Public Administration: Rajiv Gandhi National Crèche Scheme for the Children of Working Mothers

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केंद्र व राज्य दव्ारा समाज के असुरक्षत तबकों के लिए कल्याण योजनाएँ (Welfare Schemes for the Vulnerable Sections of the Population by the Centre and State)

बच्चों के लिए राष्ट्रीय चार्टर (National Charter for Children)

भारत सरकार ने बच्चों के लिए राष्ट्रीय चार्टर को 9 फरवरी, 2004 को राजपत्र में अधिसूचित घोषणा के अनुसार अपनाया था। राष्ट्रीय चार्टर सरकार का बच्चों के लिए एजेंडे का वक्तव्य है। यह दस्तावेज भारत सरकार की बच्चों के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देता है, जिसमें बच्चों को अस्तित्व का अधिकार, स्वास्थ्य एवं पोषण, जीवन स्तर खेलने एवं आराम करने, प्रारंभिक शैशवावस्था में देखरेख, शिक्षा, बालिका शिशु की सुरक्षा, किशोर सशक्तीकरण, जीवन व स्वतंत्रता में समानता, नाम व राष्ट्रीयता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संघ बनाने व शांतिपूर्ण सम्मेलन की स्वतंत्रता, परिवार का अधिकार तथा सभी प्रकार के दुर्व्यवहार व शोषण से बचने का अधिकार शामिल होगा। साथ ही यह विषम परिस्थितियों में रह रहे बच्चों, अक्षमताओं से ग्रसित बच्चों, वंचित व अलाभकारी समूहों के बच्चों और पीड़ित बच्चों को भी संरक्षण प्रदान करता है।

कार्यरत माताओं के लिए राजीव गांधी राष्ट्रीय शिशुसदन योजना (Rajiv Gandhi National Crèche Scheme for the Children of Working Mothers)

  • राजीव गांधी राष्ट्रीय शिशुसदन योजना 0 - 6 वर्ष के उन कामकाजी माताओं को, बच्चों को दैनिक देखरेख सुविधा प्रदान करती है जिनकी मासिक आय 12,000 से कम है। यह योजना बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान के साथ-साथ, शिशु सदन पूरक पोषण, स्कूल-पूर्व शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं आदि का भी प्रावधान करती है। यह योजना वर्तमान में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड (CSWB) एवं भारतीय बाल कल्याण परिषद (ICCW) दव्ारा लागू की जा रही है।
  • वर्तमान में एक शिशु सदन का एक वर्ष का व्यय 42,384 है। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 20 प्रतिमाह, गैर-गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 60 प्रतिमाह है। 11वीं योजना में इस योजना के लिए 550 करोड़ के व्यय का प्रावधान था।

बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (National Plan of Action for Children, 2005)

परिचय (Introduction)

बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना, 2005 मुख्य रूप से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों को उनके सभी अधिकार देने का प्रावधान करती है। सरकार को बच्चों के अस्तित्व, वृद्धि, विकास एवं सरंक्षण के लिए सभी प्रावधान तथा सक्षम वातावरण का निर्माण करना चाहिए ताकि प्रत्येक बच्चे में अपनी क्षमता पहचानने की शक्ति हो और वह स्वस्थ्य और उत्पादक नागरिक के रूप में बड़ा हो। इसलिए सभी सरकारी स्तरों पर तथा सभी क्षेत्र के सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ-साथ परिवारों, समुदायों, स्वैच्छिक क्षेत्रक, नागरिक समाज और स्वयं बच्चों के सहयोग की भी आवश्यकता है।

पूरे देश में बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना, 2005 राष्ट्रीय प्रावधानों और राज्य की कार्य योजना के अनुसार लागू की जाएगी। बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना, 2005 निम्न 4 क्षेत्रकों में बांटी गई है और अधिकारों के सभी आयु वर्ग के समूहों पर लागू की गई है, जिनमें शामिल हैं-

