Public Administration 1: Ministry of Home Affairs: Training Institute

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गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs)

प्रभाग (Divisions)

(ग) पुलिस बल (Police Force)

  • सीमा सुरक्षा बल।
  • केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल।
  • केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल।
  • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस।
  • असम राइफल्स।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड।
  • सशस्त्र सीमा बल।
  • होमगार्ड तथा नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक (स्वयंसेवी बल) राज्यों में।
  • राजकीय रेलवे पुलिस-राज्यों के साथ
  • मोबाइल सिविल इमरजेंसी फोर्स।

(घ) प्रशिक्षण संस्थान (Training Institute)

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ केन्द्रीय हिन्दी प्रशिक्षण संस्थान, नई दिल्ली।

  • सरदार पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद।
  • राष्ट्रीय अग्निसेवा महाविद्यालय, नागपुर।
  • राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय, नागपुर।
  • आंतरिक सुरक्षा अकादमी, माउण्ट आबू।
  • लोकनायक जयप्रकाश नारायण राष्ट्रीय अपराध एवं न्यायालयिक विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली।
  • केन्द्रीय गुप्तचर प्रशिक्षण केन्द्र कोलकाता, हैदराबाद तथा चंडीगढ़
  • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण केन्द्र, मानेसर (हरियाणा)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली।
  • पूर्वोत्तर पुलिस अकादमी, उमसो, मेघालय।
  • केन्द्रीय पुलिस रेडियो प्रशिक्षण केन्द्र, नई दिल्ली।

(ङ) परिषदें, समितियाँ तथा आयोग (Councils Committees and Commissions)

  • राष्ट्रीय एकता परिषद्।
  • अंतरराज्यीय परिषद्।
  • क्षेत्रीय परिषद्‌ें।
  • राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान।
  • केन्द्रीय हिन्दी समिति।
  • हिन्दी प्रशिक्षण परामर्शदात्री समिति।
  • केन्द्र शासित एवं नेफा क्षेत्र परामर्शदात्री समिति।
  • उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र समिति।
  • केन्द्रीय राजभाषा क्रियान्वयन समिति।
  • नगर राजभाषा क्रियान्वयन समिति।
  • हिन्दी सलाहकार समितियाँ।
  • केन्द्रीय आपातकालीन सहायता परामर्शदात्री समिति।
  • पुलिस आयोग।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (स्वतंत्र तथा वैधानिक संस्था)
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण।

(च) अन्य (Other)

  • रीपेट्रिएर को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डिवेलपमेंट बैंक लि. (रेपको) चेन्नई।
  • रिहैबिलिटेशन प्लाण्टेशंस लि. पुनालुर, केरल।

उपर्युक्त वर्णित अधीनस्थ कार्यालयों, समितियों, प्रशिक्षण संस्थाओं तथा पुलिस बलों के माध्यम से गृह मंत्रालय अपने दायित्वों को पूरा करता है। पुलिस आयोग, पुलिस प्रशासन तथा कार्यप्रणाली में सुधार हेतु सुझाव देता है जबकि केन्द्रीय कानून दव्ारा अक्टूबर, 1993 में स्थापित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक स्वतंत्र एवं वैधानिक संस्था के रूप में आम व्यक्ति के मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। मानवाधिकार आयोग के सम्मुख आने वाली अधिकांश शिकायतें पुलिस के अत्याचारों से संबंधित होती हैं। यद्यपि पुलिस तथा आंतरिक सुरक्षा का अधिकांश कार्य राज्य प्रशासन से संबंधित है तथापि अनेक कानून ऐसे हैं जिनका क्रियान्वयन केन्द्रीय गृह मंत्रालय करता है।

कार्य (Functions)

गृह मंत्रालय का कार्यक्षेत्र सदैव से ही विस्तृत तथा गंभीर प्रकृति का रहा है। गृह मंत्रालय के कार्य इसके विभागों के अनुसार यहाँ वर्णित किये जा रहे हैं-

सीमा प्रबंधन विभाग (Border Management Department)

  • यह विभाग तटवर्ती सीमाओं सहित सीमा प्रबंधन का कार्य देखता है।
  • भारत की 15106.7 किमी. भू-सीमा और दव्ीप क्षेत्रों सहित 7,516.6 किमी. तटवर्ती सीमा है। पड़ोसी देशों के साथ हमारी भू-सीमाओं की लंबाई निम्न प्रकार है:
Functions of Ministry of Home Affairs
देश के नामसीमा की लंबाई (किमी. में)
बांग्लादेश

चीन

पाकिस्तान

नेपाल

म्यांमार

भूटान

अफगानिस्तान

4,096.7

3,488

3,323

1,751

1,643

699

106

कुल15,106.7
  • देश विरोधी तत्वों से देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना और ऐसी प्रणालियों की व्यवस्था करना सीमा प्रबंधन के मुख्य उद्देश्यों में से है, जो विधिसम्मत व्यापार और वाणिज्य को सुलभ बनाते हुए ऐसे तत्वों को रोकने में सक्षम हों। सीमाओं का उचित प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हमारी सीमाओं का प्रबंधन कई चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है क्योंक इसमें हमारे सीमावर्ती प्रांतों की सुरक्षा और इनके सर्वोत्तम हितों की सुरक्षा के लिए देश की प्रशासनिक, राजनयिक सुरक्षा, आसूचना, विनियामक और आर्थिक एजेंसियों दव्ारा समन्वित और सुनियोजित कार्यवाही किया जाना शामिल है।
  • अतरराष्ट्रीय भू-सीमा और तटवर्ती सीमाओं के प्रबंधन, सीमावर्ती पुलिस व्यवस्था गैर-चौकसी को सुदृढ़ करने, सीमाओं पर सड़क बनाने, बाड़ लगाने तथा रोशनी की व्यवस्था करने जैसे आधारभूत कार्य करने तथा सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) का कार्यान्वयन करने के लिए जनवरी, 2004 में गृह मंत्रालय में सीमा प्रबंधन विभाग गठित किया गया है।

सीमाओं को सुरक्षित रखने और देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का सृजन करने की रणनीति के एक भाग के रूप में सीमा प्रबंधन विभाग ने कई पहल की है। इनमें भारत पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं के साथ-साथ बाड़ लगाना, रोशनी की व्यवस्था करना और सड़को का तेजी से निर्माण करना, देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के विभिन्न स्थानों पर एकीकृत जांच केन्द्रों के विकास की कार्रवाई करना, भारत चीन सीमाओं के साथ-साथ सामरिक महत्व की सड़कों का निर्माण करना शामिल है। इसके अतिरिक्त सीमा प्रबंधन के व्यापक दृष्टिकोण के एक भाग के रूप में विभाग ने बीएडीपी के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में कई विकासात्मक कार्य शुरू किए हैं। सीमा प्रबंधन विभाग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन:-भारत नेपाल सीमा पर जो खुली और सुभेद्य है, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को रोकने और सीमा पर सुरक्षा में सुधार करने के उद्देश्य से सीमा निगरानी बल के रूप में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 27 बटालियन तैनात कर दी गई हैं।
    • गृह सचिव स्तर की वार्ता और संयुक्त सचिव के स्तर पर संंयुक्त कार्य ग्रुप के रूप में दो देशों के बीच दव्पक्षीय तंत्र मौजूद है। इसके अतिरिक्त दो देशों के जिला पदाधिकारियों के बीच सीमा जिला समन्वय समिति की बैठकों का तंत्र है। ये तंत्र सीमा पार के अपराध तस्करी आतंकवादी क्रियाकलापों से उत्पन्न स्थिति आदि जैसे परस्पर चिंता वाले मुद्दों पर क्रमश: राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय स्तरों पर चर्चा करने के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करते हैं।
  • भारत-भूटान सीमा प्रबंधन-इस सीमा पर सुरक्षा वातावरण में सुधार करने के लिए सीमा चौकसी बल (बीएसएफ) के रूप में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 13 बटालियनें तैनात की गई हैं।
    • सीमा प्रबंधन और सुरक्षा में भारत-भूटान ग्रुप के रूप में एक दव्पक्षीय तंत्र नियमित रूप से कार्य करता रहा है। इस खुली सीमा का लाभ उठाने की कोशिश करने वाले ग्रुपों से दोनों देशों को होने वाले संभावित खतरे का आंकलन करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा वातावरण में सुधार करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए यह तंत्र बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है।
  • भारत-म्यांमार सीमा प्रबंधन:-भारत की 1643 किमी. सीमा म्यांमार के साथ लगती है। अरूणाचंल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम ऐसे राज्य हैं जिनकी सीमा म्यांमार के साथ लगती है।
    • इस सीमा पर विद्रोह-रोधी और सीमा चौकसी कार्य के लिए असम राइफल्स को तैनात किया गया है। 46 बटालियनों में से 31 बटालियनें विद्रोह-रोधी कार्रवाई के लिए तथा 15 बटालियनें सीमा चौकसी संबंधी कार्य के लिए है। इस समय भारत-म्यांमार सीमा पर 15 सीमा चौकसी बटालियनें कंपनी ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) पद्धति पर तैनात हैं न कि बीओपी प्रणाली के अनुसार। ये कंपनियाँ अंतर्गमन/बहिगर्मन के सभी मार्गों पर तैनात हैं तथा घुसपैठ, शस्त्रों, गोला बारूद, मादक द्रव्यों, जाली मुद्रा नोटों की तस्करी आदि की जाँच कर रही हैं।
  • मोरेहे (मणिपुर) में बीपी सं. 79 और 81 के बीच सीमा पर बाड़ लगाना: भारत सरकार भारत-म्यांमार सीमा पर बीपी सं. 79 से 81 के बीच बाड़ लगाने का कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। बाड़ निर्माण का कार्य तकनीकी समिति तथा उच्चाधिकार प्राप्त समिति दव्ारा लागत अनुमानों/डीपीआर का अनुमोदान किए जाने के बाद शुरू किया जाएगा।
  • सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) :- सीमा प्रबंधन विभाग, अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप स्थित दूरवर्ती तथा दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने तथा केन्द्रीय/राज्य/स्थानीय योजनाओं के समन्वय भागीदारी दृष्टिकोण के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को अधिकतम रूप से जुटाने और सीमावर्ती लोगों में सुरक्षा और कल्याण की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीमा प्रबंधन के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण के भाग के रूप में, राज्य सरकारों के माध्यम से सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम कार्यान्वत करता रहा है। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय भू-सीमा से लगे 17 राज्यों के 96 सीमावर्ती जिलों के 349 सीमावर्ती ब्लॉक आते हैंं यह कार्यक्रम 100 प्रतिशत केन्द्रीय आधार पर प्रायोजित योजना है। आधारभूत संरचना, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और संबंधित क्षेत्रों से संबंधित परियोजना का निष्पादन करने के लिए व्यक्तिगत न होने वाली विशेष केन्द्रीय सहायता (एससीए) के रूप में राज्यों को निधियाँ प्रदान की जाती हैं।

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