Public Administration: National Commission for Scheduled Castes and Scheduled Tribes

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अनुसूचित जातियों, शोषित वर्ग, अल्पसंख्यकों व अनुसूचित जनजातियों की बेहतरी एवं संरक्षण हेतु तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Law, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Scheduled Castes, Depressed Class, Minorities and Scheduled Tribes)

राष्ट्रीय अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग (सांविधिक) (National Commission for Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Statutory) )

  • एक सांविधिक बहु-सदस्यीय राष्ट्रीय अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग स्थापित करने के लिए एक नया विधेयक, अर्थात संविधान (पैसठवाँ संशोधन) विधेयक, 1990 संसद में पेश किया गया था। संसद दव्ारा पारित विधेयक को 7 जून, 1990 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली और यह 8 जून, 1990 को अधिसूचित किया गया। को अधिसूचित किया गया। राष्ट्रीय अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधी नियम 3 नवंबर, 1990 को अधिसूचित किए गए थे। इस अधिनियम को 12 मार्च, 1992 से लागू किया गया था।
  • संविधान (पैंसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1990 दव्ारा यथासंशोधित अनुच्छेद 338 में यह उपबंध किया गया है कि आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और पाँच अन्य सदस्य होंगे और उनकी सेवा की शर्तें, उनके पद का कार्य-काल ऐसा होगा, जो राष्ट्रपति नियम दव्ारा निर्धारित करेगा।

राष्ट्रीय 130अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग का विभाजन और संविधान के अनुच्छेद 338 क के अंतर्गत एक अलग राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना (Division of National Scheduled Castes and Scheduled Tribes the Establishment of a Different National Commission for Scheduled Ribes under Article 338 A)

  • संविधान के निर्माताओं ने यह महसूस कर लिया था कि भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अनुसूचित जनजातियों की आवश्यकताएँ और समस्याएँ अनुसूचित जातियों से भिन्न हैं और, इसलिए अनुसूचित जातियों का सर्वोन्मुखी विकास करने के लिए एक विशेष कार्य-पद्धति की आवश्यकता है।
  • अक्टूबर, 1999 में, अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और विकास की ओर सूक्ष्मता से ध्यान केन्द्रित करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय नाम से एक नया मंत्रालय बनाया गया था। यह जरूरी समझा गया था कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के अनुसूचित जनजातियों से संबंधित सभी क्रियाकलापों को समन्वित करना चाहिए, क्योंकि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के लिए इस भूमिका को निभाना प्रशासनिक रूप से साध्य नहीं होगा।
  • यह भी आवश्यक समझा गया कि अनुसूचित जनजातियों के लिए संविधान के रक्षोपायों के कार्यान्वयन को अधिक कारगर ढंग से मॉनीटर करने के लिए मौजूदा राष्ट्रीय अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग को विभाजित करके राष्ट्रीय अनसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की जानी चाहिए। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 338 को संशोधित करके और संविधान (नवासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 दव्ारा संविधान में नया अनुच्छेद 338 (क) शामिल करके 19 फरवरी, 2004 से की गई थी।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य (सेवा की शर्ते और कार्य-काल) नियम, 2004 फरवरी, 20.2004 को अधिसूचित किए गए थे। इन नियमों में अन्य बातों के साथ-साथ यह व्यवस्था है कि अध्यक्ष उपाध्यक्ष और सदस्य उस तारीख से, जब वे ऐसा पद ग्रहण करेंगे तीन वर्ष तक की अवधि के लिए पद धारण करेंगे। आयोग के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को क्रमश: संघ के मंत्रिमंडल के मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कृत्य, कर्तव्य और शक्तियाँ (Functions, Responsibility and Powers of National Commission for Scheduled Tribes)

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कृत्य, कर्तव्य और शक्तियाँ संविधान (नवासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 दव्ारा यथा संशोधित संविधान के अनुच्छेद 338 क के खंड (5) , (8) और (9) दव्ारा निर्धारित की गई हैं।

  • संविधान के अंतर्गत अथवा तत्समय लागू किसी अन्य कानून अथवा सरकार के किसी अन्य आदेश के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के लिए उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी मामलों का अन्वेषण और अनुवीक्षण करना और इन रक्षोपायों के कार्यकरण का मूल्याकरन करना।
  • अनुसूचित जनजातियों को उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने के संबंध में विशिष्ट शिकायतों की जाँच करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना और संघ तथा किसी राज्य के अंतर्गत उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना।
  • इन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे में प्रति वर्ष और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को प्रतिवेदन प्रस्तुत करना।
  • ऐसे प्रतिवेदनों में उन उपायों के बारे में, जो उन रक्षोपायों के प्रभावकारी कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य दव्ारा किए जाने चाहिए तथा अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करना।
  • अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण, विकास तथा उन्नयन के बारे में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वाह करना, जो राष्ट्रपति संसद दव्ारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन, नियम दव्ारा विनिर्दिष्ट करें।
  • किसी न्यायालय या कार्यालय से कोई लोक अभिलेख या उसकी प्रति अधिग्रहण करना।
  • वे उपाय, जो लघु वन उत्पादों के संबंध में स्वामित्व के अधिकार, वन क्षेत्र में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों के लोगों को प्रदान करने के लिए किए जाने आवश्यक हैं।
  • खनिज संसाधनों, जल संसाधनों आदि पर जनजातीय समुदायों के अधिकारों को विधि के अनुसार सुरक्षित रखने के लिए किए जाने वाले उपाय।
  • जनजातियों के विकास के लिए किए जाने वाले उपाय और आजीविका की और अधिक समक्ष कार्यनीतियों के लिए कार्य करना।
  • विकास परियोजनाओं से विस्थापित जनजातीय समूहों के लिए राहत और पुनर्वास के उपायों की उपादेयता को बढ़ाने के लिए किए जाने वाले उपाय।
  • प्चाांयत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 का पूरा कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए किए जाने वाले उपाय।

केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and Sate)

अनुसूचित जातियाँ एवं शोषित वर्ग (Scheduled Castes and Depressed Classes)

मुख्य तथ्य (Key Facts)

2011 की जनगणना के अनुसार देश में विभिन्न अनुसूचित जातियों के लोगों की संख्या लगभग 20.14 करोड़ दर्ज की गई। 2001 की जनगणना के अनुसार यह संख्या लगभग 16.66 करोड़ थी। अनुसूचित जातियों की जनसंख्या में दशकीय वृद्धि 20.8 प्रतिशत हुई जबकि इसी अवधि के दौरान देश की जनसंख्या में वृद्धि 17.7 प्रतिशत हुई। अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या में 9.79 करोड़ महिलाएँ हैं और इस प्रकार अनुसूचित जातियों का लिंगानुपात 946 (1000 पुरुषों पर) हैंं नागालैंड, लक्षदव्ीप व अंडमान निकोबार दव्ीप समूह में अनुसूचित जातियाँ नहीं हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जातियों की जनसंख्या इस प्रकार है-

(मिलिन अर्थात 10 लाख में)

Scheduled Castes and Depressed Classes
20012011विचलन (%)
कुल योग166.6201.4+ 20.8 %
पुरूष86.1103.5+ 20.3 %
महिलाएँ80.597.9+ 21.5 %

अनुसूचित जातियों का राज्यवार वितरण (जनगणना 2011) (Distribution of Scheduled Caste Population by States (Census 2011) )

Distribution of Scheduled Caste

वर्ष 1998 में स्थापित सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय अनुसूचित जातियों के हितों की देख-रेख हेतु नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है। अनुसूचित जाति विकास ब्यूरो के अधीन यह मंत्रालय अनुसूचित जाति उपयोजना (Scheduled Casts Sub plan) का क्रियान्वयन करता है। यह योजना केन्द्रीय नीतिगत योजना होती है, जिसके माध्यम से अनुसूचित जातियों के विकास से संबंधित सभी योजनाएँ बनाई जाती हैं।

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