Public Administration: The Prohibition of Employment as Manual Scavengers

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अनुसूचित जातियों, शोषित वर्ग, अल्पसंख्यकों व अनुसूचित जनजातियों की बेहतरी एवं संरक्षण हेतु तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Law, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Scheduled Castes, Depressed Class, Minorities and Scheduled Tribes)

मैला ढोने वालों का नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास विधेयक, 2012 (The Prohibition of Employment as Manual Scavengers and Their Rehabilitation Bill, 2012)

परिचय (Introduction)

  • इसे लोकसभा में 3 सितंबर, 2012 को प्रस्तावित किया गया। सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण पर गठित समिति (अध्यक्ष-दारा सिंह चौहान) ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट 4 मार्च, 2013 को दी थी।
  • मैला ढोने से तात्पर्य शौचालयों को हाथ से साफ करना अथवा मानव मल की सफाई करने से है। वर्तमान में इसे मैला ढोने वालों का नियोजन एवं शुष्क शौचालय निर्माण (निषेध) अधिनियम, 1993 दव्ारा प्रतिबंधित किया गया है। जिसे केन्द्र सरकार ने 6 राज्यों की अनुशंसा के उपरांत कानून बनाया था।
  • केन्द्र सरकार ने इससे संबंधित दो योजनायें बनाई हैं जो कि इस प्रकार हैं- 1981 में बनी एकीकृत निम्न मूल्य स्वच्छता स्कीम (Integrated Low Cost Sanitation Scheme, ICLS in 1981) तथा 2007 में मैला ढोने वालों के पुर्नवास से संबंधित स्वरोजगार योजना (Self Employment Scheme for Rehabilitation of Manual Scavengers (SRMS) , 2007) । ICLS योजना के तहत शहरी गरीब परिवारों को शुष्क शौचलयों को पानी से बहाव वाले शौचलयों में बदलने के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। SRMS योजना के तहत मैला ढोने वालों को ऋण व सब्सिडी उपलब्ध कराने के साथ-साथ इनमें कौशल विकास भी किया जाता है ताकि इस कुप्रथा से पीड़ित वर्ग स्वरोजगार के साधन तलाश सकें। 2003 में सफाई कर्मचारी आंदोलन ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित याचिका दायर करके शीर्ष न्यायालय से इस मामले को संज्ञान में लेकर आग्रह किया कि वह राज्य सरकारों को मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने का निर्देश दे एवं इस संबंध में 1993 का कानून लागू करे।
  • राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने 2011 में मैला ढोने की कुप्रथा को समाप्त करने के संबंध में अपने सुझाव दिये थे। इसी परिप्रेक्ष्य में 3 सिंतबर, 2012 को लोकसभा में एक प्रस्ताव पेश किया गया ताकि इस अमानवीय प्रथा को समाप्त करने हेतु कड़े प्रावधान किये जा सके और इस काम को करने वाले लोगों को दूसरे कामों में नियोजित किया जा सके।

विधेयक के प्रमुख बिन्दु (Highlights of the Bill)

  • यह विधेयक हाथ से मैला ढोने वालों का नियोजन पर प्रतिबंध लगाता है और बिना किसी संरक्षणात्मक उपकरण के हाथ से सीवर एवं सैप्टिक टैंक की सफाई पर रोक लगाता है, तथा स्वच्छ शौचलयों के निर्माण को बढ़ावा देता है।
  • यह प्रस्ताव मैला ढोने वालों के पुनर्वास एवं वैकल्पिक रोजगार की व्याख्या करता है।
  • अस्वच्छ शौचालयों का सर्वेक्षण स्थानीय प्राधिकरण और सरकारी मशीनरी, छावनी बोर्ड (Cantonment Board) तथा रेलवे संस्थायें करेंगी तथा यह कार्य इन्हीं के न्यायाधिकार में होगा। ये सामुदायिक शौचलयों का निर्माण भी करवायेंगी।
  • स्थानीय संस्था, प्राधिकरण व जिलाधिकारी इसके क्रियान्वयन के लिए प्राधिकृत होंगे।
  • विधेयक के अंतर्गत अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती होंगे।

विधेयक के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान (Other Salient Features of the Bill)

अस्वच्छ शौचालय (और मैला ढोने वालों) की पहचान करना (Identification of Insanitary Latrines and Manual Scavengers)

प्रत्येक स्थानीय प्राधिकरण (नगरपालिका पंचायत रेलवे छावनी, संस्था बोर्ड) को इनकी पहचान हेतु सर्वेक्षण करना है क्योंकि यह इन्हीं संस्थाओं के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत शामिल है। उपरोक्त संस्थाओं को दूषित शौचालय की सूची दो माह के अंतर देनी होगी तथा 6 माह के भीतर ऐसे शौचलयों को अस्वच्छ शौचालयों में बदलना होगा।

दूषित/ अस्वच्छ शौचालयों का निषेध एवं परिवर्तन (Prohibition and Conversion of Insanitary Latrines)

दूषित शौचलयों का उपयोग करने वालों और इनके मालिकों को अधिनियम लागू होने के 6 माह के भीतर इन शौचालयों के स्थान पर अस्वच्छ शौचालय अपने खर्च पर बनवाने होंगे। यदि वह ऐसा करने में असफल होता है तो स्थानीय संस्था दूषित शौचालय को तोड़कर अस्वच्छ शौचालय बनवाएगी व इसका खर्च उसके मालिक को देना होगा।

मैला ढोन का निषेध व इस कार्य में लगे लोगों का पुनर्वासन (Prohibition and Rehabilitation of Manual Scavengers)

इस सूची में शामिल व्यक्तियों की मदद हेतु एकमुश्त नगद धनराशि उनके बच्चों के लिए स्कॉलरशिप तथा आवासीय भूमि (आर्थिक मदद के साथ) भी देने का प्रावधान किया गया है।

कार्यकारी प्राधिकरण (Implementing Authorities)

प्रत्येक जिलाधिकारी एवं स्थानीय संस्था यह सुनिश्चित करेगी कि-

  • उसके न्याय क्षेत्र में कोई व्यक्ति इस कुप्रथा में न लगा हो।
  • कोई दूषित शौचालय न बनाया जाये।
  • मैला ढोने वालों का पुनर्वास हो।
    • राज्य सरकार निरीक्षकों की नियुक्ति कर सकती है। ये व्यक्ति, शौचालय हेतु क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे तथा मैला ढोने वालों की दशा के संबंध में जानकारी देंगे।
    • केन्द्रीय व राज्य मॉनिटरिंग संस्थाओं तथा प्रत्येक जिले में निरीक्षण समितियों का निर्माण किया जाएगा ताकि योजना को सुचारू रूप से क्रियान्वित किया जा सके। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (संविधानिक निकाय, इस अधिनियम की निगरानी करेगा व शिकायतों की सुनवाई भी करेगा।

दंड (Penalty)

दोषी पाये जाने पर यह अपराध संज्ञेय एवं गैर जमानीती अपराधों की श्रेणी में आएगा। प्रस्ताव के अनुसार प्रथम श्रेणी का न्यायिक अधिकारी इस मामले में सुनवाई करेगा साथ ही अपराध करने के तीन माह के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी।

भारत में अनुसूचित जाति एवं शोषत तबके के संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक रक्षोपायों की मॉनिटरिंग के लिए संस्थाएँ एवं एजेंसी (Institutions and Agencies in India for Monitoring the Constitutional Rights and Social Safeguards for Scheduled Castes and Depressed Class)

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Caste)

संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत 1990 में स्थापित किए गए, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग को 89वें संवैधानिक (संशोधन) अधिनियम, 2003 के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग नामक दो आयोगों में बाँट दिया गया है।

कार्य (Work)

