Quasi-Judicial Institutions: Controller of Certifying Authorities

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प्रमाणक अधिकारियों का नियंत्रक (Controller of Certifying Authorities)

  • प्रमाणक अधिकारियों का नियंत्रक (सीसीए) भारत में ई वाणिज्य और ई शासन के विकास के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के उपयोग को बढ़ावा देता है। सूचना तकनीक अधिनियम, 2002 ने विषम कूट प्रणालियों पर आधारित डिजिटल हस्ताक्षरों को वैधानिक मंजूरी उपलब्ध करायी है। डिजिटल हस्ताक्षरों के समकक्ष के रूप में माना जाता है तथा डिजिटल हस्ताक्षर वाले इलेक्ट्रानिक दस्तावेजों को कागजी दस्तावेजों के समान समझा जाता है। सूचना तकनीकी अधिनियम प्रमाणक प्राधिकारियों के नियंत्रक अधिकारियों के कार्यप्रणाली को विनियमित करता है और उन्हें धारा 24 के तहत लाइसेंस प्रदान करता है। ये प्रमाणक अधिकारी प्रयोक्ताओं के इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण हेतु डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण-पत्र जारी करते हैं।
  • प्रमाणक अधिकारियों का नियंत्रक अपनी स्वयं की निजी कुंजी प्रयोग करने वाले प्रमाणक अधिकारियों की सार्वजनिक कुंजियों को पमाणित करता है, जिससे साइबर स्पेस में उपस्थित प्रयोक्ता यह सत्यापित कर लेते हैं कि उन्हें दिया गया प्रमाण-पत्र एक लाइसेंस प्राप्त सीसीए दव्ारा जारी किया गया है। इस उद्देश्य के लिए सीसीए दव्ारा भारतीय मूल प्रमाणक प्राधिकरण (आसीएआई) का प्रचालन किया जाता है। सीसीए राष्ट्रीय डिजिटल प्रमाण-पत्र भंडार (एनआरडीसी) का रख रखाव भी करता है, जिससे देश के सभी प्रमाणक प्राधिकारियों दव्ारा जारी प्रमाण-पत्रों को रखा जाता है।

सीसीए के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • प्रमाण कार्यो की गतिविधियों पर पर्यवेक्षण करना।
  • प्रमाणन प्राधिकरण दव्ारा बनाये गये मानकों का निर्धारण करना।
  • प्रमाणन प्राधिकरण उनके व्यापार का संचालन करेगा जो करने के लिए विषय की स्थिति को निर्दिष्ट करना।
  • लिखित, मुद्रित या दृश्य सामग्री को एक डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और सार्वजनिक कुंजी के संबंध में वितरित या इस्तेमाल किया जा सकता है कि विज्ञापन की सामग्री को निर्दिष्ट करना।
  • एक डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र और कुंजी के फार्म और सामग्री को निर्दिष्ट करना।
  • खातों को प्रमाणन प्राधिकरण दव्ारा रखा जाएगा जिसमें फार्म को प्रमाणन प्राधिकरण दव्ारा रखा जाएगा जिसमें फार्म और तरीके निर्दिष्ट करना।

भारतीय चिकित्सा परिषद (Medical Council of India)

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) भारत में चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा योग्यता की मान्यता के उच्च मानकों को स्थापित करने और बनाये रखने की जिम्मेदारी के साथ एक सांविधिक निकाय है। एमसीआई भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1933 के तहत 1934 में स्थापित किया गया था। उक्त अधिनियम को भारतीय चिकित्सा परिषद 1956 दव्ारा निरसित कर दिया गया। इस अधिनियम में बाद में 1964,1993 में तथा 2001 में संशोधन किया गया था। चिकित्सा पदव्ति और चिकित्सा शिक्षा पर नियंत्रण एवं विनियमित करने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद कार्य निम्नलिखित हैं-

  • स्नातक तथा स्नातकोतर स्तरों पर दोनों चिकित्सा शिक्षा के समान मानक को बनाये रखना।
  • चिकित्सकीय अर्हताओं की पारस्परिक मान्यता के मामले में अन्य देशों के साथ आदान-प्रदान करना।
  • मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय योग्यता प्राप्त करने वाले चिकित्सकों अस्थायी/स्थायी पंजीकरण प्रदान करना।
  • मान्यता प्राप्त मेडिकल कालेजों में स्नाकोतर चिकित्सा शिक्षा का नियमन करना।
  • भारत में चिकित्सा संस्थानों दव्ारा की गयी। चिकित्सा योग्यता की पहचान करना।
  • भारत में विदेशी चिकित्सा योग्यता की पहचान करना।

भारतीय औषध निमाण विज्ञान परिषद (Pharmacy Council of India)

भारतीय फार्मेसी परिषद (पीसीआई) एक सांविधिक निकाय है जिसका गठन फार्मेसी अधिनियम, 1948 के अधीन किया गया था। यह भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है। भारतीय फार्मेसी परिषद देश में फार्मेसी के पेशे और व्यवहार को विनियमित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

भारतीय फार्मेसी परिषद निम्नलिखित कार्यो के लिए उत्तरदायी है-

  • फार्मेसी अधिनियम के अधीन एक औषध विक्रेता के रूप मे पंजीकरण के उद्देश्य से देश में फार्मेसी शिक्षा का विनियमन करना।
  • एक फार्मासिस्ट के रूप में योग्यता के लिए आवश्यक शिक्षा के न्यूनतम मानक निर्धारित करना।
  • फार्मेसी अधिनियम के अधीन अनुमोदन मांगने वाली फार्मेसी संस्थाओं का निरीक्षण करना।
  • फार्मेसी के व्यवसाय और व्यवहार का विनियमन करना।
  • औषध विक्रेताओं के केन्द्रीय रजिस्टर का रख-रखाव करना।
  • अध्ययन और फार्मेसी पाठ्‌यक्रम उपलब्ध कराने शैक्षिक प्रशिक्षण संस्थानों से फार्मासिस्ट यानि अनुमोदन के लिए परीक्षा के पाठ्‌यक्रम को मंजूरी प्रदान करना।

भारतीय दंत चिकित्सा परिषद (Dental Council of India)

भारतीय दंत चिकित्सा परिषद (डीसीआई) एक सांविधिक निकाय है। डीसीआई का गठन दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 के तहत किया गया था। इसके प्राथमिक उद्देश्य देश में दंत चिकित्सा की शिक्षा व्यवसाय एवं इसकी आचार नीतियों को विनियमित करना है। यह प्रशिक्षण सुविधाओं की पर्याप्तता को सुनिश्चित करने के लिए दंत चिकित्सा संस्थानों का समय-समय पर निरीक्षण करती है।

दंत चिकित्सक अधिनियम, 1948 के प्रावधान के तहत डीसीआई को निम्नलिखित जिम्मेदारी सौंपी गयी है-

  • देश भर में स्नातक और स्नाकोत्तर स्तर पर चिकित्सकीय शिक्षा का पर्यवेक्षण करना।
  • अनुमति देने के लिए
    • नई दंत चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना हेतु।
    • मौजूदा कॉलेजों का सेवन क्षमता में वृद्धि हेतु।
    • मौजूदा कॉलेजों में नये पाठ्‌यक्रम शुरू करने हेतु।
  • दंत चिकित्सक, दंत यांत्रिकी और तरह के शर्तों के प्रशिक्षण के लिए मानक पाठ्‌यक्रम निर्धारित करना।
  • इस अधिनियम के तहत अन्य आवश्यकताओं के मानक तय करने के लिए कार्य करना।

भारतीय पशु चिकित्सा परिषद (Veterinary Council of India)

भारतीय पशु चिकित्सा परिषद (वीसीआई) एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1984 के तहत किया गया था। यह देश में पशु चिकित्सा व्यवहार करने के उद्देश्य हेतु स्थापित किया है।

भारतीय पशु चिकित्सा परिषद के कार्य हैं-

  • देश में पशु चिकित्सा व्यवहार को विनियमित करना।
  • पशु चिकित्सा शिक्षा के न्यूनतम-मानकों को निर्धारित करना।
  • देश में पशु चिकित्सकों के रजिस्टर को तैयार करना एवं उसका रख-रखाव करना।
  • पेशेवर आचरण, शिष्टता एवं आचार संहिता के मानकों को निर्धारित करना।
  • पशु चिकित्सा व्यवहार एवं शिक्षा से जुड़े सभी नियामक मामलों पर केन्द्र एवं राज्य सरकार को परामर्श देना।
  • विनियमों का निर्माण करना।
  • अधिनियम के प्रावधानों और उसके अंतर्गत बनाए गये नियमों और विनियमों को लागू करना।

भारतीय केन्द्रीय चिकित्सा परिषद (Central Council of Indian Medicine)

भारतीय केन्द्रीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन भारतीय केन्द्रीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1970 के तहत किया गया था। सीसीआईएम भारतीय औषधीय प्रणाली में पालन की जाने वाली मानक और नियमों के सुझाव देने के लिए स्थापित किया गया था। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

सीसीआईएम के निम्नलिखित कार्य हैं-

  • चिकित्सा की भारतीय पदव्तियों जैसे आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी विभाग (आयुष) इत्यादि में शिक्षा के न्यूनतम मानक को निर्धारित करना।
  • भारतीय चिकित्सा पर केन्द्रीय रख-रखाव करना तथा समय-समय पर उसका पुनरीक्षण करना।
  • चिकित्सकीय योग्यता की मान्यता को देने या वापस लेने के संबंध में केन्द्र सरकार को परामर्श देना।
  • चिकित्सकों दव्ारा पालन किये जाने वाले पेशेवर-आचरण, शिष्टाचार और आचार संहिता के मानकों का निर्धारण करना।
  • अधिनियम के प्रावधानों और उसके अंतर्गत बनाये गये नियमों और विनियमों को लागू करना।

भारतीय नर्सिंग परिषद (Indian Nursing Council)

भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त निकाय है। इसका गठन भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 के तहत एक समान मानक स्थापित करने के लिए किया गया था।

भारतीय नर्सिंग परिषद के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • संस्थानों के नियमित निरीक्षण दव्ारा नर्सों, दाइयों, सहायक नर्सों एवं दाइयों तथा स्वास्थ्य निरीक्षकर्ताओं के लिए नर्सिंग शिक्षा का एक समान मानक स्थापित करना एवं उसकी निगरानी करना।
  • भारत तथा विदेश में पंजीकरण एवं रोजगार के प्रयोजन से योग्यताओं को मान्यता देना।
  • नर्सिंग कार्यक्रमों के लिए पाठयक्रम एवं विनियमों को निर्धारित करना।
  • मानकों का पालन करने में विफल रहने वाले संस्थानों के संबंध में योग्यता की मान्यता को वापस लेना।
  • विदेशी योग्यता रखने वाले भारतीय एवं विदेशी नर्सों के पंजीकरण के लिए मंजूरी देना।
  • देश में नर्सिंंग शिक्षा के संबंध में विभिन्न महत्वूपर्ण मदों में राज्य नर्सिंग परिषदों, जांच, बोर्ड, राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार को सलाह देना।
  • नर्सिंग क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देना और नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • संस्थानों/संगठनों/मास्टर डिग्री/डिप्लोमा/सर्टिफिकेट कोर्स प्रदान करने वाले विश्वविद्यालयों की पहचान करना।

केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद (Central Council of Homoeopathy)

केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद (सीसीएच) एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद अधिनियम, 1947 के तहत होम्योपैथी में शिक्षा के एक समान मानकों का विकास करने तथा होम्योपैथी के चिकित्सकों का पंजीकरण करने के लिए किया गया था। केन्द्रीय होम्योपैथी रजिस्टर में चिकित्सकों का पंजीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि इस पद्धति में योग्यता प्राप्त न करने वाले लोगों दव्ारा यह चिकित्सा न की जा सके और जो इसकी चिकित्सा करते हैं वे अपने पेशे में एक आचार संहिता का पालन करें।

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