Public Administration: Health Check-Ups and Referral Services

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केंद्र व राज्य दव्ारा समाज के असुरक्षत तबकों के लिए कल्याण योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

स्वास्थ्य जाँच (Health Check-Ups)

इसके अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की स्वास्थ्य देखरेख, गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व देखरेख एवं प्रसवोपरांत माताओं की नर्सिंग होम संबंधी देखरेख शामिल है। आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और प्रारंभिक स्वास्थ्य केन्द्र में बच्चों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवायें हैं-नियमित स्वास्थ्य जाँच, वजन की जाँच, टीकाकरण, कुपोषण का प्रबंधन, अतिसार का उपचार, सामान्य दवाओं का वितरण आदि।

संदर्भित सेवायें (Referral Services)

स्वास्थ्य जाँच और वृद्धि की निगरानी के दौरान रोगी या कुपोषित बच्चे जिन्हें तत्काल चिकित्सा कीे आवश्यकता होती है उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या इसके उपकेन्द्र भेज दिया जाता हैं। आँगनवाड़ी कार्यकर्ता छोटे बच्चों में अक्षमता की जाँच करने में भी सक्षम होती हैं। वे ऐसे सभी मामलों को विशेष रजिस्टर में लिखती है और उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या उपकेन्द्र के चिकित्सा अधिकारी (Medical Officer) को भेज देती हैं।

विद्यालय पूर्व अनौपचारिक शिक्षा (PSE) (Non-Formal Pre- School Education (PSE) )

ICDS योजना के घटक के रूप में विद्यालय पूर्व अनौपचारिक शिक्षा (PSE) को इसकी (ICDS योजना की) रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसकी सभी सेवायें आँगनवाड़ी केन्द्र (सामान्यत: गांव के किसी विशिष्ट स्थान) से वितरित की जाती हैं। आँगनवाड़ी केन्द्र- (गांव में आँगनवाड़ी केन्द्र के रूप में सुनिश्चित कोई स्थान) इन सेवाओं को प्रदान करने वाला प्रमुख मंच है। देश के हर गांव में ये आँगनवाड़ी केन्द्र खोले गये हैं। जैसा कि ICDS में उल्लिखित है PSE का मुख्य बल मुख्य रूप से वंचित तबकों के 6 वर्ष तक के बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करने पर हैं। आँगनवाड़ी केन्द्र में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को प्राकतिक, उत्साहपूर्ण और बेहतरीन वातावरण उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें सर्वोत्कृष्ट विकास एवं वृद्धि के लिए आवश्यक सभी आगमों पर बल दिया गया हैं।

पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा (Nutrition and Health Education)

पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा (NMED) आँगनवाड़ी कार्यकर्ता के कार्य का मुख्य घटक है। यह व्यवहार परिवर्तन संचार (Behaviour Change Communication-BCC) रणनीति का एक हिस्सा है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य विशेष रूप से 15 - 45 आयु वर्ग की महिलाओं का क्षमता निर्माण करना ताकि वे अपने साथ-साथ अपने परिवार एवं बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण एवं विकास का ध्यान रख सकें।

  • वित्त पोषण प्रतिरूप: ICDS एक केन्द्र प्रायोजित योजना है जिसे राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासन दव्ारा लागू किया जाता है। 2005 - 06 से पहले पूरक पोषण, जिसे राज्य अपने संसाधनों दव्ारा उपलब्ध कराते थे, के अतिरिक्त अन्य आगमों के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता भारत सरकार देती थी। लेकिन संसाधनों की कमी के चलते अनेक राज्य पर्याप्त रूप से पूरक पोषण उपलब्ध नहीं करा रहे थे, अत: 2005 - 06 में यह निर्णय लिया गया कि वित्तीय आवश्यताओं का 50 प्रतिशत या पूरक पोषण पर राज्य दव्ारा किये गये व्यय का 50 प्रतिशत इनमें से जो भी कम हो; केन्द्र दव्ारा दिया जाएगा।
  • वर्ष 2009 - 10 से, भारत सरकार ने ICDS योजना के धनराशि आवंटन प्रतिरूप में बदलाव किया है। उत्तरपूर्वी राज्यों के मामले में केन्द्र व राज्य के बीच धनराशि बँटवारे का अनुपात 50: 50 से बदलकर 90: 10 कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों और संघ राज्यों में वर्तमान 50: 50 प्रतिरूप ही लागू है। बहरहाल, ICDS के अन्य सभी घटकों के लिए यह अनुपात 90: 10 कर दिया गया है (पहले यह 100 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता के रूप में था)

एकीकृत बाल संरक्षण योजना (ICPS) [Integrated Child Protection Scheme (ICPS) ]

  • बच्चों के अधिकारों के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को सम्मान देने और बाल हिंसा के प्रति बढ़ती दंड की कमी को देखते हुए, 11वीं योजना ने सुझाव दिया कि बच्चों के संरक्षण के लिए विविध योजनाओं को एक व्यापक बाल संरक्षण कार्यक्रम के अधीन लाया जाना चाहिए। इसलिए 2009 में एकीकृत बाल संरक्षण योजना लागू की गई, जिसके लिए 11वीं योजना में 1,073 करोड़ रुपये आवंटित किये गये। इस योजना में तीन अन्य योजनायें शामिल हैं- बाल न्याय हेतु कार्यक्रम, सड़क बच्चों के लिए एकीकृत कार्यक्रम और बच्चों के लिए सहायता गृह (शिशु गृह) आदि।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, इस व्यापक केंद्र प्रायेजित योजना को 2009 - 10 से राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के दव्ारा एक पूर्व परिभाषित लागत बँटवारा (Cost Sharing) वित्तीय प्रतिरूप्ज्ञ के माध्यम से क्रियान्वित करवा रहा है। योजना के उद्देश्य विषम परिस्थितियों में रह रहे बच्चों की दशा में सुधार करना दुर्व्यवहार, उपेक्षा, शोषण, परिव्यक्त तथा माता पिता से अलग होने जैसी सिथतियों व ऐसे कारकों में कमी लाने का प्रयास करना आदि है।
  • देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को ICPS संरक्षात्मक, सांविधिक, देखरेख और पुनर्वास सेवायें उपलब्ध कराता है तथा साथ ही कानून प्रक्रिया से जुड़े रहे बच्चों को बाल न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) कानून 2000 और इसके संशोधन, 2006 दव्ारा राहत पहुँचाने का कार्य करता है।
  • योजना के तहत वित्तीय सहायता भी दी जाती है ताकि बाल न्याय कानून के अधीन बाल कल्याण समितियाँ (CWCs) और बाल न्याय बोर्ड जैसे साविधिक निकाय गठित किए जाए।
  • जम्मू कश्मीर के अतिरिक्त सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इस योजना को लागू करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कियें हैं। योजना, राज्य सरकारों/सघ राज्य क्षेत्रों में बच्चों के संरक्षण संबंधी मुद्दों पर समझ बनाने में बेहद सफल रही है। सभी भागीदारों दव्ारा इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता दी गई है ताकि सभी बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण का निर्माण हो सके।

राष्ट्रीय बाल कोष (Rashtriys Bal Kosh)

राष्ट्रीय बाल कोष का उद्देश्य 9 फरवरी 2004 को महिला एवं बाल विकास विभाग भारत सरकार दव्ारा अधिसूचित राष्ट्रीय बाल चार्टर के अनुसार में स्वेच्छिक संगठन और राज्य सरकारों के माध्यम से विभिन्न सेवा वंचित क्षेत्रों (जिनमें जनजातीय एवं सुदूर क्षेत्र शामिल हैं) में प्राकृतिक आपदाओं, विपत्ति, परेशानी से पीड़ित बच्चों तथा कैदियों के बच्चों, दंगा पीड़ित बच्चों और तस्करी तथा वैश्यावृत्ति आदि से पीड़ित बच्चों के लिए व्यक्तियों, संस्थाओं, कॉरपोरेट ताकि अन्य दव्ारा धन जुटाना है।

बालिका समृद्धि योजना (Balika Samriddhi Yojana (BSY) )

परिचय (Introduction)

बालिका समृ. द्ध योजना 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना है जिनमें केंद्र सरकार के नियमों, निर्देशों और शर्तों के अधीन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

योजना के उद्देश्य (Objectives of this Yojana Are)

  • बालिका व उसकी माता के प्रति नकारातमक पारिवारिक व सामुदायिक नजरिए में परिवर्तन लाना।
  • विद्यालय में बालिकाओं के पंजीकरण और विद्यालय में बालिकाओं को बनाए रखने में सुधार करना।
  • आय उत्पादक गतिविधियों में बालिकाओ को सहयोग देना।
  • बालिकाओं की विवाह की आयु को बढ़ाना।
  • बालिका समृद्धि योजना संपूर्ण भारत के गाँवों और शहरों के सभी जिलों में लागू होती है।
  • बालिका समृद्धि योजना के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भारत सरकार दव्ारा परिभाषित गरीबी रेखा से नीचे रहले वाले परिवारों की ऐसी लड़कियाँ शामिल होगी, जो 15 अगस्त, 1947 या उसके बाद पैदा हुई है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वर्ण जंयेती ग्राम स्वरोजगार योजना, जिसे 1.4. 1999 से पूर्व एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था, दव्ारा परिभाषित मानकों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे के परिवार लक्षित समूह के अंतर्गत आंएगे।
  • शहरी क्षेत्रों में लक्षित समूह वे परिवार होंगे जो शहरी असंगठित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और जो कूड़़ा बीनने, सब्जी/मछली बेचने, फूल बेचने आदि का कार्य करते हैं तथा सड़क किनारे निवास करते हैं।

इस योजना की मुख्य विशेषताएँ (Salient Features of this Yojana)

बालिका समृद्धि योजना के तहत पात्र बालिका को निम्न लाभ मिलेंगे-

  • जन्मोपरांत 500 का सहायता अनुदान।
  • 15.8. 1997 को या उसके बाद जन्मी बालिका जो BSY के अधीन आती है और यदि विद्यालय जाने लगी है तो उसे वार्षिक छात्रवृत्ति मिलेगी।
  • जन्मोपरांत दी जाने वाली अनुदान राशि के एक हिस्से अथवा वार्षिक छात्रवृत्ति की राशि को बालिका के नाम से भाग्यश्री बालिका कल्याण बीमा योजना के प्रीमियम के रूप में दिया जा सकता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जन्मोपरांत दी जाने वाली अनुदान राशि और वार्षिक छात्रवृत्ति महिला और बाल विकास मंत्रालय दव्ारा दी जाएगी।
  • ग्राम पंचायतें/नगरपालिकायें (जहाँ चुना गया निकाय उपस्थित है) अपने क्षेत्रों में BSY के अधीन लाभार्थियों की पहचान करेंगी।
  • ग्राम स्तरीय स्टाफ जैसे आँगनवाड़ी कार्यकर्ता (Auxiliary Nurse Midwives ANM) , ग्रामीण कर लेखाधिकारी, विद्यालय के अध्यापक, पंचायत/नगरपालिका स्टाफ का प्रयोग, पात्र लाभार्थियों की पहचान करने उन्हें BSY के विषय में बताने, आवेदन फार्म देने, फार्म भरने में मदद करने और भरे फार्म एकत्र करने में किया जाता है।
  • पात्र लाभार्थियों की सूची मासिक आधार पर कार्यकारी संस्थाओं को सौंपी जाएगी। निकट की किसी राष्ट्रीय बैंक या पोस्ट ऑफिस में बालिका के नाम खाता कार्यकारी संस्था दव्ारा खोला जाएगा।
  • 18 वर्ष की आयु पूरी होने तथा ग्राम सभा/नगरपालिका दव्ारा इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर वह अविवाहित है, कार्यकारी संस्था बैंक अथवा पोस्ट ऑफिस को इस बात के लिए प्राधिकृत करेगी कि वे बालिका को उसके खाते में जमा राशि की परिपक्व राशि की ब्याज सहित प्रदान करें।

किशोरी शक्ति योजना (KSY) (Kishori Shakti Yojana (KSY) )

  • किशोरी शक्ति योजना किशोर बालिकाओं को सक्षम बनाती है ताकि वे अपने जीवन को संभाल सके। यह किशोर बालिकाओं के संपूर्ण विकास हेतु एक पहल है। यह उन्हें उनकी पूर्ण क्षमता का प्रयोग करने की अनुमति देती है।
  • यह योजना, किशोरी बालिका योजना का पुननिर्माण है जिसे केन्द्र प्रायोजित एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) के घटक के रूप में लागू किया गया था।
  • योजना का व्यापक उद्देश्य किशोरियों के पोषण, स्वास्थ्य एवं विकास स्तर को सुधारना, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण व पारिवारिक देखभाल के प्रति जागरूक बनाना; जीवन कौशल सीखने में, स्कूल जाने में मदद करना, उन्हें एक बेहतर वातावरण देने में सहयोग देना और समाज का उत्पादक सदस्य बनाने में मदद करना है।

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