Public Administration 3: National Secondary Education Campaign

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स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय (Issues Relating to Development and Management of Social Sector/Services Relating to Health, Education, Human Resources)

शिक्षा (Education)

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (National Secondary Education Campaign)

  • 2 मार्च, 2009 को प्रारंभ किया गया ‘राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान’ भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण फ्लैगशिप कार्यक्रम है। इस अभियान का मूल उद्देश्य माध्यमिक शिक्षा का क्रमिक ढंग से सार्वभौमीकरण करना तथा माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार करना है। 12.9 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस अभियान के अंतर्गत 6000 सरकारी माध्यमिक विद्यालयों का विस्तार, पुनर्निर्माण और प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालय के रूप में उत्क्रमित किया जाना है, तथा विशेषकर पिछड़े क्षेत्रों मं 11000 नये माध्यमिक व वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल खोले जाने हैं। चूँकि माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर नामाकंन दर 50 प्रतिशत के आसपास ही है और इस स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता को भी सुनिश्चित नहीं किया जा सका है अत: राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परियोजना को शुरू करने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • वस्तुत: वर्तमान समय में यह एक सच्चाई है कि मुख्यत: सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार व कौशल, गहन विनिर्माण गतिविधियाँ जैसे सेवाओं में आर्थिक व रोजगार विकास हो रहा है जिसके लिए माध्यमिक शिक्षा की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक डिग्री है। इसलिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परियोजना को महत्वपूर्ण फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य निम्नवत्‌ हैं-
    • माध्यमिक शिक्षा के स्तर को सुधारना तथा नियमानुसार वर्ष 2017 तक सभी युवाओं को माध्यमिक विद्यालय स्तर की शिक्षा सुगम बनाना।
    • यह सुनिश्चित करना कि कोई भी बालक लैगिंक, सामाजिक-आर्थिक असमर्थता या अन्य किसी कारको की वजह से गुणवत्तापूर्ण माध्यमिक शिक्षा से वंचित न रहे।
    • यह सुनिश्चित करना कि सभी माध्यमिक विद्यालयों में भौतिक सुविधाएँ एवं कर्मचारी हों तथा स्थानीय शासन या निकायों एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कम से कम सुझाए गये मानकों के अनुसार एवं अन्य विद्यालय के मामले में उचित नियामक तंत्र के अनुसार कार्य हो।
  • हाल ही में विश्व बैंक ने भारत में माध्यमिक स्तर पर युवाओं की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए माध्यमिक शिक्षा परियोजना के लिए 500 मिलियन डॉलर (लगभ्ग 2540 करोड़ रुपये) का साख उपलब्ध कराने का निर्णय किया है। माध्यमिक शिक्षा परियोजना में उन सभी तत्वों का समावेश होगा, जो राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में हैं। विश्व बैंक के अनुसार भारत सरकार राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के स्तर को सुधारेगी।
  • उल्लेखनीय है कि माध्यमिक शिक्षा परियोजना के लिए वित्तीयन (Funding) विश्व बैंक की शाखा ‘इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन’ करेगी। यह 25 वर्ष की परिपक्वता अवधि के लिए ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध कराने वाली प्रमुख संस्था है।

12 वीं पंचवर्षीय योजना दृष्टिकोण प्रपत्र में माध्यमिक शिक्षा के विस्तार की रणनीति (Strategy for Expansion of Secondary Education in 12th Five-Year Plan Approach Form)

  • मौजूदा माध्यमिक स्कूल स्तर (कक्षा 9 - 10) में सकल नामांकन अनुपात (GER) लगभग 60 प्रतिशत है जो कि बहुत कम है। 12वीं योजना के दृष्टिकोण प्रपत्र में कहा गया है कि अब जब सार्वजनिक बुनियादी शिक्षा वास्तविकता का रूप ले रही है, तो माध्यमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण का अलग कदम तर्कसंगत प्रतीत होता है। इस प्रत्याशा में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की योजना तथा मॉडल स्कूल की योजना 11वीं योजनावधि में माध्यमिक शिक्षा में पंजीकरण को बढ़ाने तथा गुणवत्ता लाने के लिए शुरू की गयी थी।
  • माध्यमिक शिक्षा में केन्द्र दव्ारा पोषित केन्द्रीय विद्यालय (के. वी.) और नवोदय विद्यालय (एनपी) अग्रणी सार्वजनिक शिक्षा संस्थानाेें के रूप में उभर कर सामने आये हैं और उसमें ठोस विस्तारण की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त मौजूदा 1060 केन्द्रीय विद्यालय एवं 576 नवोदय विद्यालय अंतर स्कूल गतिविधियों के लिए सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अन्य स्कूलों में सुधार को अभिप्रेरित किया जा सकें यह विशेष रूप से विज्ञान एवं गणित की शिक्षा के विकास के लिए तथा संयुक्त स्कूली सेमिनारों के आयोजन और शैक्षिक प्रदर्शनियों एवं अंग्रेजी में ब्रिज पाठयक्रम चलाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार राज्य सरकारों और निजी स्कूलों के अंतर्गत प्रदत्त बेहतरीन सुविधाओं और श्रेष्ठ संचालन के लिए यह केन्द्र बिन्दु बन गये हैं ताकि वहाँ अंतर-स्कूली गतिविधियों को प्रेरित किया जा सके। 12वीं योजना के दृष्टिकोण प्रपत्र का कहना है कि व्यावसायिक पाठयक्रम से पूर्व कक्षा 9 और 10 में तृतीय भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था या विकल्प किया जाना चाहिए।
  • 12वीं योजना का मानना है कि जबकि केन्द्र व राज्य सरकारों दव्ारा इस क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना आवश्यक होगा, यह भी आवश्यक है कि निजी क्षेत्र क्षमताओं का पूरी तरह से सदुपयोग किया जाए और विशेष रूप से माध्यमिक स्कूलों को भी इसमें शामिल किया जाए जो कि निजी प्रबंधन के अधीन हैं। इस क्षेत्र में पीपीपी मॉडल को भी अपनाने की आवश्यकता है।

विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में प्रवेश की वर्तमान स्थिति (Current Status of Admission of Foreign Universities in India)

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में आने का रास्ता खोलते हए एक रेग्यूलेशन हाल ही में पारित किया है। इससे विश्व रैंकिंग में आने वाली 500 संस्थाओं को भारतीय विश्वविद्यालयों अथवा शिक्षण संस्थाओं के साथ साझेदारी में देश में अपना कैंपस खोलने की अनुमति मिली है। उल्लेखनीय है कि विदेशी शिक्षा संस्थान विधेयक, 2010 संसद में अभी लंबित है, जिसके तहत भारत सरकार यूजीसी कानून-1956 के अनु. 3 के तहत डीम्ड यूनिवर्सिटी या राज्यों के निजी विश्वविद्यालयों कानून के तहत विदेशी विश्वविद्यालय भारत में खोलने की अनुमति देना चाहती है, जिससे भारत में संचालित संस्थानों को मौजूदा कानून के तहत लाया जा सके।
  • भारतीय विश्वविद्यालय संघ के आँकड़ों के अनुसार भारत में विदेशी शिक्षा संस्थानों में 144 (वर्ष 2000) से 631 (वर्ष 2010) की वृद्धि हुई है और 60 विदेशी शिक्षा प्रदाता, जो स्थानीय संस्थानों के साथ करार के तहत कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं उनके केवल 25 स्थानीय संस्थान ही भारतीय विश्वविद्यालय या नियामक निकायों दव्ारा अनुमोदित हैंं।
  • भारत में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारतीय शिक्षा प्रणाली की तरफ आकर्षित करने के लिए उच्च शिक्षा में सुधार करने की आवश्यकता है। भारतीय ज्ञान आयोग का मानना है कि यदि पचास हजार विदेशी छात्रों से औसतन 10 हजार अमेरिकी डॉलर वार्षिक के हिसाब से फीस ली जाए तो इस दृष्टि से प्रतिवर्ष 2300 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। वहीं वाणिज्य मंत्रालय का आकलन है कि यदि विदेशी विश्वविद्यालयों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्वीकृति देकर भारत में काम करने की अनुमति दी जाए तो इससे 4 बिलियन डॉलर की बचत होगी क्योंकि यह विदेशों में अध्ययन कर रहे छात्रों दव्ारा उच्च शिक्षा पर खर्च किये जा रहे राशि का वर्तमान निर्गम है।

उच्च शिक्षा में नीति क्षेत्र की भ्ूामिका का एन. आर. नारायणमूर्ति समिति (N. R. Narayan Murthy Committee of the Role of Policy Sector in Higher Education)

भारत में उच्च शिक्षा में नीति क्षेत्र की भूमिका के संबंध में एन. आर. नारायण मूर्ति की अध्यक्षता में गठित समिति ने अत्यंत महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं जैसे, 99 वर्षों के लिए मूफ्त भूमि, उच्च शिक्षा का प्रोत्साहन देने में योगदान करने वाली कंपनियों की कर योग्य आय में 300 प्रतिशत तक की कमी तथा विदेशी अनुसंधान स्कॅालर हेतु मल्टीपल प्रवेश वीजा आदि। नारायणमूर्ति समिति की प्रमुख सिफारिशों को निम्नांकित बिंदुओं में स्पष्ट किया जा सकता है:-

  • प्रमाणन (Certification) सभी विश्वविद्यालयों तथा उनके दव्ारा संचालित सभी कार्यक्रमों हेतु आवश्यक बनाया जाना चाहिए।
  • समिति के अनुसार बड़ी कंपनियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन की प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रधानमंत्री की ओर से 25 भारतीय कंपनियों तथा 25 प्रतिष्ठित उच्च क्षमता वाले व्यक्तियों को तय शर्तों के आधार पर विश्वविद्यालयों को प्रारंभ करने हेतु व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण भेजे जाने चाहिए।
  • समिति ने सुविधाविहीन छात्रों को गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा की सुविधा ग्रहण करने हेतु 100 करोड़ रुपये का स्कॉलरशिप फंड भी प्रस्तावित किया है। इस कोष में योगदान करने वाले कॉरपोरेट सेक्टर को उनके योगदानों से 300 प्रतिशत तक की कर छूट प्रदान की जाती है।
  • समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक क्षेत्रों का बैंकों को दीर्घाविधि के ऋण प्रदान करने हेतु 10000 करोड़ रुपये एक “राष्ट्रीय शिक्षा ऋण कोष” की भी स्थापना करनी चाहिए।
  • शिक्षा संस्थानों हेतु भूमि के संदर्भ में समिति ने कहा कि स्थान संबंधी नियमों में छूट प्रदान की जानी चाहिए, जिससे नगरीय क्षेत्रों में भूमि का अधिकतम उपयोग हो सके।

इस प्रकार समिति दव्ारा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावशीलता (Efficiency) के विस्तार नीति क्षेत्र की भूमिका को स्वीकार किया गया है।

मानव संसाधन प्रबंधन की रणनीति के रूप में राष्ट्रीय युवा नीति, 2012 (National Youth Policy as a Human Resource Management Strategy, 2012)

युवा जनसंख्या अथवा युवा वर्ग के लोग मानव संसाधन अथवा मानव पूंजी का महत्वपूर्ण भाग होता है। इस वर्ग दव्ारा उत्पादकीय कार्यों को संपन्न किया जाता है। युवाओं की दशा एवं दिशा को वस्तुस्थिति के बेहतर आकलन के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय युवा नीति 2012 में प्रथम युवा विकास सूचकांक का प्रस्ताव किया गया है। इस संदर्भ में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्रालय दव्ारा स्पष्ट किया गया है कि वैश्विकरण, तकनीक के तीव्र विकास और भारत की वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के फलस्वरूप वर्तमान युवा नीति, 2003 की समीक्षा करना आवश्यक हो गया था। प्रस्तावित नीति में पहली बार युवा नीति के प्रारूप को प्रधानमंत्री के कौशल विकास मिशन के अनुरूप युवाओं को रोजगार आधारित कौशल प्रदान करने के सिद्धांत पर निर्मित किया गया है। प्रस्तावित राष्ट्रीय युवा नीति, 2012 की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत्‌ है:-

  • नीति में लक्षित आयु समूह की सीमा को वर्तमान के 13 - 35 वर्ष से 16 - 30 वर्ष करने का प्रावधान है। यह परिवर्तन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युवा की परिभाषा को देखते हुए किया गया है। संयुक्त राष्ट्र की युवा की परिभाषा में युवा गर्व 15 - 24 वर्ष तथा कॉमनवेल्थ की परिभाषा में 15 - 29 वर्ष है।
  • नयी राष्ट्रीय युवा नीति, 2012 में 16 - 30 वर्ष की आयु सीमा को तीन उप-वर्गों में विभाजित किया गया है जैसे प्रथम उपसमूह 16 - 20 वर्ष होगा जिसमें वे सभी युवा आते हैं जिन्हें शिक्षण सुविधाओं की आवश्यकता है। दव्तीय उपसमूह 20 - 25 वर्ष का होगा जिसे रोजगार योग्य कुशलता की पहुँच चाहिए। तृतीय उपसमूह 25 - 30 वर्ष होगा जिसे स्वरोजगार एवं प्रबंधकीय -कुशलता तक पहुँच की आवश्यकता है।
  • प्रस्तावित नीति में 5 कार्यक्षेत्र निगरानी सूचक हैं यथा, युवा विकास सूचकांक के अंतर्गत युवा स्वास्थ्य सूचकांक, युवा शिक्षा सूचकांक, युवा कार्य सूचकांक, युवा सुविधा सूचकांक एवं युवा भागीदारी सूचकांक सम्मिलित होंगे।
  • राष्ट्रीय युवा नीति, 2012 में 9 लक्षित समूहों की पहचान की गयी है जिसमें छात्र युवा, प्रवासी युवा, ग्रामीण युवा, जनजाति युवा, जोखिम में युवा, हिंसात्मक संघर्ष में युवा, स्कूल से बाहर युवा, सामाजिक एवं नैतिक रूप से कलंकित समूह, संस्थागत देखभाल में युवा शामिल हैं।
  • महत्व वाले क्षेत्रों में राष्ट्रीय मूल्य को प्रोत्साहन, सामाजिक तालमेल, राष्ट्रीय एकता, रोजगारपरक कुशलता के माध्यम से युवाओं का सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल एवं मनोरंजन, लैंगिक न्याय, सामुदायिक सेवाओं में भागीदारी, पर्यावरण एवं स्थानीय प्रशासन सम्मिलित हैं।
  • प्रस्तावित नीति में युवाओं को सशक्त करने हेतु कुशलता विकास एवं प्रबंधकीय अवसर प्रदान करने के लिए अन्य मंत्रालयों तथा विभागों से मिलकर कार्य करने की बात की गयी है।

इस नीति के प्रारूप की विशिष्टता का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सभी युवाओं को एक समान नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि प्रत्येक का रहन-सहन, माहौल, उनके परिवारों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति अलग-अलग है। नीति में प्रस्तावित युवा विकास सूचकांक (Youth Development Index) मूल्य निर्धारकों और नीति निर्माताओं के लिए आसान गणना और आधार रेखा के रूप में कार्य करेगा। नीति में अलग-अलग खंड बनाये गये हैं जिनमें सामाजिक-आर्थिक स्थिति, लिंग और भौगोलिक पैरामीटर सम्मिलित हैं।