हाइब्रिड (उच्च नस्ल) एन्यूइटी (वार्षिकी) मॉडल (आदर्श) (एचएएम) ने अधिक नीलामीकर्ताओं को आकर्षित किया (Hybrid Annuity Model Attracted More Auctioneers – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• सीसीईए ने पिछले वर्ष हाइवें (मुख्य मार्ग) परियोजनाओं को पुन: शुरू करने एवं सभी भागीदारों यथा डेवलपर्स (किसी भूखंड पर निर्माण-कार्य में संलग्न व्यक्ति या संघ), ऋणदाताओं एवं रियायत प्राप्त कर्ताओं में पुन: रूचि पैदा करने हेतु एचएएम को स्वीकृति प्रदान की किन्तु इसके परिणाम उतने अच्छे नहीं रहे।

• एनएसएआई दव्ारा इसके व्यापक प्रचार अभियान से अब सकरात्मक परिणाम मिले हैं

• अब प्रोजेक्ट (परियोजना) के लिए औसत बोली लगाने वालों की संख्या 3 गुना बढ़ गयी है।

हाइब्रिड एन्यूइटी है क्या?

• हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल (एचएएम) एक नये प्रकार का सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल है।

• इसके अंतर्गत सरकार कार्य आरंभ करने के लिए डेवलपर (किसी भूखंड पर निर्माण कार्य में संलग्न व्यक्ति या संघ) को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत उपलब्ध कराएगी। शेष निवेश निजी डेवलपर को करना होगा।

• सरकार टोल टैक्स (मार्ग, कर) एकत्रित करेगी। अतिरिक्त लाभांश के साथ निर्धािरित भुगतान (एन्यूइटी डेवलपर को अदा किया जाएगा।

सामान्यत: विविध प्रकार के पीपीपी मॉडल (आदर्श) प्रयोग में लाए जाते हैं

1. जिनमें सरकार मुख्य निवेशक है: ईपीसी, सेवा अनुबंध, प्रबंधन अनुबंध और लीज (पट्‌टा) अनुबंध।

2. जिनमें निजी भागीदार मुख्य निर्देश हैं: बीओटी, बीओओटी, डीबीओ, डीबीएफओ आदि।

3. संयुक्त उपक्रम: अवसंरचना पर यह-स्वामित्व है। उदाहरण: स्पेशल (विशेष) परपज (उद्देश्य) वेहिकल (वाहन) (स्मार्ट (आकर्षक) शहरों के तति एसपीवी)

4. हाइब्रिड एन्यूइटी

5. स्विस (बेंत लगाना) मॉडल (आदर्श)

हाइवें क्षेत्र में प्रयुक्त विविध पीपीपी मॉडल

1. बीओटी-टोल

2. इंजीनियरिंग खरीद और निमार्ण (ईपीसी)-सरकार लागत वहन करती है। निजी क्षेत्र की निम्न भागीदारी के कारण सरकार ने बड़े स्तर पर 2013-14 एवं 2014-15 में इसका सहारा लिया।

3. बीओटी-एन्यूइटी (अप्रैल 2014 से)- परियोजना लागत का कुछ मिश्रित प्रतिशत ही निजी निवेशकों दव्ारा वित्तप्रोषित होता है और यह निवेश एन्यूइटी (वार्षिकी) भुगतान दव्ारा पुन: प्राप्त किया जाता है।

अब एचएएम, ईपीसी एवं बीओटी के एक मिश्रित रूप में प्रारंभ किया गया है। यह जोखिम के विवेकपूर्ण बंटवारें, फंडिंग (धन) संबंधी समस्याओं को हल करने एवं निजी क्षेत्र की क्षमता के पूर्ण उपयोग हेतु एक लचीला एवं उचित उपाय है।

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