बतुकम्मा महोत्सव बाउल (Bathukamma Festival Baul – Culture)

Doorsteptutor material for UGC is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of UGC.

Download PDF of This Page (Size: 147K)

• बतुकम्मा नवरात्रि के दौरान नौ दिनों के लिए मनाया जाता है। यह महालया अमावस्या के दिन शुरू होता है और दशहरा से दो दिन पहले दुर्गाष्टमी पर ”सद्दुला बतुकम्मा” त्यौहार पर समाप्त होता है।

• बतुकम्मा फूलों का एक सुंदर ढेर होता है, जिसे सात संकेंद्रित परतों में विभिन्न अनोखे मौसमी फूलों से मंदिर के गोपुरम के आकार में सजाया जाता है। उनमें से ज्यादातर फूल औषधीय गुण वाले होते हैं।

• तेलुगु भाषा में ’बतुक’ का मतलब जीवन होता है और ’अम्मा’ का मतलब मां होता है: ’बतुकम्मा का अर्थ है ’देवी मां का जागना’

• ’जीवन दायित्री’ देवी महागौरी को ’बतुकम्मा’ के रूप में पूजा जाता है

• नौ दिनों तक, रोज़ शाम को, महिलायें और विशेष रूप से बालिकाएं, अपनी ’बतुकम्मा’ के साथ अपने इलाके के खुले क्षेत्रों में इकठ्ठा होती है। वे ’बतुकम्मा’ के चारो ओर एक गोले में लोक गीत गाते हुए, ताली बजाकर चारों ओर घुमती हैं।

बाउल (Baul – Culture)

• बाउल परिश्रम बंगाल और बांग्लादेश में रहने वाले लोगों का एक समूह है।

• इनमें मुख्य रूप से वैष्णव हिन्दू और सूफी मुसलमान शामिल हैं।

• ये अक्सर अपने विशिष्ट कपड़ों और संगीत वाद्य-यंत्रों से पहचाने जाते हैं।

• हालाकि बाउल बंगाली आबादी का केवल एक छोटा सा अंश ही हैं, मगर बंगाल की संस्कृति पर उनका काफी प्रभाव है।

• 2005 में, बाउल परंपरा को यूनेस्को दव्ारा मानवता के मौखिक और अमूर्त विरासत की सर्वोत्तम कृतियों की सूची में शामिल किया गया था।

बाउल संगीत

• इनके गीतों के बोलों पर हिंदू भक्ति आंदोलन और सूफ़ी (कबीर के गीतों दव्ारा प्रस्तुत किया गया सूफी गीत का एक रूप) का प्रभाव देखा जा सकता है।

• इनके दव्ारा एकतारा, दोतारा, खमक, डुग्गर, ढ़ोल और खोल जैसे संगीत वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाता है।

Developed by: