भारत का 13वां मेजर (मुख्य) पोर्ट (बंदरगाह) (13th Major Port of India) for IEcoS

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सुर्ख़ियों में क्यों?

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु में कोलाचेल के पास इनायम में एक मेजर पोर्ट (प्रमुख पत्तन ) की स्थापना के लिए अपनी ’सैद्धांतिक’ मंजूरी दे दी है। निर्माण पश्चातवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू यह देश का 13वां मेजर पोर्ट बन जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • वर्तमान में भारत में 12 मेजर और 187 छोटे या मझोले पत्तन हैं।

  • वर्तमान में, भारत के पूर्वी तट के पत्तनों से समुद्री यातायात का लगभग 78 प्रतिशत कोलंबो, सिंगापुर और क्लांग (मलेशिया) को ट्रांस-शिप कर दिया जाता है, क्योंकि भारत में अधिकांश प पत्तनों के पास वैश्विक कार्गों हैंडलिंग (प्रबंधन) दक्षता का मुकाबला करने तथा ट्रांसशिपमेंट (वाहनांतरण) हब (केन्द्र) के रूप में कार्य करने के लिए अनुकूल ढांचा नहीं है।

इनायम पत्तन

  • इसका लक्ष्य भारत को वैश्विक पूर्व-पश्चिम व्यापार मार्ग के लिए एक ट्रांस-शिपमेंट गंतव्य बनाना है।

  • यह पत्तन वर्तमान में देश के बाहर ट्रांस-शिप किये जाने वाले भारतीय कार्गो के लिए प्रमुख गेटवे (दव्ार) कंटेनर (पात्र) पोर्ट (बंदरगाह) के रूप में काम करेगा।

  • इनायम पत्तन के विकसित होने के बाद दक्षिण भारत में उन निर्यातकों और आयातकों के लिए माल लाने और भेजने का खर्च घट जाएगा जो अभी ट्रांस-शिपमेंट के लिए अन्य बंदरगाहों पर निर्भर रहते हैं, जिससे उन्हें वहां के बंदरगाहों को भी अतिरिक्त खर्च देना पड़ता है।

  • अन्य देशों को ट्रांस-शिप किये जाने पर भारत को प्रतिवर्ष करीब 1,500 करोड़ रुपये की राशि खर्च करनी पड़ती हैं। इस पत्तन के तैयार होने के उपरांत ऐसे राजस्व की भी बचत होगी।

Enayam

म्दंलंउ

म्दंलंउ

  • इनायम पत्तन की प्राकृतिक गहराई करीब 20 मीटर होगी, जो इसे बड़े जहाजों के लिए भी सुगम बनाएगा।

  • इसकी क्षमता 10 मिलियन (दस लाख) TEUs (बीस फुट समकक्ष इकाइयांँ) है और बाद में इसे 18 मिलियन (दस

    Major ports of India

    डंरवत चवतजे व प्दकपं

    डंरवत चवतजे व प्दकपं

  • लाख) टीईयूएस तक बढ़ाया जा सकता है।

मेजर पोर्ट क्या होते हैं?

  • पत्तन संविधान की समवर्ती सूची में हैं।

  • सभी मेजर पोर्ट केन्द्र सरकार के पोत परिवहन मंत्रालय दव्ारा प्रशासित होते हैं।

  • ये भारत के लगभग 75प्रतिशत कार्गो ट्रैफिक (यातायात) को संभालते हैं।

  • पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने पर भारत के मेजर पोर्ट हैं: हल्दिया, पारादीप, विशाखापट्टनम, एन्नोर (निजी), चेन्नई, तूतीकोरिन, इनायम, कोच्चि, पानाम्बर पोर्ट (बंदरगाह) (मंगलौर), मर्मागोवा, न्हावा शेवा (महाराष्ट्र, मुंबई पोर्ट, कांडला पोर्ट (गुजरात) और पोर्टब्लेयर (अंडमान)।

  • इस क्षेत्रक की ’मेक (बनाना) इन (भीतर) इंडिया (भारत)’ कार्यक्रम की सफलता में और अपने व्यापार भागीदारों के साथ अधिक से अधिक वैश्विक जुड़ाव और एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका है।

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