Quasi-Judicial Institutions: Whistle Blower Resolution: Practical Conditions

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केन्द्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission)

शिकायत करना (To Complain)

भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों के सुस्पष्ट तथ्य देते हुए सीधे केन्द्रीय सतर्कता आयोग को संबोधित पत्र या ई-मेल दव्ारा शिकायतें की जा सकती है। केन्द्रीय सतर्कता आयोग की वेबसाइट पर भी शिकायतें सीधे दर्ज की जा सकती हैं।

शिकायतों पर की जाने वाली कार्रवाई (Action on Complaints)

  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग दव्ारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) अथवा संबंधित संगठन के मुख्य सतर्कता अधिकारी के माध्यम से केवल उन शिकायतों का अन्वेषण करवाया जाता है, जो आयोग की अधिकारिता में आने वाले कर्मचारियों तथा संगठनों के विरुद्ध होते हैं। केन्द्रीय सतर्कता आयोग अपने स्वयं के अधिकारी के माध्यम से भी शिकायतों की जाँच करवा सकता है।
  • आयोग दव्ारा अन्वेषण के लिए भेजी गई शिकायतों पर मुख्य सतर्कता अधिकारी को तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। अन्वेषण रिपोर्ट के आधार पर आयोग सलाह देता है। संबंधित अनुशासिक प्राधिकारी दव्ारा आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में लगभग 6 माह का समय लगता है।
  • आयोग दव्ारा केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो/मुख्य सतर्कता अधिकारी को शिकायत का अन्वेषण करने तथा रिपोर्ट किए जाने का निर्देश दिए जाने पर शिकायतकर्ता को एक शिकायत संख्या दी जाएगी। शिकायतकर्ता आयोग की वेबसाइट पर शिकायत पर की गई कार्रवाई की स्थिति देख सकते हैं।
  • आयोग में एक बार शिकायत दर्ज हो जाने पर मामलें में आगे पत्राचार नहीं किया जाएगा। आयोग शिकायतों का अन्वेषण कर एवं इसके आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
  • निविदाओं के विरुद्ध शिकायतों के बारें में आयोग मामले का अन्वेषण कराता है लेकिन वह निविदा प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता है। इसका उद्देश्य यह है कि संगठन में कार्य को न रोका जाए।
  • आयोग को की गई शिकायतों में वास्तविक विवरण, सत्यापनीय तथ्य तथा संबद्ध मामले होने चाहिए। ये अस्पष्ट अथवा अतिश्योक्तिपूर्ण आरोपों वाला नहीं होना चाहिए।
  • शिकायत आयोग को सीधे संबाधित होना चाहिए। आयोग को शिकायतें प्रतिलिपि के रूप में नहीं भेजी जानी चाहिए।
  • आयोग अनाम/छद्मनाम शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है। तथापि, संगठन ऐसी शिकायतें प्राप्त होने पर इनका अन्वेषण करने के लिए आयोग से अनुमति ले सकता है।
  • शिकायतों की स्थिति संबंधित संगठन/मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी से ज्ञात की जा सकती है।

पर्दाफाश शिकायतें (लोकहित प्रकटीकरण और मुखबिर संरक्षण) संकल्प (Whistle Blower (Public Interest Disclosure and Protection of Informer-PIDPI) Resolution)

भ्रष्टाचार का मामला प्रकट करते समय यदि शिकायतकर्ता अपनी पहचान गुप्त रखना चाहता है, तो लोकहित प्रकटीकरण और मुखबिर संरक्षण संकल्प (पर्दाफाश प्रावधान के नाम से प्रसिद्ध) के अंतर्गत शिकयत दी जा सकती है। आयोग न केवल शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखता है बल्कि इसे शिकायतकर्ता को शारीरिक धमकी, उत्पीड़न अथवा भ्रष्टाचार के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने का अधिदेश भी प्राप्त है।

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया (Process of Making Complains)

  • लोकहित प्रकटीकरण और मुखबिर संरक्षण संकल्प के अंतर्गत शिकायतें केवल डाक दव्ारा दी जा सकती है। लिफाफे पर ‘लोकहित प्रकटीकरण और मुखबिर संरक्षण’ अथवा ‘पर्दाफाश’ लिखा जाना चाहिए। शिकायतकर्ता को पत्र में अपना नाम नहीं देना चाहिए। व्यक्तिगत विवरण पृथक रूप से दिया जाना चाहिए।
  • यदि किसी व्यक्ति का इस कारण उत्पीड़न किया जाता है कि उसने पर्दाफाश प्रावधानों के अंतर्गत शिकायत दर्ज की है तो वह मामले में समाधान प्राप्त करने के लिए आयोग के समक्ष आवेदन दे सकता है। आयोग शिकायतकर्ता की सुरक्षा के लिए उचित रूप से हस्तक्षेप कर सकता है।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह केन्द्र सरकार एवं उसके प्राधिकरणों से किसी भी जानकारी अथवा रिपोर्ट की मांग कर सकता है ताकि वह सतर्कता तथा भ्रष्टाचार -रोधी कार्यो पर नजर रख सके। केन्द्रीय सतर्कता आयोग किसी जाँच एजेन्सी दव्ारा जाँच रिपोर्ट को प्राप्त करने के बाद सरकार अथवा इसके प्राधिकरण को आगे की कार्रवाई करने की सलाह देता है। केन्द्रीय सरकार अथवा इसके प्राधिकरण केन्द्रीय सतर्कता आयोग की सलाह पर आवश्यक कार्रवाई करते हैं। यदि वे किसी सलाह केन्द्रीय सरकार अथवा इसके प्राधिकरण केन्द्रीय सतर्कता आयोग की सलाह पर आवश्यक कार्रवाई करते हैं। यदि वे किसी सलाह से सहमत न हो तो उसे लिखित रूप से इसके कारणों को केन्द्रीय सतर्कता आयोग को बताना होगा। केन्द्रीय सतर्कता आयोग को अपनी वार्षिक कार्यकलाप की रिपोर्ट राष्ट्रपति को देनी होती है। राष्ट्रपति इस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाता है।

व्यवहारिक स्थिति (Practical Conditions)

  • भारत में भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने वाली सर्वोच्च संस्था सतर्कता आयोग का कामकाज सामान्य: संतोषप्रद रहा है। कभी-कभी केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त तथा अन्य आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी विवाद पैदा होते रहे हैं। ऐसा ही एक विवाद सन्‌ 2011 में पी. जे. थॉसम को लेकर रहा था। केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त पी. जे. थॉमस की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय दव्ारा रद्द कर दी गई थी क्योंकि उनका नाम पॉमोलिन (Palmoline) निर्यात घोटाले में आया था। थॉमस की नियुक्ति रद्द करते समय न्यायालय ने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति का क्षेत्राधिकार न्यायालय की सुनवाई ने सरकार की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति का क्षेत्राधिकार न्यायालय की सुनवाई से बाहर है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि भविष्य में नियुक्तियाँ करते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि ये व्यक्ति सिर्फ सिविल सेवा से ही नहीं हो बल्कि अन्य क्षेत्रों के ईमानदार व्यक्तियों की नियुक्ति पर भी विचार किया जाए। न्यायालय ने संस्था की ईमानदारी के साथ-साथ व्यक्ति की ईमानदारी पर भी बल दिया।
  • कभी-कभी यह देखने में आता है कि घूसखोर भ्रष्ट सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने में सरकारी मंत्रालयों या विभागों दव्ारा अनावश्यक विलंब किया जाता है, हालाँकि आयोग का प्रयास होता है कि इस संबंध में चार महीने का निर्धारित समय-सीमा का अनुपालन हो। मुकदमा चलाने की अनुमति देना एक प्रशासनिक कार्य है जिसमें विलंब नहीं किया जाना चाहिए। इससे जहाँ निर्दोष अनावश्यक उत्पीड़न का शिकार नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर भ्रष्ट अधिकारी जो सजा दी जा सकेगी। यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मुकदमा चलाने की अनुमति देने की समय-सीमा तीन महीने निर्धारित की है। एक महीने का अतिरिक्त समय वैसे मामलों में लागू होगा जहाँ महान्यायवादी या उसके कार्यालय के किसी अन्य विधि अधिकारी से सलाह-मशविरा करने की आवश्यकता है।

भ्रष्टाचार रोकने हेतु केन्द्रीय सतर्कता आयोग दव्ारा उठाए गए अन्य कदम (Some Others Steps Taken by Central Vigilance Commission to Prevent Corruption)

  • भ्रष्टाचार रोधी वाचडॉग ने भ्रष्टाचार रोकने हेतु कुछ प्रयास किए हैं, जिनमें कार्पोरेट घोटाले या घूसखोरी की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों या अन्य व्यावसायिक संस्थाओं में भ्रष्टाचार-रोधी कक्षाएँ चलाने की योजना बनाई है। यहाँ उद्यमी नैतिकता (Corporate Ethics) तथा भ्रष्टाचार रोधी उपाय बताये जाएंगे।
  • इसके अलावा केन्द्रीय सतर्कता आयोग भ्रष्टाचार रोकने के उपाय सुझाने के लिए केन्द्र और राज्य स्तर की भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाओं का राष्ट्रीय संगठन (National Association) बनाने की बात कही है। आयोग का मानना है कि यह संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी संयुक्त राष्ट्र संविदा (United Nation Convention Against Corruption) के साथ-साथ अन्य मामलों में सहयोग करने वाली भ्रष्टाचार-रोधी प्राधिकरणों की अंतरराष्ट्रीय संगठन (International Association of Anti-Corruption Authorities-IAACA) की तर्ज पर कार्य करेगा। आई. ए. ए. सी. ए. दव्ारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक कार्यबल (Task Force) का गठन किया गया। यह कार्यबल ज्ञान प्रबंधन व्यवस्था (Knowledge Management System) की योजना बनाएगा जो भ्रष्टाचार-रोधी उपायों तथा काला धन को नियंत्रित करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा। केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त को इस कार्यबल का प्रमुख बनाया गया है। ज्ञान प्रबंधन व्यवस्था के माध्यम से पार राष्ट्रीय अपराधों (Transnational Crimes) एवं अन्य अवैध गतिविधियों (Illegal Proceedings) से निपटा जा सकेगा। इस व्यवस्था के माध्यम से भ्रष्टाचार-रोधी संगठनों, व्यवस्थाओं, प्रक्रियाओं, उपायों एवं अनुभवों के बारे में वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार रोधी प्राधिकरणों एवं अन्य भागीदारों के बीच सूचना विनियम का कार्य किया जाएगा।
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग भ्रष्टाचार रोकने हेतु विंग आई (Vig Eyq) नामक पोर्टल की शुरूआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों का निवारण किया जाएगा। आयोग ने नॉलेज पोर्टल (Knowledge Portal) बनाने की बात भी कही है, जिससे कि निश्चित समय सीमा में भ्रष्टाचार-रोधी सूचनाओं एवं बेहतर उपायों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

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