Quasi-Judicial Institutions: Economic Advisory Council and National Safety Council

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आर्थिक सलाहकार परिषद (Economic Advisory Council)

आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) भारत में एक गैर संवैधानिक, गैर स्थायी और स्वतंत्र निकाय है। प्रधानमंत्री के लिए ईएसी का गठन महत्वपूर्ण आर्थिक सलाह देने एवं सरकार में जागरूकता पैदा करने के लिए एक मजबूत बोर्ड उपलब्ध कराने हेतु किया गया था। इस परिषद को अलग अलग संगठनात्मक संरचनाओं के साथ समय समय पर पुनर्गठित किया जा चुका है और इसकी अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्रियों दव्ारा की गयी है। इस परिषद का महत्व इस बात से भी है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस परिषद के अध्यक्ष थे। परिषद का अध्यक्ष कैबिनेट स्तर का होता है। वर्तमान समय में डा. सी. रंगराजन इसके अध्यक्ष है।

प्रधानमंत्री के लिए आर्थिक सलाहकार परिषद के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • प्रधानमंत्री दव्ारा इसे सौंपे गये किसी भी आर्थिक या अन्य मुद्दे पर विश्लेषण करना और उस पर अपनी सलाह देना।
  • व्यापक आर्थिक महत्व वाले मुद्दों को संज्ञान में लेना और उन पर अपने दृष्टिकोण को प्रधानमंत्री के संज्ञान में लेना।
  • व्यापक आर्थिक विकास और आर्थिक नीति के लिए निहितार्थ के साथ मुद्दों पर प्रधानमंत्री को आवधिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
  • प्रधानमंत्री दव्ारा समय-समय पर सौंपे जाने वाले कार्यों को निष्पादित करना।

प्रधानमंत्री दव्ारा समय-समय पर परिषद को भेजे गये नीतिगत मामलों पर सलाह देने के अलावा आर्थिक सलाहकार परिषद प्रधानमंत्री के लिए देश एवं विदेशों में आर्थिक विकास पर एक मासिक रिपोर्ट तैयार करती है। यह नियमित रूप से आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा करती है एवं देश और विदेश में हो रही महत्वपूर्ण गतिविधियों की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षिक करती है तथा उचित नीतिगत जबाव हेतु सुझाव भी देती है। प्रशासनिक, रसद, नियोजन और बजट प्रयोजनों के लिए, भारत की योजना आयोग आर्थिक सलाहकार परिषद के लिए एक नोड्‌ल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Safety Council)

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) का गठन श्रम मंत्रालय (भारत सरकार) दव्ारा 1996 में राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा स्वास्थ्य और पर्यावरण पर एक स्वैच्छिक आंदोलन को विकसित करने और बनाये रखने के लिए किया गया था। परिषद एक शीर्ष गैर लाभकारी, त्रिपक्षीय निकाय है, जो कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 और बाम्बे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1950 के तहत पंजीकृत है।

अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद विभिन्न गतिविधियाँ संचालित करती है, जो निम्नलिखित हैं-

  • देश भर में विशेष प्रशिक्षण पाठयक्रमों, सम्मेलनों, सेमिनारों और कार्यशालाओं का आयोजन एवं संचालन करना।
  • इस तरह के सुरक्षा आडिट, जोखिम मूल्यांकन तथा जोखिम निर्धारण जैसे परामर्शी अध्ययनों का आयोजन करना।
  • सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को बढ़ावा देने वाली प्रचार सामग्री और प्रकाशनों का डिजाइन एवं विकास।
  • सुरक्षा दिवस, अग्नि सेवा सप्ताह, विश्व पर्यावरण दिवस जैसे विभिन्न अभियानों को आयोजित करने वाले संगठनों को प्रोत्साहन।

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का मिशन हैं-

  • राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर एक स्वैच्छिक आंदोलन उत्पन्न करना, विकसित करना एवं उसे बनाये रखना आदि समाज को ऐसी उपयुक्त नीतियों, प्रथाओं और प्रक्रियाओं को अंगीकार करने के लिए शिक्षित और प्रभावित किया जा सके जो सभी प्रकार की दुर्घटनाओं से होने वाली आर्थिक हानि और मानवीय क्षति का निवारण एवं कम करती है।
  • मानव गतिविधि के औद्योगिक एवं अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर विश्वस्तरीय मानकों और कार्य व्यवहारों की उपलब्धि को संवर्द्धित करना।
  • एनएससी को प्रभावित करने वाले मामलों में सामुदायिक जागरूकता को मजबूत बनाना तथा इसकी सक्रिय भागीदारी को अभिप्रेरित करना।
  • सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोगकारी तथा समन्वयकारी प्रयासों को विकसित करना।

इस प्रकार एनएससी 1966 के बाद शासी निकाय के सक्षम मार्गदर्शन के तहत आंदोलन के विकास में अग्रणी है और राष्ट्र के लिए समर्पित सेवा कर रहा है।

राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद (National Water Resource Council)

  • राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद (एनडब्ल्यूआरसी) भारत सरकार दव्ारा मार्च 1983 में स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष तथा केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री इसका उपाध्यक्ष होता है। केन्द्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री, संबधित केन्द्रीय/राज्य मंत्री सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघशासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल/प्रशासक इस परिषद के सदस्य होते हैं। जल संसाधन मंत्रालय का सचिव इस परिषद का सचिव होता है।
  • वर्ष 1990 में भारत सरकार ने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय जल बोर्ड (एनडब्लूबी) का गठन किया था। यह बोर्ड राष्ट्रीय जल नीति के क्रियान्वयन में होने वाली प्रगति की समीक्षा करता है एवं इस प्रगति के बारे में समय-समय पर राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद को अपनी रिपोर्ट देता है। कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, भूतल परिवहन, पर्यावरण तथा वन, नियोजन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संघीय मंत्रालयों के सचिव, केन्द्रीय जल आयोग का अध्यक्ष, सभी राज्यों, संघशासित प्रदेशों की मुख्य सचिव इसके सदस्य होते हैं। केन्द्रीय जल आयोग का एक सदस्य (जल नियोजन एवं परियोजनाएँ) इस बोर्ड का सदस्य सचिव होता है।
  • जल संसाधन के क्षेत्र में केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) भारत का एक प्रमुख तकनीकी संगठन है जो कि 1945 से ही कार्य कर रहा है। इस आयोग को पूरे देश में जल संसाधनों के नियंत्रण, संरक्षण एवं उपयोग के लिए योजनाओं को शुरू करने, समन्वित करने और आगे बढ़ाने की सामान्य जिम्मेदारियाँ सौंपी गयी हैं ताकि पेयजल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, नौचालन तथा जल विद्युत शक्ति विकास के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। यह आयोग जरूरत पड़ने पर ऐसे किसी भी योजना की जाँच, निर्माण एवं क्रियान्वयन का काम भी करता है।

राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (National Skill Development Council)

  • राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (एनएसडीसी) का गठन 2008 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति-निर्देशन एवं समीक्षा के लिए एक शीर्ष निकाय के रूप में किया गया था। मानव संसाधन विकास, वित्त, भारी उद्योग, सार्वजनिक उद्यम, ग्रामीण विकास, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन, कृषि, श्रम और रोजगार तथा सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग के मंत्रालयों विभागों के मंत्री इसके सदस्य होते हैं। योजना आयोग का उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा परिषद का अध्यक्ष राष्ट्रीय कौशल विकास निगम का अध्यक्ष तथा कौशल विकास के क्षेत्र में छह विशेषज्ञों को भी परिषद में शामिल किया जाता है। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव समिति के सदस्य सचिव होते हैं।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद एक तीन स्तरीय संरचना के शीर्ष पर होती है और यह मुख्य रणनीतियों का निर्धारण तथा भावी योजनाएँ तय करती हैं। परिषद को राष्ट्रीय कौशल विकास समन्वय बोर्ड दव्ारा सहायता प्रदान की जाती है। यह बोर्ड सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों में कौशल विकास के लिए किये जाने वाले कार्यों को समन्वित करता है। कौशल विकास के लिए निजी क्षेत्र की कार्यवाही को बढ़ावा देने के लिए एक गैर लाभकारी निगम के रूप में संस्थात्मक प्रबंधन किया गया है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के रूप में यह संस्था वित्त मंत्रालय दव्ारा गठित की गयी थी। एनएसडीसी क्षेत्रों में कुशल मानव शक्ति के लिए भारत में बढ़ती जरूरत को पूरा करने और माँग एवं कौशल की आपूर्ति के बीच मौजूदा अंतर को संकीर्ण करने के लिए एक राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था।

