Recently Constituted Certain Working Groups and Committees by Reserve Bank of India

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भारतीय रिजर्व बैंक दव्ारा हाल ही में गठित कुछ कार्य समूह व समितियां (Recently constituted certain Working Groups and Committees by Reserve Bank of India)

Recently Constituted Certain Working Groups and Committees by Reserve Bank of India
Recently constituted certain Working Groups and Committees by Reserve Bank of India

बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग दर (बीपीएलआर) पर कार्य समूह

दीपक मोहंती

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में बचत पर कार्य समूह (2007-08 से 2011-12)

डॉ. राकेश मोहन

सहकारी ऋण संस्थाओं के पुनरुद्धार पर टास्क फोर्स

प्रो. ए. वैद्यनाथन

प्रशासित ब्याज दर और सेविंग इंस्ट्रूमेंटस के युक्तिकरण के लिए सलाहकार समिति

डॉ. राकेश मोहन

लघु उद्योग क्षेत्र में ऋण के प्रवाह पर कार्य समूह

डॉ. ए एस गांगुली

सरकारों को अर्थोपाय अग्रिम पर सलाहकार समिति

सी. रामचन्द्रन

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानक व कोड पर स्थायी समिति

डॉ. वायी. वी.रेडडी

क्रेडिट इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की स्थापना के लिए कार्य समूह

श्री एन एच सिद्दीकी

नये मौद्रिक समुच्चय पर कार्य दल

डॉ. वायी. वी. रेडडी

उषा थोराट समिति

एनबीएफसी के लिए नियम

  • नचिकेत मोर समिति

  • वित्तीय समावेश के बारे में (प्रभावी वित्तीय सेवा पर जांच के लिये छठी समिति)

  • मोर समिति ने, छोटे व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने के अतिरिक्त कम आय वाले परिवारों के वित्तीय समावेश पर विचार किया है।

  • रघुराम राजन समिति: विकास सूचकांक पर सुझाव

  • डॉ. ऊर्जित पटेल समिति : मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क पर रिपोर्ट

  • नए बैंक लाइसेंस आवेदनों की जांच के लिये समिति

  • रिजर्व बैंक ने पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में

  • समिति में जालान के अलावा तीन अन्य सदस्य उषा थोराट (रिजर्व बैंक की पूर्व डिप्टी गवर्नर), सी बी भावे (सेबी के पूर्व चेयरमैन) तथा नचिकेत मोर (वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ) शामिल है।

डिमांड ड्राफ्ट

  • डिमांड ड्राफ्ट पैसा ट्रांसफर करने के लिए एक प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट की तरह है। बैंक रकम और कमिशन लेने के बाद डिमांड ड्राफ्ट जारी करता है। ड्राफ्ट एक खास शख्स/संस्था के नाम जारी किया जाता है। यह किसी खास शहर की किसी खास ब्रांच में ही भुनाया जा सकता है।

  • जिस शख्स के नाम ड्राफ्ट बना होता है, वह उसमें लिखी ब्रांच में इसे जमा करके पैसा हासिल कर सकता है। चूँकि ड्राफ्ट में बैंक पहले ही पैसा ले लेता है, इसलिए इसमें बाउंस होने जैसा कोई खतरा नहीं होता। ड्राफ्ट को बैंकर जारी करता है।

चेक

चेक को कोई भी पार्टी जारी कर सकती है। इसे किसी के भी नाम जारी किया जा सकता है। जिसके पास चेक है, वह इसे अपने अकाउंट में जमा करा सकता है। किसी दूसरे शहर में स्थित ब्रांच में भी इसे जमा कराया जा सकता है।

बैंकर्स चेक

इसे पे-ऑर्डर भी कहते हैं। जिस तरह चेक कोई थर्ड पार्टी जारी करती है, उसी तरह बैंकर्स चेक को बैंक जारी करता है। यह उसी ब्रांच से क्लियर होता है, जहां से इश्यू किया गया होता है। एक ही शहर के मामलों में इसे इस्तेमाल किया जाता है।

स्वाभिमान योजना (Self-respect scheme)

  • आम आदमी के नारे को बुलंद करते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन योजना 2011 में शुरू की थी। इस योजना के तहत वर्ष 2012 मार्च तक लगभग 73,000 गांवों में रह रहे लोगों के शून्य बैलेंस वाले खाते खोले जाते हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 5 करोड़ शून्य बैलेंस वाले खाते खोले जाएंगे।

