विभिन्न स्तरों पर संचालित किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सभी कार्यक्रमों की समग्र निगरानी मंत्रालय के निगरानी प्रभागों दव्ारा की जाती है। कार्यक्रम प्रभाग उनके दव्ारा कार्यान्वित संबंधित कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं। मंत्रालय के कार्यक्रमों को मूल रूप से राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों दव्ारा कार्यान्वित किया जाता है। राज्यस्तर पर कार्यक्रम से संबंधित सचिव/आयुक्त इसकी निगरानी करते हैं। कार्यक्रम का वास्तविक कार्यान्वयन डीआरडीए, पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) तथा अन्य कार्यान्वयन एजेंसियों के जरिए जिला/गांव स्तर पर किया जाता है। जो बुनियादी स्तर पर कार्यक्रम के निष्पादन की निगरानी करती है।
  • चूंँकि कार्यक्रम का कार्यान्वयन स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं और आकाक्षाओं को प्रदर्शित करता है अत: पंचायती राज संस्थानों को मंत्रालय के कार्यान्वयन हेतु एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। योजना प्रक्रिया और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के विकेन्द्रीकरण के एक उपाय के रूप में पंचायती राज संस्थानों को सुद़ृढ़ करने की परिकल्पना संविधान (73वां) संशोधन अधिनियम, 1992 के जरिए की गई है, और इस अधिनियम के पारित होने से पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) को संवैधानिक दर्जा उपलब्ध कराया गया है। इसलिए अधिकांश ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत पीआरआई को कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है। स्थानीय शासन को सुदृढ़ करने लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पीआरआई के जरिए महिलाओं को अधिकार देने के लिए सतत्‌ प्रयास किया जा रहे हैं। राज्य सरकारों को पीआरआई को पर्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के प्रत्यायोजन के लिए कहा जा रहा है तथा इस संबंध में पर्याप्त परिवर्तन देखने में आया है। इस विभाग के अंतर्गत तीन स्वायत्तर निकाय हैं। लोक-कार्यक्रम और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद (कपार्ट) , राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआरडीआई) और राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (एनआरआरडीए) ।
  • लोक कार्यक्रम और ग्रामीण प्रौद्योगिकी विकास परिषद (कपार्ट) की स्थापना ग्रामीण विकास में स्वैच्छिक एजेंसियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए गठित करने और उन्हें उनकी ग्रामीण विकास परियोजनाओं में भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई गई है। कपार्ट स्वैच्छिक एजेंसियों और उनकी परियोजनाओं से सीधे संपर्क में रहता है।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (एनआईआरडी) राष्ट्र स्तरीय प्रशिक्षण की आयोजना और समन्वय करता है। राज्य और जिला स्तरीय प्रशिक्षण के लिए क्रमश: राज्य ग्रामीण विकास संस्थानों (एसआईआरडी) और विस्तार प्रशिक्षण कंट्रोल (ईटीसी) की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी (एनआरआरडीए) को हाल में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को तकनीकी विशिष्टियाँ, परियोजना मूल्यांकन, अंशकालिक गुणवत्ता नियंत्रण निगरानीकर्ताओं की नियुक्ति, निगरानी प्रणाली के प्रबंधन पर सलाह देता है तथा मंत्रालय को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।
  • ग्रामीण विकास प्रभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय दव्ारा कार्यान्वित किए जाने वाले निम्नलिखित कार्यक्रमों का काम संभालता है।

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