  • बाल अस्तित्व
  • बाल विकास
  • बाल संरक्षण
  • बाल भागीदारी

बच्चों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना 2005 के निर्देशक सिद्धांत (The Guiding Principle of the National Plan of Action for Children, 2005 Are)

  • बच्चों को एक परिसंपत्ति व मानवाधिकार से युक्त व्यक्ति की भांति संबोधित करना।
  • समानता सुनिश्चित करने के लिए लिंग, वर्ग, जाति, धर्म और कानूनी स्तर पर विभेद के मुद्दों को संबोधित करना।
  • सभी नीतियों और कार्यक्रमों में सर्वाधिक पीड़ितों, अत्यंत निर्धनों और बेहद कम सहायता प्राप्त बच्चों को सबसे अधिक प्राथमिकता देना।
  • बचपन के विविध स्तरों को पहचानना और सभी जरूरतों को पूरा करना, जो उनके अधिकारों को सभी परिस्थितियों में पूरा करें।

योजना ने प्राथमिकताओं और चुनौतियों की तीव्रता को ध्यान में रखते हुए 12 प्रमुख बिंदुओं की पहचान की है, जिन पर पहुँच के मामले में तथा कार्यक्रम के उद्देश्यों तथा संसाधन आवंटन के मामले में सर्वाधिक ध्यान दिये जाने की जरूरत है ताकि बच्चों के लिए आवश्यक लक्ष्यों और जरूरतों को निम्नलिखित स्तरों पर पूरा किया जा सके-

  • शिशु मृत्यु दर को घटाना।
  • मातृत्व मृत्यु दर को घटाना।
  • बच्चों में कुपोषण को घटाना।
  • जन्म का 100 प्रतिशत पंजीकरण प्राप्त करना।
  • प्रारंभिक बचपन में देखरेख और विकास का सार्वभैमीकरण तथा सभी बच्चों की गुणात्मक शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना (जिसमें विद्यालयों तक 100 प्रतिशत पहुँच भी शामिल है) ।
  • बाल विवाह, बालिका शिशु हत्या, कन्या भ्रूण हत्या की पूर्ण समाप्ति तथा बालिका के अस्तित्व, विकास और संरक्षण को सुनिश्चित करना।
  • ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जल व स्वच्छता की उपलब्धता को बेहतर बनाना।
  • विषम परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के अधिकारों को संबोधित करना।
  • सभी प्रकार के दुर्व्यवहार, शोषण और उपेक्षा से पीड़ित बच्चों के कानूनी व सामाजिक अधिकार सुनिश्चित करना।
  • बाल श्रम की पूर्ण समाप्ति जिसमें बच्चों के सभी प्रकार के शोषण का समापन शामिल हैं।
  • बच्चों के हित और अधिकारों से जुड़े कानूनों और कार्यक्रमों की निगरानी, पुनर्विलोकन और उनमें सुधार करना।
  • बच्चों के जीवन पर प्रभाव डालने वाले मुद्दों और निर्णयों में बच्चों की भागीदारी और चुनाव को महत्व देना।

एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS) (Integrated Child Development Service (ICDS) Scheme)

2 अक्टूबर, 1975 को प्रारंभ हुई यह योजना, आज प्रारंभिक शैशवावस्था में विकास से संबंधित विश्व की सबसे बड़ी और विशिष्ट योजना है। ICDS बच्चों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का सर्वप्रमुख सूचक है, साथ ही एक तरफ यह योजना विद्यालय पूर्व शिक्षा तक बच्चों की पहुँच की भारत की चुनौती का जवाब है तो दूसरी तरफ कुपोषण, अस्वस्थता, घटती सीखने की क्षमता और मृत्यु दर के प्रति भारत का जवाब है।

ICDS योजना के उद्देश्य (Objective of the ICDS Scheme)

ICDS योजना 1975 में निम्न उद्देश्यों के साथ लागू की गई थी-

  • 0 - 6 वर्ष के बच्चों के पोषणीय और स्वास्थ्य स्तर को सुधारना।
  • बच्चे के बेहतर मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए आधार सुनिश्चित करना।
  • मृत्यु दर, अस्वस्थता, कुपोषण और विद्यालय छोड़ने की संख्या में गिरावट लाना।
  • बाल विकास सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों में प्रभावी सहयोग प्राप्त करना।
  • माता को बेहतर पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा उपलब्ध कराना ताकि माता की क्षमता में वृद्धि हो और वह बच्चे के स्वास्थ्य एवं पोषण की जरूरतें पूरी कर सके।

ICDS योजना के अधीन दी जाने वाले सेवायें (Services Provided under ICDS Scheme)

उपरोक्त उद्देश्यों को निम्न सेवाओं की मदद से प्राप्त किया जा सकता है-

  • पूरक पोषण
  • टीकाकरण
  • स्वास्थ्य जाँच
  • संदर्भित सेवाएँ
  • विद्यालय पूर्व अनौपचारिक शिक्षा
  • पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा
Services Provided under ICDS Scheme
सेवायेंलक्षित समूहसेवा प्रदाता
पूरक पोषण6 वर्ष से कम आयु के बच्चे गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलायेंआँगनवाड़ी कार्यकर्ता और आँगनवाड़ी सहायक
टीकरकण ⚹6 वर्ष से कम आयु के बच्चे गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलायेंANM/MO
स्वास्थ्य जाँच ⚹6 वर्ष से कम आयु के बच्चे गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलायेंANM/MO/AWW ⚹
संदर्भित सेवाएँ6 वर्ष से कम आयु के बच्चे गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलायेंAWW/ANM/MO
विद्यालय पूर्व शिक्षा3 - 6 वर्ष के बच्चेAWW
पोषण औ स्वास्थ्य शिक्षामहिलायें (15 - 45 वर्ष)AWW/ANM/MO
  • ⚹ AWW, ANM के लक्षित समूहों की पहचान करने में मदद करता है
  • # ANM (Auxiliary Nurse Midwife) , MO (मेडिकल ऑफिसर/चिकित्सा अधिकारी) , AWW (आँगनवाड़ी कार्यकर्ता)
  • छ: में से तीन सेवायें-टीकरकण, स्वास्थ्य जाँच और संदर्भित सेवाएँ लोक स्वास्थ्य अवसरंचना के माध्यम से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दव्ारा प्रदान की जाती हैं।

पोषण जिसमें पूरक पोषण भी शामिल है (Nutrition Including Supplementary Nutrition)

  • इसमें पूरक स्तनपान, वृद्धि की निगरानी, विटामिन ए की कमी के कारण होने वाली बीमारियों से सुरक्षा और पोषणीय रक्ताल्पता का नियंत्रण शामिल है। समुदाय के सभी परिवारों का सर्वेक्षण किया जाता है ताकि 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का पता चले सके और उनको साल के 300 दिन पूरक पोषक तत्व मिल सकें।
  • तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों का वजन माह में एक बार और 3 - 6 वर्ष के बच्चों का वजन तिमाही में नियमित रूप से मापा जाता है। 6 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के ‘आयु के लिए वजन’ कार्ड बनाये जाते हैं। इसमें वृद्धि में आ रहे अवरोधों की पहचान होती है और पोषण स्तर जानने में मदद मिलती है।

टीकाकरण (Immunization)

गर्भवती महिलाओं एवं शिशुओं का टीकाकरण बाद में वैक्सीन के दव्ारा होने वाली 6 बीमारियों-पोलियों, डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस, क्षयरोग और खसरे से बच्चों की रक्षा करता है। ये सभी शिशुओं की मृत्युदर, अक्षमता, अस्वास्थता और संबंधित कुपोषण के प्रमुख करण हैं अत: इन्हें रोका जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं में टिटनेस का टीकाकरण मातृत्व मृत्यु दर तथा शिशु मृत्यु दर दोनों में कमी लाता हैं।

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