Public Administration: Strengthening Education Among Scheduled Tribes Girls in Low Literacy Districts

Get top class preparation for CTET-Hindi/Paper-2 right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-2.

केन्द्र व राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

कम साक्षरता वाले जिलों में अनुसूचित जनजाति के लड़कियों की शिक्षा को मजबूत बनाना (Strengthening Education Among Scheduled Tribes Girls in Low Literacy Districts)

2009 के वित्त वर्ष के प्रारंभ के साथ इस योजना को संशोधित कर इसका नामकरण दोबारा किया गया है- “कम साक्षर जिलों में अनुसूचित जनजाति के लड़कियों की शिक्षा को मजबूत बनाना।” संशोधित योजना 54 चिन्हित जिलों को अपने दायरे में लाती है जहाँ ST जनसंख्या 25 % या अधिक है और ST स्त्री साक्षरता 35 प्रतिशत से कम है (2001 के आँकड़े की जनसंख्या के अनुसार) ं इन 54 जिलों के अतिरिक्त उन जिलों के ब्लॉको भी योजना अपने दायरे में लेती है जिनमें ST जनसंख्या 25 प्रतिशत या उससे अधिक है और ST स्त्री साक्षरता 35 प्रतिशत से कम है और PTG क्षेत्र इसमें भी शामिल हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है और मंत्रालय बालिका छात्रावासों हेतु उन विद्यालयों को वित्तीय मदद देता है जो “सर्व शिक्षा अभियान” , “कस्तूरबा गांधी विद्यालय” या अन्य उपलब्ध शैक्षणिक योजनाओं के अंतर्गत आते हैं।

राजीव गांधी राष्ट्रीय फैलोशिप (RGNF) [Rajiv Gandhi National Fellowship (RGNF) ]

योजना का उद्देश्य वित्तीय मदद के रूप में अनुसूचित जनजातियो को फैलोशिप प्रदान करना है ताकि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। RGNF के अधीन प्राप्त फैलोशिप, अनुसंधान करने वाले UGC के अधीन M Phil और Ph. D पाठयक्रमों में दी जाने वाली फैलोशिप के समान ही होगी।

अनुसूचित जनजातियों हेतु राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति योजना (गैर-योजनागत) (National Overseas Scholarship Scheme for Scheduled Tribes (Non-Plan) )

यह योजना सराहनीय छात्रों को परास्नातक पाठ्‌यक्रम, पी. एच. डी. विदेशों में अनुसंधान, अभियांत्रिकी, तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में विदेशों में उच्च शिक्षा पाने के लिए वित्तीय मदद देती है। यह व्यवस्था अनसूचित जनजातियों, गैर-अधिसूचित, घूमक्कड़ और अर्ध घूमक्कड़ जनजातियों के लिए की गई हैं। चुने गए प्रत्याशी को विदेशी विश्वविद्यालय दव्ारा ली जाने वाली ट्‌यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक फीस उपलब्ध करायी जाती है।

लघु वन-उत्पादक क्रियाओं हेतु अनुदान (Grants-In-Aid for Minor Forest Produce (MFP) Operations)

यह एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है, जिनमें 100 प्रतिशत अनुदान राज्य जनजातीय विकास सहकारी निगम, वन विकास निगम और लघु वन-उत्पाद (व्यापार और विकास) संघो को दिया जाता है ताकि वे लघु वनोंत्पाद क्रियायें संचालित कर सकें। योजना के अधीन उपलब्ध धनराशि का प्रयोग:

  • किसी भी प्रकार की प्रचालनात्मक क्षति को वहन करने के लिए लघु वनोत्पाद (Minor Format Produce-MFP) की मात्रा को बढ़ाने में।
  • लघु वन-उत्पाद संबंद्ध कार्य संचालन के लिए निगम के अंश पूंजी आधार को सुदृढ़ करना ताकि वर्तमान में लघु वन-उत्पाद रखरखाव की क्षमता बढ़ायी जा सके।
  • जहाँ जरूरत हो वहाँ वैज्ञानिक गोदाम (Warehouse) सुविधा स्थापित करना।
  • मूल्य वर्द्धन के लिए उद्योग स्थापित करना, जिसका उद्देश्य जनजातियों को MFPs पर अत्यधिक लाभ देना होगा।
  • जनजातियों को उपभोग ऋण देना।
  • अनुसंधान और विकास गतिविधियों संचालित करना।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (National Scheduled Tribes Finance and Development Corporation)

  • जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम की स्थापना अप्रैल, 2001 में की गई थी।
  • NSTFDC दव्ारा वित्तीय मदद उन अनुसूचित जनजातियों तक विस्तृत कर दी गई है जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय गरीबी रेखा की दोगुनी है। NSTFDC लक्षित समूह को कौशल और उद्यम विकास हेतु वित्तीय मदद भी देती है। यह वित्तीय मदद उन सरकारी एजेंसियों दव्ारा संचालित होती है, जिन्हें संबंधित मंत्रालयों/राज्य सरकारों और संघ राज्य प्रशासन दव्ारा नामांकित किया जाता है। इसका उद्देश्य अर्हता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों की आय और सामाजिक-आर्थिक स्तर में वृद्धि करना है। NSTFDC आवंटन और लघु वन उत्पाद (MFPs) के वितरण हेतु भी वित्तीय मदद देती है ताकि अनुसूचित जनजातियों दव्ारा उत्पादों की बिक्री का प्रोत्साहन दिया जा सके।

अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास हेतु NSTFDC निम्न कार्यक्रम चला रहा है-

  • NSTFDC उन योजनाओं को सावधि ऋण देता है, जिनकी लागत 10 लाख प्रति व्यक्ति इकाई/लाभ केन्द्र है।
  • योजना की 90 प्रतिशत लागत NSTFDC दव्ारा दी जाती है।
  • NSTFDC ने स्वयं सहायता समूहों तक वित्तीय मदद पहुँचाने के लिए विशिष्ट योजनायें लागू की हैं और योजना के लिए प्रति (SHG) वित्तीय मदद 25 लाख तक बढ़ा दी गई है।
  • केन्द/राज्य सरकारों की किसी भी एजेंसी या राष्ट्रीय स्तर की परिसंघ की वित्तीय सहायता करना ताकि यह एजेंसी या परिसंघ लघु वन उत्पाद/कृषि उत्पाद की सरकारी खरीद कर सके।

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) [Eklavya Model Residential Schools (EMRS) ]

  • देश के सभी क्षेत्रों और निवासों में शिक्षा के प्रचार हेतु गुणात्मक आवासीय विद्यालयों की स्थापना के क्रम में ST ही छात्रों हेतु एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विद्यालयों का स्थान जवाहर नवोदय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और केन्द्रीय विद्यालयों में ही आता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के अधीन एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों की स्थापना अनुदान की मदद से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में की गई है।
  • EMRS का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के अनुसूचित जनजाति छात्रों को गुणवत्ता युक्त माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्रदान करना है, जिससे उन्हें न केवल उच्च और व्यावसायिक पाठयक्रमों में आरक्षण और सरकारी व निजी क्षेत्रों में नौकरी मिले बल्कि गैर-अनुसूचित जनंसख्या से तुलना करने पर भी शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम अवसर मिले।
  • योजना की प्रगति का अवलोकन अनुसूचित मामलों के केन्द्रीय मंत्रालय दव्ारा, राज्य सरकारों/लागू करने वाली संस्थाओं दव्ारा प्रदत्त सामयिक रिपोर्टो की मदद से किया जाता ळें
  • अनुच्छेद 275 (1) के अधीन अनुदान का प्रयोग कार्यक्रम के प्रशासन हेतु आवंटित कुल धनराशि के 2 प्रतिशत के बराबर होगा।

आदिम जनजातीय समूहों के लिए विकास योजना (Scheme of Development of Primitive Tribal Groups (PTGs) )

उद्देश्य (Objective)

  • ऐसे कुछ जनजातीय समुदाय हैं जिनमें निम्न साक्षरता है, घटती या अवरूद्ध जनसंख्या है, कृषि की परंपरागत तकनीक है और आर्थिक रूप से दशा दयनीय है। 15 राज्यों/संघ क्षेत्रों में ऐसे 75 समूहों की पहचान की गई है और इन्हें आदिम जनजातीय समूह (PTGs) नाम दिया गया है। ये सभी समूह संख्या में कम है, एक दूसरे की तुलना में विभेदात्मक रूप से विकसित है तथा दूरस्थ निवासी है जिनमें प्रशासनिक और अवसरंचनात्मक खामियाँ व्याप्त हैं। अत: इन्हें संरक्षण और विकास हेतु प्राथमिकता आधारित मदद की जरूरत है।
  • इनकी समस्यायें एवं जरूरतें अन्य अनुसूचित जनजातियों से अलग प्रकार की हैं। चूँकि जनजातीय समूहों में आदिम जनजातीय समूहों की दशा सर्वाधिक दयनीय है, अत: इनके सामाजिक आर्थिक विकास हेतु केन्द्रीय/केन्द्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं और राज्य/केन्द शासित क्षेत्र की योजनाओं से धन आवंटन हेतु आग्रह किया जाता है।
  • हालाँकि आदिम जनजातीय समूहों के विकास के लिए केन्द्रीय क्षेत्रक योजना के अधीन दिया जाने वाला धन केवल उन्हीं वस्तुओं/गतिविधियों हेतु मिलेगा जो आदिम समूहों (PTGs) के अस्तित्व, संरक्षण व विकास के लिए आवश्यक हो।
  • ऐसी वस्तुएँ/गतिविधियाँ केवल केन्द्रीय स्तर पर चिन्हित नहीं किया जा सकता क्योंकि ये एक राज्य से दूसरे राज्य और एक ही राज्य में एक योजना से दूसरी योजना में अलग-अलग हो सकती है। बहरहाल योजना के तहत धन का प्रयोग कार्यक्रम के लाभार्थियों की मदद के लिये किया जाता है ताकि वे अत्यधिक बुरे दबावों को झेल सकें जो उनके अस्तित्व को संकट में डालते हैं, और शोषण के विभिन्न रूपों से उनकी रक्षा करे और अंतत: उन्हें ऐसे स्तर पर पहुँचा दे, जहाँ वे विशिष्ट परिसंपत्ति और सेवाओं को मांग सके और इन्हें प्राप्त भी कर सकें।
  • योजना में जागरूकता उत्पन्न करना, आत्मविश्वास बढ़ाना, स्वयं सहायता समूहों के युवा जनजातीय संगठनों के कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण और उन सेवाओं/निवेश का प्रावधान जो किसी मौजूदा योजना में नहीं है आदि जैसेी गतिविधियाँ शामिल हैं। योजना के तहत केवल PTGs के सदस्यों को लाभार्थियों में गिना जाएगा।
  • योजना का क्रियान्वयन एकीकृत जनजातीय विकास प्रोजेक्ट (Integrated Tribal Development Projects- ITDPs) / एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों (Integrated Tribal Development Agencies-ITDAs) , जनजातीय अनुसंधान संस्थाओं (TRIs) और गैर सरकारी संगठनों दव्ारा किया जाता है जिनके पास क्षमता और इच्छा शक्ति हो। यह केन्द्रीय योजना है, अत: वित्तीय सहायता 100 प्रतिशत आधार पर उपलब्ध होगी। क्रियान्वयन करने वाली एजेंसियों के पास अधिकतम 3 साल का समय अनुदान के लिए होगा। योजना के अधीन आवंटित धन निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए ही प्रयुक्त होगा।

आदिवासी महिला सशक्तीकरण योजना (AMSY) [Adivasi Mahila Sashakitikaran Yojana (AMSY) ]

आदिवासी महिला सशक्तीकरण योजना, आदिवासी महिलाओं के कल्याण के लिए विशिष्ट योजना हैं, जिनमें ब्याज की दर बेहद कम रखी गई है। योजना के तहत NSTFDC प्रोजेक्ट के लिए सावधि ऋण देता है जिसकी कीमत 50,000/प्रति व्यक्ति इकाई/लाभ केन्द्र है। स्कीम/प्रोजेक्ट की 90 पतिशत वित्तीय सहायता NSTFDC दव्ारा प्रदान की जाती है। महिला लाभार्थियों से State Channelising Agency- SCA अधिकतम 4 प्रतिशत की दर से ब्याज ले सकती है।

सूक्ष्य वित्त योजना-एक नई योजना की शुरूआत (Micro-Credit Scheme-Launch of a New Scheme)

सूक्ष्य वित्त योजना का उद्देश्य मौजूदा लाभ कमाने वाले स्वयं सहायता समूहों के दव्ारा स्वरोजगार उद्यम/गतिविधियों में लगी अर्हता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों को वित्तीय मदद प्रदान करना है। State Channelising Agencies-SCAs लक्षित समूह को उसकी योजना के अनुसार सब्सिडी या मार्जिन मनी प्रदान करता है और शेष राशि NSTFDC दव्ारा सावधि ऋण के रूप में प्रदान की जाती है।

जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribes Advisory Council)

संविधान की पाँचवी अनुसूची के पैरा 4 (1) के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में TAC होनी चाहिए और यदि राष्ट्रपति निर्देश दे तो ऐसे राज्यों में भी जहाँ अनुसूचित क्षेत्र न हो परन्तु अनुसूचित जनजातियाँ हो।

TAC का गठन (Composition of TAC)

5वीं अनुसूची के अनुसार में 20 से अधिक सदस्य नहीं होने चाहिएँ, जिसमें तीन-चौथाई सदस्य राज्य की विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

TAC की भूमिका (Role of TAC)

राज्य दव्ारा निर्दिष्ट मुद्दों पर राज्य में जनजातियों के कल्याण और विकास के विषय में सुझाव देना। कोई विनियमन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक राज्यपाल, परिषद से सलाह नहीं ले लेगा (जिन राज्यों में TAC है) ।