Public Administration: Multi-Sectoral Development Programme for Minorities

Doorsteptutor material for IAS is prepared by world's top subject experts: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

अल्पसंख्यक के लिए बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम (Multi-Sectoral Development Programme for Minorities)

परिचय (Introduction)

  • वर्ष 1987 में 1971 में हुई जनगणना के आँकड़ों पर आधारित 20 प्रतिशत या उससे अधिक जनसंख्या की एक मात्र कसौटी के आधार पर देश में 41 अल्संख्यक बहुत जिलों की पहचान की गई।
  • बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम की संकल्पना सच्चर समिति की अनुशंसाओं के उपरांत विशेष पहल के रूप में की गई। यह ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के प्रारंभ में सरकार दव्ारा अनुमोदित एवं 2008 - 09 में देश के 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में चलाई जाने वाली केन्द्र सरकार दव्ारा प्रायोजित योजना है। यह अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक आधारभूत संरचना एवं मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कर उन क्षेत्रों में विकास की कमी को पूर्ण करने की दिशा में एक क्षेत्र विशिष्ट विकासीय पहल है।

बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य (Objective of Multi-Sectoral Development Programme (MsDP) )

  • यह कार्यक्रम आय उत्पन्न करने वाले अवसरों की योजनाओं के अतिरिक्त शिक्षा हेतु बेहतर आधारभूत संरचना, कौशल विकास, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पक्के मकान, सड़क, पेयजल आदि के प्रावधानों से संबद्ध है।
  • आमजनों के जीवन स्तर में सुधार हेतु एवं समावेशी वृद्धि व त्वरित विकास प्रक्रिया के लिए यह पहल केन्द्र एवं राज्य/केन्द्रशासित प्रदेशों का एक संयुक्त प्रयास होगा।

बहुक्षेत्रक विकास योजना (Multi-Sect Oral Development Plan (MsD Plan) )

  • राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रशासन संबंधित विभाग को बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन की सुस्पष्ट जिम्मेदारी के संबंध में सूचित करेगा। राज्य सरकार/केन्द शासित प्रशासन दव्ारा बहुक्षेत्रक विकास योजना एवं प्रधानमंत्री के नवीन 15 सूत्रीय कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी किसी एक ही विभाग को सौंपना उपयुक्त होगा।
  • बहुक्षेत्रक विकास योजना की तैयारी के दौरान राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अल्पसंख्यकों के कौशल प्रशिक्षण सहित कौशल विकास के कार्यो को प्राथमिकता देगा। राज्य को मिले आवेदन में से कम से कम 10 प्रतिशत अल्पसंख्यक युवाआंे के कौशल प्रशिक्षण से संबंधित गतिविधियों के लिए सुनिश्चित होना चाहिए।
  • बहुक्षेत्रक विकास योजना प्रक्रिया को जमीनी स्तर तक पहुँचाने एवं इन कार्यक्रमों में पंचायती राज संस्थानो की सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए इन कार्यक्रमों के अंतर्गत आने वाले सभी प्रखंडों में एक प्रखंड स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। प्रखंड स्तर की समितियाँ ग्राम स्तर पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर आवश्यक विभिन्न परियोजनाओं को सम्मिलित करते हुए योजना बनाएँगी। तत्पश्चात्‌ यह समिति इन योजनाओं को प्रधानमंत्री के नवीन 15 सूत्रीय कार्यक्रम के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुशंसित करेगीं।
  • इस योजना के अंतर्गत परियोजनाएँ परस्पर प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न लक्षित क्षेत्रों जैसे प्राथमिक/माध्यमिक शिक्षा पेयजल आपूर्ति विद्युत, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवास एवं आय उत्पन्न करने वाली गतिविधियों से संबंधित होनी चाहिए। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का रणनीतिक विकास भी इसी प्रकार से किया जाएगा। इसके अंतर्गत बच्चों को विद्यालय भेजने, महिलाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने जैसे कार्यों के लिए सामाजिक लाभबंदी एवं जागरूकता अभियान चलाने संबंधी परियोजनाएँ भी सम्मिलित हो सकती हैं, जो अल्पसंख्यक बहुत क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक स्तर को उन्नत करेंगी।
  • योजना के सूत्रपात, क्रियान्वयन एवं पर्यवेक्षण सहित प्रत्येक स्तर पर आमजनों की सहभागिता हेतु पंचायती राज संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों एवं स्वयं सहायता समूहों का सम्मिलित होना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • 15 सूत्री कार्यक्रमों के लिए जिला स्तरीय समिति योजनाओं की जाँच करेगी एवं राज्य स्तर की समिति को अनुशंसित करेगी।
  • अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री के नवीन 15 सूत्री कार्यक्रम के निष्पादन हेतु मुख्य सचिव के नेतृत्व में बनी राज्य स्तरीय समिति ही बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम के निष्पादन के लिए राज्य स्तरीय समिति का कार्य संबंधित राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश के लिए करेगी।
  • बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम के प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम के पर्यवेक्षण के लिए प्रखंड स्तरीय समिति जिम्मेदार होगी। यह समिति कम से कम प्रति तीन महीने में एक बार अवश्य सभा करेगी एवं जिला स्तरीय समिति को प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम के लिए रिपोर्ट करेगी।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय सुविख्यात बाह्य एजेंसी या योग्य पर्यवेक्षक दव्ारा एक स्वतंत्र पर्यवेक्षण तंत्र स्थापित करेगा।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दव्ारा समुदाय के लोगों को कार्यक्रम के पर्यवेक्षण एवं समीक्षा में सम्मिलित करने के लिए एक समुचित सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) प्रणाली अपनाई जाएगी। राज्य व केन्द्र शासित प्रदेश, जिला एवं प्रखंड स्तरीय प्रशासन सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) प्रणाली के सफल निष्पादन में पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे।

बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रमों के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना की अनुशंसाएँ (12th Five Year Plan Recommendations for Multi-Sector Development Programme)

  • प्रखंड नियोजन की सूत्रपाती इकाई के रूप में: बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम के निष्पादन के लिए वर्तमान में जिले के स्थान पर प्रखंड योजना की शुरूआती इकाई होगा। इससे अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में कार्यक्रम की तीव्रता को बल मिलेगा, क्योंकि जिला इस कार्य के लिए एक बहुत बड़ी इकाई बन जाता है। इसके अतिरिक्त इसे योग्य अल्पसंख्यक बहुल प्रखंडों को भी साथ लेने में सहायता मिलेगी जो कि वर्तमान में अवस्थित अल्पसंख्यक बहुल जिलों के दायरे से बाहर हैं।
  • 11वीं पंचवर्षीय योजना में पिछड़े अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित जिलों को चिन्हित करने के लिए अपनाये गए पिछड़ेपन के पैमाने के आधार पर कम से कम 25 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय की जनसंख्या वाले प्रखंडों को अल्पसंख्यक बहुल प्रखंड के रूप में चिन्हित किया गया। लक्षदव्ीप, पंजाब, नागलैंड मेघालय, मिजोरम एवं जम्मू कश्मीर इन छ: राज्यों के मामले में जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय-बहुसंख्यक हैं, में इनके अतिरिक्त अन्य अल्पसंख्यक जनसंख्या (समुदाय नहीं) के 15 प्रतिशत को पारगमन रेखा (कट-ऑफ) के न्यूनतम स्तर के रूप में अपनाया गया।

“नई-रोशनी” -अल्पसंख्यक महिलाओं में नेतृत्व विकास की योजना (Nai Roshni-The Scheme of Leadership Development of Minority Women)

परिचय (Introduction)

  • भारत में मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति पर उच्च स्तरीय समिति की एक रिपोर्ट जिसे लोकप्रिय रूप से सच्चर समिति की रिपोर्ट के रूप में जाना जाता है, ने यह रेखांकित किया कि भारत का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय-मुस्लिम विकास लक्ष्यों में पीछे रह गया है एवं इस समुदाय में मुस्लिम महिलाएँ दोहरे रूप में वंचित हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 2011 - 2012 में इस योजना का सूत्रपात किया एवं “अल्पसंख्यक महिला नेतृत्व विकास योजना” के रूप में इसका पुन: नामांकन कर वर्ष 2012 - 13 से इसका निष्पादन प्रारंभ किया।
  • प्रथम वर्ष के निष्पादन के अनुभवों के आधार पर यह अनुभव किया गया कि लक्षित समूहों तक इसकी पहुँच एवं जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिवर्तन आवश्यक हैं। इसलिए 6 मार्च, 2013 को निवर्तमान वित्त समिति के दव्ारा इसका मूल्यांकन किया गया। उसकी अनुशंसाओं के अनुसार योजना को 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जारी रखने के लिए निम्नानुसार संशोधित किया गया है:

