Public Administration: World Health Organisation on Disability Laws

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भारत में श्रमिकों की बेहतरी और संरक्षण के लिए तंत्र, कानून, संस्थायें और संवैधानिक निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Constitutional Bodies for the Betterment and Protection of Labourers in India)

नि: शक्तता से पीड़ित लोगों के संरक्षण एवं बेहतरी हेतु निर्मित तंत्र, कानून, संस्थायें और निकाय (Mechanism, Laws, Institutions and Bodies Constituted for the Protection and Betterment of People Suffering with Disabilities)

परिचय (Introduction)

एक अनुमान के मुताबिक विश्व की 10 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी रूप की नि: शक्तता या शारीरिक दुर्बलता (विश्व स्वास्थ्य संगठन कार्य योजना 2006 - 2011) से प्रभावित है। नि: शक्तता शब्द के कई अर्थ हैं। हालाँकि मोटे तौर पर नि: शक्तता स्वास्थ्य में गिरावट का संकेत करता है। स्वास्थ्य को इसके विभिन्न कार्य क्षेत्रों जैसे गतिशीलता, पहचानने, सुनने एवं देखने के कार्यक्षता की संकल्पना (विश्व स्वास्थ्य संगठन 2004) के रूप में समझा जा सकता है। जनसंख्या वृद्धि, बुढापा बढ़ने तथा गंभीर बीमारियों के उभरने से नि: शक्त लोगों की संख्या बढ़ रही है। नि: शक्तता की गंभीरता के अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया में इसका प्रभाव कुल जनसंख्या के 1.5 से 21.3 प्रतिशत के बीच है।

नि: शक्तता पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation on Disability)

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (1973) ने शारीरिक दुर्बलता, नि: शक्तता और असमार्थ्यता के बीच अंतर किया है।
  • शारीरिक दुर्बलता (Impairment) , मनोवैज्ञानिक, शारीरिक या शरीर रचना या शारीरिक कार्यशैली में कमी या दुर्बलता है।
  • एक सामान्य व्यक्ति के लिए अपेक्षित कार्य दक्षता की तुलना में नि: शक्तता (Disability) किसी तरह का कार्य करने की क्षमता में रूकावट या कमी की स्थिति है (जो कि शारीरिक दुर्बलता से उत्पन्न होता है।)

अमसार्थ्यता (Handicap) एक व्यक्ति के लिए प्रतिकूल परिस्थिति या अलाभा की स्थिति है जो कि शारीरिक दुर्बलता या नि: शक्तता से उत्पन्न होती है और उस भूमिका को पूरा करने से रोकती है जो उस व्यक्ति के लिए सामान्य समझा जाता है। ऐसा व्यक्ति की उम्र, लिंग या सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों पर निर्भर करता है।

2001 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कृत्य (Functioning) नि: शक्तता और स्वास्थ्य का अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण जारी किया। इसने मोटे तौर पर नौ कार्यो का वर्णन किया जिसे करने में नि: शक्त लोग कठिनाई का सामना करते हैं।

  • सीखना या ज्ञनान का उपयोग करना
  • सामान्य कार्य और मांगे (Demands)
  • संप्रेषण (Communication)
  • गतिशीलता (Mobility)
  • अपनी देखभाल (Self Care)
  • घरेलू जीवन (Domestic Life)
  • अंतवैयक्तिक अंतर्क्रिया एवं संबंध (Interpersonal Interactions and Relationship)
  • जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्र (Major Life Areas)
  • सामुदायिक, सामाजिक और नागरिक जीवन

भारत में नि: शक्तता का प्रसार (Prevalence of Disability in India)

भारत में नि: शक्तता के विभिन्न प्रसार दर उपलब्ध हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 21 मिलियन से भी अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की नि: शक्तता से पीड़ित हैं।

नि: शक्त जनसंख्या की संख्या और नि: शक्तता के प्रकार (Number of Disabled Population and Type of Disability)

Number of Disabled Population and Type of Disability
जनसंख्याप्रतिशत
कुल जनसुख्या1, 028,610, 328100.0
कुल नि: शक्त जनसंख्या21,906, 7692.1
नि: शक्तता दर (प्रति लाख जनसंख्या)2,130-
नि: शक्तता के प्रकार-
देखने में10,634, 8811.0
बोलने में1,640, 8680.2
सुनने में1,261, 7220.1
गतिविधि करने में1,105, 4770.6
मानसिक2,263, 8210.2

इसके विपरीत राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (National Sample Survey Organization) ने अनुमान लगाया है कि भारत में नि: शक्तता से पीड़ित लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का 1.8 प्रतिशत (49 - 90 मिलियन) है और नि: शक्तता से पीड़ित 75 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। केवल 49 प्रतिशत नि: शक्त लोग साक्षर हैं तथा केवल 34 प्रतिशत रोज़गार करते हैं। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन देखने, सुनने, बोलने, चलने तथा मानसिक नि: शक्तता को भी शामिल करता है।

नि: शक्तता के प्रकार (Types of Disability)

  • चलने संबंधी नि: शक्तता (Locomotors Disability) -चलने संबंधी नि: शक्तता के अंतर्गत व्यक्ति स्वयं या किसी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचालित करने में अक्षम रहता है और तंत्रिका तंत्र में समस्या के कारण कोई भी कार्य करने में असमर्थ रहता है। कुछ सामान्य स्थितियाँ जिनसे चलने संबंधी नि: शक्तता को बढ़ावा मिल सकता है वे हैं- पोलियो, प्रमस्तिष्क पक्षाघात (Cerebral Palsy) , ऑटिज्म, अंगच्छेद (Amputation) , रीढ़ मस्तिष्क, मुलायम उत्तक में चोट, हड्‌डी टूट जाना, मांसपेशीय दुर्विकास (Muscular Dystrophies) आदि।
  • दृश्यता संबंधी नि: शक्तता (Visual Disability) - दृश्यता संबंधी नि: शक्तता दृष्टिहीनता से तात्पर्य एक व्यक्ति की पूर्णत: या अंशत: देखने की अक्षमता से है। दृष्टिहीन नि: शक्त व्यक्ति देखने संबंधी शारीरिक दुर्बलता से पीड़ित होता है।
    • निम्न दृश्यता या कमजोर दृष्टि (Low Vision or Poor Eye Sight) से पीड़ित व्यक्ति इस स्थिति का सामना तब भी करता है जब वह चिकित्सीय स्वीकृति प्राप्त उपचार करवाता है फिर भी कमजोर दृश्यता से पीड़ित व्यक्ति इस स्थिति में होता है कि वह उपयुक्त सहायक उपकरणों की सहायता से अपने कार्य कर सके।
  • मानसिक बीमारी (Mental Illness) -मानसिक बीमारी में मानसिक बीमारी तथा मानसिक मंदता (Retardation) दोनों शामिल होते हैं। मानसिक मंदता को मंद बुद्धि (State of Arrested) या बुद्धि के अपूर्ण विकास के रूप में समझा जा सकता है। इसे विकास काल (जैसे-ज्ञान संबंधी भाषा, चलने-फिरने, सामाजिक योग्यता) के दौरान कौशल की कमी के रूप में समझा जा सकता है जो सामान्य रूप से बुद्धि के स्तर को दर्शाता है। मानसिक रूप से रोगग्रस्त स्वास्थ्य के अंतर्गत शिजोफ्रेनिया, व्याकुलता संबंधी बीमारी (Anxiety Discorder) , अवसाद संबंधी बीमारी (Depressive Disorder) तथा अन्य किसी तरह की समस्या (जो दिमाग में निरंतर रासायनिक परिवर्तन के कारण होता है) को रखा जाता है।
  • बोलने या सुनने संबंधी नि: शक्तता (Speech and Hearing Disability) - बोलने (वाक) या सुनने (श्रव्य) संबंधी नि: शक्तता के अंतर्गत व्यक्ति किसी ध्वनि को बोलने या सुनने में अक्षम होता है।
  • सीखने संबंधी नि: शक्तता (Learning Disability) - यह एक ऐसी बीमारी है जो समझ शक्ति, या लिखने-पढ़ने की भाषा के आधारभूत मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। यह बीमारी सामाजिक अंतर्क्रिया के लिए आवश्यक बोलना, पढ़ना, भाषा के विकास तथा संबंधिति संचार कौशल को प्रभावित करती है। मस्तिष्क पर चोट (Brain Injury) मस्तिष्क का सामान्य रूप से कार्य न करना (Minimal Brain Dysfunction) , मानसिक विकार जिससे पढ़ने-लिखने में कठिनाई हो (Dyslexia) , बुद्धि क्षय के कारण भाषा को समझने या प्रयोग करने में अक्षमता (Development Aphasia) सीखने संबंधी नि: शक्तता के उदाहरण हैं।
  • विविध नि: शक्तता (Multiple Disabilities) - विविध नि: शक्तता का तात्पर्य नि: शक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण एवं पूर्ण सहभागिता) अधिनियम, 1995 के अनुच्छेद (2) के खंड (i) में परिभाषित दो या दो से अधिक नि: शक्तता का योग होता है जैसे दृष्टिहीनता या कमजोर दृष्टि, बोलने और सुनने संबंधी शारीरिक दुर्बलता, मानसिक मंदता एवं मानसिक बीमारी तथा कुष्ठरोग सहित चलने-फिरने संबंधी शारीरिक दुर्बलता।
    • शारीरिक दुर्बलता या नि: शक्तता के प्रमुख कारणों में गंभीर बीमारियों जैसे मधुमेह, हृदय वाहिनी संबंधी बीमारी (Cardiovascular Disease) एवं कैंसर, सड़क दुर्घटना में घायल होना, संघर्ष, मानसिक दुर्बलता, जन्म संबंधी विकृति, कुपोषण, एचआईवी/एड्‌स और अन्य संक्रामक रोगों को रखा जा सकता है।

नि: शक्तता के कारण (Causes of Disability)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की नि: शक्तता संबंधी पुस्तिका (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग-2005) में नि: शक्तता के अप्रत्यक्ष कारणों को विस्तार से बताया गया है।

  • कुपोषण (Malnutrition) - अपने विभिन्न रूपों में यह भारत में नि: शक्तता का प्रमुख कारण है तथा अन्य बीमारियों में भी सहायक है जो नि: शक्तता की संभावना उत्पन्न करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक 515 मिलियन एशियाई व्यक्ति गंभीर तौर पर कुपोषित हैं, में विश्व में भुखमरी के शिकार कुल लोगों का दो-तिहाई है।
    • विटामिन ए की कमी - अंधापन
    • विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी - बेरी बेरी (Beriberi)
    • विटामिन डी की कमी - सूखा रोग (Rickets)
    • आयोडीन की कमी- मंद वृद्धि, सीखने में कठिनाई बौद्धिक नि: शक्तता और घेंघा या गलगंड (Goitre)
    • लौह की कमी- एनीमिया जो की सीखने एवं कार्य करने को प्रभावित करता है और यह मातृ मृत्यु दर का प्रमुख कारण है।
    • कैल्सियम की कमी- भंगुर हड्‌िडयाँ (Osteoporosis)
  • संघर्ष (Confict) - स्थायी नि: शक्तता के लिए युद्ध एक अकेला सबसे बड़ा कारण है जो केवल युद्ध लड़ने वाले सैनिकों बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों की नि: शक्तता के लिए भी उत्तरदायी है। नागरिक प्राणघातक रासायनिक एवं परमाणु अस्त्रों से होने वाले नुक्सान का जोखिम उठाने के लिए बाध्य किए जाते हैं। अफगानिस्तान कंबोडिया के साथ 206 समुदायों के बीच कराए गए अध्ययन के आँकड़ों के अनुसार बारूदी सुरंगों के विस्फोट के कारण नि: शक्तता की दर 0.9 प्रतिशत है।
  • व्यावसायिक जोखिम (Occupational Harards) - भारत में लगभग 90 प्रतिशत श्रमबल असंगठित क्षेत्र में हैं। इस क्षेत्र को निम्न स्तर की तकनीक सुरक्षा के निम्न मानक और खतरनाक कार्य स्थिति के रूप में माना जाता है। गेंहू की खेती एवं अगंच्छदन धान की खेती एवं माशपेशिया बीमारियाँ नारियल चुनना तथा तथा रीढ़ संबंधी चोट (Spinal Cord Injury) कुछ ऐसे जोखिम है जो विशिष्ट कृषि कार्यों से जुड़े हैं।
  • यातायात जोखिम (Traffic Hazard) - अनुमानित है कि 2020 तक एशिया प्रशांत क्षेत्र मे सड़क दुर्घटना नि: शक्तता का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा। सड़क दुर्घटना में जीवित बचे लोगो में चतुराग घात (Quadriplegia) , सदमा के कारण शरीर के निचले आधे भाग का लकवाग्रसत होना (Paraplegia) मस्तिष्क का क्षतिग्रस्त होना (Brain Damage) तथा व्यवहारपरक विकृति (Behavioural Disorders) जैसे कुछ सामान्य नि: शक्तता पायी जाती है।