Public Administration 1: Regulation of the Working Conditions of Domestic Workers

Doorsteptutor material for IAS is prepared by world's top subject experts: Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

भारत में महिलाओं की उन्नति एवं संरक्षण के लिए गठित तंत्र, विधि, संस्थाएँ एवं निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Bodies Constituted for the Protection and Betterment of Women in India)

घरेलू कामगारों के कार्य परिस्थितियों का विनियमन (Regulation of the Working Conditions of Domestic Workers)

  • प्रत्येक नियोक्ता या सेवा प्रदाता या एजेंसियों दव्ारा नियुक्त किए गए घरेलू कामगारों से संबंधित जानकारी एक फार्म एवं निर्धारित शुल्क अदा कर जिला बोर्ड या उसके दव्ारा प्राधिकृत व्यक्ति को देगा।
  • कार्य घंटे-किसी भी कर्मचारी को किसी घर में एक दिन में 9 घंटे या किसी सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम करने की अनुमति या आवश्यकता नहीं होगी।
  • साप्ताहिक अवकाश-प्रत्येक कामगार चाहे वह पूर्णकालिक हो, अंशकालिक हो, रात्रि में कार्य करने वाला कामगार हो, ये सभी साप्ताहिक अवकाश के हकदार हैं।
  • न्यूनतम मजदूरी-संबंधित सरकार अधिसूचना के माध्यम से घरेलू कामगारों को दी जाने वाली न्यूनतम मजदूरी की दर तय करेगी।
  • यदि कोई सेवा प्रदाता इस अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए कानूनों का उल्लंघन करता है तो तीन माह तक के कारावास की सजा तथा दो हजार रुपए तक के जुर्माना से दंडित किया जा सकेगा।

घरेलू कामगार कल्याण कोष (Domestic Workers Welfare Fund)

एक घरेलू कामगार कल्याण कोष नामक कोष का गठन किया जाएगा जिसमें निम्नलिखित को शामिल किया जाएगा-

  • केन्द्र एवं राज्य सरकारों दव्ारा दिए गए अनुदान।
  • इस कोष का प्रशासन एवं देखरेख जिला बोर्ड दव्ारा किया जाएगा तथा घरेलू कामगारों के कल्याण को बढ़ावा देने वाले आवश्यक एवं व्यवहारिक उपायों एवं सुविधाओं के संबंध में व्यय किया जाएगा।
  • घरेलू कामगारों के कल्याण से संबंधित स्कीमों के लिए किसी व्यय की अनुमति देना। इन कल्याणकारी स्कीमों में पारिवारिक कल्याण, परिवार नियोजन, शिक्षा, बीमा तथा अन्य कल्याणकारी उपाय शामिल हो सकते हैं।
  • इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत प्रत्येक घरेलू कामगार जो लाभार्थी के रूप में पंजीकृत है, वह इस अधिनियम के अधीन बोर्ड दव्ारा कोष से उपलब्ध कराए जाने वाले लाभों का हकदार होगा।
  • प्रत्येक घरेलू कामगार जिसने 18 वर्ष की उम्र तो पूरी कर ली है लेकिन 65 वर्ष की उम्र पूरी नहीं की है और पिछले 12 महीनों में कम से कम 90 दिनों से किसी घरेलू कार्य में व्यस्त है तो वह इस अधिनियम के अधीन लाभार्थी के रूप में पंजीकृत होने के योग्य होगा।

भारत में महिला अधिकारों की निगरानी के लिए एजेंसियों एवं संस्थाएँ (Agencies and Institutions to Monitor Women Rights in India)

राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women)

  • देश में महिला हितों की रक्षा एवं संरक्षण की सर्वोच्च संस्था के रूप में राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत किया गया था। इसे महिलाओं के लिए बनाए गए विभिन्न कानूनों का परीक्षण एवं उनकी जाँच करने तथा बदलते परिवेश में उनकी समीक्षा करने तथा नीतिगत मामलों में सरकार को सलाह देने का अधिकार प्राप्त है। इसे महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से बनाए गए कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के संबंध में संस्तुति करने, शिकायत की जाँच करने तथा इन मुद्दों से संबंधित मामलों में स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति प्राप्त हैं।
  • आयोग निरंतर अपने अधिदेश जैसे बलात्कार पीड़ितों के लिए राहत एवं पुनर्वास स्कीम की प्राप्ति, घरेलू हिंसा से महिलाआंे का संरक्षण अधिनियम, 2005 का कार्यान्वयन, तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए राहत एवं पुर्नवास योजना, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, काश्तकारी अधिकारों (Tenancy Rights) , घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम में संशोधनों के लिए प्रयासरत है। यह महिला अधिकारों का उल्लंघन करने तथा उनके साथ विभिन्न प्रकार के अन्याय किए जाने संबंधी शिकायतों को देखता है। महिलाओं के विरुद्ध होने वाले विभिन्न प्रकार के गंभीर अपराधों जैसे बलात्कार, दहेज हत्या, सम्मान के नाम पर की गई हत्या, हत्या, यौन हमला (Sexual Assault) कार्यस्थलों पर उत्पीड़न संबंधी मामलों में आयोग स्वत: संज्ञान लेता है। आयोग महिलाओं को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Service) तथा राज्य महिला आयोग के साथ मिलकर पारिवारिक महिला लोक अदालत (Parivarik Mahila Lok Adalat) आयोजित करता है।

राष्ट्रीय महिला कोष (Rashtrya Mahila Kosh-RMK)

  • राष्ट्रीय महिला कोष (राष्ट्रीय महिला साख कोष) का गठन मार्च 1993, में विशेषकर ग्रामीण एवं असंगठित क्षेत्र की गरीब महिलाओं दव्ारा औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से माइक्रो क्रेडिट (Micro Credit) की प्राप्ति में सामने आ रही सामाजिक-आर्थिक बाधाओं की पृष्ठीभूमि में किया गया था। राष्ट्रीय महिला कोष के गठन का प्रमुख उद्देश्य गरीब महिलाओं को बिना किसी गारंटी के विभिन्न आजीविका एवं आय सृजन गतिविधियों के लिए आसान शर्तों पर सूक्ष्म साख उपलब्ध कराना था जिससे कि वे अपना सामाजिक-आर्थिक विकास कर सकें।
  • माइक्रो क्रेडिट शहरी एवं ग्रामीण गरीब महिलाओं को मध्यस्तरीय लघु वित्त संगठनों (Micro-Financing Organization) दव्ारा उपलब्ध कराया जाता है। राष्ट्रीय महिला कोष माइक्रो क्रेडिट के अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों की क्षमता निर्माण तथा मध्यस्तरीय लघुवित्त संगठनों को प्रबंधन एवं आय सृजन गतिविधियों में सहभागी बनता है ताकि वे साथी सदस्यों एवं जमीनी स्तर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने में सक्षम बन सके। राष्ट्रीय महिला कोष की महिला लाभार्थी उद्यमी कौशल का विकास करने के प्रति प्रोत्साहित हुई हैं। राष्ट्रीय महिला कोष के शासकीय बोर्ड ने इसे पुनर्गठित एवं मजबूत बनाकर सरकार की स्वामित्व वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Finance Company-NBFC) बनाने की अनुमति दे दी हैं।

केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (Central Social Welfare Board- CSWB)

  • केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड का गठन भारत सरकार के एक प्रस्ताव दव्ारा 12 अगस्त, 1953 को किया गया था। इसके गठन का मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से महिलाओं एवं बच्चों से जुड़ी सामाजिक कल्याण गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करना था। यह सरकार एवं स्वैच्छिक क्षेत्र के बीच इंटरफेस यानि अंतराफलक के रूप में कार्य करता है। बोर्ड पारिवारिक परामर्श केन्द्रों, अल्पकालिक आवास (Short Stay Homes) , जागरूकता सृजन परियोजनाओं, शिक्षा कार्यक्रम तथा सहायक सेवाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास कर रहा है।
  • बोर्ड को 1969 में धर्मार्थ कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया था। केन्द्रीय बोर्ड विकास संबंधी योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए बोर्ड ने एक वेब आधारित ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था ई-आवेदन (महिला सशक्तिकरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक आवेदन तथा गैर सरकारी संगठनों दव्ारा विकास कार्य) (E-awed-Electronic Application For Women Empowerment and Development Action by NGOs) की विकास बोर्ड के कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन, पारदर्शिता एवं बेहतर निगरानी के उद्देश्य से शुरूआत की थी।

केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resources Authority-CARA)

केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) भारत सरकार के महिला एवं विकास मंत्रालय के अधीन एक स्वायत निकाय है। यह भारतीय बच्चों के दत्तक ग्रहण हेतु नोडल निकाय के रूप में कार्य करता है तथा इसे देश में दत्तक ग्रहण की निगरानी एवं विनियमन का अधिकार प्राप्त है। केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण, भारत सरकार दव्ारा वर्ष 2003 में अनुसमर्थित अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण पर हेग अधिसमय, 1993 के प्रावधानों के अनुरूप अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण के मामलों को देखने के लिए प्राधिकृत हैं।

केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-

  • देश में गैर-संस्थागत बाल देखरेख सेवाओं के लिए नोडल निकाय के रूप में कार्य करना।
  • अंतर्देशीय दत्तक ग्रहण हेतु हेग अभिसमय के तहत यथाकल्पित केन्द्रीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करना।
  • अनाथ परित्यक्त एवं अध्यर्पित (Surrendered) बच्चों के दत्तक ग्रहण में सहायता करना एवं बढ़ावा देना।
  • दत्तक ग्रहण प्रक्रिया एवं अदाएगी या सुपुर्दुगी प्रणाली को व्यवस्थित करना।

केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की महत्वपूर्ण पहले (Major Initiatives of Central Adoption Resource Authority)

केयरिंग्स (चाइल्ड ऐडाप्शन रिसोर्स इन्फॉर्मेशन एंड गाइडेंस सिस्टम) एक सूचना तकनीक आधारित प्रणाली है जो बाल दत्तक प्रणाली में बेहतर पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और यह एक ऑन लाइन मंच है जो एक बेहतर वेब आधारित प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से संपर्क सृजन का कार्य करती है।

यह-

  • शीघ्र दत्तक ग्रहण की सुविधा प्रदान करता है।
  • दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
  • कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच उत्तरादायित्व बढ़ाता है।
  • उन्नत कार्य के लिए पक्षकारों का नेटवर्क विकसित करना है।
  • प्रभावी नीति निर्माण एवं अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय आँकड़ा संचय (National Database) का कार्य करता है।

जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting)

  • जब तक लैंगिक चिंताओं को सरकारी कार्यक्रमों एवं नीतियों एवं योजना प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा नहीं बनाया जाता और उसके बाद कार्यान्वयन एवं मूल्यांकन के चरण में भी जारी नहीं रखा जाता तब तक राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में सहभागिता सुनिश्चित करना संभव नहीं होगा तथा तब तक सही मायने में उन्हें सशक्त नहीं समझा जा सकता है।
  • जेंडर बजटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे बजट प्रक्रिया के सभी स्तरों एवं चरणों यथा योजना, नीति कार्यक्रम तैयारी, लक्षित समूहों आदि की आवश्यकताओं का मूल्यांकन तथा संसाधानों की प्राथमिकता आदि सभी चरणों में लैंगिक संवेदनशीलता के लिए सम्मिलित किया जाता है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि भारत वित्त मंत्रालय के अधीन जेंडर बजट को संस्थागत रूप देने वाला पहला देश माना जाता है। भारत सरकार बजट संबंधी लेखा प्रणाली का पालन करते हुए बजट संबंधी वर्गीकरण में बदलाव लाने की संभावना पर विचार कर रही है ताकि मुख्य बजट में जेंडर बजट को शामिल किया जा सके।
  • जेंडर बजट की तार्किकता इस तथ्य के संदर्भ में है कि राष्ट्रीय बजट संसाधनों के आवंटन प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों की प्राथमिकता अनुसार महिलाओं एवं पुरुषों को भिन्न तरीके से प्रभावित करते हैं। इसे एक ऐसे यंत्र के रूप में समझा जाता है जो महिलाओं के प्रति मनोवृत्तियों एवं परंपरागत मान्यताओं से आगे आता है और उसमें बदलाव ला सकता है और एक लैंगिक संवदेनशील जागरूकता को जन्म देता है जो न केवल महिलाओं को मुख्यधारा में शामिल होने में सक्षम बनाता है बल्कि उन्हें देश के समान नागरिक के रूप में उनके अधिकार को भी मान्यता देता है।

बजट के लैंगिक विश्लेषण के पाँच चरण-

  • महिलाओं, पुरुषों, लड़कों एवं लड़कियों की स्थिति का वर्णन करे।
  • जाँच करें कि क्या नीति लैंगिक रूप से संवेदनशील है?
  • जाँच करें कि क्या लैंगिक संवेदनशील नीति कार्यान्वित करने के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन किया गया हैं?
  • जाँच करें कि क्या किया गया व्यय योजनागत है?
  • नीति एवं व्यय के प्रभाव का मूल्यांकन करें।

Developed by: