Public Administration 1: Ministry of Personnel and Prime Minister Office-PMO

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कार्मिक लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances and Pension)

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reform and Public Grievance)

यह विभाग श्रव्य-दृश्य मीडिया तथा प्रकाशन के माध्यम से सफल गवर्नेस प्रथाओं के दस्तावेज तैयार करने और उनका प्रचार प्रसार करने का प्रयास करता है। यह विभाग सुधारों को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय विनिमय और सहयोग के क्षेत्र में भी कार्यकलापों को चलाता है। सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत तथा पेंशन एवं पेंशन भोगी कल्याण इस विभाग के प्रमुख हैं। इसमें एक अपर सचिव, एक संयुक्त सचिव, 7 निदेशक/उप सचिव तथा 14 अवर सचिव स्तर के अधिकारी हैं। इस विभाग में प्रशासनिक सुधार, संगठन तथा पद्धति, ई -गवर्नेस, प्रलेखन एवं प्रचार-प्रसार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रशासन तथा समन्वय एवं लोक शिकायत नामक सात प्रभाग हैं। इस विभाग का संगठनात्मक चार्ट अनुबंध-1 पर दिया गया है।

भारत सरकार के कार्य आबंटन नियमावली के अनुसार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग को निम्नलिखित कार्य आबंटित किए गए हैं-

  • ई-गवर्नेंस तथा प्रशासनिक सुधार श्रेष्ठ प्रथाओं के प्रचार-प्रसार सहित।
  • संगठन एवं पद्धति।
  • निम्नलिखित से संबंधित पहलूओं की नीति बनाना, समन्वय करना तथा निगरानी करना।
    • सामान्य लोक शिकायतों का निर्वारण करना;
    • लोक प्रबंधन मामलों में राज्य सरकारों, व्यावसायिक संस्थानों आदि से संपर्क।
    • लोकप्रबंधन में अनुसंधान
  • केन्द्रीय सचिवालय कार्यालय पद्धति नियम पुस्तिका का प्रबंधन।

प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के निम्नलिखित विजन, मिशन एवं कार्यकलाप हैं-

विजन (Vision)

सभी नागरिकों के हित के लिए गवर्नेस में उत्कृष्टता के लक्ष्य को सरल एवं सुविधाजनक बनाना।

मिशन (Mission)

  • ई-गवर्नेस में उत्कृष्टता का संवर्धन करना और सरकारी ढाँचों और प्रक्रियाओं में सुधार के माध्यम से प्रशासनिक सुधारों का अनुसरण करना।
  • शिकायत निवारण पर बल सहित नागरिक-केन्द्रिक प्रशासन का संवर्धन करना।
  • ई-गवर्नेंस में नवाचार।
  • सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का प्रलेखन एवं प्रचार-प्रसार।

उद्देश्य (Objectives)

  • सरकारी नीतियों, ढाँचों तथा प्रक्रियाओं में प्रशासनिक सुधारों का संवर्धन करना।
  • ई-गवर्नेंस के माध्यम से सुधारों को बढ़ावा देना।
  • नीति निर्माण तथा मामूलों के निवारण संबंधी विषयों का समन्वयन।
  • सरकारी ज्ञान तथा सर्वोत्तम प्रयोग का विस्तार।

कार्य (Functions)

  • नागरिक केन्द्रित पहलूओं में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना।
  • ई-गवर्नेंस पर राष्ट्रीय सम्मेलन तथा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करना।
  • प्रशासनिक सुधार से संबंधित विषय।
  • सरकारी वेबसाइटों पर दिशा-निर्देशों का क्रियान्वयन।
  • प्रशासनिक सुधार पर कोर ग्रुप तथा मंत्रियों के समूह को सेवा प्रदान करना।
  • त्रैमासिक पत्रिका-सरकार में प्रबंधन तथा मासिक न्यूज लेटर-नागरिक/सिविल सेवा समाचार का प्रकाशन।
  • दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्टों/सिफारिशों के कार्यान्वयन से संबंधित विषयों पर अनुवर्ती कार्रवाई करना।
  • सिविल सेवा दिवस, मुख्य सचिवों के सम्मेलन तथा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों से प्रशासनिक सुधार सचिवों के सम्मेलन का आयोजन।
  • श्रेष्ठ प्रथाओं तथा लोक प्रशासन में उत्कृष्टता में प्रधानमंत्री पुरस्कार से संबंधित मामलों का प्रलेखन और प्रचार-प्रसार।
  • गवर्नेंस ज्ञान केन्द्र-श्रेष्ठ प्रथाओं का एक पारस्परिक क्रिया पोर्टल।
  • केन्द्रीय सचिवालय कार्यालय पद्धति नियम पुस्तिका।
  • सरकारी कार्यालयों के आधुनिकीकरण के लिए सहायता।
  • ई-गवर्नेंस के माध्यम से सुधार उपाय कराने हेतु क्षमता निर्माण, परिवर्तित प्रबंधन तथा सरकारी प्रक्रिया की पुन: अभियांत्रिकी।
  • लोक प्रशासन तथा गवर्नेस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विनिमय तथा सहयोग।
  • सामान्यत: लोक शिकायतों तथा विशेष रूप में केन्द्र सरकार के अभिकरणों संबंधित शिकायतों के निवारण की मॉनीटरिंग करना तथा इसके सुविधाजनक बनाना।
  • केन्द्रीकृत लोक शिकायत निवारण तथा मॉनीटरिंग प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से लोक शिकायतों के कुशल प्रबंधन के लिए ऑनलाइन फ्रेमवर्क का सृजन एवं उन्नयन और केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों तथा राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों में इसकी शुरूआत।
  • केन्द्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों/संगठनों तथा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तथा स्थानीय सरकारी संस्थाओं में लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु सर्वोत्तम ढाँचे के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाना/करना।
  • संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी और उनसे ऊपर के अधिकारियों की शिकायतों हेतु स्थायी समिति को सेवा प्रदान करना।
  • राष्ट्रीय ई-गवर्नेस योजना के अंतर्गत ई-ऑफिस मिशन मोड परियोजना।

पेंशन एवं पेंशनभागेी कल्याण विभाग (Department of Pension and Pensioners Welfare)

पेंशन तथा पेंशनभोगी कल्याण विभाग की स्थापना 1985 में कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के एक भाग के रूप में देश में केन्द्रीय सिविल पेंशनभोगियों की आवश्यकताओं के मद्देनजर की गई थी। सरकार की पेंशन तथा सेवा से संबंधित अन्य लाभों एवं पेंशन तथा सेवानिवृत्ति लाभों से संबंधित शिकायतों के निपटाने के संबंध में एक आम नीति बनाने हेतु नोड्‌ल अभिकरण है। इस विभाग ने बेहतर सुविधा तथा पेंशनभोगियों के कल्याण हेतु पेंशन प्रणाली को कारगर बनाने हेतु वर्षों से कई कदम उठाए है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office-PMO)

  • भारत के प्रधानमंत्री संघ सरकार के प्रमुख के रूप में भारत के राष्ट्रपति, जो देश के प्रमुख हैं, से अलग हैं। चूँकि भारत में संवैधानिक लोकतंत्र का वेस्टमिंस्टर मॉडल अपनाया गया है, अत: प्रधानमंत्री को भारत संघ सरकार के दैनिक कामकाज की देखरेख करनी होती है।
  • प्रधानमंत्री को इस कार्य में उनके मंत्रियों की परिषद दव्ारा सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें कैबिनेट मंत्रियों के साथ स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री, राज्य मंत्री शामिल हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office-PMO)

  • प्रधानमंत्री को सचिवालयी सहायता प्रदान करने के लिए स्वतंत्रता के तुरंत पश्चात्‌ प्रधानमंत्री सचिवालय की स्थापना की गई थी, जून, 1977 से प्रधानमंत्री सचिवालय को प्रधानमंत्री कार्यालय कहा जाने लगा। भारत सरकार के ‘कार्य आबंटन नियम, 1961’ के अंतर्गत पीएमओ को 1967 से एक विभाग का दर्जा प्राप्त है। इन नियमों में पीएमओ का कार्य केवल प्रधानमंत्री को सचिवीय सहायता देना बताया गया है।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रत्यक्ष नियंत्रण स्वयं प्रधानमंत्री दव्ारा किया जाता है। कई बार राज्य मंत्री या उपमंत्री का पद भी इस कार्यालय में निर्मित किया जाता है। प्रशासनिक स्तर पर पीएमओ का एक प्रधान या प्रमुख सचिव होता है। सामान्यत: यह पद प्रधानमंत्री के अत्यंत विश्वासपत्र अधिकारी को मिलता है। अत: नीति निर्माण और अन्य शासकीय कार्यो में यह अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस पद पर सेवारत आई. ए. एस. अधिकारी अथवा किसी अन्य योग्य व्यक्ति की नियुक्ति प्रधानमंत्री दव्ारा की जाती है। पीएमओ में अन्य अधिकारी-कर्मचारी आवश्यकतानुसार नियुक्त किए जाते हैं।
Prime Minister Office-PMO
  • भारत के राष्ट्रपति दव्ारा पार्टी या गठबंधन के उस नेता को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता है, जो लोक सभी (भारतीय संसद के निचले सदन) का बहुमत हासिल करता है। यदि किसी एक पार्टी या गठबंधन को बहुमत प्राप्त नहीं होता है तो सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है, किन्तु उसे अंतत: लोक सभा में विश्वास मत प्राप्त करना होता है। मंत्रियों की केन्द्रीय परिषद् की नियुक्ति राष्ट्रपति दव्ारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है। प्रधानमंत्री राज्य सभा या लोकसभा का सदस्य हो सकता है। प्रधानमंत्री भारत के योजना आयोग का अध्यक्ष भी होता है।
  • म्त्राीं परिषद के प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री सभी मंत्रालयों के कार्यों की देखरेख करता है। यह मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करता है, जो आमतौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्रिमंडल कक्ष में आयोजित की जाती है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • प्रधानमंत्री कार्यालय दव्ारा प्रधानमंत्री को सचिवालीय सहायता प्रदान की जाती है। इसका नेतृत्व प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव करते हैं। पीएमओ में भ्रष्टाचार विरोधी इकाई और शिकायतों से निपटने के लिए सार्वजनिक स्कंध शामिल हैं।
  • प्रधानमंत्री के पास जमा करने के लिए अपेक्षित फाइल की विषय-वस्तु इस पर निर्भर करती है कि क्या उनके पास उस मंत्रालय का प्रत्यक्ष प्रभार है या क्या उस मंत्रालय के प्रभारी एक कैबिनेट मंत्री हैं अथवा एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं।
  • दूसरे मामले में अधिकांश मुद्दों को कैबिनेट मंत्री/प्रभारी राज्य मंत्री दव्ारा निपटाया जाता है। केवल महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों के लिए, जिनके प्रति मंत्री संवेदनशील है, उन्हें आदेश या सूचना के लिए प्रधानमंत्री के पास जमा किया जाना चाहिए, जिन्हें पीएमओ में प्राप्त किया जाता है। उन मामलों में जहाँ प्रधानमंत्री ही प्रभारी मंत्री हैं तो मंत्रालय के अनुमोदन की आवश्यकता का प्रत्यायोजन राज्य/उपमंत्री को सौंपा नहीं गया है, यदि कोई हो, इन्हें आदेश को प्रस्तुत किया जाता है। प्रधानमंत्री पारंपरिक रूप से अंतरिक्ष परमाणु ऊर्जा विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत पेंशन मंत्रालय के प्रभारी मंत्री होते हैं।

चूँकि प्रधानमंत्री योजना आयोग का अध्यक्ष है, अत: प्रासंगिक उनकी टिप्पणियों और निकासी के लिए पीएमओं को ही अग्रेषित की जाती है। कुछ महत्वपूर्ण मामले जिनमें कि प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत ध्यान की आवश्यकता होती है, निम्नलिखित हैं:

  • रक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे।
  • सजावट (नागरिक और रक्षा) जहाँ राष्ट्रपति के अनुमोदन की आवश्यकता होती हैं।
  • सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे।
  • विदेशों में मिशन पर भारतीय प्रमुखों की नियुक्ति के प्रस्ताव और भारत में तैनात मिशन के विदेशी प्रमुखों के लिए करार प्रदान करने हेतु अनुरोध।
  • मंत्रिमंडल सचिवालय से संबंधित सभी महत्वपूर्ण निर्णय।
  • राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनलों और केन्द्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल संघ लोक, सेवा आयोग, निर्वाचिन आयोग, सांविधिक समितियों के सदस्यों की नियुक्ति विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े आयोगों में नियुक्ति।
  • सिविल सेवाओं और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित सभी नीतिगत मामलें।
  • प्रधानमंत्री दव्ारा राज्यों के लिए घोषित विशेष पैकेज की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय में की जाती है और इसकी आवधिक रिपोर्ट प्रधानमंत्री को पेश की जाती है
  • सभी न्यायिक नियुक्तियाँ जिनके लिए राष्ट्रपति के अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

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