Public Administration 1: Pre-Conception and Prenatal Diagnostics Techniques

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भारत में महिलाओं की उन्नति एवं संरक्षण के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थाएँ एवं निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Bodies Constituted for the Protection and Betterment of Women in India)

गर्भधारणपूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 (Pre Conception and Prenatal Diagnostics Techniques (Prohibition of Sex Selection) Act, 1994)

प्रसवपूर्व निदान तकनीक (विनियमन एवं दुरुपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1994 में संसद दव्ारा प्रसव पूर्व निदान तकनीक के विनियमन के लिए बनाया गया था। इस निदान तकनीक का उद्देश्य जीन संबंधी (Generic) या चयापचयी (Metabolic) गड़बड़ियों या गुणसुत्र संबंधी असमान्यताओं (Chromosomal Abnormalities) या कुछ निश्चित प्रकार की जन्मजात विकृतियों या सेक्स संबंधी विकारों को दूर करना था। लेकिन इस तकनीक का उपयोग प्रसवपूर्व लिंग निर्धारण के लिए किया जाने लगा, जिससे भ्रूण हत्या या संबंधित मामलों में बढ़ोत्तरी देखी गई।

प्रस्तावना (Introduction)

  • लिंग चयन केवल तकनीक का ही दुरुपयोग नहीं है। इस पूरे मामले के केन्द्र में महिलाओं एवं लड़कियों की निम्न प्रस्थिति तथा आजीवन उनके दव्ारा सामाना किए जाने वाले पूर्वाग्रह हैं। इस मुद्दें को पुरुष प्रधान सामाजिक एवं पारिवारिक संरचना और पुत्र प्राथमिकता वाली मूल्य व्यवस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
  • भारत में गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम, 1971 (Medicial Termination of Pregnancy Act, 1971) के अंतर्गत कुछ परिस्थितियों में गर्भपात कानूनी है। उदाहरण के लिए-माँ के जीवन को खतरा, भ्रूणीय असामान्यता, बलात्कार या गर्भनिरोधक असफलता (Contraceptive Failure) । हालांकि कानून लिंग चयन के लिए गर्भपात की अनुमति नहीं देता है। इस तथ्य को ध्यान में रखा जाए और यह नहीं सोचना चाहिए कि भारत में गर्भपात स्वत: या अपने आप में गैर कानूनी है। गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम (एमटीपी एक्ट) के अनुसार एक महिला सुरक्षित एवं कानूनी गर्भपात का अधिकार रखती है।

पीसीपीएनडीटी अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of the PCPNDT Act)

  • प्रसवपूर्व निदान तकनीक का प्रयोग असामान्यता (abnormalities) और विसंगतियों (Anomalies) के चिकित्सीय आधार पर करने की अनुमति है न कि लिंग निर्धारण के लिए।
  • प्रसवपूर्व नैदानिक प्रक्रिया को संपन्न करने वाला कोई भी व्यक्ति भ्रूण की लिंग संबंधी जानकारी गर्भवती महिला या उसके रिश्तेदारों को शब्द, चिन्ह या किसी अन्य रूप में नहीं देगा।
  • अल्ट्रासाउंड करने वाली क्लीनिकों को आवश्यक रूप से पंजीकृत होना चाहिए तथा मशीनों की संख्या, सोनोग्राफी करने वाले व्यक्तियों की योग्यता तथा पंजीकरण की समयावधि संबंधी प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना चाहिए।
  • सभी क्लीनिक जो अल्ट्रासाउंड करते हैं उन्हें अंग्रेजी के साथ स्थानीय भाषा में ‘कानून दव्ारा लिंग प्रकट करना प्रतिबंधित है’ का बोर्ड प्रदर्शित करना चाहिए।
  • सभी क्लीनकों के पास अधिनियम की कॉपी उपलब्ध होनी चाहिए।
  • डॉक्टरों या क्लीनकों दव्ारा किसी भी रूप में लिंग निर्धारण संबंधी परीक्षण का विज्ञापन कानूनी रूप से दंडनीय है।
  • प्रसवपूर्व निदान तकनीक का उपयोग करने में उनकी भूमिका को देखते हुए महिलाओं को दंड से छूट प्रदान की गई है।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक अपराध संज्ञेय एवं गैर जमानती है।
  • इस अधिनियम को लागू करने के लिए उचित प्राधिकरण कार्य करेगा।
  • अधिनियम प्रत्येक जाँच (Scan) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करता है।

सम्मान एवं परंपरा के नाम पर किए गए अपराधों की (रोकथाम) विधेयक, 2010 (राष्ट्रीय महिला आयोग दव्ारा तैयार प्रारूप) (The Prevention of Crimes in the Name of ‘Honour’ & Tradition, Bill 2010 [Drafted by National Commission for Women] )

प्रस्तावना (Introduction)

पिछले कुछ दिनों में एक परिवार या जाति या समुदाय में सम्मान के नाम पर कई हत्याएँ एवं असम्मानजनक अपराध किए गए हैं और अभी भी इस तरह की खबरें आ रही है। हालांकि इस तरह के अधिकांश अपराधों की घटनाएँ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा भारत के उत्तरी एवं पश्चिमी भागों से सुनने में आती है। लेकिन इस तरह की घटनाएँ इस क्षेत्र तक ही सीमित नहीं हैं और देश के लगभग सभी भागों में इस तरह की घटनाएँ देखने को मिलती है। सम्मान के नाम पर अपराध एक हिंसात्मक एवं अपमानजनक कार्य है।

इस अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of this Act)

युवाओं एवं महिलाओं के साथ सभी व्यक्तियों को अपने जीवन को नियंत्रित करने का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने का अधिकार तथा शारीरिक शुद्धता (Bodily Integrity) बनाए रखने का अधिकार प्राप्त है। उन्हें विवाह या अन्य तरीके से अपना साथी चुनने का अधिकार है और इस विधेयक का प्रावधानों के अंतर्गत उनके इन अधिकारो का प्रयोग रोकने हेतु किसी प्रकार की कार्रवाई को एक अपराध माना जाएगा।

इस अधिनियम के अंतर्गत उत्पीड़न कार्य एवं निवारण में निम्नलिखित शामिल होंगे (The Acts of Harassment and Prevention in this Act Shall Include)

  • विवाह करने वाले दंपत्ति को भाई और बहन घोषित करना।
  • दंपत्ति या उनके परिवार एवं संबंधियों की उस गांव या इलाके से बाहर करना जहाँ वे रहते हैं।
  • दंपत्ति या उनसे जुड़े या उन्हें आश्रय देने वाले व्यक्ति को जुर्माना देने के लिए कहना।
  • दंपत्ति या उनके परिवार या उनसे जुड़े किसी व्यक्ति पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना या उनका बहिष्कार करना।
  • दंपत्ति या उनके परिवार या उनसे जुड़े किसी व्यक्ति पर सामाजिक प्रतिबंध लगाना या उनका सामाजिक बहिष्कार करना।
  • दंपत्ति को लगातार तंग करना तथा दंपत्ति को एक-दूसरे से मिलने जुलने या एक साथ रहने से सशरीर उपस्थिति होकर या संचार साधनों दव्ारा मना करना।
  • लड़की या दंपत्ति या उनसे जुड़े किसी व्यक्ति को हानि या चोट पहुँचाना।

घरेलू कामगार कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा अधिनियम 2010 (राष्ट्रीय महिला आयोग दव्ारा तैयार प्रारूप) (Domestic Workers Welfare and Social Security Act 2010 [Drafted by National Commission for Women] )

प्रस्तावना (Introduction)

  • घरेलू कामगारों के शोषण की नियमित खबरें मिलती हैं। उनके अधिकारों एवं कानूनों का सम्मान न किए जाने से घरेलू नौकर समकालीन दास बन गए हैं। यह भी एक ज्ञात तथ्य है कि कई महिलाओं का अनैतिक व्यापार एवं शोषण नियोजन एजेंसियों (Placement Agencies) दव्ारा किया जाता है। जो बिना किसी प्रतिबंध या नियमन के खुले में कार्य करते हैं।
  • पिछले कुछ दशकों में घरेलू कामगारों की मांग में तीव्र वृद्धि हुई है जिससे लाखों महिलाओं एवं बच्चों का अवैध व्यापार एवं अन्य तरीके से शोषण किया जा रहा है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए घरेलू कामगारों को उपलब्ध कराने वाली हजारों नियोजन एजेंसियाँ (Placement Agencies) अनेक राज्यों के मेट्रो शहरों में खुल चुकी हैं, जहाँ इन कामगारों का अनेक रूपों में शोषण होने के साथ-साथ अवैध व्यापार भी होता है और उसके बावजूद ये किसी तरह के विधायी नियंत्रण से बाहर हैं।
  • किसी तरह के कानूनी संरक्षण के अभाव में महिलाओं एवं बच्चों का अत्यंत शोषण होता है तथा दिन में 16 से 18 घंटे काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी से वंचित रखा जाता है। पारगमन (Transit) के दौरान एजेंटो दव्ारा उनका यौन शोषण किया जाता है। एजेंसी के कार्यालयों तथा नियोक्ताओं के घर स्थित कार्यस्थलों पर यह शोषण जारी रहता है। शोषण की सूची अनंत (Endless) है तथा मीडिया दव्ारा अक्सर इसके संबंध में रिपोर्ट दी जाती है।

घरेलू कामगारों कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2010 की प्रमुख विशेषताएँ (Salient Features of Domestic Workers Welfare and Social Security Act, 2010)

  • घरेलू कामगार का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो किसी घर या इसी तरह के प्रतिष्ठान में किसी एजेंसी या प्रत्यक्ष रूप से अस्थायी या संविदा आधार पर अंशकालिक या पूर्णकालिक रूप से रोजगार करता है और जो अपना पारिश्रमिक नकद या सामग्री के रूप में प्राप्त करता है। इसमें प्रतिस्थापन कामगार (Replacement Worker) को भी शामिल किया गया है। यह कार्य मुख्य कामगार (Main Worker) के प्रतिस्थापन के तौर पर अल्प एवं विशिष्ट समय-सीमा के लिए किया जाता है जो कि मुख्य कामगार के साथ सहमति के आधार पर तय होती है।
  • नियोक्ता का तात्पर्य किसी ऐसे व्यक्ति प्राधिकार और प्रबंधन से है जो प्रत्यक्ष या किसी व्यक्ति या एजेंसी के माध्यम से अंशकालिक या पूर्णकालिक रूप से घरेलू कार्य करने के लिए घरेलू कामगारों को नियुक्त करता है।
  • सेवा प्रदाता का तात्पर्य किसी स्वैच्छिक सभा (Voluntary Association) से है जो सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत हो।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत केन्द्र सरकार, केन्द्रीय सलाहकार समिति (Central Advisory Committee) का गठन करेगी। केन्द्रीय समिति का एक अध्यक्ष होगा, जिसकी नियुक्ति केन्द्र सरकार दव्ारा की जाएगी तथा उतने सदस्य होंगे जितने केन्द्र सरकार उपयुक्त समझें। इसमें ऐसे सभा, संघ एवं व्यक्ति शामिल होंगे जो घरेलू कामगारों के मामलों में रुचि लेते हों तथा ऐसे व्यक्ति श्रम मामलों तथा महिला एवं बाल मुद्दों के विशेषज्ञ होने चाहिए।
  • केन्द्रीय समिति इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाए गए कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा एवं निगरानी करेगी तथा इस अधिनियम या कानून में संशोधन के संबंध में केन्द्र सरकार को संस्तुति करेगी।
  • यह समिति राज्यों में इस अधिनियम के कार्यान्वयन की समीक्षा एवं निगरानी करेगी।
  • राज्य सरकारों जिलों में घरेलू कामगारों के कल्याण की स्कीमों की तैयारी एवं कार्यान्वयन के उद्देश्य से सरकारी राजपत्र में अधिसूचना के दव्ारा जिला घरेलू श्रम कल्याण बोर्ड (District Domestic Labour Welfare Board) की स्थापना कर सकेगी।
  • समिति राज्य सरकारों को घरेलू कामगारों के लाभ एवं कल्याण जैसे सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा तथा अन्य लाभदायक स्कीमों के बारे में सलाह देती है।
  • राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रशासन से उत्पन्न होने वाले मामलों तथा घरेलू कामगारों पर लागू होने वाले इस अधिनियम के प्रावधानों और नियोक्ताओं या विभिन्न बोर्डों के कार्यो में समन्वय स्थापित करने या जैसा कि राज्य सरकार इसे सलाह देने के लिए कहे, के उद्देश्य से एक सलाहकार समिति (Advisory Committee) का गठन कर सकेगी।
  • लाभार्थी बच्चों की शिक्षा, लाभर्थाी या उसके आश्रित की बीमारी के उपचार के लिए चिकित्सा व्यय, महिला लाभार्थी को मातृत्व लाभ, लाभार्थी की मृत्यु की स्थिति में उसके अंतिम संस्कार के खर्च के लिए उसके कानूनी उत्तराधिकारी को जिला बोर्डो दव्ारा वित्तीय सहायता दी जाएगी।

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