Public Administration: Ministry of Social Justice and Empowerment

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भारत में श्रमिकों की बेहतरी और संरक्षण के लिए तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Labourers in India)

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से इस योजना के क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित अभिकरण उत्तरदायी होंगे (Following Agencies Would be Eligible to Implement the Scheme on Behalf of Ministry of Social Justice and Empowerment)

  • सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत सोसाइटीज।
  • चेरिटेबल ट्रस्ट
  • जिलाअधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी/जिला परिषद के जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटीज तथा अन्य स्वायत निकाय।
  • ALIMCO जैसे शीर्ष राष्ट्रीय संस्थान।
  • राज्य विकलांग विकास निगम।
  • स्थानीय निकाय जैसे-जिला परिषद, नगरपालिकाएँ, जिला स्वायत विकास परिषदे तथा पंचायतें।

दीनदयाल विकलांगजन पुनर्वास योजना (Deendayal Disabled Rehabilitation Scheme)

केन्द्र सरकार नि: शक्त व्यक्तियों के पुनर्वास से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं कायर्कमों के माध्यम से एक के बाद एक पंचवर्षीय योजनाओं में गैर-सरकारी संगठनों को सहायता अनुदान देती आ रही है। नि: शक्त जन अधिनियम (PWD Act) की धारा 66 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए 1999 में नि: शक्त व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधित चार योजनाओं को नि: शक्त व्यक्तियों के लिए स्वैच्छिक गतिविधियों के प्रोत्साहन की योजना नामक एक योजना में समायोजित कर दिया गया। उक्त योजना को संशोधित करके 1 - 04 - 2003 से एक नई योजना “दीनदयाल विकलांगजन पुनर्वास योजना” (DDRS) की शुरूआत की गई।

इस योजना के उद्देश्य हैं (Objectives of the Scheme Are)

नि: शक्त व्यक्तियों के लिए समान अवसर, समता, सामाजिक न्याय तथा सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना। नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1995 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक क्रियाओं को प्रोत्साहन।

दृष्टिकोण एवं रणनीति (Approach and Strategy)

नि: शक्त व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए आवश्यक सभी सेवाओं, जिनमें नि: शक्तता की शीघ्रतिघीघ्र पहचान करना, दैनिक जीवन संबंधी क्षमताओं का विकास, शिक्षा, रोजगार केन्द्रित क्षमताओं का विकास, प्रशिक्षण और जागरूकता शामिल हैं, की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक संगठनों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करना योजना की रणनीति का भाग है। नि: शक्त व्यक्तियों का समाज की मुख्यधारा में समावेशन करने तथा उनकी क्षमताओं का वास्तविक उपयोग करने की दृष्टि से मुख्य बल शिक्षा एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर होना चाहिए। योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मुख्य रणनीति इस प्रकार होगी-

  • सभी स्तरों एवं स्वरूपों में शैक्षिक अवसरों में वृद्धि करना तथा व्यावसायिक अवसरों, आय सृजन और लाभप्रद व्यवसाय के क्षेत्र को विस्तृत करना।
  • नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सुदूर एवं व्यापक समुदाय आधारित पुनर्वास कार्यक्रमों को लागू करना।
  • विभिन्न स्तरों पर सभी सुविधाओं से युक्त संसाधन केन्द्रों की स्थापना करना। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों, मूल संगठनों तथा आत्मनिर्भर जीवन-यापन को प्रोत्साहित एवं उसका समर्थन करना।
  • पर्यावरण मित्र एवं पर्यावरण प्रोत्साहक परियोजनाओं में नि: शक्त लोगों का समर्थन देना।
  • नि: शक्त व्यक्तियों मानव, नागरिक एवं उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित करना।
  • विधिक साक्षरता के साथ-साथ विधि परामर्श, विधिक सहायता और विद्यमान कानूनों के विश्लेषण एवं मूल्यांकन को समर्थन देना।
  • ऐसे उपायों को समर्थन देना जो नि: शक्त लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं तथा नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1995 में निहित उत्तरदायित्वों को पूरा कर सकते हैं।

योजना के अंतर्गत समर्थित मॉडल कार्यक्रम (Model Projects Are Supported under the Scheme)

  • विद्यालय पूर्व एवं विकलांगता की शीघ्रातिशीघ्र पहचान एवं उपचार तथा प्रशिक्षण के लिए योजना।
  • विशेष विद्यालय
  • प्रमस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बालक।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द।
  • स्रांक्षित कार्यशालाएँ
  • कुष्ठरोग से ठीक हुए लोगों के पुनर्वास की योजना।
  • समुदाय आधारित पुनर्वास की योजना।
  • कमजोर दृष्टि केन्द्रों की योजनाएँ
  • जिला नि: शक्तता पुनर्वास केन्द्र

नि: शक्त व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (Scheme of National Scholarships for Persons with Disabilities)

  • नि: शक्त व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत एक वर्ष से अधिक समायावधि के मैट्रिक पश्चात्‌ व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठयक्रमों में पढ़ रहे लोगों के लिए प्रतिवर्ष 500 नई छात्रवृत्तियाँ दी जाती है। जबकि ऐसे विद्यार्थियों के संदर्भ में जो प्रमस्तिष्क पक्षाद्यात से पीड़ित, कम मानसिक विकास वाले, बहुल नि: शक्तता से पीड़ित तथा सुनने की गंभीर अक्षमता से पीड़ित हैं, उन्हें 9वीं कक्षा से ऊपर की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
  • ऐसे विद्यार्थी जो 40 प्रतिशत या उससे अधिक नि: शक्तता से पीड़ित हैं और जिनके परिवार की मासिक आय 15000 रुपये से अधिक नहीं है, वे छात्रवृत्ति के पात्र होते हैं। ऐसे विद्यार्थी जो स्नातक तथा परास्नातक स्तरीय तकनीकी अथवा व्यावसायिक पाठयक्रम में अध्ययन कर रहे हैं, उनमें जो दिन के समय कॉलेज आते हैं, उन्हें प्रतिमाह 700 रुपये तथा जो युवा छात्रावासों में रहते हैं, उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए जाते हैं। डिप्लोमा और सर्टिफिकेट स्तर के पेशेवर पाठ्‌यक्रम करने वालों में दिन के समय आने वाले छात्रों को प्रतिमाह 400 रुपये तथा छात्रावास में रहने वालों को प्रतिमाह 700 रुपये देने का प्रावधान है।

नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 के क्रियान्वयन हेतु कुछ योजनाएँ [Schemes Arising Out of the Implementation of the Persons with Disabilities (Equal Opportunities, Protection of Rights and Full Participation) Act, 1995)

इस अधिनियम के तहत कई योजनाएँ बनाई गई हैं। इसके तहत क्रियान्वित की जा रही योजनाएँ इस प्रकार हैं-

नि: शक्त व्यक्तियों को नियमित रोजगार प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को प्रोत्साहन (Incentives to Employers in this Private Sector for Providing Regular Employment to Persons with Disabilities)

इस संदर्भ में 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान सरकार दव्ारा 1800 करोड़ की प्रस्तावित लागत से नि: शक्त व्यक्तियों को प्रतिवर्ष एक लाख रोजगार उपलब्ध कराने की केन्द्रिय क्षेत्र की एक योजना को 1.04. 2008 से अनुमोदित किया गया है। इस योजना के तहत यदि नियोक्ता दव्ारा किसी नि: शक्त व्यक्ति को 25000 रुपये प्रतिमाह तक का रोजगार दिया जाता है, तो इसके बदले सरकार दव्ारा नियोक्ता के योगदान स्वरूप में शुरूआती तीन वर्षों तक कर्मचारी भविष्य निधि तथा कर्मचारी राज्य बीमा का भुगतान किया जाएगा।

नि: शक्त व्यक्तियों के लिए संयुक्त क्षेत्रीय केन्द्र [Composite Regional Centres for Persons with Disabilities (CRCs) ]

नि: शक्त व्यक्तियों के लिए पर्याप्त पुनर्वास सुविधाओं के अभाव के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य पुनर्वास, रोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण, शोध तथा मानव शक्ति विकास तथा नि: शक्त व्यक्तियों के पुनर्वास के संरक्षणात्मक एवं प्रोत्साहन के पहलूओें को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय ने श्रीनगर, सुंदरवन (हिमाचल प्रदेश) , लखनऊ, भोपाल और गुवाहाटी में नि: शक्त व्यक्तियों के लिए पाँच संयुक्त क्षेत्रीय केन्द्रों की स्थापना की।

जिला नि: शक्तता पुनर्वास केन्द्र [District Disability Rehabilitation Centres (DDRCs) ]

नि: शक्त व्यक्तियों को पुनर्वास सुविधाओं की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय राज्य सरकारों के सक्रिय सहयोग से जिला नि: शक्तता केन्द्रों की स्थापना कर रहा है। इन केन्द्रों की स्थापना देश के सुदूर तथा सेवाओं से वंचित जिलों में चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। ये केन्द्र रोकथाम और शीघ्र जाँच, चिकित्सकीय हस्तक्षेप तथा शल्य चिकित्सा जाँच संबंधी निर्दिष्ट कृत्रिम सहायता और सामग्री का निर्धारण शारीरिक चिकित्सा जैसी उपचारात्मक सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैंं।

मिशन मोड में तकनीकी विकास योजनाएँ (Technology Development Projects in Mission Mode)

प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से उपयुक्त एवं लागत प्रभावी सहायता एवं सामग्री उपलब्ध कराने और शारीरिक रूप से नि: शक्त व्यक्तियों के समाज में एकीकरण तथा उनके रोजगार अवसरों में वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए 1990 - 91 के दौरान इस योजना की शुरूआत की गई थी। इस योजना के तहत विकास परक सहायता एवं सामग्री के लिए उपयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की पहचान की गई है तथा उनका वित्तीयन किया गया है। इस योजना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) , शिक्षण संस्थानों, शोध एजेंसियों और स्वैच्छिक संगठनों के दव्ारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके तहत 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता मुहैया कराई जाती है। चार तकनीकी परामर्शदात्री समूह इन प्रोजेक्टों के चयन की निगरानी करते हैं और विकलांगता के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न चरणों से संबद्ध इन प्रोजेक्टों की प्रगति की निगरानी भी करते है।

राष्ट्रीय नि: शक्त वित्त एवं विकास निगम (National Handicapped Fiancé and Development Corporation)

नि: शक्त व्यक्तियों के आर्थिक विकास के लिए साख सुविधाओं के विस्तार हेतु राष्ट्रीय नि: शक्त वित्त एवं विकास निगम एक शीर्षस्थ वित्तीय संस्था है। जबकि वित्तीय सहायता का व्यय राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन तथा गैर-सरकारी संस्थाओं दव्ारा अधिकृत एजेंसियों दव्ारा किया जाता है। स्नातक तथा उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने के लिए यह ऋण भी प्रदान करता है। इसके अलावा लाभभोगियों की उत्पादन इकाइयों की उत्पादन क्षमता को व्यवस्थित करने के लिए यह तकनीकी तथा उद्यम कौशल के सुधार में उनकी सहायता भी करता है।

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