  • बीएसई सेंसेक्स:-बीएसई सेंसेक्स या मुंबई शेयर बाजार संवेदी सूचकांक भारत का एक मूल्य-भारित सूचकांक है। मुंबई शेयर बाजार ने 1986 में सेंसेक्स की रचना की थी। आज उसकी सिर्फ भारत में हीं नहीं बल्कि विदेश में भी प्रमुख इंडेक्स में गणना होती है। सेंसेक्स में 30 कंपनियों को समाहित किया गया है, जिसकी गणना मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेज मेथाडोलाजी के आधार पर की जाती है। सेंसेक्स का आधारवर्ष 1978-79 है। सेंसेक्स को समय गुजरते ’फ्री प्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेज’ मेथाडोलाजी में बदला गया था।

  • सेंसेक्स का आधार मूल्य 1 अप्रैल 1979 को 100 रु और आधार वर्ष 1978-1979 है।

  • जून 1990 को सूचकांक अपने आधार मल्यसे लगभग 10 गुना बढ़ गया।

माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यम की परिभाषा

  • विनिर्माण उद्यम अर्थात नीचे विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार वस्तुओं के विनिर्माण, प्रसंस्करण या परिरक्षण के कार्य में लगे उद्यम।

  • माइक्रो उद्यम एक ऐसा उद्यम है जिसका संयंत्र और मशीनों में निवेश 25 लाख रुपए से अधिक न हो।

  • लघु उद्यम एक ऐसा उद्यम है जिसका संयंत्र और मशीनों में निवेश 25 लाख रुपए से अधिक हो, परन्तु 5 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

  • मध्यम उद्यम एक उद्यम है जिसका संयंत्र और मशीनों में निवेश 5 करोड़ रुपए से अधिक हो, परन्तु 10 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

  • माइक्रो उद्यम वह उद्यम है जिसका उपकरणों में निवेश 10 लाख रुपए से अधिक न हो।

  • लघु उद्यम वह उद्यम है जिसका उपकरणों में निवेश 10 लाख रुपए से अधिक हो, परन्तु 2 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

  • मध्यम उद्यम वह उद्यम है जिसका उपकरणों 2 करोड़ रुपए से अधिक हो, परन्तु 5 करोड़ रुपए से अधिक न हो।

  • बैंकों दव्ारा विनिर्माण और सेवा दोनों के माइक्रो और लघु उद्यमों को दिए जाने वाले बैंक ऋण निम्नानुसार प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अंतर्गत वर्गीकृत किए जाने के पात्र होंगें

प्रत्यक्ष वित (Direct finance)

विनिर्माण उद्यम

उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम 1951 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट और सरकार दव्ारा समय-समय पर अधिसूचित प्रकार से किसी उद्योग के लिए विनिर्माण या वस्तुओं के उत्पादन में लगी माइक्रो और लघु उद्यम संस्थाएंँ। विनिर्माण उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी में निवेश के अनुसार परिभाषित किया गया है।

खाद्यान्न तथा एग्रो प्रंसस्करण के लिए ऋण

खाद्यान्न तथा एग्रो प्रंसस्करण के लिए ऋणों को माइक्रो और लघु उद्यमों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाएगा। बशर्ते यूनिट एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 में किए गए प्रावधान के अनुसार माइक्रो और लघु उद्यमों के लिए निर्धारित निवेश मानदंड पूरा करते हों।

सेवा उद्यम

एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 के अंतर्गत उपकरणों में निवेश के अनुसार परिभाषित और सेवाएं उपलब्ध कराने या प्रदान करने में लगे माइक्रो और लघु उद्यमों को प्रति उधारकर्ता/यूनिट 5 करोड़ रुपए तक का बैंक ऋण।

निर्यात ऋण

एमएसई यूनिटों (विनिर्माण और सेवा दोनों) को उनके दव्ारा उत्पादित वस्तुओं/सेवाओं के निर्यात के लिए निर्यात ऋण।

खादी और ग्रामोउद्योग क्षेत्र (केवीआई)

  • खादी और ग्रामोउद्योग क्षेत्र की इकाइयों को, परिचालनों के आकार, अवस्थिति तथा संयंत्र और मशीनरी में मूल निवेश की राशि पर ध्यान दिए बिना प्रदत्त सभी अग्रिम प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को अग्रिम के ंअंतर्गत शामिल होंगे तथा एमएसई क्षेत्र के अंतर्गत सूक्ष्म (माइक्रो) उद्यम हेतु 60 प्रतिशत के नियत उप-लक्ष्य के अधीन विचार करने के लिए पात्र होंगे।

  • यदि माइक्रो और लघु उद्यमों को सामान्य क्रेडिट कार्ड (जीसीसी) किए अंतर्गत ऋण मंजूर किया जाता है तो ऐसे ऋणों को माइक्रो और लघु उद्यमों की संबंधित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।

अप्रत्यक्ष वित (Indirect finance)

