Public Administration: National Institute of Social Defence

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भारत में अन्य असुरक्षित समूहों की बेहतरी एवं संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण तंत्र, विधि, संस्थायें एवं निकाय (Important Mechanism, Laws, Institutions and Bodied for Betterment and Protection of Other Vulnerable Groups in India)

अन्य महत्वपूर्ण संगठन (Other Important Organizations)

सामाजिक सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय संस्थान (National Institute of Social Defence)

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण और शोध के लिए सामाजिक सुरक्षा राष्ट्रीय संस्थान एक नोडल संस्था है। हालाँकि सामाजिक सुरक्षा में समाज की सुरक्षा हेतु विभिन्न गतिविधियाँ और कार्यक्रम शामिल हैं, परन्तु यह संस्थान मुख्यत: मानव संसाधान विकास, पदार्थ कुप्रयोग रोकथाम, वृद्धजनों की देखभाल और अन्य मुद्दों (जिनमें भिक्षावृत्ति रोकथाम और बाल संरक्षण शामिल है) से जुड़ा है।

संस्थान का कार्य भारत सरकार के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा दस्तावेज देना है। संस्थान के प्रमुख उद्देश्य हैं-

  • सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नीतियों का पुनर्विलोकन।
  • सामाजिक सुरक्षा समस्याओं की पहचान।
  • सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सुरक्षात्मक, पुनर्वास एवं रक्षात्मक उपाय अपनाना।
  • सामाजिक सुरक्षा नीतियों के उद्देश्य की पूर्ति हेतु उपागमों की पहचान एवं विकास।
  • सामाजिक सुरक्षा नीतियों और कार्यक्रमों को लागू करने के लिए मूल्यांकन
  • सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में स्वैच्छिक प्रयासों को बढ़ावा।

जनसंख्या के असुरक्षित समूहों के लिए केन्द्र और राज्य की कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

वृद्धजन, मादक द्रव्य व्यसनी और सामाजिक सुरक्षा (Elderly, Substance Addicts and Social Security)

वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय नीति (National Policy for Older Persons)

वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय नीति की घोषणा जनवरी, 1999 में निम्नलिखित उदृदेश्यों के साथ की गई- अपनी और अपनी पत्नी की वृद्धावस्था की देखभाल के लिए उन्हे प्रोत्साहित करना, अपने वृद्ध सदस्यों की देखरेख करने के लिए परिवारों को प्रोत्साहन देना, परिवार दव्ारा वृद्ध सदस्यों की देखरेख में पूरक भूमिका निभाने के लिए स्वैच्छिक एवं गैर-सरकारी संगठनों को समर्थन प्रदान करना, असुरक्षित वृद्धजनों की देखरेख एवं संरक्षण प्रदान करना, वृद्धजनों को स्वास्थ्य देखरेख सुविधा प्रदान करना, वृद्धजनों हेतु सेवा संगठनों को प्रशिक्षित करने के लिए अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सुविधाओं को प्रोत्साहित करना ताकि वृद्धजनों को पूर्णत: आत्मनिर्भर बनाने के संबंध में जागरूकता पैदा करना।

वृद्धजनों के लिए राष्यट्रीय परिषद [National Council for Older Persons (NCOP) ]

सरकार ने वृद्धजनों के लिए कार्यक्रम एवं नीतियाँ बनाने में सलाह एवं सहायता पदान करने के लिए राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद का पुनर्गठन किया। यह परिषद राष्ट्रीय वृद्धजन नीति एवं वृद्धजनों की नीति के लिए विशेष पहलकारी उपायों के क्रियान्वयन के संबंध में सरकार को प्रतिपुष्टि प्रदान करती है। वृद्धजनों के कल्याण के लिए नीतियों एवं कार्यक्रमों को बनाने एवं उनके क्रियान्वयन के संबंध में सरकार को सलाह देने एवं सरकार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राष्ट्रीय वृद्धजन परिषद एक शीर्षस्थ निकाय है।

राष्ट्रीय वृद्धजन की राष्ट्रीय नीति, 2011 मसौदा (National Policy on Senior Citizens, 2011 Draft)

नीति के उद्देश्य (Policy Objectives)

नई राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक नीति 2011 की आधारशिला विभिन्न कारकों पर रखी गई है। इनके अंतर्गत वृद्धजनों में जनसांख्यिकीय विस्फोट, बदलता हुआ सामाजिक और आर्थिक परिवेश, चिकित्सा, शोध में प्रगति, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी तथा ग्रामीण वृद्ध निर्धनों में अत्यधिक अभावग्रस्त्ता (51 मिलियन वृद्धजन गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं) इत्यादि शामिल है। वृद्ध पुरुषों की अपेक्षा महिलाएँ बड़ी संख्या में, अकेलापन महसूस करती हैं और अपने बच्चों पर निर्भर है। सामाजिक अपवंचना, अपवर्जन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के नीजिकरण एवं रूग्णता के बदलते स्वरूप का वृद्धजनों पर प्रभाव पड़ता है। 60 वर्ष और इससे अधिक आयु के सभी लोग वृद्धजनों की श्रेणी में आते हैं। इस नीति का संबंध नगरीय एवं गामीण क्षेत्रो में रह रहे वृद्धों तथा मुख्य रूपों में वृद्ध महीलाओं से संबंधित विषयों से है।

नई नीति की मुख्य विशेषताएँ (Salient Features of the New Policy)

