आचार संहिता (Code of Ethics – Part 15)

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1. रिपोर्टिंग पक्षपात रहित हो और उसमें वस्तुनिष्ठता हो: समाचार चैनलों के काम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू सच्चाई एवं सटीकता है अर्थात वे जो कुछ दिखाएं वह पूरी तरह सच हो। 24 घंटे समाचार चैनल देखने वाले दर्शक रफ्तार यानी फटाफट खबरे पेश होने की अपेक्षा करते हैं , लेकिन रफ्तार से भी ज्यादा सटीकता और संतुलन बनाए रखना और उन्हें फटाफट खबरों से ज्यादा तरजीह देना टेलीविजन समाचार चैनलों की जिम्मेदारी होती है। इसके बावजूद यदि उनमें गलती होती है, तो चैनलों को उन गलतियों के बारे में पूरी तरह पारदर्शिता बरतनी चाहिए। गलतियों को तुरंत और स्पष्ट रूप से सही करना चाहिए, चाहें वह गलती चित्रों के इस्तेमाल में हुई है, किसी समाचार रिपोर्ट (विवरण) में हुई है, कैप्शन (शीर्षक) में हुई है या ग्राफिक (लिखित) में हुई है या फिर स्क्रिप्ट (लिपी) में ही गलती हो गई है। चैनलों (साधन) को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी किसी भी सामग्री का प्रसारण न हो जाए, जो स्पष्ट तौर पर मानहानि करने वाली अथवा किसी तरह के मुकदमें का कारण बनने वाली हो। ऐसे सभी प्रकार के मामलों में सत्य ही हिफाजत का माध्यम बनेगा, जहां व्यापक जन हित जुड़ा हुआ होता है और उन मामलों में भी सभी संबंधित पक्षों को अपने विचार और दृष्टिकोण रखने का पूरा और समान मौका दिया जाएगा। यह सिद्धांत उन मामलों में भी लागू होगा, जहां टेलीविजन चैनल उन लोगों के बारे मे कोई समाचार प्रसारित करते हैं, जो किसी सार्वजनिक पद पर होने का तर्क देकर ही कोई व्यक्ति समाचार चैनलों की जांच पड़ताल, खोजबीन या आलोचला से बरी नहीं हो सकता।

2. निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए: किसी प्रकार के विवाद अथवा झगड़े आदि में सभी प्रभावित पक्षों, खिलाड़ियों और अभिनेताओं को उनके विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का समान अवसर देकर टेलीविजन समाचार चैनलों को पूरी तरह निष्पक्षता बरतनी चाहिए। हालांकि निष्पक्षता का मतलब हमेशा सभी पक्षों को बराबर का अवसर देना नहीं होता (समाचार चैनलों को मुख्य पक्षों के मुख्य विचारों और दृष्टिकोणों को प्रस्तुत करने का प्रयास तो करना ही चाहिए।) समाचार चैनलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी प्रकार के आरोप को सत्य के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए और इसी प्रकार आरोपों को कभी अपराध की शक्ल देकर पर्दे पर नहीं उताराना चाहिए।

3. अपराध के बारे में रिपोर्टिंग करते समय और अपराध और हिंसा सुनिश्चित करने वाली गतिविधियों के बारे में बताते समय उनका महिमामंडन न किया जाए: टेलीविजन समाचार चैनलों की पहुंच बहुत ज्यादा होती है और मीडिया (संचार माध्यम) के अन्य रूपों के मुकाबले उसका असर भी बहुत तेज और तुरन्त होता है और ये दोनों पहलू इस बात को जरूरत और बढ़ा देते हैं कि चैनलों का यह सुनिश्चित करने के लिए समुचित संयम बरतना चाहिए कि किसी भी प्रकार के समाचार अथवा दृश्य प्रसारण से हिंसा को बढ़ावा न मिलां उसका महिमामंडन न हो, वह भड़क न जाए या उसे सकारात्मक नजरिये से न देखा जाए। ऐसा भी हिंसा करने वाले के साथ भी होना चाहिए चाहे वे किसी भी विचारधारा के हो और उनका संदर्भ कुछ भी हो। ऐसे दृश्यों का प्रसारण नहीं होना सुनिश्चित करना चाहिए और उसके लिए विशेष सावधानी भी बरतनी चाहिए, जो किसी के बारे में पूर्वग्रह बनाते हो या भड़काऊ हों।

इसी प्रकार हिंसा (चाहे वह सामूहिक हो या व्यक्तिगत) की रिपोर्टिंग (प्रतिवेदन) करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हिंसा का किसी भी प्रकार से महिमामंडन न हो जाए क्योंकि इससे दर्शकों पर भ्रामक या संवेदनहीन कर देने वाला प्रभाव पड़ सकता है। समाचार चैनल यह सुनिश्चित करेंगे कि इन घटनाओं का नाटकीय रूपांतरण करते समय किसी भी तरह जन हित और संवदेनशीलता की सीमाओं का उल्लेघन न होने पाए। इसमें पीड़ा, भय इत्यादि के दृश्य दिखाते समय पर्याप्त सावधानी बरतने का प्रावधान भी शामिल होना चाहिए। इसके अलावा आत्महत्या अथवा खुद को नुकसान पहुंचाने की किसी भी घटना या तरीके के ब्यौरे देने या दृश्य दिखाने से बचना चाहिए और इसमें भी शालीनता की सीमाएं किसी भी हालात में नहीं लांघी जानी चाहिए।

4. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा और भयभीत किए जाने का चित्रण: बिन्दु 3 की व्याख्या के तौर पर, समाचार चैनल यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी महिला अथवा बच्चा, जो यौन हिंसा, प्रताड़ना, संदर्भ का शिकार हुआ हो अथवा इस प्रकार की किसी भी गतिविधि का गवाह बना हो, उसका परिचय छिपाने का समुचित प्रयास किए बिना टेलीविजन पर न दिखाया जाए। यौन हिंसा के सभी मामलों अथवा ऐसे मामले, जो किसी महिला के व्यक्तिगत चरित्र अथवा निजता से संबंधित होते हैं, उनमें महिलाओं के नाम, उनके चित्र और अन्य ब्यौरे और जानकारी को प्रसारित अथवा प्रचारित नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार बाल शोषण और बाल अपराधों के मामले में पीड़ितों के परिचय का भी खुलासा नहीं किया जाएगा और उनका परिचय छिपाने के लिए उनके चित्रों को छिपाते हुए प्रसारित किया जाएगा अथवा उनकी मॉर्फिंग (आकार बदलना) कर दी जाएगी।

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