महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-13: Important Political Philosophies for NMATfor NMAT

Doorsteptutor material for competitive exams is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

Download PDF of This Page (Size: 147K)

जयप्रकाश नारायण

जयप्रकाश नारायण स्वाधीनता संग्राम के महान नेता तो थे ही, वे आज़ादी के बाद भी भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं की कतार में अग्रणी हैं। शुरू में वे मार्क्सवाद से प्रभावित हुए पर धीरे-धीरे महात्मा गांधी की सर्वोदय विचारधारा का प्रभाव इन पर गहरा होता गया। 1970 के दशक में इन्होंने इंदिरा गांधी के तानाशाही के रवैये के विरुद्ध जन-आंदोलन का सूत्रपात किया जो स्वाधीन भारत के सबसे सफल आंदोलनों में शामिल है। इन्हीं के प्रयासों से जनता पार्टी का गठन हुआ था जिसने 1977 में देश की पहली गैर कांग्रेसी केन्द्र सरकार बनाई थी। 1979 में जयप्रकाश नारायण की मृत्यु हुई। 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया।

जयप्रकाश नारायण के समाजवादी विचारों का सार इस प्रकार है-

  • इनके अनुसार भारतीय संस्कृति में निहित मूल्य समाजवाद को धारण करते हैं। ’अपरिग्रह’ (धन और सुविधाएँ एकत्रित न करना) और ’अस्तेय’ (चोरी न करना) जैसे मूल्य समाजवाद के ही मूल्य हैं। भारतीय संस्कृति में व्यक्ति की भौतिक उपलब्धियों को कभी भी ज्यादा महत्व नहीं दिया गया। यह भी समाजवाद से सुसंगत है।

  • मनुष्य मात्र में समानता हो-यह सबसे आधारभूत नैतिक मूल्य है। भारतीय समाज में आध्यात्मिक समानता का मूल्य तो विकसित हुआ है, किन्तु आर्थिक समानता का नहीं। जब तक आर्थिक समानता स्थापित न हो, तब तक आध्यात्मिक समानता का कोई महत्व नहीं हैं।

  • इन्होने हिंसक क्रांती के सिद्धांत का विरोध और वर्ग सहयोग की धारणा पर बल दिया।

  • सोवियत संघ और चीन की राजनीतिक प्रणाली में निहित तानाशाही के तत्व को इन्होने हमेशा खारिज किया और स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही समाजवाद तक पहुँचने की बात कही।

  • इन्होने राष्ट्रवाद से अधिक बल अंतर्राष्ट्रवाद पर दिया क्योंकि जब तक विश्व समुदाय का गठन न हो जाए, तब तक एशिया और अफ्रिका के अल्प विकसित राष्ट्रों को साम्राज्यवादी शोषण से बचाना संभव नही हैंं।

  • इनके आरंभिक विचार नेहरू के विचारों से मिलते-जुलते थे जिनमें भारी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण, उत्पादन के साधनों पर समाज का स्वामित्व तथा व्यापक स्तर पर आर्थिक आयोजन जैसे तत्व महत्वपूर्ण थे। आगे चलकर इन्होने गांधी के सर्र्र्वोदय सिद्धांत को स्वीकार कर लिया जिसमें ज्यादा ग्रामीण सुधार, कृषि पुनर्निमाण, भूमि कानूनों में परिवर्तन, सहकारी खेती, सत्ता के विकेंद्रीकरण और स्वावलंबी ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे तत्वों पर दिया गया।

Developed by: