ग्यारहवाँ प्रतिवेदन ई गवर्नेस (शासिका) को प्रोत्साहन (Eleventh Report: Promoting E Governance) Part 5for IAS

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दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपने ग्यारहवें प्रतिवेदन में ई. गवर्नेस की अवधारणात्मक संरचना, अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, भारत दव्ारा पहल, ई. गवर्नेंस के प्रमुख सिद्धांतों, सुधारों, वैधानिक ढाँचे तथा राष्ट्रीय ई. गवर्नेंस योजना के साथ-साथ ज्ञान प्रबंध का विवेचन किया हैं। इस रिपोर्ट (विवरण) में दिए गए सुझाव इस प्रकार हैं-

  • राष्ट्रीय ई. गवर्नेस को गति देने हेतु ऐसे सहयोगी वातावरण की आवश्यकता है जिसमें राजनेता तथा लोक प्रशासन का आंतरिक तंत्र सहयोग कर सके।

  • केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर सरकारी विभागों एवं संगठनों को ऐसी परियोजना एवं प्राथमिकताओं को चिन्हित करने की आवश्यकता है जहाँ ई. गवर्नेस पहल की जा सकती है। इस क्रम में नागरिकों का समय बचाने वाली महत्वपूर्ण सूचनाओं तथा सेवा-भुगतान के ऑनलाइन से व्यवहारों से संबंधित प्रयासों को प्राथमिकता दी जाए।

  • ई. गवर्नेस से संबंधित प्रयासों को चरणबद्ध, तार्किक तथा सरलतापूर्ण तरीके से लागू किया जाए। सरकारी प्रपत्रों, प्रक्रियाओं तथा संरचनाओं को इस प्रकार पुनर्गठित किया जाए ताकि ई. गवर्नेस के प्रयासों को प्रक्रियात्मक, संस्थात्मक तथा वैधानिक परिवर्तनों का सहारा मिल सके।

  • ई. गवर्नेस परियोजनाओं से संबंधित सभी कार्मिकों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाए ताकि उनकी पेशेवर क्षमता बढ़ सके।

  • राज्यों में प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थाओं के नेटवर्क (जाल पर कार्य) के दव्ारा कार्मिकों के क्षमतावर्द्धन का कार्य किया जाना चाहिए।

  • भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी की विभाग के निर्देशन एवं सहयोग से राज्य सरकारों को क्षमतावर्द्धन कार्ययोजना को संचालित किया जाए।

  • अन्य देशों की तरह भारत में भी ’ई. गवर्नेंस (शासिका) इन्टरप्राइेजेज (उद्यम) architecture (वास्तुकला) फ्रेंमवर्क (ढांचा)’ विकसित किया जाना चाहिए।

  • प्रत्येक विभाग को ई. गवर्नेंस प्रयासों की जाँच हेतु ई. preparedness (तत्परता) अंकेक्षण करवाना चाहिए।

  • ई. गवर्नेंस से संबंधित मानको का प्रवर्तन होना चाहिए तथा इस संबंध में तकनीकी समाधान उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

  • भारत सरकार कार्य नियम, 1961 की दूसरी अनुसूची में संशोधन करते हुए ’ई. गवर्नेंस’ विषय की प्रविष्टि की जाए।

  • जहाँ संभव है, वहाँ लोक-निजी भागीदारी (पीपीपी) विधि को अपनाया जाए।

  • सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति की 58वीं रिपोर्ट (विवरण) में दिए गए सुझाव के अनुसार राज्य आकँड़ा केन्द्रों (एसडीसी) तथा राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एनआईसी) का एकीकरण कर देना चाहिए।

  • प्रथम चार वर्षो तक ग्राम पंचायतों को सामान्य सेवा केन्द्रो (जीएससी) की मॉनिटरिंग (निगरानी) करनी चाहिए। राज्य सरकारों को इन केन्द्रों के माध्यम से जीसी सेवाएँ देने हेतु पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए।

  • ई. गवर्नेंस परियोजनाओं को ’मिशन (लक्ष्य) भावना’ से पूर्ण किया जाना चाहिए।

  • लोक सेवकोें की वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट में राष्ट्रीय ई. गवर्नेंस योजना के क्रियान्वयन से संबंधित एक पृथक से प्रविष्टि होनी चाहिए।

  • एक मिशन के रूप में सभी भू-अभिलेख तथा इनसे संबंधित अन्य मुद्दों का कम्प्यूटरीकरण (परिकलक) कर देना चाहिए।

  • चरणबद्ध तरीके से पासपोर्ट (आज्ञापत्र) जारी करने की प्रक्रिया को ई. गवर्नेंस विधि के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।

  • प्रत्येक नागरिक को उसकी जन्मतिथि, जन्म स्थान एवं अन्य विवरणों से युक्त ’unique (अदव्तीय) national (राष्ट्रीय) identify (परिचय) number (संख्या)/card (गत्ता)’ दिया जाना चाहिए।

  • सनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू 2020 तक सरकार मेें सभी स्तरों पर ई. गवर्नेंस के प्रवर्तन को सुनिश्चित करने हेतु एक वैधानिक ढाँचा निर्मित किया जाना चाहिए जो संसदीय नियंत्रण के अधीन हो।

  • संघ एवं राज्य सरकारों को शीघ्रता से ऐसे प्रशासनिक सुधार करने चाहिए ताकि ज्ञान-प्रबंध व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।

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