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अनुसूचित जातियों को प्रदत्त रक्षोपायों की निगरानी रखने और साथ ही इनके कल्याण से संबंधित मुद्दों की समीक्षा करने के लिए जिम्मेवार है। संविधान के अनुच्छेद 338 (5) में वर्णित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के कार्य इस प्रकार हैं-

  • संविधान के अंतर्गत या किसी अन्य कानून अथवा सरकार के किसी अन्य आदेश के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को प्रदान किए गए रक्षोपायों के संबंध में सभी मामलों की जाँच करना और मॉनीटर करना तथा ऐसे रक्षापायों के कार्यकरण का मूल्यांकन करना।
  • अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को अधिकारी तथा रक्षापायों से वंचित करने संबंधी विषेश शिकायतों की जाँच करना।
  • अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना तथा संघ या किसी राज्य के अंतर्गत उनके विकास की प्रगति की समीक्षा करना।
  • राष्ट्रपति को उन रक्षोपायों के कार्यकरण पर वार्षिक रूप से या किसी ऐसे अन्य समय में जिसे आयोग उचित समझे, रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
  • ऐसी रिपोर्टो के उन उपायों के बारे में सिफारिशें करना जो अनुसूचित जातियों के कल्याण, सुरक्षा तथा आर्थिक विकास के लिए उन रक्षोपायों और अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए किसी राज्य या संघ सरकार दव्ारा किए जाने चाहिए।
  • अनुसूचित जातियों के कल्याण सुरक्षा विकास तथा उन्नयन के संबंध में ऐसे अन्य कार्यों को करना, जो राष्ट्रपति दव्ारा संसद के किसी कानून दव्ारा या किसी नियम दव्ारा विनिर्दिष्ट किए जाए।

आयोग के पास अनुसूचित जातियों के हितों के संरक्षण सुरक्षा और संवर्धन करने की व्यापक शक्तियाँ हैं।

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (National Commission of Karamchari)

  • राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993 सितंबर में अधिनियमित किया गया था। अधिनियम में शब्द ‘सफाई कर्मचारी’ को इस प्रकार परिभाषित किया गया था-
  • “सफाई कर्मचारी से अभिप्रेरित ऐसे व्यक्ति से है जो मानव मल को उठाने या स्वच्छता कार्य में शामिल या नियोजित है”

अधिनियम के सेक्शन 3 में निम्न कार्यों को करने के लिए राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की स्थापना का उल्लेख है-

  • समयबद्ध कार्रवाई योजना के तहत सफाई कर्मचारियों हेतु स्थितियों, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को समाप्त करने की विशेष कार्रवाई संबंधी कार्यक्रमों के संबंध में केन्द्र सरकार को सिफारिश करना।
  • सफाई कर्मचारियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास से संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं का अध्ययन, मूल्यांकन और कार्यान्वयन करना और ऐसे कार्यक्रमों और योजनाओं के बेहतर समन्वय और कार्यान्वयन के लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को सिफारिशें करना।
  • विशेष शिकायतों की जाँच करना और इनके मामलों के गैर-कार्यान्वयन के संबंध में अपनी ओर से कार्रवाई करना।
    • सफाई कर्मचारियों के किसी भी समूह के संबंध में कार्यक्रम या योजनाएँ।
    • सफाई कर्मचारियों की मुश्किलों को दूर करने संबंधी निर्णय, दिशा-निर्देश या अनुदेश इत्यादि।
    • सफाई कर्मचारियों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए उपाय।
    • सफाई कर्मचारियों के संबंध में किसी कानून के प्रावधान की बावत तथा ऐसे मामलों को संबंधित प्राधिकारियों अथवा केन्द्र सरकार के साथ उठाना।
    • सफाई कर्मचारियों से संबंधित किसी मामले पर केन्द्र और राज्य सरकारों को आवधिक रिपोर्ट देना जिसमें सफाई कर्मचारियों की कोई मुश्किलें या इन्हें किसी प्रकार की कठिनाई पहुँची हो।
    • केन्द्र सरकार दव्ारा इसे निर्दिष्ट कोई अन्य मामला।

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