  • यह नीति वृद्धावस्था को सुविधाजनक बनाने एवं इसकी गरिमा को बनाए रखने के लिए घरों में ही “वृद्धावस्था जीवन यापन करना” आय की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, वृद्धावस्था पेंशन तथा स्वास्थ्य बीमा योजना तक पहँुच एवं अन्य कार्यक्रमो को बढ़ावा देती है।
  • वरिष्ठ नागरिकों को देश का मूल्यवान संसाधन मानते हुए उनके लिए समान अवसरों, अधिकारों का संरक्षण और समाज में उनकी पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करना। इस उदृदेश्य की प्राप्ति हेतु नीति में यह निर्धारित किया गया है कि ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में गरीब रेखा से नीचे रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को समर्थन एवं उनकी सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखरेख आवास एवं कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए राजकीय समर्थन को बढ़़ाने की सिफारिश की गई है।
  • सरकार को यह सुझाव दिया गया है कि वह माता-पिता का भरण-पोषण एवं वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 का क्रियान्वयन और एक न्यायाधिकरण की स्थापना करे ताकि अपना भरण-पोषण करने में अक्षम माता-पिता परित्यक्त एवं अपेक्षित न रहें।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (IGNOAPS) के अंतर्गत वयोवद्ध व्यक्तियों को शामिल किया गया है। इन व्यक्तियों को नि: शक्तता, युवा बच्चों की मृत्यु तथा पौत्रों एवं घर की महिलाओं की संयुक्त जिम्मेदारी की स्थिति में अतिरिक्त पेंशन प्रदान किया जाएगा। इस प्रावधान की प्रति पाँच वर्ष बाद समीक्षा की जाएगी।
  • गरीबी रेखा से नीचे रह रहे सभी वरिष्ठ नागरिकों तक सार्वजनिक वितरण प्राणाली की पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।
  • काराधान नीतियों को वरिष्ठ नागरिकों की वित्तीय समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा तथा चिकित्सकीय देखरेख, परिवहन तथा घर पर ही आवश्यक सहायक सेवाओं की उच्च लागत को देखते हुए इस संवेदनशीलता में और भी वृद्धि की जाएगी।
  • वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य देखरेख सुविधाओं को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी तथा श्रेष्ठ, वहनीय स्वास्थ्य सेवाओं पर गरीबों को उच्च सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • रोकथाम जन्य, आरोग्य जन्य, स्वास्थ्यकर और पुनर्वास सेवाओं का विस्तार किया जाएगा तथा दव्तीय और तृतीय स्तर पर मजबूत और वृद्धावस्था देखभाल सुविधाएँ उपलब्ध की जाएगी।
  • आशा कार्यकर्ता दव्ारा वर्ष में दो बार ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों के 80 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की विशेष जाँच-पड़ताल का आयोजन किया जाएगा तथा देश में गैर संक्रामक रोगों की पहचान वाले ग्रामीण क्षेत्रों में वृद्ध और उपशामक (Palliative) देखभाल के लिए लोक-निजी सहभागिता को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी स्वास्थ्य बीमा योजना के सार्वभौमिक क्रियान्वयन को सभी जिलो में प्रोत्साहित किया जाएगा तथा वरिष्ठ नागरिकों को अनिवार्य रूप से इस योजना में शामिल किया जाएगा।
  • वरिष्ठ नागरिकों की आँखों की दृष्टि क्षमता को पुन: स्वस्थ करना राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण कार्यक्रम का एक अत्यावश्यक घटक है।
  • वर्तमान में क्रियान्वित किये जा रहे राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम (NPHCE) का शीघ्र ही विस्तार किया जाएगा तथा नागरिक संगठनों की भागीदारी के माध्यम से इसका विस्तार देश के सभी जिलों में किया जाएगा।
  • सरकार दव्ारा सामाजिक सुरक्षा अधिकार से प्राप्त राजस्व के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक कल्याण कोष का गठन किया जाएगा। इससे प्राप्त राजस्व का वितरण राज्यों में उनकी वरिष्ठ नागरिक जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा। राज्य स्वयं भी इसी तरह का कल्याण कोष गठित कर सकते हैं।
  • सभी वरिष्ठ नागरिक विशेषकर विधवाएँ एकल जीवन व्यतीत करने वाली महिलाएँ वयोवृद्ध लोग सरकार की सभी योजनाओं के पात्र होंगे। उन्हें आधार योजना के अंतर्गत प्राथमिकता के तौर पर सार्वभैमिक पहचान उपलब्ध कराई जाएगी।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिक विभाग की स्थापना करेगा, जो वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित सभी कार्यक्रमों एवं योजनाओं तथा राष्ट्रीय वृद्धजन नीति 2011 के क्रियान्वयन के लिए प्रमुख निकाय होगा।
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए केन्द्र स्तर पर एक राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक आयोग तथा राज्य स्तर पर ऐसे ही आयोगों की स्थापना की जाएगी।
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक परिषद की स्थापना की जाएगी। इस परिषद का कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा और वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी तथा वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित विषयों पर मंत्रालय को परामर्श देगी।
  • पंचायती राज संस्थाओं को राष्ट्रीय वृद्धजन नीति 2011 के कार्यान्वयन तथा वृद्धजनों से संबंधित स्थानीय मुद्दों एवं आवश्यकताओं के लिए निर्देश दिया जाएगा।
  • ग्रामीण/जनजातीय क्षेत्रों में जनजातीय परिषद अथवा ग्राम सभा या फिर संबंधित पंचायती राज संस्था इस नीति के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होंगे।

वृद्धजनों के लिए एकीकृत कार्यक्रम (Integrated Programme for Older Persons)

भारत में वृद्धजन जनंख्या में नियमित वृद्धि देखी गई है। वृद्धजनों की जनसंख्या 1951 से 19.8 मिलियन से बढ़कर 2001 में 76 मिलियन हो गई और अनुमान बताते हैं कि 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की संख्या 2013 में 100 मिलियन होगी, जो 2030 में बढ़कर 198 मिलियन पहुँच जाएगी। जीवन प्रत्याशा जो 1947 में 29 वर्ष थी अब कई गुना बढ़कर 63 वर्ष के करीब है।

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