Public Administration 2: Provisions and New Issues of MGNREGA

Get top class preparation for CTET-Hindi/Paper-1 right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-1.

सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय (Government Policies and Interventions for Development in Various Sectors and Issues Arising Out of Their Design and Implementation)

मनरेगा के प्रावधान (Provisions of MGNREGA)

रोजगार का वैधानिक अधिकार देने वाले मनरेगा की मुख्य विशेषताएँ अथवा प्रावधान निम्नवत्‌ हैं-

  • प्रत्येक ग्रामीण परिवार के कम से कम एक प्रौढ़ सदस्य को वर्ष में कम से कम 100 दिन का गारंटीयुक्त रोजगार प्रदान करने की जिम्मेदारी होगी, जिसमें कम से कम एक-तिहाई स्त्रियाँ होंगी। यह प्रावधान महिला कल्याण के लक्ष्य को भी प्रतिबिंबित करता है। यह प्रावधान इस अधिनियम के लैंगिक रूप से संवेदनशील होने का सूचक है। महिलाओं को रोजगार का वैधानिक अधिकार गाँवों व परिवारों में उनकी स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक है।
  • मनरेगा के अंतर्गत दिया गया रोजगार अकुशल शारीरिक श्रम रोजगार होगा, जिसके लिए वैधानिक न्यूनतम मजदूरी देय होगी तथा जिसका भुगतान कार्य किये जाने के 7 दिन के भीतर देय होगा।
  • रोजगार दिये जाने के संबंध में आवेदन के 15 दिन के भीतर रोजगार प्रदान किया जाएगा तथा रोज़गार श्रमिक के निवास से 5 कि. मी दूरी के भीतर होगा। इससे बाहर काम दिये जाने पर श्रमिक को 10 प्रतिशत अतिरिक्त मजदूरी दी जायगी, जो राज्य सरकार दव्ारा देय होगी। प्रत्येक आवेदक को एक जॉब कार्ड निर्गत किया जाता है, और जॉब कार्ड प्राप्त होने के 15 दिन तक काम प्राप्त न होने पर वह बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करेगा। जॉब कार्ड 5 वर्ष तक वैध रहेगा।
  • यदि इस समय सीमा के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया गया तो आवेदक को बेरोजगारी भत्ता देय होगा जो न्यूनतम वैधानिक मजदूरी के एक-तिहाई से कम नहीं होगा।
  • संपूर्ण ग्राम रोजगार योजना (SGRY) तथा कार्य के लिए राष्ट्रीय अनाज योजना का इसमें विलय का प्रावधान।
  • केन्द्रीय रोज़गार गारंटी परिषद तथा प्रत्येक राज्य सरकार दव्ारा राज्य परिषदों की स्थापना जो इससे संबंधित कार्य संपादित कर सकें।
  • जिला स्तर पर पंचायत अपने सदस्यों की स्टैंडिंग कमेटी बनाती है, जो जिले के भीतर कार्यक्रम की देखरेख, निगरानी तथा क्रियान्वयन देखती है।
  • इस स्कीम के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार प्रत्येक प्रखंड के लिए कार्यक्रम अधिकारी (Programme Officer) की नियुक्ति करती है, और ग्राम पंचायत परियोजनाओं की पहचान, क्रियान्वयन तथा देखरेख के लिए जिम्मेदार होती है।
  • केन्द्र सरकार इसके वित्तीयन (Funding) की व्यवस्था के लिए ‘राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी कोष’ तथा राज्य सरकार ‘राज्य रोज़गार गारंटी कोष’ की स्थापना करती है।
  • पूरी स्कीम इस अर्थ में स्वचयनात्मक (Self Selecting) है कि गरीबों में जो लोग न्यूनतम मज़दूरी पर कार्य करने के इच्छुक हैं वे स्वयं इस स्कीम में कार्य के लिए आते हैं।
  • प्रावधान के तहत यह प्रस्तावित है कि परियोजना से संबंधित मजदूरी भाग का भुगतान (जो कुल लागत का 80 प्रतिशत होगी) केन्द्र सरकार करेगी, जबकि उसमें लगने वाली सामग्री (Materials) की लागत का 75 प्रतिशत तथा प्रशासनिक लागत का कुछ भाग केन्द्र सरकार वहन करेगी। इसमें होने वाले व्यय को केन्द्र तथा राज्य सरकार 90: 10 के अनुपात में वहन करती हैं। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत इस स्कीम की क्रियान्वयक इकाई है तथा परिवार लाभ प्राप्तकर्ता इकाई है।

ध्यातव्य है कि मनरेगा के अंतर्गत जल संभरण, वाटरशेड मैनेजमेंट, बाढ़ तथा सूखा प्रबंधन, वानिकी (Forestry) , भूमि विकास, गाँवों को सड़क के दव्ारा जोड़ना एवं मरूथल विकास आदि से संबंधित परियोजनाओं में रोजगार प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार रोज़गार के दव्ारा अर्थव्यवस्था में संपत्ति का सृजन होगा। मनरेगा के अंतर्गत 2008 - 09 में 4.31 करोड़ परिवारों, 2009 - 10 में 5.26 करोड़ परिवारों तथा 2010 - 11 में 4.1 करोड़ परिवारों को रोज़गार दिया गया। 2009 - 10 में लाभान्वित होने वाले अनूसचित जाति का प्रतिशत 29, अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत 22 तथा महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत रही।

मनरेगा से जुड़े नये मुद्दे (New Issues of MGNREGA)

हाल के समय (2011 - 2012) मनरेगा को अधिक प्रभावी व परिणाममूलक बनाने के उद्देश्य से कुछ महत्वपूर्ण प्रयास किये गये है। इनमें से प्रमुख निम्नवत्‌ हैं-

  • मनरेगा के तहत दी जाने वाली दैनिक मजदूरी में वृद्धि का निर्णय-केन्द्र सरकार ने महात्मा गांधी रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत दी जाने वाली दैनिक मजदूरी में वृद्धि की है। यह वृद्धि 1 अप्रैल, 2012 से प्रभावी हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय दव्ारा स्पष्ट किया गया है कि मनरेगा की दिहाड़ी को खेतिहर मजदूरों के अनुसार देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत बिहार और झारखंड में मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में मात्र 2 रु. तथा उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में 5 रु. की वृद्धि की गई है। अब मनरेगा मजदूरों को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 125 रु. तथा बिहार एवं झारखंड में 122 रु. दैनिक मजदूरी प्राप्त होगी। इस प्रकार सबसे कम मजदूरी बिहार व झारखंड में होगी।
    • उल्लेखनीय है कि सरकार ने वर्ष 2011 में ही मनरेगा की दैनिक मजदूरी में वृद्धि की घोषणा की थी। ग्रामीण विकास मंत्रालय दव्ारा उस समय स्पष्ट किया गया था कि सरकार संसद के बजट सत्र में मनरेगा कानून की धारा 6 (1) में संशोधन प्रस्ताव लाएगी, जिसके माध्यम से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी दरों व न्यूनतम मजदूरी अंतर को दूर किया जाएगा। मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी में इस वृद्धि से सरकारी खजाने पर लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। विभिन्न राज्यों व संघशासित प्रदेशों में मनरेगा के तहत नई मजदूरी इस प्रकार है- हरियाणा (191 रु.) पंजाब (166 रु.) , केरल (164 रु.) , कर्नाटक (155 रु.) , असम (136रु.) , आंध्र प्रदेश (137 रु.) , अरुणाचल प्रदेश (124 रु.) , गुजरात (134 रु.) , अंडमान दव्ीप (178 रु.) , निकोबार दव्ीप (189 रू.) व चंडीगढ़ (189 रु.) ।
  • मनरेगा के तहत सूखा प्रभावित राज्यों में रोज़गार संबंधी नवीन निर्णय- सूखा पर, अधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह (EGOM) की बैठक में 11 सितंबर, 2012 को निर्णय लिया गया कि सूखा प्रभावित राज्यों में मनरेगा के तहत अब 150 दिन का रोज़गार मिलेगा तथा इसके साथ ही फसल ऋण पर ब्याज दर को घटा कर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। दोनों राहत केवल वर्ष भर के लिए होगीं। इसका लाभ उन 7 प्रतिशत परिवारों को मिलेगा जिन्होंने 100 दिन का काम पूरा कर लिया है। ध्यातव्य है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के 390 से अधिक प्रखंडों में सूखा घोषित किया गया था। इसका फायदा सिर्फ इन्हीं प्रखंडों के लोगों को होगा।
  • सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्‌स) मनरेगा के साथ मिलाने का निर्णय-सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वनयन मंत्रालय ने एमपीलैड्‌स को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के साथ मिलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। केन्द्र सरकार ने अधिक स्थायी परिसंपत्ति के निर्माण के उद्देश्य से एमपीलैड्‌स को मनरेगा के साथ मिलाने का निर्णय किया है। सरकार के इस निर्णय के पश्चात्‌ अब सांसद वर्ष के लिए जिला पंचायत दव्ारा मंजूर मनरेगा परियोजना में से एमपीलैंड्‌स के अंतर्गत कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। शर्त यह होगी कि यह जिला कार्यक्रम संयोजक दव्ारा स्वीकृत हो और जिले के मनरेगा कार्यक्रम के अंतर्गत मंजूर वार्षिक कार्य योजना का हिस्सा हो।

Developed by: