Quasi-Judicial Institutions: National Rain Fed Area Authority

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राष्ट्रीय वर्षा पोषित क्षेत्र प्राधिकरण (National Rain Fed Area Authority)

राष्ट्रीय वर्षा पोषित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) का गठन 2006 में देश के वर्षा आधारित क्षेत्रों की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए किया गया था। यह एक परामर्शी, नीति निर्माणकारी एवं निगरानी निकाय है, जो कि विभिन्न मौजूदा योजनाओं में दिशा-निर्देशों का परीक्षण करने तथा इस क्षेत्र में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं सहित नई योजनाओं के निर्माण में अपनी भूमिका निभाता है। इसका उद्देश्य केवल जल संरक्षण तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह वर्षा पोषित क्षेत्रों के संवहनीय एवं समग्र विकास के सभी पहलुओं को समाहित करता है।

भारतीय अतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (Inland Waterways Authority of India)

भारतीय अतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन जहाजरानी तथा नौचलन हेतु अंतरराज्यीय जलमार्गों पर अंतर्देशीर्य जल परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास एवं रख-रखाव के लिए परियोजनाओं को हाथ में लेता है। प्राधिकरण का मुख्य कार्यालय नोएडा, उत्तर प्रदेश में है। प्राधिकरण ने पटना, कोलकाता, गुवाहाटी, कोच्चि, इलाहाबाद, वाराणसी, भागलपुर, फरक्का और कोल्लम में उप कार्यालयों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण (Central Ground Water Authority)

केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजडब्ल्यूए) एक सांविधिक निकाय है। इसका गठन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत देश में भू-जल विकास एवं प्रबंधन के विनियमन एवं नियंत्रण के उद्देश्य से किया गया था। केन्द्रीय भू-जल प्राधिकरण विकास के विनिमय से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में शामिल है ताकि भू-जल की दीर्घकालीन संवहीनीयता सुनिश्चित की जा सके। इनमें ऐसे प्रस्तावों के समाशोधन के दव्ारा अतिदोहित, अर्द्धसंक्रांतिक एवं संक्रातिक ब्लाको/तालुकाओ/मंडलों/जिलो में उद्योगो/ परियोजनाओं दव्ारा भू-जल की निकासी को निविनियमति करना शामिल है। यह भू-जल प्रबंधन में जागरूकता एवं क्षमता निर्माण हेतु अग्रिम उपायों के रूप में पूरे देश में जनजागरूकता एवं जल प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन भी करता है।

नागरिक उड्‌डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil Aviation)

नागरिक उड्‌डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) नागरिक उड्‌डयन के क्षेत्र में प्रमुख नियामक संस्था है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

नागरिक उड्‌डयन महानिदेशालय कार्यो के लिए उत्तरदायी है-

  • भारत के भीतर और भारत से या भारत को प्रदान की जाने वाली परिवहन सेवाओं का विनियमन।
  • नागरिक विमानों का पंजीकरण।
  • पायलटों, विमान रखरखाव इंजीनियरों और उड़ान के चालक दलों के मानकों की निगरानी करना एवं लाइसेंस प्रदान करना।
  • भारत में पंजीकृत नागरिक विमानों के लिए अनिवार्य उड़ान योग्यताएँ निर्धारित करना तथा ऐसे विमानों को उड़ान योग्यता का प्रमाण-पत्र देना।
  • नागरिक उड्‌डयन से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देना।
  • मामूली हवाई दुर्घटनाओं और घटनाओं एवं जांच के न्यायालयों/समितियों को प्रतिपादन तकनीकी सहायता की जांच करना।
  • क्लब फ्लाइंग/ग्लाइडिंग का प्रशिक्षण गतिविधियों का पर्यवेक्षण करना।
  • हवाई अड्‌डे एवं हवा वाहकों को लाइसेंस प्रदान करना।
  • हवाई अड्‌डों तथा वायुयान वाहकों का सुरक्षा अधिवीक्षण एवं निगरानी करना।
  • हवाई अड्‌डे और सीएनएस/एटीएम की सुविधा के प्रमाणन।
  • विमान रखरखाव, मरम्मत और निर्माण के लिए मंजूरी देने एवं संगठनों और उनके निरंतर निरीक्षण करना।

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (Airports Economic Regulatory Authority of India)

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण (एईआरए) एक सांविधिक निकाय है। इसका उद्देश्य भारत में प्रमुख विमान पत्तनों पर वैमानिकी सेवाओं को प्रदान करने के लिए टैरिफ विनियमित करना, अन्य विमान पत्तन अधिकारों को निर्धारित करना तथा ऐसे विमान पत्तनों के निष्पादन मानदंडो की निगरानी करना है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

प्राधिकरण के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • प्राधिकरण प्रमुख हवाई अडडों के संबंध में निम्नलिखित कार्य करेगा-
    • वैमानिकी सेवाओं के लिए प्रशुल्क का निर्धारण करना।
    • पूंजी व्यय और हवाई सुविधाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना।
    • प्रमुख हवाई अड्‌डों के आर्थिक और व्यवहार अभियान चलाना।
    • इसकी गुणवत्ता और सेवा तथा दक्षता में सुधार करना।
  • किसी भी समझौते या ज्ञापन में केन्द्र सरकार दव्ारा प्रस्तावित रियायत को समझना।
  • प्रमुख हवाई अड्‌डों के संबंध में विकास शुल्क की राशि का निर्धारण करना।
  • केन्द्र सरकार का इस संबंध में उसके दव्ारा अधिकृत किसी प्राधिकारी दव्ारा निर्दिष्ट किया जा सकता है कि सेवा की गुणवत्ता, निरंतरता और विश्वसनीयता से संबंधित मानकों की निगरानी करना।
  • अपनी शक्तियों और कार्यों एवं अन्य बातों के साथ निर्वहन करते हुए प्राधिकरण दव्ारा पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
  • सभी प्रमुख विमान पत्तनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना।

पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority)

  • पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) एक सांविधिक निकाय है, जिसका गठन 2003 में किया गया था। भारत में इसके गठन का उद्देश्य पेेंशन क्षेत्र का विकास एवं विनियमन करना है। भारतीय न्यास अधिनियम, 1982 के तहत पीएफआरडीए ने एक ट्रस्ट का गठन किया है जो पेंशन विधि प्रबंधकों (पीएफएम) के कार्यों पर निगरानी रखता है। नया पेंशन प्रणाली (एनपीएस) ट्रस्ट विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों दव्ारा संघटित हैं और यह प्रतिभा की व्यापक श्रृंखला को नियामक ढाँचे में लाता है।
  • पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण के प्रयास देश में एक संवहनीय, दक्ष तथा स्वैच्छिक रूप से परिभाषित अंशदान पर आधारित पेंशन प्रणाली के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारत का खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India)

भारत का खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) एक सांविधिक निकाय है, जिसका गठन खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत किया गया था। प्राधिकरण खाद्य वस्तुओं तथा उनके विनिर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री एवं आयात की संबंध में विज्ञान आधारित मानकों का निर्धारण करता है ताकि मानव उपभोग के लिए पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इस अधिनियम का उद्देश्य बहुस्तरीय, बहुविभागीय नियंत्रण से आगे बढ़कर निर्देश की एक एकल लाइन दव्ारा खाद्य सुरक्षा तथा मानकों से जुड़े सभी मामलों के लिए एक एकल संदर्भ बिन्दु स्थापित करता है। परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एफएसएसएआई के क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक मंत्रालय हैं। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

अधिनियम के तहत एफएसएसएआई को निम्नलिखित कार्य निर्धारित किया गया है-

  • भोजन के लेख के संबंध में नियमों, मानकों और दिशा निर्देशों का निर्धारण करना।
  • प्रमाणन निकायों/प्रयोगशालाओं की मान्यता हेतु दिशा-निर्देश करना।
  • खाद्य सुरक्षा और पोषण से संबंधित क्षेत्रों में नीति और नियम तैयार करने के मामले मेंं केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को वैज्ञानिक सलाह और तकनीकी सहायता प्रदान करना।
  • भोजन की खपत घटनाओं और जैविक जोखिम के प्रसार, भोजन में दूषित पदार्थों, खाद्य उत्पादों, उभरते खतरों और रैपिड चेतावनी प्रणाली की शुरूआत में पहचान कर विभिन्न संदूषकों (Containinants) के अवशेषों के बारे में डेटा इकट्‌ठा करना और मुकाबला करना।
  • खाद्य सुरक्षा के बारे में देश भर में सूचना प्रसार नेटवर्क बनाना।
  • विभिन्न हितधारकों के लिए क्षमता निर्माण करना।
  • भोजन के अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों के विकास में योगदान करना और संभव सीमा तक राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप।
  • खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानक के बारे में सामान्य जागरूकता को बढ़ावा देना।

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (National Advisory Council)

  • राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) भारत के प्रधानमंत्री को सलाह देेने के लिए गठित एक सलाहकारी निकाय है। एनएसी का गठन प्रधानमंत्री दव्ारा 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के सत्ता में आने के बाद किया गया था। केद्र सरकार ने मार्च 2010 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एनएसी का अध्यक्ष नियुक्त किया था। यह सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम तथा वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर नागरिक समाज के साथ अंतरफलक के रूप में गठित की गई थी।
  • राष्ट्रीय सलाहकार परिषद सामाजिक नीति और वंचित तबकों के अधिकारों पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार को नीतिगत और वैधानिक आगत उपलब्ध कराने के लिए गठित की गयी थी। इसके अतिरिक्त एनएसी को सरकार के मुख्य कार्यक्रमों की समीक्षा करनी थीं और उनके क्रियान्वयन और आपूर्ति में आनी वाली बाधाओं से निपटने के लिए सुझाव देने थे। इस प्रकार एनएसी का कार्य सरकार दव्ारा नीति के निर्माण में जानकारी प्रदान करने के लिए और इसके विधायी कार्य में सरकार को समर्थन प्रदान करने के लिए है।
  • एनएसी में विकास गतिविधि के विभिन्न क्षेत्रों में तैयार प्रतिष्ठित पेशेवरों को शामिल किया जाता है, जो अपनी व्यक्तिगत क्षमता में काम करते है। एनएसी के माध्यम से सरकार न केवल उनके अनुभव और विशेषज्ञता पर पहुँच बनाती है वरन्‌ शोध संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों एवं सामाजिक सक्रिय एवं समर्थन तबकों के एक बड़े नेटवर्क तक भी पहुँचती है।

एनएसी कार्य समूह के विषय निम्नलिखित है-

  • सरकार के सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रम में कार्यकताओर्ं के कौशल विकास।
  • फार्म पर कृषि वानिकी पेड़।
  • कार्यकताओर्ं को व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा।
  • भारत में संहकारिता का विकास।
  • भारत में बगान श्रमिकों के कल्याण के लिए नीति की रूपरेखा।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास।
  • मध्य भारत में आदिवासी विकास शासन मुद्दे।

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