वृद्ध लोगों के लिए राष्ट्रीय परिषद (National Council for Older Persons)

वृद्ध लोगों के लिए राष्ट्रीय परिषद (एनसीओपी) का गठन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार दव्ारा 1999 में किया गया था। इस परिषद का पुनर्गठन, 2005 में किया गया। वर्तमान में इसके 50 सदस्य हैं, जिनमें केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों, नागरिक समूहों, सेवानिवृत्ति व्यक्तियों के संघों के प्रतिनिधि तथा कानून, सामाजिक कल्याण एवं चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त लोग शामिल हैं। परिषद का उद्देश्य वृद्ध लोगों को सुविधाएँ, रियायतें और राहत प्रदान करने के लिए और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार को सलाह देना है।

वृद्ध लोगों के लिए राष्ट्रीय परिषद के निम्नलिखित कार्य हैं-

  • वृद्ध लोगों के लिए नीतियों एवं कार्यक्रमों पर सरकार को सलाह देना।
  • सरकार को वृद्ध लोगों के सामूहिक जनमत से परिचित कराना।
  • सरकारी एवं निगमित क्षेत्र में वृद्ध लोगों के लिए रियायतो, कर छूटों एवं मूल्य छूटों के लिए समर्थन उपलब्ध कराना।
  • वृद्ध लोगों पर राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन तथा वृद्ध लोगों के लिए विशेष कार्यक्रमों की पहल पर सरकार को फीडबैक उपलब्ध कराना।
  • वृद्ध लोगों की व्यक्तिगत प्रकार की शिकायतों को निपटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक नोडल बिन्दु उपलब्ध कराना।
  • वृद्ध लोगों के लिए सर्वोत्तम हितों की वकालत करना जिसमें उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही वित्तीय सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आवास शिक्षा, कल्याण जीवन और संपत्ति जैसे क्षेत्र शामिल है।

इस प्रकार परिषद अपने मूल उद्देश्य एवं कार्यों में विभिन्न सुविधाओं की एक व्यापक तस्वीर प्रदान करता है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission)

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) एक सांविधिक निकाय है जिसकी स्थापना 1957 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 के तहत की गयी थी। इसने पूर्ववर्ती अखिल भारतीय खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का स्थान लिया था। आयोग का मुख्यालय मुंबई में है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के उद्देश्य निम्नलिखित है-

  • रोजगार उपलब्ध कराने का सामाजिक उद्देश्य।
  • बिक्री योग्य वस्तुओं को उत्पादित करने का आर्थिक उद्देश्य।
  • गरीबों के बीच आत्मनिर्भरता बनाने और एक मजबूत ग्रामीण समुदाय की भावना के निर्माण के व्यापक उद्देश्य।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के प्रमुख कार्यों में कुछ इस प्रकार है-

  • केवीआईसी को ग्रामीण विकास में संलग्न अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में खादी एवं अन्य ग्रामोद्योगों के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाने, संवर्द्धन, संगठन और क्रियान्वयन का भार सौंपा गया है।
  • केवीआईसी के कार्यों में कच्चे माल के भंडार का निर्माण करना, उत्पादकों को कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करना, अर्द्ध तैयार माल के रूप में कच्चे माल के प्रसंस्करण के लिए साझा सेवा सुविधाओं का निर्माण करना।
  • केवीआईसी उत्पादों के विपणन हेतु सुविधाओं का प्रबंध करना तथा इन उद्योगों में संलग्न कारीगरों के प्रशिक्षण का संगठन करना तथा इन कारीगरों के बीच सहकारिता प्रयासों को बढ़ावा देना।
  • केवीआईसी खादी एवं ग्रामोद्योग के विकास और संचालन के लिए संस्थाओं और व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और डिजाइन प्रोटोटाइप और अन्य तकनीकी जानकारी की आपूर्ति के माध्यम से मार्गदर्शन का कार्य सौंपा गया है।
  • ग्रामोद्योग या हस्तशिल्प उत्पादों तथा खादी की बिक्री एवं विपणन को बढ़ावा देना।

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