Public Administration: The Scheduled Castes and the Scheduled Tribes

Doorsteptutor material for CTET-Hindi/Paper-1 is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-1.

अनुसूचित जातियों, शोषित वर्ग, अल्पसंख्यकों व अनुसूचित जनजातियों की बेहतरी एवं संरक्षण हेतु तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Law, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Scheduled Castes, Depressed Class, Minorities and Scheduled Tribes)

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (The Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989)

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, दिनांक 30.1. 1990 से प्रभावी हुआ। इस विधायन का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों से इतर व्यक्तियों दव्ारा अपराधों के कृत्य को रोकना है। इस अधिनियम के तहत विस्तृत नियमावली “अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों (अत्याचार निवारण) नियम, 1995” नाम से वर्ष 1995 में अधिसूचित की गई थी, जिसमें, अन्य बातों के साथ-साथ, राहत और पुनर्वास संबंधी मानकों का प्रावधान है। यह अधिनियम जम्मू और कश्मीर को छोड़कर समस्त भारत में प्रभावी है। यह अधिनियम संबंधित राज्यों सरकारों तथा संघ राज्यक्षेत्र प्रशासनों दव्ारा कार्यान्वित किया जाता है, उन्हें इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केन्द्र प्रायोजित स्कीम के तहत केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान निम्न प्रकार हैं:

  • अत्याचारों के अपराधों को परिभाषित करना तथा उनके लिए दंड निर्धारित करना (धारा 3)
  • गैर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनसेवकों दव्ारा कर्तव्यों की जानबूझकर अवहेलना के लिए दंड (धारा 4)
  • इस अधिनियम के तहत अपराधों के त्वरित अभियोजन के लिए विशेष अदालत के रूप में प्रत्येक जिले में एक सत्र न्यायालय को नामित करना (धारा 14)
  • अन्य बातों के साथ-साथ, विशेष अदालतों की, शक्तियाँ, बाहरी व्यक्तियों जो अध्याय- के तहत कोई अपराध कर सकते हैं (धारा 10)
  • विशेष अदालतों में मुकदमों के संचालन के लिए जन अभियोजकों/विशेष जन अभियोजकों की नियुक्ति (धारा 15)
  • कानून और व्यवस्था तंत्र दव्ारा की जाने वाली निरोधक कार्रवाई (धारा 17)

इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकारों दव्ारा किए जाने वाले उपायों में शमिल हैं-

  • अत्याचार पीड़ितों का आर्थिक और सामाजिक पुनर्वास।
  • समुचित स्तरों पर समितियों का गठन।
  • अपराध प्रवण क्षेत्रों की पहचान।
  • अत्याचारों के शिकार व्यक्तियों के लिए विधिक सहायता ताकि वे स्वयं न्याय पा सके।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए अभियोजन आरंभ करने या निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति और
  • इस अधिनियम के प्रावधानों की क्रियाशीलता का सर्वाधिक सर्वेक्षण (धारा 21 (2)

विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में इस अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए संरचना और तंत्र इस प्रकार है:

राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों ने जिला सत्र न्यायलयों को विशेष न्यायालयों के रूप में नामित कर दिया है।

  • विशेष अदालते: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 14 के अनुसार, राज्य सरकार त्वरित अभियोजन प्रदान करने के उद्देश्य से, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, सरकारी राजपत्र में अधिसूचना दव्ारा, प्रत्येक जिले के लिए इस अधिनियम के तहत अपराधों के अभियोजन के लिए विशेष न्यायालय के रूप में किसी सत्र न्यायालय को निर्दिष्ट करती है।
  • विशेष लोक अभियोजनक: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 15 के अनुसार, विशेष अदालतों में मुकदमों के संचालन के प्रयोजनार्थ जन अभियोजक और विशेष जन अभियोजकों के रूप में अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधी प्रावधान हैं। तदनुसार राज्य/संघ राज्यक्षेत्र, जिन्होंने विशेष अदालतें गठित की हैं, ने जन अभियोजकों/विशेष जन अभियोजनकों को नियुक्त किया है।
  • राज्य मुख्यालयों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठों का गठन: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली, 1995 के नियम 8 में एक डीजीपी/आईजीपी के प्रभाव के तहत राज्य मुख्यालयों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठ के निम्नलिखित दायित्वों के साथ राज्य सरकार को गठन करना आवश्यक है:
    • चिन्हित क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए सर्वेक्षण संचालित करना और विशेष पुलिस बल की तैनाती की अनुशंसा करना।
    • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों के बीच सुरक्षा की भावना बहाल करने के लिए, इस अधिनियम के तहत अपराधों के कारणों का अन्वेषण करना।
    • चिन्हित क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था स्थिति के बारे में नोडल और विशेष अधिकारियों से संपर्क बनाना।
    • अपराधों के अन्वेषण की मॉनीटरिंग और जनसेवकों की जानबूझकर लापरवाही की जाँच करना।
    • इस अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों की स्थिति की समीक्षा करना।
    • उल्लखित के संबंध में की गई कार्रवाई/की जाने वाली प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में राज्य सरकार/नोडल अधिकारी के समक्ष मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
  • विशेष पुलिस थाने: बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सरकारों दव्ारा अनुसूचित जातियों और गैर-अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराधों की शिकायतों के पंजीकरण के लिए भी विशेष पुलिस थाने गठित कर दिए हैं।
  • नोडल अधिकारी: अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली, 1995 के नियम 9 के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षकों अथवा अन्य प्राधिकृत अधिकारियों के कार्यों का समन्वय करने के लिए नोडल अधिकारियों को नामित किया गया है।
  • राज्य तथा जिला स्तरीय सर्तकता और मॉनीटरिंग समिति: अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली, 1995 के नियम 16 और 17 में इस अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन की समीक्षा करने के लिए, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनीटरिंग समितियों तथा जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता और मानीटरिंग समितियों के गठन संबंधी प्रावधान हैं।
  • अत्याचार प्रवण क्षेत्रों की पहचान तथा अनुवर्ती उपाय किया जाना
    • अत्याचार प्रवण क्षेत्रों की पहचान: अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली, 1995 के नियम 3 (1) (1) के अनुसार, राज्य सरकारों ने अपने-अपने संबंधित राज्यों में अत्याचार प्रवण/संवदेनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली है।
    • विशेष अधिकारियों की नियुक्ति: अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियमावली, 1995 के नियम 10 के अनुसार इस अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षण या अन्य उत्तरदायी अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए एक विशेष अधिकारी जो अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद से नीचे का न हो, की नियुक्ति संबंधी प्रावधान हैं।
    • अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दर्ज मुकदमों में पुलिस तथा अदालतों दव्ारा कार्रवाई।

नागरिक अधिकार संरक्षण और अत्याचार निवारण अधिनियमों के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए समिति (Committee to Review the Implementation of the Civil Rights Protection and Prevention of Atrocities Acts)

अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबद्ध संसदीय समिति ने अपनी चौथी रिपोर्ट (2006 - 2007) में अन्य बातों के साथ-साथ, अनुशंसा की थी कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को अत्याचारों पर अंकुश लगाने के तरीके और उपाय तैयार करने और सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का प्रभावी कार्यान्वयन जनजातियों के विरुद्ध अपराधों पर अंकुश लगाने के तरीके और उपाय तैयार करने के लिए प्रभावी समन्वय तथा दोनों अधिनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मार्च 2006 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी।

हाथ से मैला ढोने वालों का नियोजन और शुष्क शौचालय निर्माण (निषेध) अधिनियम, 1993 (The Employment of Manual Scavengers and Construction of Dry Latrines (Prohibition) Act, 1993)

  • स्वच्छता राज्य का विषय है। तथापित, संविधान के अनुच्छेद 252 (1) के अनुसरण में, हाथ से मैला ढोने वालों का नियोजन और शुष्क शौचालय निर्माण (अधिनियम, 1993 आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की राज्य विधायिकाओं दव्ारा पारित इस आशय के संकल्पों के पश्चात्‌ अधिनियमित किया गया था। यह अधिनियम, 26.1. 1997 से सभी संघ राज्य क्षेत्रों और उक्त छह राज्यों में प्रभावी हुआ था।
  • अभी तक यह अधिनियम 23 राज्यों तथा सभी संघ राज्य क्षेत्रों ने अपना लिया है। शेष 5 राज्यों में से 3 राज्यों अर्थात हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के अपने अधिनियम हैं। दो राज्य अर्थात मणिपुर और मिजोरम ने सूचित किया है कि इनके यहाँ कोई शुष्क शौचालय नहीं है या वे स्केवेंजर मुक्त हैं।

इस अधिनियम की धारा 3 (1) के अनुसार, कोई व्यक्ति ′ :

  • मानव मल को हाथ से उठाने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को लगाने या नियुक्त करने अथवा किसी अन्य व्यक्ति के लिए लगाने या नियुक्ति के लिए अनुमति नहीं देगा।
  • किसी शुष्क शौचालय का निर्माण या रखरखाव नहीं करेगा।

इन प्रावधानों का उल्लंघन एक अपराध है जिसकी सजा एक अवधि है जो एक वर्ष तक हो सकती है या जुर्माना है जो 2000/- रुपए तक हो सकता है अथवा दोनों हो सकते है और यदि कोई चूक अथवा उल्लंघन जारी रहता है तो अतिरिक्त जुर्माने सहित इस प्रकार की चूक अथवा उल्लंघन जारी रहने की ऐसी प्रथम चूक अथवा उल्लंघन के लिए दोष सिद्धि के पश्चात्‌ की अवधि के दौरान प्रत्येक दिन के लिए एक सौ रुपए तक हो सकता है।

इस अधिनियम का आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के दव्ारा प्रशासित किया जा रहा है।

Developed by: