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ट्रांजिट आधारित विकास नीति

सुर्ख़ियों में क्यों?

  • शहरीकरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए, शहरी विकास मंत्रालय ने एक ट्रांजिट (पारवहन) आधारित विकास नीति प्रकाशित की है।

ट्रांजिट आधारित विकास

  • यह लोगों को, मोनोरेल और बस रैपिड (तीव्र) ट्रांजिट (पारवहन) (बीआरटी) जैसे ट्रांजिट (पारवहन) कोरिडोर (गलियारा) से साइकल से या पैदल तय करने योग्य दूरी के भीतर रहने के लिए सक्षम बनाता है।

पृष्ठभूमि

  • अहमदाबाद, दिल्ली (कड़कड़डूमा) , नया रायपुर, नागपुर और नवी मुंबई में ट्रांजिट आधारित विकास परियोजनाएं पहले से ही प्रारंभ कर दी गई हे।
  • ट्रांजिट आधारित विकास की वर्तमान प्रगति निम्न तथ्यों में देखी जा सकती है-
  • 7 शहरों में 300 किलोमीटर से अधिक मैट्रो (भूमिगत रेल) लाइन (रेखा) का परिचालन किया जा रहा है और 600 कि. मी. की मेट्रो लाइन परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
  • 12 शहरों में बस रेपिड (तीव्र) ट्रांसपोर्ट (यातायात) सिस्टम (प्रबंध) प्रगति कं विभिन्न चरणों में हैं।
  • दिल्ली में 380 किमी लंबाई के मास रेल ट्रांजिट (पारवहन) सिस्टम (प्रबंध) की शुरुआत की जा रही है।

नीति के बारे में

  • मास ट्रांजिट कॉरिडोर के आस पास शहरी घनत्व को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
  • फ्लोर (धरातल) एरिया (क्षेत्र) अनुपात को बढ़ाकर उर्ध्वाधर भवनों का निर्माण।
  • पैदल चलने और साइक्लिंग के लिए गैर-मोटर चालित परिवहन को बढ़ावा देना।
  • फीडर (पोषक) सेवाओं के माध्यम से प्रथम और अंतिम बिन्दु कनेक्टिविटी (संयोजकता) के साथ विभिन्न परिवहन माध्यमों को समेकित एकीकरण।

फ्लोर एरिया अनुपात

  • जिस भूमि पर भवन का निर्माण किया गया है उस भूमि के आकार की तुलना में भवन के कुल फ्लोर एरिया का अनुपात फ्लोर एरिया अनुपात कहलाता है।
  • यह बढ़ती शहरी चुनौतियों के समाधान के रूप में टीओडी पर राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की समझ को बढ़ाने के लिए प्रयास करता है।
  • इसे ट्रांजिट कॉरिडोर में निवेश के बाद संपत्ति के मूल्य में होने वाली बढ़ोतरी के एक भाग को बेटरमेंट (सुधार) लेवी (उगाही) और वैल्यू (मूल्य) कैप्चर (कब्जा) फाइनेंसिंग (वित्तपोषण) के माध्यम से चैनेलाईज करके वित्तपोषित करने का प्रस्ताव है।
  • इसका उद्देश्य मिश्रित पड़ोस के विकास के साथ किफायती आवास समेत विभिन्न आवास विकल्प और स्ट्रीट (सड़क) वेंडर्स (विक्रेताओं) के लिए रिक्त स्थान सुनिश्चित कर समावेशी विकास करना है।
  • राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए आवश्यक होगा:
  • टीओडी को मास्टर (विशेषज्ञ) प्लान्स (योजना) और डेवलपमेंट (विकास) प्लान (योजना) में शामिल करें।
  • राजस्व स्रोत के रूप में दोहन के लिए ट्रांजिट कॉरिडोर में से ‘इन्फ्लुएंस (प्रभाव) ज़ोन (क्षेत्र) ’ की पहचान करना।

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