  • काश्तकारों, ग्राम और कुटीर उद्योगों को निविष्ठियों की आपूर्ति और उनके उत्पादन के विपणन के विकेन्द्रीकृत सेक्टर को सहायता प्रदान करने वाले व्यक्तियों को ऋण।

  • विकेंद्रित सेक्टर अर्थात काश्तकार तथा ग्राम और कुटीर उद्योग के उत्पादकों की सहकारी समितियों को ऋण।

  • प्राथमिकता प्राप्त को उधार पर वर्तमान मास्टर परिपत्र में निर्दिष्ठ शतों के अनुसार एमएफआई को आगे एमएसई सेक्टर को ऋण देने के लिए बैंकों दव्ारा स्वीकृत ऋण।

  • बैेंको दव्ारा मध्यम उद्यमों को दिए गए ऋण को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के अंतर्गत अग्रिमों की गणना के लिए शामिल नहीं किया जाएगा।

  • घरेलू वाणिज्य बैंकों और भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों दव्ारा लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसई) को दिए जाने वाले उधार का लक्ष्य।

  • माइक्रो और लघु उद्यम (एमएसई) क्षेत्र अग्रिमों को समायोजित निवल बैंक ऋण (एएनबीसी) या तुलन पत्र से इतर एक्सपोजर के बराबर ऋण राशि इनमें से जो भी अधिक हो, के प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के 40 प्रतिशत के समग्र लक्ष्य (भात में 20 से कम शाखाओं के साथ कार्यरत विदेशी बैंकों के लिए 32 प्रतिशत) की गणना में हिसाब में लिया जाएगा।

  • सेवाएं उपलब्ध कराने अथवा प्रदान करने में लगे और उपकरणों में निवेश के संदर्भ में एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 के अंतर्गत लघु और मध्यम उद्यमों को बैंकों दव्ारा दिए जाने वाले प्रति उधारकर्ता 5 करोड़ रुपए से अधिक ऋणों को समग्र प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र लक्ष्यों की गणना में हिसाब में नहीं लिया जाएगा। तथापि एमएसई क्षेत्र को उधार हेतु एमएसएमई पर प्रधानमंत्री टास्क फोर्स दव्ारा निर्धारित लक्ष्यों की बैंकों की उपलब्धि के संदर्भ में उनके कार्य निष्पादन के मूल्यांकन के समय ऐसे ऋणों को हिसाब में लिया जाएगा।

  • एमएसएमई पर प्रधानमंत्री टास्क फोर्स की सिफारिशों के अनुसार बैंकों को माइक्रो और लघु उद्यमों को ऋण में 20 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि तथा माइक्रो उद्यम खातों की संख्या में 10 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि प्राप्त करने हेतु सूचित किया गया है।

  • एमएसई क्षेत्र के भीतर माइक्रो उद्यमों को पर्याप्त ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बैंकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि-

    • एमएसई क्षेत्र हेतु नियत कुल अग्रिम का 40 प्रतिशत ऐसे माइक्रो (विनिर्माण) उद्यम जिनका संयंत्र और मशीनरी में 10 लाख रुपये तक का निवेश हो तथा ऐसे माइक्रो (सेवा) उद्यम जिनका उपस्कर में 4 लाख रुपए तक का निवेश हो, को दिया जाना चाहिए।

    • एमएसई क्षेत्र के लिए नियत कुल अग्रिम का 20 ऐसे माइक्रो (विनिर्माण) उद्यम जिनका संयंत्र और मशीनरी में किया गया निवेश 10 लाख रुपए से अधिक और 25 लाख रुपए तक हो तथा माइक्रो (सेवा) उद्यम जिनका उपस्कर में किया गया निवेश 4 लाख रुपए से अधिक और 10 लाख रुपए तक हो, को दिया जाना चाहिए। इस तरह एमएसई अग्रिमों बैंकों का 60 प्रतिशत माइक्रो उद्यमों को जाना चाहिए।

    • जबकि प्रधानमंत्री टास्क फोर्स की सिफारिशों के अनुसार बैंकों को उपर्युक्तानुसार 60 प्रतिशत आवंटन चरणों में प्राप्त किया जाना है अर्थात वर्ष 2010-11 में 50 प्रतिशत वर्ष 2011-12 में 55 प्रतिशत तथा वर्ष 2012-13 में 60 प्रतिशत।

  • एमएसई क्षेत्र के भीतर माइक्रो उद्यमों को उधार हेतु लक्ष्य (अर्थात एमएसई क्षेत्र को कुल उधार का 60 प्रतिशत माइक्रो उद्यमों को दिया जाना चाहिए) की गणना पिछले 31 मार्च को एमएसई क्षेत्र को बकाया ऋण के संदर्भ में की जाएगी।

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