Quasi-Judicial Institutions: National Institute of Social Defence

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राष्ट्रीय सामाजिक प्रतिरक्षा संस्थान (National Institute of Social Defence)

राष्ट्रीय सामाजिक प्रतिरक्षा संस्थान (एनआईएसडी) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त निकाय है। यह सामाजिक प्रतिरक्षा के क्षेत्र में हस्तक्षेपों के लिए नोडल प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान है। संस्थान का उद्देश्य भारत सरकार के सामाजिक प्रतिरक्षा कार्यक्रमों को मजबूत बनाना तथा उन्हें तकनीकी लागत उपलब्ध कराना है। संस्थान के लिए सामाजिक रक्षा के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, हालांकि मुख्य रूप से इसे गतिविधियों और समाज के सुरक्षा के लिए कार्यक्रम सौंपा गया है।

संस्थान के ध्यान देने हेतु मुख्य क्षेत्र हैं-

  • मादक द्रव्यों के सेवन की रोकथाम।
  • वृद्धजनों की देखभाल।
  • भिक्षावृत्ति निवारण, बाल संरक्षण सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे इत्यादि।

संस्थान के जनादेश भारत सरकार के कार्यक्रम, प्रशिक्षण, शोध एवं प्रलेखन के माध्यम से सामाजिक बचाव के लिए जानकारी प्रदान करना है।

संस्थान के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं-

  • सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करना।
  • सामाजिक रक्षा से संबंधित समस्याओं का निदान करने के लिए सामाजिक प्रतिरक्षा के क्षेत्र में कार्यक्रमों एवं संगोष्ठियों का आयोजन करना।
  • प्रभावित लोगों के लिए सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में निवारक, पुनर्वास एवं उपचार हेतु विकास नीतियों को विकसित करना।
  • सामाजिक प्रतिरक्षा के क्षेत्र में स्वैच्छिक प्रयास को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक प्रतिरक्षा नीतियों के क्रियान्वयन और कार्यक्रमों की समीक्षा एवं मूल्यांकन करना।

भारत का महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General and Census Commissioner of India)

दस वर्ष की जनगणना के संचालन की जिम्मेदारी गृहमंत्रालय, भारत सरकार के अधीन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय के साथ टिकी हुई हैं। यह ऐतिहासिक रूचि का विषय हो सकता है कि भारत में जनगणना के एक प्रमुख प्रशासनिक कार्य होने के बावजूद जनगणना संगठन का गठन 1951 की जनगणना होने तक प्रत्येक जनगणना के लिए तदर्थ आधार पर किया जाता था। जनगणना अधिकारियों के कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों के साथ जनगणना के आयोजन करने की योजना उपलब्ध कराने के लिए जनगणना अधिनियम, 1948 में पारित किया गया था। भारत सरकार ने मई 1949 में जनसंख्या के आकार, इसकी संवृद्धि के संबंध में सांख्यिकीय आंकड़ों के व्यवस्थित संग्रह के विकास के लिए कदम उठाने का निर्णय लिया और भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के अधीन ग्रह मंत्रालय में एक संगठन की स्थापना की। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय (ओआरजी एंड सीसीआई) जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना (संशोधन) अधिनियम, 1993 के अधीन दशकीय आवास एवं जनसंख्या गणना के नियोजन, क्रियान्वयन एवं अधिवीक्षण तथा जनगणना परिणामों के सारणीकरण, संकलन एवं वितरण का कार्य करता हैं। इसके अतिरिक्त यह कार्यालय जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के समग्र क्रियान्वयन के लिए भी उत्तरदायी है। यह देश भर में जन्म मृत्यु से जुड़े सांख्यिकीय आंकड़ों का संकलन करता है। ओरआरजी एवं सीसीआई पृथक रूप से नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के तहत एक सुप्रदर्शित नमूने के दव्ारा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर मृत्यु दर एवं जन्म दर का अनुमान लगाते हैं। 2003 से ओआरजी एवं सीसीआई दव्ारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत नागरिक पंजीकरण के महापंजीयक एवं राष्ट्रीय पंजीकरण प्राधिकरण के रूप में भी कार्य किया जा रहा है। ओआरजी एवं सीसीआई को अब जिला स्तर पर मूलभूत स्वास्थ्य सूचकांकों की प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एएचएस) का कार्य भी सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त कार्यालय को बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान पत्र (एमएनआईसी) पर एक पायलट परियोजना का भी कार्य सौंपा गया है।

मुख्य लागत सलाहकार का कार्यालय (Office of the Chief Advisor Cost)

  • मुख्य लागत सलाहकार (सीएसी) का कार्यालय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में कार्य करने वाले प्रभागों में से एक है। यह कार्यालय लागत लेखा मामलों पर मंत्रालयों और सरकारी उपक्रमों को सलाह देने और उनकी ओर से लागत जांच का काम शुरू करने के लिए जिम्मेदार है। यह एक पेशेवर संस्था है, जिसमें लागत लेखाकारों/सनदी (चार्टर्ड) लेखाकारों को स्टाफ में रखा जाता है।
  • मुख्य लागत सलाहकार का कार्यालय लागत और मूल्य निर्धारण से जुड़े मामलों, निष्पक्ष मूल्यों के निर्धारण हेतु उद्योग स्तरीय अध्ययनों, प्रयोक्ता अधिमारों का अध्ययन, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में कमी के मामलों, परियोजनाओं के लागत-लाभ विश्लेषण लागत कटौती पर अध्ययन, लागत प्रभाविता, पूंजी गहन परियोजनाओं का मूल्यांकन, लाभ प्रदाता विश्लेषण तथा भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों के लिए लागत, वाणिज्यिक-वित्तीय लेखांकन के विकास तथा आधुनिक प्रबंधन औजारों के अनुप्रयोग से जुड़े मामलों को देखता है। यह कार्यालय उत्पादन की लागत को सत्यापित करने के लिए और रक्षा खरीद सहित सरकारी विभागों के लिए उचित बिक्री मूल्य निर्धारित करने के लिए केन्द्र सरकार की एक स्वतंत्र एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था। इस कार्यालय की भूमिका को बाद में और बढ़ा दिया गया तथा इसे प्रशासित मूल्य प्रणाली (एपीएम) के तहत अनिवार्य वस्तु अधिनियम के अंतर्गत आने वाले उत्पादों, जैसे-पैट्रोलियम, इस्पात, कोयला, सीमेंट आदि के मूल्यों को स्थिर करने का कार्य भी सौंपा गया है। यह कार्यालय भारतीय लागत लेखा सेवा (आईसीओएएस) के लिए एक संवर्ग नियंत्रण कार्यालय भी है एवं यह अधिकारियों के ज्ञान एवं कौशल के निरंतर उन्नयन के लिए प्रशिक्षण जरूरतों को भी पूरा करता है।

सीसीए के कार्यालय के कार्य निम्नलिखित हैं-

  • केन्द्र सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों/जटिल मूल्य समझाने में संगठन/संबंधित मुद्दों लागत की सहायता करना एवं विभिन्न सेवाओं/उत्पादों के लिए उचित मूल्य तय करने और लागत के मामले में विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को सलाह देना।
  • सरकारी विभागो/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और आपूर्तिकर्ताओं के बीच खरीद अनुबंध से उत्पन्न दावों का परीक्षण एवं सत्यापन करना।
  • सरकारी विभागों को सक्षम करने के लिए, सरकार के लिए आपूर्ति के उत्पादों और आपूर्ति संगठनों के साथ कीमतों में बातचीत करने के लिए सेवाओं की कीमतों का निर्धारण करना।

प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय (Office of the Principal Scientific Advisor)

भारत सरकार का प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) का कार्यालय भारत सरकार के अधीन कार्य करता है।

इस कार्यालय की मुख्य जिम्मेदारियाँ निम्नलिखित हैं-

  • नवाचारों को उत्पन्न करने के क्रम में विभिन्न नीतियों, मिशन और रणनीतियों को विकसित करना तथा कई अनुप्रयोगों के प्रयोजन के लिए समर्थन प्रणालियों का विकास करना।
  • भारत में विभिन्न उद्योगों, विभागों और संस्थानों के तहत आर्थिक, सामरिक एवं सामाजिक वर्गों के विकास की दिशा में कार्य करना।
  • भारत सरकार के साथ साझेदारी में काम करना।
    • प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय दव्ारा सामरिक, आर्थिक तथा तकनीकी विकास के अन्य क्षेत्रों में बहुविभागीय, बहुसंस्थात्मक परियोजनाओं की संचालित किया जाता है एवं लक्ष्यों का निर्माण किया जाता हैं। पीएसए का कार्यालय सरकारी विभागों, शैक्षिक संस्थानों एवं उद्योग के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास करता है। यह सामंजस्य इसलिए आवश्यक होता है क्योंकि सरकार के वैज्ञानिक उद्यम विभिन्न विभागों में बंटे होते हैं और इनमें से कुछ क्षेत्र किसी के भी कार्यक्षेत्र में नहीं आते है, जबकि कुछ क्षेत्र अनेक मंत्रालयों/विभागों के कार्यक्षेत्र में आ जाते हैं।
    • भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार मंत्रिमंडल की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करता है। इस तरह यह कार्यालय मंत्रिमंडल की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सचिवालय के रूप में भी काम करता है।

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