Public Administration: Types of Trainings and Financial and Physical Targets

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केन्द्र और राज्य दव्ारा जनसंख्या के असुरक्षित वर्ग के लोगों हेतु कल्याणकारी योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

प्रशिक्षण के प्रकार (Types of Trainings)

नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण दो प्रकार होगा -गैर आवासीय एवं आवासीय। प्रत्येक प्रकार के प्रशिक्षण के लिए चुनाव की शर्ते निम्नानुसार हैं:-

  • ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गैर- आवासीय नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण : ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों से एक दल में 25 महिलाओं तक को नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो विशिष्ट रूप से अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं की बेहतरी एवं कल्याण व सामान्य तौर पर समाज की उन्नति करने के लिए समर्पित एवं प्रतिबद्ध हों। 25 महिलाओं के समूह से कम से कम 10 प्रतिशत महिलाओ को दसवीं (X) कक्षा उत्तीर्ण या उसके समतुल्य होना चाहिए।
  • आवासीय नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण: 25 महिलाओं के समूह (एक दल) में आवासीय नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण हेतु एक ग्राम या शहरी क्षेत्र की अधिकतम पाँच महिलाएँ ही चुनी जा सकती है। उनके पास बारहवीं (XII) कक्षा या उसके समकक्ष का प्रमाणपत्र होना चाहिए। यदि कक्षा (XII) उत्तीर्ण की हुई महिलाएँ सरलता से प्राप्त नहीं होती हैं, तो दसवीं (X) कक्षा या उसके समकक्ष प्रमाणपत्रधारियों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के कल्याण के विशिष्ट रूप से एवं सामान्य तौर पर समाज की उन्नति के लिए कार्य करने हेतु समर्पित प्रेरित, प्रतिबद्ध एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।

वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्य (Financial and Physical Targets)

उल्लेखनीय अल्पसंख्यक जनसंख्या वाले प्रखंडों एवं शहरों को विशेष ध्यान में रखते हुए यह योजना पूरे देश में क्रियान्वित की जाएगी। यह प्रस्तावित है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना काल में दो लाख अल्पसंख्यक महिलाओं को प्रत्येक वित्त वर्ष में 40000 महिलाओं की दर में समावेशित किया जाएगा। संपूर्ण 12वीं पंचवर्षीय योजना काल में इस योजना के लिए वित्त की आवश्यकता 75 करोड़ है।

पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकन (Monitoring and Evaluation)

  • संगठनों दव्ारा परियोजना के निष्पादन में हुई प्रगति का पर्यवेक्षण करने के लिए मंत्रालय एक तंत्र स्थापित करेगा एवं इसके लिए संबंधित राज्य के सचिव एवं सुविख्यात महिलाओं या गैर सरकारी संगठनों को समीक्षा बैठक में आमंत्रित करेगा।
  • बहुक्षेत्रक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय समिति, जिसमें लोक प्रतिनिधि भी सम्मिलित होते हैं, उन्हें भी इस कार्यक्रम का पर्यवेक्षण कार्य सौंपा जा सकता है।
  • 2015 - 16 में योजना का मध्यावधि मूल्यांकन होगा। मध्यावधि मूल्यांकन में मंत्रालय विशिष्ट रूप से एक विशिष्ट क्षेत्र में विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करेगा, जैसे- प्रशिक्षण मोडयूल की आवश्यकता, इस प्रकार के प्रशिक्षण के वित्तीय औचित्य, एक संगठन दव्ारा अधिकतम कितनी महिलाओं को प्रशिक्षत किया जा सकता है आदि।
  • अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, वित्तीय पहलू को छोड़कर, राष्ट्रीय क्षेत्री एवं लक्षित समूहों की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए योजना के क्रियान्वयन में सुधार हेतु, जब जैसी आवश्यकता हो फेर-बदल एवं परिवर्धित कर सकता है।

अल्पसंख्यक के लिए कौशल विकास योजना-सीखो और कमाओ (Seeko Aur Kamao (Learn % Earn) the Scheme for Skill Development of Minorities)

परिचय (Introduction)

  • राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन की 61वें दौर (2004 - 05) की मार्च 2007 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों में भी स्वरोजगार धार्मिक समुदायों के लिए मुख्य स्तंभ रहा। वर्ष 2004 - 05 26 प्रतिशत मुस्लिम व 35 प्रतिशत ईसाई ″ कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार ″ पर निर्भर रहे, जबकि गैर कृषि क्षेत्रों में स्वरोजगार ″ में 28 प्रतिशत मुस्लिम एवं 15 प्रतिशत ईसाई संलग्न रहे। वर्ष 2004 - 05 के दौरान शहरी भारत के मुस्लिम घरों की ″ सवरोजगार ″ , ″ नियमित मजदूरी/वेतन ″ एवं ″ अंशकालिक श्रम ″ पर निर्भरता का अनुपात क्रमश: 49 प्रतिशत, 30 प्रतिशत एवं 14 प्रतिशत था, जबकि ईसाइयों में यह क्रमश 27 % , 47 % एवं 11 % था। ग्रामीण भारत में ईसाइयों के मध्य बेराजगारी दर अधिक (44 %) थी, तत्पश्चात्‌ मुस्लिम (23 %) एवं हिन्दू (15 %) । उसी प्रकार से शहरी भारत में बेरोजगारी ईसाइयों के मध्य सर्वाधिक (86 %) तत्पश्चात्‌ हिन्दू (44 %) एवं मुस्लिम (41 %) में थी।
  • सच्चर समिति की अनुशंसा के अनुसार, राष्ट्र एक उच्च वृद्धि/विकास के दौर से गुजर रहा है। यह वह समय है जब वंचितों की सहायता के लिए नये अवसरों का उपयोग कौशल विकास एवं शिक्षा दव्ारा किया जाना चाहिए। मुस्लिम समुदाय की एक बड़ी संख्या स्वरोजगार की गतिविधियों में संलग्न है। इसके अतिरिक्त एक बड़ा अनुपात, विशेषकर महिलाएँ, वास्तव में गृह-आधारित कार्यों में संलग्न हैं। इनमें से कुछ कामगार तो उन क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं जिनमें आय वृद्धि का अनुभव हो रहा है, किन्तु अधिकतर ऐसे पेशों या क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं जिनमें वृद्धि एवं विकास दोनों ही रूके हुए हैं।
  • भारत ज्ञान आधारित अर्थतंत्र के संक्रमण काल में है तथा इसकी प्रतियोगी धार इसके लोगों दव्ारा अधिक प्रभावी रूप से ज्ञान (जानकारी) को उत्पन्न, वितरित एवं उपयोग करने की क्षमता से निर्धारित होगी। इस परिवर्तन के लिए भारत को अपने कार्मिकों को ज्ञान कार्मिकों में विकसित करना होगा जो अधिक लचीले, विश्लेषणात्मक, अनुकूलनीय एवं बहुकौशल संपन्न होंगे।
  • ऊपर उल्लेखित बिन्दुओं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए अल्पसंख्यकों की अधिकारिता पर कार्य दल की अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दव्ारा “अल्पसंख्यकों के कौशल विकास” हेतु केन्द्र दव्ारा 100 प्रतिशत प्रायोजित एक नई योजना “सीखो और कमाओ” प्रस्तावित की गई है, जिसे वित्त वर्ष 2013 - 14 से क्रियान्वित किया जाना है।

सीखो एवं कमाओ योजना का उद्देश्य (Objective of Learn & Earn Scheme)

  • 12वीं योजना काल में अल्नसंख्यकों की बेरोजगारी दर को कम करना।
  • अल्पसंख्यकों के पारंपरिक कौशल को संरक्षित एवं अद्यतन करना एवं उन्हें बाजार से जोड़ना
  • मौजूदा श्रमिकों एवं विद्यालय छोड़ चुके व्यक्तियों इत्यादि के लिए रोजगार उन्मुखता में वृद्धि करना तथा उनके नियोजन को सुनिश्चित करना।
  • सीमांत अल्पसंख्यकों के लिए बेहतर जीविकोपार्जन के साधन विकसित करना एवं उन्हें मुख्यधारा में लाना।
  • अल्पसंख्यकों को विकसित होते बाजार में अवसरों को प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाना।
  • राष्ट्र के लिए संभावित मानव संसाधन विकसित करना।
  • यह एक शत प्रतिशत केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दव्ारा इसका क्रियान्वयन अधिसूचित योग्य संगठनों के माध्यम से सीधे तौर पर किया जाएगा।
  • स्वीकृत परियोजनाओं के संपूर्ण व्यय का वहन अनुशंसित वित्तीय मानकों के अनुसार मंत्रालय करेगा।
  • “सीखो और कमाओ” कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाओं का कुल कार्यकाल 12वीं पंचवर्षीय योजना के साथ समाप्त हो जाएगा।
  • आधुनिक कौशल के लिए प्रत्येक प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि न्यूनतम 2 माह होगी तथा यह कौशल समूह पर निर्भर करेगा जिनमें तकनीकी कौशल, मृदु कौशल (सॉफ्ट स्किल) एवं जीवन कौशल सम्मिलित है।
  • परंपरागत कौशल के प्रत्येक कार्यक्रम की अवधि अधिकतम 1 वर्ष की होगी जो ‘ट्रेड’ पर निर्भर करती है। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह/उत्पादक कंपनी का गठन सम्मिलित है।
  • मंत्रालय न केवल उपयोगिता के अंतर्गत अधिसूचित अवयवों के लिए क्रियान्वनय एजेंसी को जिम्मेदार ठहराएगा बल्कि जमीनी तर पर वास्तविक रूप से जो कुछ हो रहा है उसका प्रभावी एवं निरंतर पर्यवेक्षण हो, यह सुनिश्चित करने के लिए जाँच की एक प्रणाली भी स्थापित करेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मंत्रालय कौशल विकास कार्यक्रम के क्षेत्र की एक विशेषज्ञ एजेंसी जैसे “नॉलेज पार्टनर या तकनीकी सहायक एजेंसी” को नियुक्त करेगा।
  • इस योजना की 3 वर्ष पश्चात्‌ मध्यावधि उपयोगिता समीक्षा एवं किसी सुविख्यात स्वतंत्र एजेंसी दव्ारा मूल्यांकन एवं अंकेक्षण प्राप्त होने के पश्चात्‌ 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत में समीक्षा की जानी है।

अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए मौलाना आजाद राष्ट्रीय फैलोशिप (Maulana Azad National Fellowship for Minority Students)

  • इस फैलोशिप का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता के रूप में समेकित पाँच वर्षीय फैलोशिप प्रदान करना है, जैसा कि केन्द्र सरकार दव्ारा एम. फिल. एवं पी. एच. डी. जैसी उच्च शिक्षा के लिए अधिसूचित किया गया है। यह फैलोशिप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग दव्ारा मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालयों व संस्थानों में अध्ययन के लिए देय है एवं इसका क्रियान्वयन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय दव्ारा यू. जी. सी. के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए किया जाएगा।
  • यह फैलोशिप अल्पसंख्यक समुदाय के उन विद्यार्थियों की आवश्यकता को पूर्ण करेगी जो एम. फिल एवं पी. एच. डी. पाठय्‌क्रम का नियमित एवं पूर्णकालिक अनुसंधान अध्ययन कर रहे हैं या उसके समतुल्य अनुसंधान डिग्री भारत के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं वैज्ञनिक संस्थानों में ले रहे हैं। यह उन्हें एम. फिल एवं पी. एच. डी. की योग्यता की मांग करने वाले पदों के योग्य बनाएगी, जिनमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रध्यापक का पद भी सम्मिलित है।
  • फैलोशिप के निष्पादन के लिए यू. जीसी. नोडल एजेंसी होगी। यू. जी. सी. , समाचार पत्रों, इंटरनेट, वेबपेज एवं अन्य माध्यमों में समूचित विज्ञापन देकर फैलोशिप की सूचना देगी।

मौलाना आजाद शिक्षण प्रतिष्ठान (Maulana Azad Education Foundation)

इस प्रतिष्ठान की स्थापना मौलाना अबुल कालाम आजाद के जन्म शताब्दी महोत्सव के अवसर पर की गई थी। प्रतिष्ठान एक स्वयंसेवी, गैर-राजनीतिक, अलाभकारी सामाजिक सेवा संगठन है, जिसकी स्थापना समाज के शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो के मध्य शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए की गई थी। यह अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार दव्ारा पूर्णत: वित्त पोषित है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्री इस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष होते हैं। इसका पंजीकरण सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत 6 जुलाई, 1989 को किया गया था।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (National Minorities Development and Finance Corporation) (NMDFC)

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम का निगमन 30 सितंबर, 1994 को अल्पसंख्यकों के मध्य पिछड़े वर्गों के लिए आर्थिक एवं विकास संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था। इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के योग्य लाभार्थियों को स्वरोजगार गतिविधियों के लिए रियायती वित्त प्रदान करता है, जिनके परिवार की आय गरीबी रेखा से भी निम्न है जो कि वर्तमान में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्रम: 55000 एवं 40000 है। NMDFC अंतिम लाभार्थी तक स्टेट चैनलिंग एजेंसी (State Channelising Agencies-SCA) जो कि संबंधित राज्य/केन्द्र शासित सरकार दव्ारा नामांकित होती है एवं गैर-सरकारी संगठनों दव्ारा पहुँचती है। SCA कार्यक्रम के अंतर्गत 5.00 लाख तक की लागत वाली परियोजनाओं के लिए व्यैक्तिक लाभार्थियों को वित्त प्रदान की जाती है। इसके लिए SCA को कोष से 3प्रतिशत की ब्याज दर पर तथा लाभार्थी को 6 प्रतिशत की दर ऋण उपलब्ध कराए जाने के लिए प्रदान की जाती है। इसके लिए को कोष से की ब्याज दर पर तथा लाभार्थी को 6 प्रतिशत की दर पर ऋण उपलब्ध कराए जाने के लि प्रदान की जाती है। निगम SCA के माध्यम से व्यवासायिक प्रशिक्षण एवं शैक्षिक ऋण की योजनाओं को क्रियान्वित करता है, जिससे लक्षित समूहों में योग्यता संवर्धन होता है एवं स्वरोजगार के साथ-साथ वैतनिक रोजगार भी प्राप्त होते हैं।

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