Public Administration: National Overseas Scholarship for Scheduled Casts Candidates

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केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and Sate)

अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship for Scheduled Casts Candidates)

  • राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship) चुनिंदा अनुसूचित जातियों, गैर-अधिसूचितों, धूमक्कड़ व अर्ध-धूमक्कड़ जनजातियों, भूमिहीन कृषि मजदूरों एवं परंपरागत कलाकारों के विद्यार्थियों को विदेशों में अभियांत्रिकी, तकनीकी एवं विज्ञान के विशिष्ट क्षेत्रों में स्नातकोतर एवं पी. एच. डी. स्तर की उच्च शिक्षा के लिए प्रदान की जाती है।
  • योजना के अंतर्गत संस्थान दव्ारा ली गई वास्तविक शुल्क राशि, मासिक निर्वाहन भत्ता, वार्षिक आकस्मिक भत्ते, आकस्मिक यात्रा भत्ता प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत माता-पिता/अभिभावकों का केवल एक ही संतान यह लाभ प्राप्त कर सकता है। लाभार्थियों की आयु 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों को नि: शुल्क कोचिंग की योजना (Scheme of Free Coaching for SC and OBC Students)

  • योजना का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड एवं राज्य लोक सेवा आयोगों दव्ारा आयोजित ग्रुप-ए एवं ग्रुप-बी परीक्षाओं, बैंकों, बीमा कंपनियों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU՚s) दव्ारा आयोजित अधिकारी वर्ग परीक्षाओं एवं निजी क्षेत्रों में नियोजन हेतु प्रति पूर्ति पाठयक्रमों/रोजगारोन्मुख पाठयक्रमों जैसे आई. टी. बायो-टेक्नोलॉजी इत्यादि में प्रवेश परीक्षा पूर्व गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाना एवं आवश्यक लोकाचार कौशल (Soft Skill) को विकसित करना भी है।
  • इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों/केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासनों, विश्वविद्यालयों एवं निजी क्षेत्र के संगठनों दव्ारा चलाए जा रहे सुविख्यात कोचिंग संस्थानों/केन्द्रों के माध्यम से किया जाता है।

हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना (Self Employment Scheme for Rehabilitation of Manual Scavengers)

भारत सरकार ने जनवरी 2007 से ‘हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना’ (Self Employment Scheme for Rehabilitation of Manual Scavengers -SRMS) आरंभ की। इस योजना का उद्देश्य हाथ से मैला ढोने वालों एवं उनके आश्रितों के पुनर्वास के लिए निर्धारित समय सीमा में राशि उपलब्ध कराया जाना है। चिन्हित किये गये हाथ से मैला ढोने वालों एवं उनके आश्रितों को 20000 तक की पूंजी एवं रियायती दरों पर ऋण उन्हें स्वरोजगार उद्यम अपनाने के लिए प्रदान की जाती है। लाभार्थियों को कौशल विकास हेतु एक वर्ष की अवधि तक का प्रशिक्षण भी दिया जाता है एवं इस अवधि में 1000 प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है।

  • चिन्हित किये गये सफाई कर्मियों को प्रशिक्षण ऋण एवं रियायत प्रदान की जाएगी। ऋण बैंकों दव्ारा प्रदान की जाएगी एवं उस पर ब्याज योजना में निर्धारित दरों पर लाभार्थियों से ली जाएगी। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (National Safai Karamchari Finance and Development Corporation-NSKFDC) या कोई अन्य शिखर स्तर पर चिन्हित एजेंसी बैंकों को ब्याज रियायत स्टेट चैनेलाइजिंग एजेंसीज (State Channelising Agencies) या राज्य स्तर पर किसी अन्य चिन्हित एजेंसी के माध्यम से बैंकों दव्ारा आरोपित ब्याज एवं लाभार्थियों से लिए जाने वाले ब्याज की अंतर राशि इस योजना के अंतर्गत प्रदान करेगी।
  • इस योजना के अंतर्गत सावधि ऋण (अधिकम 5 लाख तक) एवं सूक्ष्म ऋण (अधिकतम 25000 तक) दोनों ही देय है। सूक्ष्म वित्तीयन स्वयं सहायता समूहों एवं सुविख्यात गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के माध्यम से भी क्रियान्वित होंगे।
  • NSKFDC या योजना के अंतर्गत चिन्हित अन्य कोई एजेंसी, योजना के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों की देख-रेख एवं संबंधित एजेंसियों से समन्वय यह सुनिश्चित करने के लिए करेगी की लाभार्थियों को समुचित लाभ हो।
  • यह प्रस्तावित है कि योजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्तर पर NSKFDC या इस उद्देश्य से चिन्हित किसी अन्य एजेंसी दव्ारा किया जाएगा। राज्य स्तर पर क्रियान्वयन एजेंसी State Channelising Agencies या इस उट्टेश्य के लिए चिन्हित राज्य सरकार की कोई एजेंसी एवं सुविख्यात गैर सरकारी संगठन में से होगी।
  • राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग दिए गए संदर्भ शर्तों के अनुसार हाथ से मैला ढोने वालों के सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास कार्यक्रमों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कर सकती है। योजना का मूल्यांकन एक स्वतंत्र एजेंसी दव्ारा किया जाएगा और योजना के कुल लागत का 1 प्रतिशत (अर्थात 7.35 करोड़ रु.) निगरानी एवं ससमय मूल्यांकन के लिए तय किया गया है।

