प्राचीन ताम्र-पत्र पर उर्त्कीण विषयवस्तु की व्याख्या जागोर लोक नृत्य (Interpreting the subject matter inscribed on ancient copper Jagor Folk Dance – culture)

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सुर्खियों में क्यों?

दक्षिण एशिया की पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों के सबसे बड़े संग्रह-स्थल, भंडाकर ओरिएंटल (पूर्ववासी) रिसर्च (अनुसंधान) इंस्टीट्‌यूट (संस्थापित करना) (बीओआरआई), के शोधकर्ताओं ने एक ताम्र-पत्र की व्याख्या की है।

ताम्र-पत्र से प्राप्त निष्कर्ष

• चालुक्य राजा पुलकेशिन दव्तीय के हाथों सम्राट हर्षवर्धन के पराजित होने का काल 618 ईस्वी निर्धारित किया गया है।

• पहले यह माना जाता था कि यह लड़ाई 612 ईस्वी से 634 ईसवी के बीच किसी समय हुई थी।

• ताम्र-पत्र 610-611 ईसवी में पुलकेशिन दव्तीय के राज्याभिषेक का विवरण निर्णित करने में भी उपयोगी है।

हर्षवर्धन और पुलकेशिन दव्तीय के बीच युद्ध

• यह युद्ध नर्मदा के तट पर हुआ था।

• चालुक्य राजधानी बादामी के राजा पुलकेशिन ने हर्ष के विजय अभियान को चुनौती दी।

• हर्ष दक्षिण में एक शक्तिशाली प्रतिदव्ंदव्ी के अस्तित्व को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं था, वह एक बड़ी सेना के साथ कन्नोज से निकल पड़ा।

वस्तुत: पुलकेशिन दव्तीय दव्ारा नर्मदा नदी के दर्रों की सुरक्षा इतने कुशल तरीके से की गई थी कि हर्ष नदी को सीमा रेखा के रूप में स्वीकार करने के लिए विवश हो गया और अत्यधिक संख्या में अपने हाथियों के सेना को खोने के बाद युद्ध के मैदान से वापस लौट गया।

जागोर लोक नृत्य (Jagor Folk Dance – Culture)

• यह गोवा की एक नृत्य-वाटिका है जो किसी सतत कथा पर आधारित नहीं होती है।

• यह हिंदुओं और ईसाइयों दव्ारा संयुक्त रूप से प्रदर्शित की जाती है।

• इसमें नदी के पानी से गांव की रक्षा करने के लिए देवता से प्रार्थना की जाती है। ऐसा विश्वास है। कि यह प्राकृतिक आपदाओं और पारस्परिक झगड़ों को टालता है।

• जागोर का शाब्दिक अर्थ ”जागरण” होता है। यह दृढ़ विश्वास है कि रात भर का प्रदर्शन वस्तुत: वर्ष में एक बार देवताओं को जागता है और वे पूरे वर्ष गांव की रखवाली के लिए जागते रहते हैं।

• पर्णी जागोर जोकि एक प्राचीन मास्क डांस (मुखौटा नृत्य) है, मुख्यत: गोवा का एक नाटक है। अच्छी तरह से तैयार की गई चित्रित लकड़ी के मास्क का प्रयोग, विभिन्न पशुओं, पक्षियों, सुपर (विशिष्ट) प्राकृतिक शक्ति, देवताओं, राक्षसों और सामाजिक पात्रों को प्रदर्शित करते हुए पर्णी परिवारों दव्ारा इसका प्रदर्शन किया जाता है।

• इसक प्रदर्शन गोवा के लोक वाद्ययंत्र नगारा/दोब, घुमट, मदाले आदि का प्रयोग कर किया जाता है।

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