लक्षित समूह एवं लक्ष्यों का वितरण (Target Group and Distribution of Targets)

  • लक्षित समूह में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 के अनुच्छेद 2 (स) के अंतर्गत अधिसूचित अल्पसंख्यकों यथा मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, बौद्ध एवं पारसी समुदाय की महिलाएँ सम्मिलित हैं। यद्यपि समाज में उपस्थित विविधताओं को और मजबूती प्रदान करने एवं महिलाओं को अपने प्रयासों दव्ारा अपना भाग्य बदलकर सामाजिक सुदृढ़ता एवं एकता प्रदान करने के लिए, यह योजना प्रस्तावों में गैर-अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को भी सम्मिलित करने की अनुमति देती है, जिनकी भागीदारी 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। संगठन दव्ारा यह प्रयास किया जाना चाहिए कि समूह के इस 25 प्रतिशत के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, विकलांग, महिलाएँ एवं अन्य समुदाय की महिलाओं के समुचित मिश्रण का प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
  • प्रयास यह होगा कि पंचायती राज संस्थान के अंतर्गत चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षुओं के रूप में सम्मिलित होने के लिए राजी किया जाए।

नई रोशनी योजना के उद्देश्य (Objectives of Nai Roshni Scheme)

  • अल्पसंख्यक महिलाओं एवं उसी ग्राम या क्षेत्र में उनके पड़ोस में रहने वाली अन्य समुदाय की महिलाओं की सभी स्तर पर सरकारी प्रणालियों, बैंकों एवं अन्य संस्थानों के विषय में जानकारी, साधन एवं उनसे पारस्परिक क्रियाओं की तकनीक प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना एवं उनमें आत्मविश्वास स्थापित करना।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दव्ारा संगठनों के माध्यम से महिलाओं के लिए नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण योजनाएँ क्रियान्वित की जाएगी।
  • चुने गए संगठन को स्थानीय ग्राम या क्षेत्र में स्थापित अपने संगठन से परियोजना को सीधे तौर पर क्रियान्वित किया जाना चाहिए।
  • नेतृत्व क्षमता प्रशिक्षण मॉडयूल में महिलाओं के अधिकार एवं उनसे संबंधित मुद्दे, उनके शिक्षण, रोजगार, जीविका इत्यादि से जुड़े मुद्दे आवश्यक रूप से समाहित होने चाहिए, जो उन्हें संविधान के विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत प्राप्त होते हैं तथा केन्द्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्ध अवसर, सुविधा एवं सेवाएँ जो उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, प्रतिरक्षा, परिवार नियोजन, रोग नियंत्रण, उचित मूल्य दुकान, पेयजल आपूर्ति, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता, आवास, स्व-रोजगार, दैनिक रोजगार, कौशल प्रशिक्षण अवसरों तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराध इत्यादि क्षेत्रों में प्राप्त होती हैं।
  • इसमें पंचायती राज एवं नगरपालिका में महिलाओं की भूमिका, महिलाओं के कानूनी अधिकार, सूचना का अधिकर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम (मनेरगा) , गृह सर्वेक्षण एवं गरीबी रेखा से नीचे (बी. पी. एल) की सूची व औपचारिकताएँ, आधार या विशिष्ट पहचान पत्र संख्या, सरकारी एवं अर्द्ध -सरकारी कार्यालयों की संरचना एवं कार्य प्रणाली, शिकायत निवारण फोरम/कार्यप्रणाली इत्यादि की जानकारी भी सम्मिलित हो सकती है।
  • अल्पसंख्यक महिलाओं में नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण के लिए चुने गए संगठन की जिम्मेदारी होती है कि वह एक उल्लेखनीय अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले ग्राम या क्षेत्र से योजना की शर्तों के अनुसार प्रशिक्षण हेतु महिलाओं का चुनाव करें।
  • यद्यपि वार्षिक आय की कोई परिसीमा नहीं होगी, फिर भी चुनाव में महिला या उसके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय सभी स्त्रोतों से 2.50 से अधिक न होने वालों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्हे 18 से 65 वर्ष के आयु वर्ग का होना चाहिए।

Developed by: