Public Administration 1: Prime Minister Office-PMO: Parliament Question

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प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office-PMO)

संसदीय प्रश्न (Parliament Question)

उन मंत्रालयों और विभागों से संबंधित संसदीय प्रश्न जिनके प्रभारी मंत्री स्वयं प्रधानमंत्री है उनके उत्तर स्वयं प्रधानमंत्री दव्ारा नामित राज्यमंत्री दव्ारा दिए जाते हैं, जिन्हें इस प्रयोजन हेतु नामित किया गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के कार्य (Functions of PMO)

प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को प्रदत्त कार्य इस पर निर्भर करता है कि प्रधानमंत्री के पास कौन से मंत्रालय हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के कुछ महत्वपूर्ण कार्य है-

  • प्रधानमंत्री को उनके अधीन विभागों या मंत्रालयों के कार्यों को संपादित करने के लिए सहायता करना।
  • कार्यविधि नियमों के अंतर्गत प्रधानमंत्री को प्राप्त सभी कार्यो तथा उत्तरदायित्वों से संबंधित विषयों को संपादित करना।
  • प्रधानमंत्री के पास आने वाली शिकायतों, गंभीर प्रकरणों तथा नीतिगत मामलों की छानबीन करना तथा प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराना।
  • प्रधानमंत्री को विभिन्न संगठनों (जैसे-राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद, योजना आयोग, राष्ट्रीय विकास परिषद आदि) में उनके पदेन अध्यक्ष के रूप में कर्तव्यों से संबंद्ध निर्वहन में सहायता करना।
  • सभी उच्च पदों, मिशनों, आयोगों, बोर्डों एवं समितियों इत्यादि में नियुक्ति के प्रकरण निस्तारित करना।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय की बढ़ती भूमिका को लेकर आलोचनाएँ की गई हैं। यह देखा गया है कि कई बार प्रधानमंत्री के मित्रों, रिश्तेदारों, नौकरशाहों, राजनीतिज्ञों, उद्योगपतियों तथा कुछ प्रमुख प्रभावशाली व्यक्तियों से युक्त प्रधानमंत्री हाउस पीएमओ की तरह कार्य करने लगा।

कभी-कभी तो पीएमओ को सुपर कैबिनेट, भारत सरकार की सरकार जैसे नामों से भी संबोधित कर दिया जाता है।

प्रधानमंत्री कोष (Prime Minister Fund)

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) और राष्ट्रीय रक्षा निधि (एनडीएफ) सीधे पीएमओ से प्रचालित किए जाते हैं।

  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) - तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू दव्ारा एक अपील के अनुसरण में जनवरी, 1948 में सार्वजनिक योगदान के साथ पाकिस्तान से विस्थापित व्यक्तियों की सहायता करने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष स्थापित किया गया था। अब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के संसाधनों का मुख्य रूप से उपयोग बाढ़, चक्रवात और भूकंप आदि और प्रमुख दुर्घटनाओं और दंगों के पीड़ितों को, प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से राशि का उपयोग हृदय की सर्जरी, गुर्दा प्रत्यारोपण, कैंसर उपचार आदि में भी किया जाता है और चिकित्सा उपचार के लिए सहायता की यह निधि पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान की होती है और इसमें बजटीय सहायता नहीं प्रदान की जाती है। कोष की राशि बैंकों के साथ फिक्स्ड डिपोजिट में निवेश की जाती है। प्रधानमंत्री के अनुमोदन के साथ इसका संवितरण किया जाता है।
  • राष्ट्रीय रक्षा निधि (NDF) -राष्ट्रीय रक्षा निधि राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए नकद और वस्तु रूप में स्वैच्छिक आधार पर दान प्राप्त करने और उसके उपयोग के संबंध में निर्णय लेने के लिए स्थापित किया गया था। इस कोष का सशस्त्र बल (अर्द्ध सैनिक बल सहित) के सदस्यों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए प्रयोग किया जाता है। यह कोष कार्यकारिणी समिति दव्ारा प्रशासित होता है। प्रधानमंत्री इस समिति के अध्यक्ष होते हैं तथा रक्षा, वित्त एवं गृह मंत्री इसके सदस्य होते हैं। वित्त मंत्री कोषाध्यक्ष होता है और विषय से संबंधित संयुक्त सचिव (प्रधानमंत्री कार्यालय) इस कार्यकारिणी समिति का सचिव होता है। कोष का लेखा भारतीय रिजर्व में रखा जाता है। यह कोष पूरी तरह से लोगों के स्वैच्छिक अंशदान पर निर्भर है और इसे कोई सहायता समर्थन नहीं मिलता है।

राष्ट्रीय रक्षा निधि के अंतर्गत आने वाली स्कीम (Schemes under National Defence Fund)

  • प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बल और अर्द्ध सैनिक बलों के मत व्यक्तियों की विधवाओं और आश्रितों के लिए तकनीकी और स्नाताकोत्तर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति स्कीम अनुमोदित की है। यह स्कीम सशस्त्र बलों के संबंध में भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग, रक्षा मंत्रालय दव्ारा कार्यान्वित की जा रही है। जहाँ तक अर्द्ध सैनिक बल और रेल संरक्षण बल के कार्मिकों का संबंध है, स्कीम क्रमश: गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय दव्ारा कार्यान्वित की जा रही है।
  • सियाचीन बेस कैंप के सियाचीन के अस्पताल में सी. टी. स्कैन मशीन और मनोरंजन के लिए 2 बड़े होम थियेटरों के संस्थापन की घोषणा की गई।
  • प्रधानमंत्री ने कूकी इन कॉॅम्प्लेक्स, इम्फाल में समुदाय, हॉल व संग्रहालय और पुस्तकालय के निर्माण के लिए 1.44 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया है।

प्रधानमंत्री की समितियाँ एवं परिषद (Committees and Councils of Prime Minister)

  • आर्थिक सलाहकार परिषद- प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन 29 दिसंबर, 2004 को किया गया, जिसके अध्यक्ष कैबिनेट रैंक के होंगे। वर्तमान में डॉ. सी. रंगराजन इसके अध्यक्ष हैं।
    • प्रधानमंत्री दव्ारा समय-समय पर परिषद को भेजे गए नीतिगत मामलों पर सलाह देने के अलावा आर्थिक सलाहकार परिषद प्रधानमंत्री के लिए देश एवं विदेशों में आर्थिक विकासों पर एक मासिक रिपोर्ट तैयार करती है। यह नियमित रूप से आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा करती है एवं देश एवं विदेश में हो रही महत्वपूर्ण गतिविधियों की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करती है तथा उचित नीतिगत जवाब हेतु सुझाव भी देती है।
    • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर प्रधानमंत्री की परिषदें (एमएसएमई) -अगस्त 2009 में प्रधानमंत्री ने उस समय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी, जब प्रमुख एमएसएमई एसोसिशन्स के प्रतिनिधियों ने उनसे मिलकर अपने मुद्दों और चिंताआंे से उन्हें अवगत कराया था, तदनुसार 2 सितंबर, 2009 को श्री टी. के. ए. नायर, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव के अधीन टास्क फोर्स का गठन किया गया ताकि एसोसिएशनों दव्ारा उठाए गए मुद्दों पर विचार करने एवं सभी हिस्सेदारों के साथ विचार-विमर्श के बाद कार्रवाई करने के लिए एक एजेण्डा तैयार किया जा सके। इसके सदस्यों में योजना आयोग के सदस्य, संबंधित सरकारी विभागों के सचिव, आर. बी. आई. के डिप्टी गवर्नर, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेश, एस. आई. डी. बी. आई तथा एमएसएमई एसोसिएशनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
    • रिपोर्ट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास एवं संवर्धन के लिए एक रोड मैप तैयार किया गया है। इस रिपोर्ट में हाल की आर्थिक मंदी मद्देनजर एमएसएमई को राहत और प्रोत्साहन देने हेतु तुरंत कार्रवाई करने के लिए एक एजेंडा की सिफारिश भी की गई है। इसमें संस्थागत बदलावों एवं विस्तृत कार्यक्रमों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा इसमें समुचित कानूनी एवं रेगुलेटरी ढाँचे के गठन की भी सलाह दी गई है ताकि देश में उद्यमों हेतु अनुकूल वातावरण बनाया जा सके और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का विकास हो सके। तदनंतर एमएसएमई क्षेत्र के विकास एवं व्यापक नीति हेतु मार्गदर्शी सिद्धांत बनाने के लिए एमएसएमई पर प्रधानमंत्री की परिषद् का गठन 7 अप्रैल, 2010 को किया गया। परिषद् की बैठक वर्ष में एक बार होगी।
    • एक स्टीयरिंग ग्रुप का भी गठन किया गया है जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, वित्त श्रम आदि मंत्रालयों के सचिव शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद्‌- ‘कौशल विकास के लिए समन्वित कार्रवाई’ तथा ‘राष्ट्रीय कौशल वािकस निगम’ के गठन पर 15 मई 2008 को हुई बैठक में कैबिनेट दव्ारा लिए गए निर्णय के अनुसरण में 1 जुलाई 2008 को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद् का गठन किया गया।

स्घांटन (Structure)

राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद् का संघटन इस प्रकार है-

  • प्रधानमंत्री-अध्यक्ष
  • मानव संसाधन विकास मंत्री-सदस्य
  • वित्त मंत्री सदस्य
  • भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री सदस्य
  • ग्रामीण विकास मंत्री सदस्य
  • आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री-सदस्य
  • श्रम और रोजगार मंत्री-सदस्य
  • उपाध्यक्ष योजना आयोग सदस्य
  • अध्यक्ष राष्ट्रीय विनिर्माण-सदस्य

चार्टर (Charter)

  • यह परिषद् त्रिस्तरीय संरचना वाली शीर्ष संस्था है और विजन तय करने तथा मूल कार्यनीतियाँ तैयार करने में अपना योगदान देगी। इस परिषद् के राष्ट्रीय विकास विभाग समन्वयन बोर्ड सहायता प्रदान करेगा। इसके अध्यक्ष योजना आयोग के उपाध्यक्ष होंगे तथा यह परिषद् सरकारी एवं गैर सरकारी दोनों क्षेत्रों में कौशल विकास की दिशा में की जाने वाली कार्रवाई का समन्वयन करेगी।
  • कौशल विकास के संबंध में गैर सरकारी क्षेत्र दव्ारा की जाने वाली कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम नामक गैर मुनाफे वाले निगम (कार्पोरेशन) के रूप में संस्थागत व्यवस्था की जा रही है। इसे वित्त मंत्रालय दव्ारा स्थापित किया जा रहा है। वित्त मंत्रालय दव्ारा स्थापित किए जाने वाले राष्ट्रीय कौशल विकास निगम नामक गैर मुनाफा वाले निगम के अध्यक्ष परिषद् के सदस्य भी होंगे।
    • प्रधानमंत्री जलवायु परिवर्तन परिषद-प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 6 जून, 2008 को इसका गठन किया गया। यह परिषद जलवायु परिवर्तन के निर्धारण, अनुकूलन और न्यूनीकरण के लिए राष्ट्रीय कार्यवाही का समन्वय करेगी। इसके सदस्यों के तौर पर विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, पर्यावरण व वन मंत्री, कृषि मंत्री जल संसाधन मंत्री, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री को ही शामिल किया गया है। साथ ही किसी भी बैठक में अन्य मंत्री, अधिकारी व विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जा सकता है।
    • व्यापार एवं आर्थिक संबंध समिति- 3 मई 2005 को गठित, व्यापार एवं आर्थिक संबंध समिति अन्य देशों के साथ हमारे आर्थिक संंबंधों के विस्तार, कार्य क्षेत्र एवं संचालन मामलों को एक समन्वित एवं समकालिक ढंग से विकसित करने के लिए एक संस्थागत तंत्र है। इस समिति को प्रधानमंत्री कार्यालय दव्ारा सेवाएँ प्रदान की जाएगी जो आवश्यकता पड़ने पर सरकार के किसी भी मंत्रालय/विभाग/सरकारी एजेंसी से सहंयोग ले सकता है।
    • प्रधानमंत्री व्यापार एवं उद्योग परिषद्- इस परिषद् की प्रथम बैठक 26 मई, 2010 को संपन्न हुई। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित इस परिषद् के सदस्यों में रतन राय, राहुल बजाज, एन. नारायणमूर्ति, किरण मजूमदार सहित 23 सदस्य हैं। यह परिषद् व्यापार और उद्योग से संबंधित आर्थिक मुद्दों पर नीति संबंधी संवाद का एक मंच होगा।

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