Public Administration 1: Indira Gandhi Matritva Sahyog Yojana and Women Empowerment

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जनसंख्या के असुरक्षित समूहों के लिए केन्द्र एवं राज्य की कल्याणकारी योजनायें (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना (IGMSY) सर्शत मातृत्व लाभ (CMB) योजना (Indira Gandhi Matritva Sahyog Yojana) (IGMSY) -Conditional Maternity Benefit (CMB) Scheme)

योजना के उद्देश्य है (The Objectives of the Scheme Are)

गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं व शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार हेतु -

  • गर्भावस्था, सुरक्षित प्रसव व स्तनपान कराने के दौरान उचित क्रिया-कलापों, देखबाल व सेवा उपयोगिता को बढ़ावा देना।
  • महिलाओं को सर्वोत्कृष्ट क्रियायें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कराना जिसमें 6 माह तक केवल स्तनपन कराना शामिल है।
  • गर्भवती महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य व पोषण हेतु नकद प्रोत्साहन राशी देकर सुविधाजनक वातावरण बनाना।
  • योजना के तहत 19 वर्ष या उससे अधिक की ऐसी महिलाएँ जो पहले जीवित बच्चे को जन्म दे देगी, इसका लाभ उठा सकती है, लेकिन केंद्र व राज्य को महिला सरकारी कर्मचारियों को इस योजना से बाहर रखा गया है क्योंकि उन्हें इसके लिए सवेतन मातृत्व अवकाश दिया जाता है।
  • आँगनवाडी कर्मचारियों (AVW) और आँगनवाडी सहायिकाओं की क्रमश: 200 रुपये और 100 रुपये दिये जाते हैं।

योजना के लाभ (Benefits this Scheme)

  • गर्भावस्था और प्रसव के दौरान देखभाल
  • प्रसवपूर्व देखभाल
  • शिशु देखभाल (टीकाकरण, विकास निगरानी)
  • गर्भावस्था के शीघ्र पहचान और पंजीकरण
  • ससथागत प्रसव
  • शिशु और छोटे बच्चों को स्तनपान (IYCF)

महिलाओं के लिए प्रशिक्षण व रोजगार कार्यक्रम हेतु सहयोग (Support to Training and Employment Programme for Women (STEP) )

स्टेप योजना, 1986 - 97 में केंद्रिय क्षेत्रक की योजना के रूप में प्रारंभ की गई थी। योजना मुख्य रूप से, महिलाओं को स्वयंसमर्थ (Viable) समूहों में संगठित करके संपोषणीय आधार पर उनके कौशल विकास, बाजार संपर्क तथा उनके दव्ारा सहायक सेवाओं एवं बैंक दव्ारा ऋण प्राप्ति (Credit) पर केंद्रित है। योजना के उद्देश्य इस प्रकार है:-

  • महिलाओं को छोटे स्वयंसमर्थ समूहों में संगठित करना तथा प्रशिक्षण, बैंक ऋण एवं अन्य आगम (Input) संबंधी सुविधाएँं उपलब्ध कराना।
  • कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण देना।
  • महिला समूहों को सक्षम बनाना ताकि वे अपने आप रोजगार-सह-आय उत्पादक कार्यक्रमों या फिर दैनिक रोजगार तक अपनी पहुँच बना सकें।
  • महिलाओं की योजगार दशाओं में सुधर करना और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं तक उनकी पहुँच बढ़ाना।

योजना के प्रमुख प्रावधाओं के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई है कि इस योजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और शेष 10 प्रतिशत क्रियान्वयन करने वाली संस्था के दव्ारा उठाया जाना है।

धनलक्ष्मी -बालिकाओं के लिए सशर्त नकद हस्तांतरण (Dhanlakshmi- Conditional Cash Transfer for Girl Child)

ये 3 मार्च, 2008 को प्रारंभ की गई योजना है जिसमें बालिका के परिवार (मुख्यत: माँ को) कुछ शर्तें पूरी करने पर नकद राशि हस्तांरित की जाती है।

  • जन्म और जन्म के पंजीकरण का समय
  • टीकाकरण की प्रगति के समय (छमाही हस्तांतरण)
  • टीकाकरण पूर्ण हो जाने पर।
  • विद्यालय में नामांकन और विद्यालय आना जारी रखने पर (महिला तथा बाल विकास मंत्रालय, 8वीं तक और मानव संसाधन और विकास मंत्रालय 9वीं से 12वीं तक नकद राशि देंगे) ।
  • योजना का स्पष्ट और प्रत्यक्ष उद्देश्य यह है कि बालिका की देखरेख एवं उसकी शिक्षा हेतु परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
  • बालिका के प्रति परिवार के नज़रिए में परिवर्तन लाना। इसके कारण परिवार बालिका को भार (Liability) समझाने की जगह परिसंपत्ति (Assets) समझेगा, क्योंकि उसके बने रहने से परिवार को नकद धनराशि मिलेगी।
  • योजना को 7 राज्यों-आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और पंजाब के 11 प्रखंडों में लागू किया गया है।
  • योजना के तहत बालिका के जन्म के पंजीकरण के समय 5000, विद्यालय में नामांकन के समय 1000 तथा उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए 6,250 विभिन्न किस्तों में प्रदान किए जाते हैं और इस तरह लाभार्थी को कुल 13,500 की धनराशि और साथ में एक बीमा भी प्रदान किया जाता है।

उज्जवला योजना (Ujjawala Scheme)

हाल के वर्षों में बांग्लादेश और नेपाल की सीमा से महिलाओं और छोटे बच्चों की अवैध तस्करी बढ़ी है। तस्करी का मुद्दा 11वीं पंचवर्षीय योजना में उठाया गया था और 4 दिसंबर, 2007 को केन्द्रीय क्षेत्र की योजना ‘उज्जवला’ प्रारंभ की गई थी। योजना के 5 घटक है-

  • रोकथाम - सामुदायिक जागरूकता समूहों और किशोर समूहों का निर्माण। पुलिस और सामुदायिक नेताओं में सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री और कार्यशालाओं दव्ारा जागरूकता और संवदेनशीलता बढ़ाना।
  • बचाव-शोषण स्थल से पीड़ित को सुरक्षित निकालना।
  • पुनर्वास- पीड़ितों के लिए सुरक्षित निवास जहाँ आधारभूत आवश्यकता जैसे, भोजन, वस्त्र, परामर्श, चिकित्सकीय देखभाल, विधिक सहायता, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आय उत्पादक गतिविधियों की आपूर्ति की जाती है।
  • पुन: एकीकरण- पीड़ित का परिवार/समुदाय (केवल तभी जब वो चाहे) में पुन: एकीकरण करना और इसमें आने वाली लागत का भुगतान करना।
  • स्वदेश भेजना-सीमा-पारीय पीड़ित को सुरक्षित स्वदेश लौटने में मदद करना।

स्वाधार स्कीम (Swadhar Scheme)

  • स्वाधार योजना को 2001 - 02 में केन्द्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में लागू किया गया था ताकि विषम परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं जैसे- परित्यक्त विधवायें, काशी और वृदांवन में रहने वाली परिवार से त्याग दी गयी स्त्रियाँ, जेल से छोड़ी गई महिला कैदी, प्राकृतिक आपदाओं में जीवित बची महिलायें जिनके पास न तो रहने के लिए घर है, और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता, तस्करी दव्ारा लाई गई या वेश्यालयों से भागी महिलायें, आतंकवादी हिंसा की पीड़ित स्त्रियाँ जिनके पास पारिवारिक मदद और आर्थिक साधन नहीं है, मानसिक रोगी स्त्रियाँ जिनके परिवार/रिश्तेदार नहीं है और HIV/AIDS पीड़ित महिलायें जिनके पास सामाजिक/आर्थिक सहयोग न हो इत्यादि को संपूर्ण व एकीकृत मदद उपलब्ध करायी जा सके।
  • योजना को सामाजिक कल्याण/महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला विकास निगम, शहरी स्थानीय निकायों, मान्यता प्राप्त निजी/सरकारी न्यासों या स्वैच्छिक संगठनों आदि के दव्ारा लागू किया जाता है, ऐसा तभी हो सकता है जब उपरोक्त संस्थाओं को ऐसी स्त्रियों के पुनर्वास के संबंध में आवश्यक अनुभव हो।

मध्य गंगा मैदानों में महिला सशक्तीकरण और आजीविका कार्यक्रम (प्रियदर्शनी योजना) (Women Empowerment and Livelihood Programme in Mid-Genetic Plains (Priyadarshni Scheme) )

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायतों समूहों (SHGs) और बेहतर आजीविका अवसरों के माध्यम से महिलाओं और किशारियों के संकटग्रस्त समूहों का किसी परियोजना क्षेत्र में समग्र सशक्तीकरण (आर्थिक व सामाजिक) सुनिश्चित करना है। इस योजना के तहत 1,00, 000 से अधिक परिवार आयेंगे और 2016 - 17 यानी योजना के अंत तक 7200 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाएगा। हालाँकि प्रोजेक्ट का मुख्य बल आजीविका में सुधार पर है लेकिन साथ ही साथ लाभार्थियों का उनके राजनीतिक, कानूनी व स्वास्थ्य मामलों में क्षमता निर्माण दव्ारा सशक्तीकरण किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) को इसे लागू करने के क्रम में शीर्ष संस्था बनाया गया है। उत्तर प्रदेश के 4 जिलों श्रावस्ती, बहराइच, अमेठी, सुल्तानपुर में और बिहार के मधुबनी और सीतामढ़ी के कुल 13 प्रखंडों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह योजना लागू की गई है।

स्वयंसिद्धा योजना (Swayamsidha Scheme)

  • स्वयंसिद्धा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक फ्लैंगशिप कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य महिलाओं का संपूर्ण सशक्तीकरण करना है। यह योजना पूर्व की इंदिरा महिला योजना (IMY) से उद्भूत हुई है।
  • स्वयंसिद्धा भारतीय महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की एक ऐसी योजना है, जिससे महिलायें आत्म-निर्भरता एवं आत्मसम्मान के साथ रहने में सक्षम होगी। इसके अलावा योजना बिना किसी प्रादेशिक, आर्थिक और सामाजिक भेदभाव के सूक्ष्मवृत्ति पहुँच बढ़ाने और महिलाओं की प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती है।
  • यहाँ ‘स्वयं सहायता’ एक महत्वपूर्ण शब्द है। यह कार्यक्रम महिलाओं को उनकी स्वयं की मदद करने की पैरवी करता है और इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी सामाजिक स्तरों पर और विभिन्न क्षेत्रों व राज्यों की महिलाओं में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सुनिश्चत तंत्र की मदद से जागरूकता के लाभों को वितरित करता है। फरवरी को महिलाओ के ‘आर्थिक सशक्तीकरण’ के माह के रूप देखा गया। ऐसा तब हुआ जब ‘एकीकृत महिला सशक्तीकण कार्यक्रम’ या ‘स्वयंसिद्धा’ की भी शुरूआत हुई और इसी दौरान महिलाओं के संपत्ति के अधिकार पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला भी आयोजित की गई थी।
  • स्वयंसिद्धा जैसा कि नाम है, इसका उद्देश्य महिलाओं को स्व-निर्भर बनाना है और सुदृढ़करण हेतु उन्हें पर्याप्त आत्मविश्वास प्रदान करना है। स्वयं सहायता समूहों पर आधारित महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम के बेहतर स्वरूप के साथ स्वयंसिद्धा नामक योजना फरवरी 2001 में 650 प्रखंडी में प्रारंभ की गई, जिसमें राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 238 इंदिरा आवास योजना ब्लॉक भी शामिल थे। अधिकांश राज्यों में यह योजना ICDS के ढाँचे दव्ारा ही लागू की जाती है, जबकि अधिकांश राज्यों में अतिरिक्त मानवशक्ति व निगरानी की भी व्यवस्था नहीं है। राज्य मशीनरी को उनके दव्ारा किये जाने वाले अतिरिक्त कार्यो के लिए कोई अतिरिक्त वेतन/धनराशि नहीं मिलती है।

कार्यरत महिलाओं के लिए हॉस्टल (Working Women ′ S ′ Hostel)

महिलाओं को रोजगार बाजार में आवागमन की अच्छी सुविधा देने और अपने गृहनगरों से दूर रहने वाली कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और सस्ता आवास देने के लिए भारत सरकार, केन्द्रीय योजना के रूप में 1972 - 73 से कार्यरत महिला हॉस्टल (Working Women Hostel) योजना चला रही है। योजना के अधीन वित्तीय घटक इस प्रकार हैं-

  • सार्वजनिक भूमि पर बने हॉस्टल भवन के निर्माण की कीमत का 75 प्रतिशत वहन करना।
  • किसी किराये की जगह पर चल रहे हॉस्टल को वित्तीय सहायता देना।
  • किसी सार्वजनिक भूमि पर किसी कॉरपोरेट हाउस दव्ारा बनाये जा रहे हॉस्टल पर 50 प्रतिशत अनुदान देना।

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