Indian Geography MCQs in Hindi Part 9 with Answers

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1 निम्नलिखित पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ अंतरराष्ट्रीय रूप में यह उष्ण कटिबंधीय चरनोजम नाम से जानी जाती है।

  • गोली होने पर यह चिपचिपी तथा सूखने पर दरार युक्त हो जाती है।

  • उत्तर प्रदेश में इसे ’करे’ कहा जाता है।

उपर्युक्त विशेषताओं का संबंध निम्नलिखित में से किस मिट्टी से हैं?

अ) काली मिट्टी

ब) लैटेराइट मिट्टी

स) जलोढ़ मिट्टी

द) क्षारीय मिट्टी

उत्तर :(अ)

व्याख्या:

  • उपर्युक्त विशेषताओं का संबंध काली अथवा रेगूर मिट्टी से है। इसका सर्वाधिक क्षेत्र विस्तार महाराष्ट्र में है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा कार्बनिक तत्वों की कमी पाई जाती है। इस प्रकार की मृदा में कपास, सूर्यमुखी, खट्टोफलों तथा तिलहनी फसलों की खेती की जाती है।

  • इस मिट्टी में जल धारण करने की क्षमता सर्वाधक होती है, अत: गीली होने पर यह चिपचिपी तथा सूखने पर दरार युक्त हो जाती हैं अत: इसे स्वत: जुताई वालइ मिट्टी की संज्ञा भी दी जाती है।

2 लैटेराइट मिट्टी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नही है?

अ) यह प्रायदव्ीपीय पठार के उपरी भागों में पाई जाती है।

ब) इसकी उत्पत्ति चूना तथा सिलिका के निक्षालन से हुई है।

स) इसमें एल्यूमिनियम ऑक्साइड की कमी तथा पोटाश, चूना तथा कार्बनिक तत्वों की अधिकता पाई जाती है।

द) इसमें काजू, चावल तथा तम्बाकू की खेती की जाती है।

उत्तर: (स)

व्याख्या: लैटेराइट मिट्‌टी की उत्पत्ति चूना तथा सिलिका के निक्षालन से हुई है। इसमें लोहे, चूने तथा एल्यूमिनियम ऑक्साईड के अंश तो प्रचुर मात्रा में पाए जाते है किंतु पोटाश, चूना तथा कार्बनिक तत्वों की कमी होती है।

3 जलोढ़ मिट्‌टी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए

  • प्राचीन जलोढ़क को ’खादर’ तथा नवीन जलोढ़क मिट्‌टी को बांगर कहा जाता है।

  • इसमें नाईट्रोजन तथा हूयमस की कमी पाई जाती है।

  • यह मिट्टी गन्ना, गेंहू, धान, तिलहन आदि की खेती के लिए उपर्युक्त है।

उपर्युक्त कथनों में कौन सा/से सही है/हैं।

अ) केवल 1

ब) केवल 1 और 2

स) केवल 2 और 3

द) केवल 3

उत्तर : (स)

व्याख्या:

  • यह जलोढ़ मिट्टी मुख्यत: नर्मदा, तापी, कावेरी, कृष्णा तथा केरल के तटवर्ती प्रदेशों में 15 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र पर विस्तृत है।

  • इसे दो भागों में विभक्त किया गया है बांगर तथा खादर प्राचीन जलोढ़क को बांगर तथा नवीन जलोढ़क को खादर कहा जाता है। खादर मिट्टी बांगर की अपेक्षा अधिक उपजाऊ होती है अत: कथन (1) गलत है।

  • जलोढ़ मिट्टी में चूना, कार्बनिक तत्व एवं पोटाश प्रचूर मात्रा में पाया जाता है, जबकि फास्फोरस, नाइट्रोजन तथा हूयमस की कमी पाई जाती है। अत: कथन (2) सही है।

  • यह गन्ना, धान, गेहूँ, दलहन तथा तिलहन के लिये उपयुक्त है। अत: कथन (3) सही है।

4 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ यह नवीन तथा अविकसित मृदा है।

  • इसमें जीवांश प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं।

  • इसमें अम्लीय गुण निहित होता है।

उपर्युक्त विशेषताएं निम्नलिखित में से किस मृदा से संबंधित हैं?

अ) पर्वतीय मृदा

ब) दलदली मृदा

स) मरुस्थलीय मृदा

द) लाल मृदा

उत्तर : (अ)

व्याख्या: उपर्युक्त विशेषताएँ पर्वतीय मृदा से संबंधित है। यह नवीन तथा अविकसित मृदा है जो कश्मीर से अरुणाचल तक के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। इसमें पोटाश, फास्फोरस तथा चूने का अभाव पाया जाता है जबकि जीवांश प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें सेब, नाशपाती आदि के वृक्ष उगाए जाते हैं। इस प्रकार की मृदा में अम्लीय गुण निहित होते हैं।

5 निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ क्षारीय मृदा में नाइट्रोजन की अधिकता होती है।

  • मॉलीसोल प्रकार की मृदा उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों तथा उत्तर-पूर्व हिमालय के जंगलों में पाई जाती है।

उपर्युक्त कथनों में कौन सा/से सही है/हैं।

अ) केवल 1

ब) केवल 2

स) 1 और 2 दोनों

द) न तो 1 और न ही 2

उत्तर : (ब)

व्याख्या:

  • क्षारीय मृदा में नाइट्रोजन की अधिकता पाई जाती है। अत: कथन 1 गलत है।

  • मॉलीसोल प्रकार की मृदा विशेषत: मोटी द्धिसंयोजी तथा दोहरी काली होती है। सूखने पर ये कठोर नहीं होती। भारत में इस मृदा के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों की कुछ मृदाएँ तथा उत्तर-पूर्व तथा हिमालय के जंगलों की मृदाएँ आती हैं। अत: कथन 2 सही है।

6 निम्नलिखित में से कौन-सी मृदाओं को ’एन्डीसॉल’ वर्ग में शामिल किया जाता हैं?

अ) गर्म जलवायु में विकसित होने वाली मृदाएँ।

ब) कार्बनिक मृदाएँ।

स) शुष्क तथा अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाने वाली मृदाएँ।

द) ज्वालामुखी के मुहाने पर बनने वाली मृदाएँ।

उत्तर : (द)

व्याख्या:

  • ज्वालामुखी के मुहाने पर बनने वाली मृदाओं को ’एन्डीसॉल’ मृदा वर्ग में शामिल किया जाता है।

  • गर्म जलवायु में विकसित होने वाली मृदा-आल्टीसॉल वर्ग

  • कार्बनिक मृदाएँ-हिस्टोसॉल वर्ग

  • शुष्क तथा अर्द्ध-शुष्क जलवायु क्षेत्रों में विकसित मृदाएँ-एरीडीसॉल वर्ग

7 मरुस्थल की समस्या के अध्ययन के लिये की स्थापना कहाँ की गई है?

अ) जोधपुर

ब) उदयपुर

स) जयपुर

द) जबलपुर

उत्तर : (अ)

व्याख्या: मरुस्थल की समस्या के अध्ययन के लिये की स्थापना राजस्थान के जोधपुर में की गई है।

8 भारत में मृदा की गुणवत्ता की जाँच के लिये ’मृदा स्वास्थ कार्ड (पत्रक) योजना’ की शुरुआत कब और कहाँ की गई?

अ) मार्च, 2014 को गुजरात के गांधी नगर से

ब) फरवरी, 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ से

स) नवंबर, 2012 को छत्तीसगढ़ के रायपुर से

द) जनवरी, 2016 को उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर से

उत्तर : (ब)

व्याख्या: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरूआत 19 फरवरी, 2015 में राजस्थान के सूरतगढ़ से की गई। इस योजना का ध्येय वाक्य ’स्वस्थ धरा, खेत हरा’ है। इसमें मिट्‌टी में मौजूद पोषक तत्त्वों तथा उर्वरकों की आवश्यकता का ब्यौरा होगा। इसका उद्देश्य उपयुक्त संसाधनों के उपयोग दव्ारा मिट्‌टी की गुणवत्ता के सुधार दव्ारा किसानों की स्थिति को सुधारना है।

9 मृदा अपरदन को रोकने संबंधी निम्नलिखित उपायों पर विचार कीजिये:

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ सीढ़ीदार खेत बनाकर कृषि।

  • अति चराई तथा स्थानान्तरित कृषि।

  • समोच्च रेखीय सीढ़ीदार खेती।

  • आवरण फसलें उगाना।

  • मिश्रित खेती तथा शस्यावर्तन।

उपर्युक्त उपायों में से कौन-से उपाय मृदा अपरदन रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं?

अ) केवल 1, 2 और 3

ब) केवल 2, 3 और 4

स) केवल 1, 3, 4 और 5

द) 1, 2, 3, 4 और 5

उत्तर : (द)

व्याख्या: उपर्युक्त सभी उपायों दव्ारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है तथा इन सब उपायों को लागू करना आवश्यक है ताकि किसानों को अपरदन की समस्या तथा समाधान से अवगत कराया जाए।

10 भारत में किस कारण से सिंचित क्षेत्रों की कृषि योग्य भूमि में लवणीयता की समस्या बढ़ रही है?

अ) अत्याधिक उर्वरकों का प्रयोग

ब) अतिधारण

स) आवरण फसलें उगाना

द) अति सिंचाई

उत्तर : (द)

व्याख्या: अत्यधिक सिंचाई से कोशिका क्रिया को बढ़ावा मिलता है जिसके परिणामस्वरूप नमक ऊपर की ओर बढ़ता है और मृदा की सबसे ऊपरी परत में जमा हो जाता है। इस प्रकार की समस्या हरित क्रांति के बाद पंजाब तथा हरियाणा के अति सिंचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिलती है। मृदा में लवणता की समस्या से निपटने के लिये खेतों में जिप्सम डालने की सलाह दी जाती है।

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