अनुसूचित जातियों की कन्याओं हेतु शिक्षा विकास कार्यक्रम (Educational Development Programme for Scheduled Castes Girls)

इसका उद्देश्य अत्यंत कम साक्षरता वाले क्षेत्रों में अनुसूचित जातियों की कन्याओं हेतु आवासीय विद्यालयों के माध्यम से शिक्षा की बहुमुखी सेवाएँ प्रदान करना है, जहाँ कन्याओं के शिक्षा के लिए अनुकूल परंपराएँ एवं परिवेश नहीं है। यह योजना संबंधित जिले के जिला परिषद दव्ारा क्रियान्वित होती है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (National Scheduled Castes Finance and Development Corporation)

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC) की स्थापना भारत सरकार दव्ारा फरवरी, 1989 में कंपनी अधिनियम 1958 की धारा 25 के अंतर्गत की गई। NSFDC का वृहद उद्देश्य रियायती ऋण के रूप में सभी अनुसूचित जातियों के परिवारों, जो दोहरी गरीबी रेखा (वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में 40,000 और शहरी क्षेत्रों में 55000 प्रतिवर्ष) के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, के आर्थिक विकास, उत्थान एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहयोग प्रदान करना है।
  • निगम की अधिकृत शेयर पूंजी 1000 करोड़ है। निगम ने 31.03. 2011 तक 7.51 लाख लाभार्थियों के मध्य 21.14 करोड़ का वितरण किया है। NSFDC चैनल वित्त प्रणाली (Cannel Finance System) के माध्यम से कार्य करती है जिसमें निगम के रियायती ऋण संबंधित राज्य सरकारों/केन्द्र शासित प्रदेश के प्रशासनों के दव्ारा नियुक्त State Channelising Agencies के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुँचाती है।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (National Safai Karamchari Fiancé and Development Corporation)

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की स्थापना 24 जनवरी, 1997 को एक ‘अलाभकारी कंपनी’ के रूप में कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के अंतर्गत किया गया था। शिखर -संस्थान की स्थापना का उद्देश्य सफाई कर्मचारियों/हाथ से मैला ढोने एवं उनके आश्रितों के सर्वांगीण सामाजिक, आर्थिक उत्थान एवं लाभर्थियों को रियायती आर्थिक सहायता देकर आय सजृनकारी परियोजना की स्थापना में सहयोग करना है। निगम सफाई कर्मचारी एवं उनके आश्रितों की ऋण State Channelising Agencies के माध्यम से प्रदान करती है।

निगम लक्षित समूहों के विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठयक्रमों में उच्च शिक्षा के लिए शैक्षणिक ऋण भी प्रदान करती है। कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत निगम विभिन्न तकनीकी ट्रेडो में प्रशिक्षण हेतु 100 प्रतिशत अनुदान प्रदान करती है।

  • निगम के लक्षित समूहों में मलिनकर्मी अर्थाज जो पूर्णत या आंशिक रूप से मानव मल के हाथ से निस्तारण कार्यों में संलग्न हैं एवं सफाई कर्मचारी अर्थात जो स्वच्छता (सफाई) कार्यो में संलग्न हैं तथा उनके आश्रित शामिल है।
  • आर्थिक सहयोग प्राप्त करने के लिए कोई उपरि आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। यद्यपि निगम सफाई कर्मियों, सफाई कर्मियों में जो दोहरी गरीबी रेखा से नीचे हैं लक्षित समूह की महिलाओं एवं विकलांग व्यक्तियों के आर्थिक विकास एवं पुनर्वास को प्राथमिकता देती है।

केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

अन्य पिछड़े वर्ग एवं अल्पसंख्यकों हेतु योजनाएँ (Schemes for Other Backward Classes and Minorities)

अन्य पिछड़े वर्ग के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्तियाँ (Pre-Metric Scholarship for OBCs)

मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्तियाँ पिछड़े वर्ग के उन विद्यार्थियों को प्रदान की जाती हैं, जिनके माता-पिता/अभिभावक की आय सभी स्त्रोतों में 44.500 प्रतिवर्ष से अधिक न हो। छात्रावासों में निवास करने वाले छात्र-छात्राओं को यह छात्रवृत्ति कक्षा -III एवं गैर-आवासीय छात्र-छात्राओं की कक्षा -I से लेकर मैटिक-पूर्व स्तर तक प्रदान की जाती है। कक्षा-X के पश्चात्‌ यह छात्रवृत्ति देय नहीं है। एक शैक्षणिक सत्र में छात्रवृत्ति की अवधि 10 माह होती है। यह छात्रवृत्ति संबंधित राज्य सरकार एवं केन्द्र शासित प्रशासन दव्ारा मान्यता प्राप्त संस्थान एवं उनके दव्ारा मान्यता प्राप्त मैटिक-पूर्व पाठयक्रमों के लिए ही देय है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिबद्ध उत्तरदायित्व के अतिरिक्त, 50 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता राज्य सरकार को प्रदान की जाती है एवं केन्द्र शासित प्रदेश के मामले में यह 10 प्रतिशत है।

अन्य पिछड़े वर्गो के लिए मैटिक उपरांत छात्रवृत्तियाँ (Pre-Metric Scholarship for OBCs)

इस योजना का उद्देश्य अन्य पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को मैटिक स्तर की शिक्षा को पूर्ण करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह छात्रवृत्ति केवल भारत में अध्ययन के लिए देय है एवं यह पार्थी छात्र छात्राओं को संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रशासन के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। यह छात्रवृत्ति केवल मान्यता प्राप्त संस्थान में अध्ययन के लिए ही दी जाती है। बेरोजगार छात्र-छात्राओं जिनके माता-पिता/अभिभावक की आय 44500 प्रतिवर्ष से अधिक न हो उन्हें यह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत केन्द्रीय सहायता राज्य सरकार/केन्द शासित प्रशासन को प्रतिबद्ध उत्तरादायित्व के अतिरिक्त दी जाती है।

अन्य पिछड़े वर्गो के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास (Hostels for OBC Boys and Girl)

इस योजना का उद्देश्य सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों जिन्हें केन्द्र राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश की अन्य पिछड़े वर्गो की सूची में अनुसूचित किया गया है, कि छात्रों को शिक्षण के सर्वोत्तम अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत छात्रावासों के निर्माण हेतु राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश को क्रमश: 50 प्रतिशत और 100 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है। ये छात्रावास माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए बनाए जाते हैं। छात्रावास के लिये भूमि अधिग्रहण का व्यय और कर्मचारियों एवं अन्य रख-रखाव कार्यों का व्यय संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रशासन दव्ारा वहन किया जाता है।

अन्य पिछड़े वर्गो के कल्याण के लिए स्वयं सेवी संगठनों को सहायता (Assistance to Voluntary Organisations for Welfare of OBCs)

इस योजना का उद्देश्य स्वयं सेवी संगठनों को सम्मिलित करके उनकी सहायता से अन्य पिछड़े वर्गो के शैक्षणिक, सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए उनका कौशल संवर्धन करना एवं उन्हें स्वयं की आय उत्पादक गतिविधियों को प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित करना या उन्हें लाभकारी रोजगार प्रदान करना है। इस योजना के तहत इलेक्टिशियन, मोटर बाइन्डिंग एवं फिटिंग, फोटोग्राफी, प्रिंटिंग, कम्पोजिंग एवं बुक बाइंडिंग, टाइपिंग एव शॉर्टहैंड तथा वेल्डिंग एवं फिटर प्रशिक्षण इत्यादि कार्यों के लिए स्वीकृत व्यय की 90 प्रतिशत राशि सहायता स्वरूप प्रदान की जाती है।

राष्टीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) [National Backward Classes Finance & Development Corporation (NBCFDC) ]

राष्टीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBDFDC) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार का एक राष्ट्रीय उपक्रम है। इसका निगमन कंपनी अधिनिम 1958 की धारा 25 के अंतर्गत 13 जनवरी, 1992 को एक गैर-लाभकारी, गैर व्यासायी कंपनी के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य अन्य पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए आर्थिक एवं विकासपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा इस वर्ग के गरीब तबकों में कौशल विकास एवं स्वरोजगार उद्यम स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है। निगम संबंधित राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रशासन दव्ारा नामित राज्य प्रसार एजेंसियों (State Channelising Agencies-SCA) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करता है। निगम राज्य प्रसार एजेंसियों या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सूक्ष्म आर्थिक सहयोग भी प्रदान करता है। निगम इस वर्ग के गरीब तबकों के व्यक्तियों में कौशल विकास एवं स्वरोजगार उद्यमों जैसी आय उत्पादक गतिविधियों की एक वृहद श्रृंखला के लिए निम्न क्षेत्रों के अंतर्गत सहायता प्रदान करता है-

  • कृषि एवं संबंधित गतिविधियाँ
  • लघु व्यवसाय
  • कला एवं पारंपरिक व्यवसाय
  • तकनीकी एवं व्यवसायिक ट्रेड/पाठ्‌यक्रम
  • परिवहन एवं सेवा क्षेत्र इत्यादि।

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