Public Administration 2: Scheduled Caste Sub-Plan (SCSP) -Objective and Strategy

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केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and Sate)

अनुसूचित जाति उपयोजना (Scheduled Caste Sub-Plan- SCSP)

  • विभिन्न संवैधानिक रक्षोपायों और इस संबंध में सन्‌ 1951 से ही लागू की गई विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के बावजूद अनुसूचित जातियों के लोग विभिन्न सामाजिक-आर्थिक सूचकांको में काफी पीछे रहे हैं। ‘भारत में मानव निर्धनता और सामाजिक रूप से वंचित समूह’ पर यूएनडीपी इंडिया रिपोर्ट (2007) के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर अनुसूचित जातियों का मानव विकास सूचकांक 0.303 अनुमानित है, जो गैर- अनुसूचित जातियों/जनजातियों के एचडीआई (वर्ष 1980 - 2000 की अवधि के लिए 0.393) से कम हैं भारत में सामाजिक समूहों के बीच रोजगार और बेराजगारी की स्थिति पर नेशनल सैम्पल सर्वे ऑर्गनाइजेशन ने अपनी रिपोर्ट (61वाँ क्र, जुलाई 2004-जून 2005) में बताया है कि इस दौरान श्रम बल में सबसे ज्यादा अनुसूचित जनजाति, उसके बाद अनुसूचित जाति तथा उसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग का अनुपात था। इन समूहों हेतु श्रम बल का प्रतिशत क्रमश: 55 % , 44 % , एवं 40 % था।
  • अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जातियों के अनवरत और व्यापक सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए इन समूहों को अत्यंत प्रभावी ढंग से लाभान्वित करने हेतु नई नीतियों की जरूरत महसूस की गई। सरकार ने 1976 में एक पृथक विकास योजना तैयार की जिसे अनुसूचित जनजाति हेतु जनजातीय उपयोजना (Tribal Sub Plan for STs) के नाम से जाना गया। इसके बाद 1978 में अनुसूचित जातियों के लिए ‘स्पेशल कंपोनेट प्लान’ आया जिसका नाम बाद में बदलकर ‘अनुसूचित जाति उपयोजना’ (SCSP) रख दिया गया। छठी योजना में पूर्व की योजनाओं के दौरान अनुसूचित जाति के विकास की अत्यंत धीमी गति के प्रमुख कारण के रूप में आर्थिक सहायता के अभाव को चिन्हित किया गया। अनुसूचित जातियों के मध्य निर्धनों में निर्धनतम को पहचानने के लिए जो रणनीति बनाई गई उसमें तीन उपकरणों को सम्मिलित किया गया-
    • राज्य एवं केन्द्रीय मंत्रालयों की विशेष कंपोनेंट योजना (SCP)
    • विशेष केन्द्रीय सहायता
    • राज्यों में अनुसूचित जाति विकास निगम (SCDCs)
  • अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) को इस प्रकार तैयार किया गया है कि इससे अनुसूचित जातियों का भौतिक एवं वित्तीय अर्थों में समुचित विकास हो सके। छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान इन योजनाओं का उद्देश्य समन्वित आय उत्पादक कार्यक्रमों (Composite Income Generating Programme) के जरिए गरीब अनुसूचित जाति के परिवारों की मदद करना था। इन परिवारोन्मुखी कार्यक्रमों के अंतर्गत अनुसूचित जातियों के सभी पेशागत समूह जैसे कृषि, मजदूर, लघु एवं सीमांत किसान, साझा फसलोत्पाक (बंटाईदार) , मछुआरे, सफाईकर्मी हाथ से मैल ढोने वाला तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले शहरी असंगठित मजदूर आते हैं। इसके अतिरिक्त पेय जल आपूर्ति ग्रामों को सड़क से जोड़ना, आवास स्थल, आवास-मरम्मत तथा कुछ सेवाओं जैसे प्राथमिक पाठशालाएँ, स्वास्थ्य केन्द्रों, पशुचिकित्सा केन्द्रों, पंचायत घरों, सामुदायिक भवनों, पोषण केन्द्रों, ग्रामीण विद्युतीकरण, सार्वजनिक सुविधा केन्द्रों आदि प्रावधानों के माध्यम से विशेष घटक योजनाओं (Special Component-plan-SCP) का उद्देश्य अनुसूचित जातियों के लोगों का जीवन स्तर उठाना भी है। केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे भी अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) का सूत्रपात करें और यह सुनिश्चित करें कि निधियों का प्रवाह देश की अनुसूचित जाति के लोगों को अनुपातिक दृष्टि से लाभ पहुँचाए।

अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) -उद्देश्य एवं रणनीति (Scheduled Caste Sub-Plan (SCSP) - Objective and Strategy)

1979 से लेकर अब तक अनुसूचित जाति उपयोजना की रणनीति निम्न बिन्दुओं पर केन्द्रित रही है-

  • आय बढ़ाने और परिसंपत्तियाँ सृजित करने हेतु लाभार्थी उन्मुख कार्यक्रमों के माध्यम से आर्थिक विकास।
  • पेयजल आपूर्ति, लिंक सड़कों, आवास आदि के प्रावधान के माध्यम से संरचनात्मक विकास हेतु बस्ती-उन्मुख योजनाएँ।
  • शैक्षिक एवं सामाजिक विकास संबंधी क्रियाकलाप जैसे प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केन्द्रों, व्यावसायिक केन्द्रों, सामुदायिक भवनों, महिला कार्यस्थल आदि की स्थापना।

विशेष केन्द्रीय सहायता (Special Central Assistance-SCA)

सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय विशेष केन्द्रीय सहायता की केन्द्रीय योजना (Central Scheme) के तहत SCSP (Scheduled Castes Sub-Plan) को 100 प्रतिशत अनुदान प्रदान करता है। यह अनुदान राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के SCSP के बड़े अंतर की भरपाई करने हेतु दिया जाता है। यह अनुदान योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दृष्टि से सहायक संरचनात्मक विकास के साथ परिवारोन्मुखी आय सृजन योजनाओं में विलुप्त महत्वपूर्ण आगम की भरपाई के लिए भी दिया जाता है। विशेष केन्द्रीय सहायता (SCA) का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों को उनकी उत्पादकता एवं आय बढ़ाने हेतु अतिरिक्त सहायता प्रदान करना है। SCA का प्रयोग उन खंड क्षेत्रों (Blocks) में भी सरंचना विकास हेतु किया जा सकता है जहाँ की कुल जनसंख्या का 50 प्रतिशत या उससे अधिक अनुसूचित जाति से संबंधित हो।

SCSP के अनुसार अनुसूचित जाति के लाभ हेतु क्रियान्वित की जाने वाली योजनाएँ (Important Schemes to be Implemented for the Benefit of SCs and Per SCSP)

राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों दव्ारा क्रियान्वयन हेतु सुझायी गई कुछ योजनाओं का विवरण-

  • सर्वप्रथम उन गाँवों को छाँटना चाहिए जिनमें अनुसूचित जाति/जनजाति की जनंसख्या 50 प्रतिशत या इससे अधिक हो और उसके बाद इन गाँवों में भारत निर्माण योजना के तहत सभी विकासात्मक गतिविधियाँ जैसे- विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण आदि क्रियान्वित करना।
  • प्रत्येक संभागीय मुख्यालय में एक पॉलीटेक्निक संस्थान की स्थापना की जानी चाहिए। अनुसूचित जाति हेतु नर्सिंग व पैरामेडिकल प्रशिक्षण कोर्स हेतु एक या दो प्रशिक्षण महाविद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए।
  • राज्य व राज्य के बाहर बेरोजगार अनुसूचित जाति के युवाओं हेतु रोजगार के अवसर जुटाने की दृष्टि से रोजगार योग्य कौशल प्रदान करने के लिए प्रत्येक जिले में अच्छी गुणवत्ता वाले आई. टी. आई केन्द्रों की स्थापना करना।
  • विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य सेवाओं में प्रवेश हेतु तैयारी करने वाले अनुसूचित जाति को किसी भी प्रतिष्ठित निजी प्रशिक्षण केन्द्र में प्रवेश लेने की सुविधा दिलाना तथा उनकी पूरी फीस की व्यवस्था निधियों से सरकार दव्ारा किया जाना।
  • प्राइवेट महाविद्यालयों एवं संस्थानों में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति निधियों से समाज कल्याण विभाग दव्ारा किया जाना।
  • ऐसे गाँवों विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में जहाँ भूमि उपलब्ध नहीं है, इंदिरा आवास योजना के तहत बेघरों को गृह निर्माण हेतु भूमि खरीदकर उन्हें उपलब्ध कराना।
  • अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में सदैव खाद्यान्नों का अभाव रहता है, अत: राज्य सरकारों से अपेक्षित है कि वह 5 - 10 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वाले स्वयं सहायता समूह का चुनाव करे और इन्हें आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के वितरण हेतु राशन की दुकानों का आवंटन किया जाए। उन्हें 5 लाख रुपए तक का सब्सिडी/ऋण (वसूली योग्य) भी प्रदान किया जा सकता है।
  • शहरी झुग्गी झोपड़ी वाले इलाकों में अनुसूचित जाति से संबंधित परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु एक सामुदायिक भवन की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • स्बांंधित जिला/खंड विशेष के अंतर्गत आने वाले विभिन्न पंचायत क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जाति के लोगों की विकासात्मक आवश्यकताओं का पता लगाने की जिम्मेदारी जिला/ब्लॉक स्तरीय मॉनीटरिंग समितियों को सौंपना।

अनुसूचित जाति विकास निगम (Scheduled Castes Development Corporation-SCDC)

  • अनुसूचित जाति विकास निगम की स्थापना सन्‌ 1978 - 79 में केन्द्र राज्य के 49: 51 के अनुपात में राज्य निगमों की समान भागीदारी की दृष्टि से केन्द्रीय क्षेत्रक योजना (Central Sector Scheme-CSS) के रूप में की गई थी। अनुसूचित जाति विकास निगम रोजगार उन्मुख योजनाओं का वित्तपोषण करती है जिसके अंतर्गत-सूक्ष्म सिंचाई सहित कृषि एवं संबद्ध क्रियाएँ, लघु उद्योग, परिवहन, व्यापार एवं सेवा क्षेत्र सम्मिलित है। यह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (National Scheduled Castes Finance and Development Corporation-NSFDC) / बैंकों से ऋण प्रभाग से जुड़ी परियोजनाओं का भी वित्तपोषण करती है।
  • जनजातीय उपयोजना (Tribal Sub-plan-TSP) एवं अनुसूचित जाति उपयोजना (Scheduled Caste Sub-plan-SCSP) से जुड़े मामलों की देखरेख हेतु एक केन्द्रीय स्थायी त्रिपक्षीय समिति (Central Standing Tripartite Committee-CSTC) का गठन मई 1999 में किया गया था। इसमें योजना आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग, सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय तथा राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों के मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि शामिल थे। SCSP एवं TSP के सूत्रपात, क्रियान्वयन एवं मॉनीटरिंग (अनुवीक्षण) की समीक्षा करने तथा योजना आयोग एवं प्रधानमंत्री को उन उपायों जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए अधिक प्रभावी हो सकते थे, के लिए CSTC का पुनर्गठन 2006 के आरंभ में किया गया।

SCSP हेतु 2006 में योजना आयोग दव्ारा जारी मुख्य दिशा निर्देश (Main Guidelines for SCSP as Issued by Planning Commission in 2006)

  • कुल राज्य योजना से SCSP एवं TSP हेतु निधियों का निर्धारण कम से कम उस राज्य/संघ शांसित क्षेत्र की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की आबादी के समानुपाती होना चाहिए।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हित व विकास से जुड़े समाज कल्याण/जनजातीय कल्याण विभाग को SCSP के नीति निर्धारण व क्रियान्वयन हेतु नोडल विभाग बनाना।
  • SCSP एवं TSP हेतु निर्धारित निधियों को प्रत्येक विकास विभाग के लिए पृथक बजट मद/उप-मद में बाँटना।
  • संबंधित विभागों एवं क्रियान्वयन एजेंसियों को 100 प्रतिशत बजट प्रावधानों, मंजूरियों व समय पर निधियों की व्यवस्था करने के आग्रह के साथ SCSP व TSP की सहायता करना।
  • SCSP एवं TSP के तहत केवल उन्हींं योजनाओं को शामिल करना जो प्रत्यक्षत: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े लोगों व परिवारों के हितों को सुनिश्चित करे।
  • 10 वर्षों के भीतर शेष जनसंख्या और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोगों के बीच की खाई पाटने के उद्देश्य से प्रत्येक योजना हेतु SCSP एवं TSP से संबंधित विस्तृत भौतिक व वित्तीय प्रलेख तैयार करना।

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